हस्त नक्षत्र परिचय || Hasta Nakshatra in Hindi Introduction
वर्तमान भारतीय ज्योतिष में हस्त नक्षत्र’ क्रम से 13वांँ नक्षत्र हैं। भचक्र में 160° अंश से लेकर 173° अंश 20′ कला तक के विस्तार क्षेत्र ‘हस्त नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘कोरवस (Corvus)’ कहा जाता हैं। Corvus एक लैटिन भाषा का शब्द हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ है — Crow (कौवा); इसे Raven (बड़ा काला पक्षी) भी कहा जाता है। ग्रीक पौराणिक आख्यानों में इसे देवता अपोलो (Apollo) के पवित्र पक्षी के रूप में वर्णित किया गया है।
अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-अव्वा (Al-Awwa) कहा गया है; जिसका अर्थ है — भौंकने वाला कुत्ता।
चाइनीज सियु में इसे ‘झेन’ (Zhen Xiù) कहा जाता हैं; जो चाइनीज चन्द्र भवन के प्रमुख 4 वर्गीकरण में से, ‘दक्षिण लाल पक्षी’ (Vermilion Bird of the South) के अंतर्गत आने वाला अंतिम सियु है। इसका अर्थ ‘रथ’ (Chariot) हैं।
कोरवस तारामंडल (Corvus Constellation) के पाँच तारें (α, β, γ, δ, ε Corvi) को नक्षत्र मंडल में मानव हाथ वा मुट्ठी की आकृति बनाते हुए भारतीय पूर्वाचार्यों ने देखा, जिससे इसका नामकरण “हस्त नक्षत्र” किया गया।
इन तारों के अन्य नाम इस प्रकार हैं —
- α Corvi (Alpha Corvi) — अल्चिबा (Alchiba) वा अल्चिता (Alchita)।
- β Corvi (Beta Corvi) — क्राज़ (Craz)
- γ Corvi (Gamma Corvi) — जीनाह (Gienah) वा (Gienah Ghurab) — सबसे चमकदार
- δ Corvi (Delta Corvi) — अल्गोराब (Algorab)
- ε Corvi (Epsilon Corvi) — मिन्कार (Minkar)
चूंकि भारतीय ज्योतिष में इसे मानव हाथ वा मुठ्ठी की तरह देखा गया; अतः यह क्रिया, निर्माण, चिकित्सा, हस्तकला, आशीर्वाद, सृजन, दान, स्वागत, कौशल, नियंत्रण, पकड़, दृढ़ता, संग्रहण क्षमता, संकल्प को साकार करना (manifestation), अवसरों को पकड़ने की सटीक बुद्धिमत्ता का द्योतक है।
अतः “हस्त नक्षत्र” कन्या ♍ राशि अंतर्गत 10° अंश से लेकर 23° अंश 20′ कला तक के विस्तार क्षेत्र में आता हैं। इस नक्षत्र का स्वामी (Hasta Nakshatra Lord) – चन्द्रमा, नक्षत्र देवता (Hasta Nakshatra Deity) – सवितृ वा सविता (सूर्य का एक रुप), जाति – वैश्य, योनि – महिष/ भैंसा, योनिवैर – अश्व / घोड़ा, देव गण, वात प्रकृति, आदि नाड़ी, सत्तोगुणी, शुभ, लक्ष्मी कारक, सात्विक, पुरुष नक्षत्र हैं। यह दक्षिण दिशा का स्वामी हैं। यह लघु / क्षिप्र, तिर्यकमुखी, मंद-लोचन वा मंदाक्ष नक्षत्र हैं।
नया व्यापार या दुकान शुरू करना, निवेश और खरीद-बिक्री के सौदे, बैंक कार्य और ऋण लेना, चित्रकारी, मूर्तिकला, बुनाई, कढ़ाई, ज्वेलरी बनाना या खरीदना, हस्तशिल्प से जुड़े कार्य, विद्यारंभ (नई पढ़ाई शुरू करना), लेखन, पुस्तक प्रकाशन, ज्योतिष व चिकित्सा संबंधी अध्ययन, औषधि लेना शुरू करना, शल्य चिकित्सा, योग व ध्यान साधना, भूमि खरीदना, नया घर बनवाना, समहूत, नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश), घर बदलना, यात्रा प्रारंभ करना, वाहन खरीदना, पूजा-पाठ, हवन, व्रत, दान-पुण्य के कार्य, मंदिर निर्माण या जीर्णोद्धार, स्तनपान, सूतिका स्नान, सूर्य पूजा, दोला-रोहण अर्थात झूला झुलाना, प्रसूति जल पूजन, वाग्दान, सगाई, वर का रोका / छेंका करना, वधू प्रवेश, द्विरागमन अर्थात गौना करना, चूड़ी पहनना वा पहनाना, नौकरी हेतु कर्म प्रारंभ, पद ग्रहण, शपथग्रहण, चूड़ा कर्म अर्थात मुण्डन संस्कार, अक्षरारम्भ, विवाह, प्रेम प्रस्ताव देना वा स्वीकार करना, रोमांस, कामक्रीड़ा, भावनात्मक कृत्य, जलक्रीड़ा, धन संग्रह, निवेश, मातृ सेवा, जन कल्याण, श्रृंगार, कलात्मक कार्यों का प्रशिक्षण लेना, राज्य संवर्धन, गृह प्रबंधन कार्य, मित्रों व रिश्तेदारों से भेंट-मुलाक़ात करना, पराक्रम युक्त कार्य करना, क्षमा करना, अभयदान देना, सांत्वना देना, गायन-वादन कार्य, कुटनीतिक व राजनैतिक कार्य, शास्त्रार्थ आदि वाद-विवाद, कारीगरी, नक्काशी कार्य, चित्रकारी, गणित, खगोल, ज्योतिष, विज्ञान आदि विषयों पर अनुसंधान कार्य, शुभ व प्रसिद्धि प्राप्ति के मौके को लपकने से संबंधित कार्य, बीज बोना, बागवानी, खेल-कूद, बच्चों से संबंधित कार्य, भाषा सीखना, योग-ध्यान, जादू-मंत्र आदि कौशल युक्त कार्य, हंँसी-मज़ाक या आनंद बढ़ाने वाले कार्य आदि अनुकूल परिणाम देने वाले हैं।
विशेषतया यह चिकित्सा, हस्तकला, निर्माण, कलात्मक व सृजनात्मक कार्य, नियंत्रण, शासन-प्रशासन संबंधी कार्य, कौशल युक्त कार्य, अनुबंध, मैत्री, प्रेम संबंध, विवाह, दान, आशीर्वाद, समर्थन आदि का द्योतक है।

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ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Hasta Nakshatra Astrological Symbolic Description
हस्त नक्षत्र के देवता – सवितृ वा सविता हैं। 12 आदित्यों में इनका स्थान 7वां हैं। इन्हें सविता / त्वष्टा आदि नामों से भी बुलाया गया हैं। 12 मासों में ये आश्विन मास के अधिष्ठाता हैं। वैदिक वाङ्मय, विशेष रूप से ऋग्वेद संहिता में ये प्रमुख सौर देवता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। सूर्योदय से पहले “सवितृ” और उदय के बाद “सूर्य” कहा जाता है। इन्हें उत्तेजक, जीवनदाता, वनस्पतियों व पेड़-पौधों में वास करने वाला व सृष्टि को प्रेरित करने वाला कहा गया हैं।
ऋग्वेद संहिता में “सवितृ” की सबसे अधिक स्तुति है। उनका नाम लगभग 170 बार आता है और 11 पूर्ण सूक्त उन्हें समर्पित हैं।
ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 35वें सूक्त में महर्षि अंगिरस द्वारा रचित “हिरण्यस्तूप सूक्त” में “सवितृ” को हिरण्यहस्त (सुवर्ण हाथों वाले) कहा गया है। वे स्वर्णिम रथ पर सवार होकर अंधकार को दूर करते हुए पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग को प्रकाशित करते हैं। रात्रि में भी उनकी रक्षा का आह्वान है।
ऋग्वेद के तृतीय मंडल के 62वें सूक्त का 10वां मंत्र महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित प्रसिद्ध “गायत्री मंत्र” (सावित्री मंत्र) है। गायत्री मंत्र को “वेदों की माता” का दर्जा प्राप्त है। यह मंत्र “देवता सवितृ” को समर्पित हैं।
गायत्री मंत्र — ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
ॐ — परमात्मा का प्रणव (बीज मंत्र)।
भूर्भुवः स्वः — भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक (महाव्याहृति) — तीनों लोकों का प्रतीक।
तत् सवितुः — उस सवितृ देव का (प्रेरक, उत्तेजक, जीवनदाता)।
वरेण्यं — श्रेष्ठ, वरण करने योग्य।
भर्गः — तेज, प्रकाश, पावन शक्ति।
देवस्य — दिव्य (सवितृ) का।
धीमहि — हम ध्यान करें / धारण करें।
धियः — हमारी बुद्धि / बुद्धियों को।
यः — जो।
नः — हमारी।
प्रचोदयात् — प्रेरित करे।
अर्थात उस श्रेष्ठ सवितृ देव के पावन तेज का हम ध्यान करें, जो हमारी बुद्धि को सत्कर्मों की ओर प्रेरित करें।
गायत्री मंत्र – सवितृ की बुद्धि-प्रेरक शक्ति की स्तुति है। “सवितृ सूक्त” में “सवितृ” को विश्व-व्यवस्था का प्रेरक, मार्गदर्शक और रक्षक बताया गया है — गायत्री मंत्र उसी शक्ति को व्यक्तिगत बुद्धि-जागरण के रूप में लेता है।
सवितृ सूक्त में सवितृ की बाह्य (लौकिक) यात्रा और रक्षा का वर्णन है, जबकि गायत्री मंत्र उनकी आंतरिक प्रेरणा पर केंद्रित है।
Note :- गायत्री मंत्र का मूल रूप (तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥) ऋग्वेद में है, लेकिन वर्तमान में प्रचलित पूर्ण रूप [ॐ व महाव्याहृति सहित (भूर्भुवः स्वः)] बाद के वैदिक ग्रन्थों यथा तैत्तिरीय आरण्यक में मिलता है।
गायत्री मंत्र — देवता सवितृ की कृपा से बुद्धि, विवेक और आध्यात्मिक जागृति प्रदान करता है। बुध ग्रह भी अपने परमोच्च स्थान “हस्त नक्षत्र” में प्राप्त करते हैं। अतः “हस्त नक्षत्र” भी परम मेधावी, प्रेरक शक्ति, आध्यात्मिक चेतना, व्यवहारिक ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, उच्च स्मरण शक्ति, प्रबंधन कौशल, कलात्मक ज्ञान, उन्नत बौद्धिक विकास आदि का परिचायक हैं।
हस्त नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Hasta Nakshatra in Hindi
वराह मिहिर का कथन हैं कि — चोर, हाथी, रथ पर चलने वाले, हस्तिसाधनपति, शिल्पी, क्रय-विक्रय द्रव्य, भूसी वाले धान्य, सुनने वाले, वणिक्, तेजस्वी- ये सब हस्त नक्षत्रगत पदार्थ हैं। हस्त नक्षत्र में उद्यमी, साहसी, मद्यपान करने वाले, दयावान्, चोरी के कार्य में चतुर जातकों का जन्म होता हैं।
पं• रामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि — हस्त नक्षत्र पाँच ताराओं के योग से हाथ के समान स्वरूप वाला, सावित्र नामक देवता वाला, कुंँडिनी गोत्र वाला है। इसमें क्षिप्रकर्म, दक्षिण, महातन्त्र, विद्या सम्बन्धी कर्म, विद्या दान, घर, सवारी, मकान निर्माण, घर में प्रवेश, हाथो, घोड़ा, रथ व शस्त्रों की पूजा सम्बन्धी कार्य, वज्र, मांगलिक कार्य, चौल, यज्ञोपवीत, विवाह, वस्त्र, आच्छादन, वापी सम्बन्धी कार्य करना चाहिए। इसमें बुद्धिमान् का जन्म होता है।
वशिष्ठ संहिता का कथन है कि —
भेषजयात्राविद्याविवाहशिल्पव्रताम्बराभरणम्। सुरसंस्थापनमखिलं वास्तुप्रारम्भमर्कनक्षत्रे ॥
अर्थात औषधि सेवन, यात्रा करना, विद्या अभ्यास, विवाह, शिल्प, व्रत, नवीन वस्त्र धारण करना, देवप्रतिष्ठा तथा समस्त वास्तु प्रारम्भिक कृत्य हस्त नक्षत्र में शुभ होते है।
अतः चाँदी, पारद (पारा), श्वेत धातुएँ, मोती, चंद्रकांत मणि, श्वेत पुखराज, सूती वस्त्र, हाथ से बुने कपड़े, खादी, हस्तशिल्प वस्त्र, चावल, जौ, कुट्टू, हरड़, बहेड़ा, आँवला (त्रिफला), तिल, नारियल तेल, तिल का तेल, हरा, धानी, पीताभ श्वेत रंग, बुनाई, कढ़ाई, मूर्तिकला, चित्रकारी, बीज बोना, फसल काटना, रोपाई, मालिश, एक्यूप्रेशर, शल्य क्रिया, क्रय-विक्रय, मोल-भाव, हाथ मिलाकर सौदा, लेखन व दस्तावेज़ीकरण, मिट्टी के बर्तन, काष्ठकला, पारंपरिक विधि से भोजन पकाना, चतुर, व्यावहारिक व कुशल, हाथ की सफ़ाई जैसी निपुणता, परिश्रमी व उद्यमी, व्यापारिक बुद्धि, अवसर पहचानने में निपुण, आत्मनिर्भरता, स्वच्छंदता प्रिय, हास्यप्रिय, चुलबुला स्वभाव, सेवाभावी, जिज्ञासु, नई विद्याओं व भाषाओं को सीखने में रुचि वाला, अधीर, चंचल, महात्वाकांक्षी, मूर्तिकार, चित्रकार, जुलाहा, कुम्हार, शल्य चिकित्सक, फिज़ियोथेरेपिस्ट, मालिश करने वाल, किसान, माली, नर्सरी व्यवसायी, व्यापारी, दलाल, मुद्रा व्यवहारी, जादूगर, कठपुतली संचालक, हाथ की सफ़ाई दिखाने वाले, नाई, नाखून तकनीशियन, स्पा-मालिश, शिक्षक, लेखक, ज्योतिषी, हस्तरेखाविद्, बुनकर, दर्जी, एम्ब्रॉइडरी कलाकार, संदेशवाहन, जलयान, सूती कपड़े व वस्त्र उद्योग, पुल, बांध, नहर, सुरंग आदि का निर्माण करने वाला, रंग निर्माता, रसोइया, बेकर, कैटरर, हस्तकला, संगीत वाद्य बजाना, बागवानी, पाककला, ज्योतिष-हस्तरेखा, बाज़ार व हाट, कृषि मंडी व अनाज बाज़ार, अस्पताल व क्लिनिक, कुम्हार बस्ती, बुनकर कॉलोनी, विद्यालय व पुस्तकालय, नाई की दुकान, सैलून, स्पा, ज्योतिष व हस्तरेखा केंद्र, मेला व प्रदर्शनी स्थल, हस्त-चिकित्सा सेवाएँ यथा – रिफ्लेक्सोलॉजी, एक्यूप्रेशर, मसाज थेरेपी, हस्तशिल्प उत्पादन व निर्यात, सफाई व स्वच्छता सेवाएँ, कृषि सेवाएँ व बीज वितरण, वस्त्र व परिधान सेवाएँ, भोजन सेवा व खानपान, मुद्रण व प्रकाशन, राजनयिक, राजदूत, वकील, भाषण देने वाला, आयातक-निर्यातक, मिट्टी के घड़े, कुल्हड़ बुनी हुई वस्तुएँ चटाई, टोकरी, दरी, हस्तनिर्मित फर्नीचर, रसोई के उपकरण यथा सिल-बट्टा, ओखली-मूसल, कृषि उपकरण यथा – हल, फावड़ा, खुरपी, हाथ से बने दीपक व मूर्तियाँ, सूती बिस्तर व तकिए, विवाह संस्कार, पाणिग्रहण (हाथ थामना), कन्यादान, हस्तमेलापक, अन्नप्राशन, गृहप्रवेश, द्वार पूजन, विद्यारंभ संस्कार, हस्त पूजन यथा दीपावली पर हाथों की पूजा (यंत्र-वाहन पूजा), होम व यज्ञ, सूर्य नमस्कार अर्घ्य व हथेलियों से जल देना, हाथ से बनी ईंटें (कच्ची मिट्टी की), लकड़ी की नक्काशी यथा दरवाजे, खंभे, झरोखे आदि, चूना व मिट्टी का प्लास्टर (पारंपरिक), बाँस व सरकंडे की संरचना, हस्तनिर्मित टाइल्स व मोज़ेक, खपरैल छत, भित्तिचित्र व दीवार कला, वास्तु में पश्चिम दिशा, हाथ, हथेली, उँगलियाँ, नाखून, कंधे व कलाई, आँतें व पाचन तंत्र, त्वचा (हाथों की), स्नायु तंत्र, स्त्रावी ग्रंथियांँ, एन्जाइम्स, हाथों के रोग यथा कार्पल टनल सिंड्रोम, गठिया, हाथ काँपना (कंपवात), त्वचा रोग आदि एग्ज़िमा, सोरायसिस, पाचन विकार, कब्ज़, IBS, अपच, नाखून रोग, फंगल इन्फेक्शन, नाखून टूटना, स्नायु दुर्बलता यथा हाथों में सुन्नपन, पारेस्थेसिया, अंतड़ियों के रोग, हैजा, पेचिश, श्वसन तंत्र के रोग, पागलपन, हरसिंगार (पारिजात), आंवला, नारियल, केला, हस्त के आकार के पत्ते, हल्दी, पीत वर्ण, तुलसी, कपास का पौधा, बाँस, हस्तशिल्प का प्रमुख माध्यम, नीम, जूट आदि वस्तुएंँ “हस्त नक्षत्र” से संबद्ध पदार्थ हैं।
लग्न में हस्त नक्षत्र के फल || Hasta Nakshatra Results in Ascendant/ Lagna
यदि लग्न में हस्त नक्षत्र हो तो जातक उत्साही, उद्यमी, मेधावी, वेदज्ञ परन्तु लापरवाह, नौकरी पेशा में रुचिवान्, भावुक, स्वच्छंद, वाचाल, हँसी-मज़ाक करने वाला, झूठा, हस्तकला निपुण, कलाकार, कारीगर, शल्यचिकित्सक, चित्रकार वा मूर्तिकार, वाक्-चातुर्य से युक्त, जादूगरी आदि हाथ की सफाई वाले कामों में सिद्धहस्त, मनोरंजन प्रेमी व दूसरों का मनोरंजन भी करने वाला, भाषण-अभिभाषण, वाद-विवाद से लाभ अर्जित करने वाला, समय की नज़ाकत को समझने में माहिर, आपदा को सुअवसर में बदलने वाला, अपने संस्कृति व संस्कारों के प्रति संवेदनशील, अपने प्रेमी वा जीवनसाथी के प्रति अत्यधिक सुरक्षात्मक व स्नेही, भावुक आसक्त, कामकला में निपुण, विपरीत लिंगीयों के प्रति विशेष आसक्त, प्रबंधन व तकनीकी कार्यों में दक्ष, छद्म आध्यात्मिक अर्थात आध्यात्मिक होते हुए भी नीच कर्मों में रत होता है।
कोई-कोई जातक निर्दय, पाखण्डी, अभिमानी, मद्यप्रिय, ढीठ, निर्लज्ज, झगड़ालू, चोरी-डकैती में निपुण, दुष्ट, तस्कर होता हैं। इस नक्षत्र में धन-धान्य, कलात्मक व रचनात्मक क्षमता के साथ-साथ व्यसन व अपराधिक वृत्तियों की भी वृद्धि होती है।
हस्त नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष : Qualities of a Male Chart/Horoscope born in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक (Hasta Nakshatra born Male Personality) लम्बे कद-काठी वाला, थुलथुले बदन, बलिष्ठ, गोल मुखाकृति, गेहूंआ रंग वाला, घने घुंघराले बालों वाला, तीखे चमकदार नेत्र, घनी भौंहें, सीधी नुकीली नाक, मोटे किन्तु आकर्षक अधर, चिकनाई युक्त चमड़ी, छोटी बाहें, मजबूत कलाई, नरम चौड़ी हथेली, लम्बी अंगुली, चौड़े कंधे, उन्नत वक्ष, गहरी व स्पष्ट हस्तरेखाओं वाला, समतल पेट, बुद्धिमान, व्यवहारिक, तीव्र स्मरण शक्ति वाला, आकर्षक मुस्कुराहट वाला, शंकालु, परोपकारी, दूसरों की नकल उतारने, व्यंग्य करने व आलोचना करने वाला होता है।
ये पढ़ाई लिखाई में होशियार, गणित, विज्ञान, ज्योतिष, कलात्मक व रचनात्मक ज्ञान, तकनीकी शिक्षा, वाणिज्य, भाषा व साहित्य में रुचिवान्, प्रयोग करके सीखने की आदतों के कारण अन्य विद्याओं में भी पारंगत, कारीगरी, शिल्पकला, सर्जरी, संगीत, वाद्ययंत्रों से संबंधित क्षेत्र, चित्रकारी, लेखन, प्रकाशन, मीडिया, व्यवसाय, बैंकिंग, लेखाकारी, पत्रकारिता, ज्योतिष, आध्यात्म, औषधि आदि क्षेत्रों में विशेष रुचिवान् व सफल होता है। अत्यंत गुणवान, अनेक कार्यों में सिद्धहस्त व परिश्रमी होने के बावजूद भी नौकरी पेशा में ऊपरी दबाव व अनावश्यक नियंत्रण से चिढ़ते रहते हैं; फलतः ये स्वतंत्र व्यवसाय में विशेष सफल व प्रतिष्ठित होते हैं। कृषि आधारित व्यवसाय विशेष उपयुक्त होता हैं।
ये अक्सर धन-वैभव युक्त, प्रतिष्ठा व संपत्ति में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने वाले, चोर, अग्नि, अस्त्र-शस्त्र व शासक वर्गों से पीड़ित, स्वयं भी निष्ठुर, असमाजिक तत्वों से हितैषी रखने वाला, दुस्साहसी, अवैध कारोबार में रुचिवान्, निर्दयी, व्यसनी, प्रेम संबंधों में गहरे किन्तु भावनाएँ प्रकट करने में संकोची, आदर्श दाम्पत्य जीवन वाला, शिक्षित, आस्थावान जीवनसाथी वाला होता हैं।
हस्त नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष : Qualities of a Female Chart/Horoscope born in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका (Hasta Nakshatra born Female Personality) सामान्य कद-काठी वाली, गौरवर्णी वा गेहूंआ रंग वाली, गोल मुखाकृति, लम्बी नासिका, नरम लम्बे कान, उन्नत वक्षस्थल, चौड़े कंधे, भारी व मोटी जांघ, गोल नितंब, हाथ पतले और उँगलियाँ लंबी व कोमल, सहज प्राकृतिक सौन्दर्ययुक्त होती है। कृत्रिम श्रृंगार के बिना भी ये आकर्षक दिखती हैं। सुघड़ देहयष्टि और संतुलित अंगों की स्वामिनी होती हैं। आँखें बड़ी, भावपूर्ण और हिरण-सी चंचल होती हैं। चेहरे पर एक मधुर मुस्कान और स्वाभाविक प्रसन्नता झलकती है।
ये भावनाप्रधान, परोपकार कर्मों में रत, बात-बात पर शरमाने वाली, सभ्य, विनम्र, बड़ों का आदर करने वाली, ईर्ष्यालु, स्वाभिमानी, तर्क-वितर्क करने में निपुण, नवाचारी विचारों की समर्थक व कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाली, परिवार व संबंधों को सर्वोपरी मानने वाली, तीव्र अंतर्ज्ञान युक्त, सामान्यतया मधुरभाषिणी किन्तु आवश्यकता पड़ने पर दृढ़, स्वच्छंद, जी हजूरी करने से घृणा करने वाली, निकट संबंधों वा प्रेम संबंधों में निर्णय लेने में कठिनाई वाली होती है।
ये बहुमुखी प्रतिभा की धनी, शिक्षा, स्वास्थ्य, ज्योतिष, आध्यात्म, हस्तकला, लेखन, पत्रकारिता, मार्केटिंग, प्रबंधन, फैशन, पाक-कला आदि कलात्मक क्षेत्रों में विशेष सफल होती है। पारिवारिक स्थिति सुदृढ़ होने से व अत्यंत उन्नत सोच रखने के कारण अधिक समय तक नौकरी नहीं करती, निजी व्यवसाय में प्रतिष्ठित, पारिवारिक सहयोग से बहुत ऊँचाइयाँ छूने में सक्षम होती हैं।
पेट, प्रजनन अंग, अनिद्रा व मानसिक तनाव से पीड़ित, कल्पनाओं में खोई, विश्वासघात पर भयंकर प्रतिघात करने वाली, दाम्पत्य जीवन में निष्ठावान होती है।
प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Hasta Nakshatra Subtel Results Variations in all 4 Charan (Padas)
हस्त नक्षत्र प्रथम चरण (Hasta Nakshatra in Hindi First Charan / Padas) : कन्या राशि अंतर्गत 10° अंश से लेकर 13° अंश 20′ कला तक का क्षेत्र विस्तार हस्त नक्षत्र का प्रथम चरण है। नवमांश मेष ♈ होने से इस चरण का स्वामी मंगल हैं। अतः हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण पर बुध-चन्द्र-मंगल का संयुक्त प्रभाव है। ओज, वीर्य, बहादुरी, चंचलता, उग्र व्यवहार, उच्च ऊर्जा, साहस, नेतृत्व, सर्जरी, रक्षात्मक क्षेत्र, सैन्य गतिविधि, गणित, खगोल व भौतिक अनुसंधान, समाज पर नियंत्रण, शासन, आक्रामक लेखन हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण के मुख्य गुण हैं।
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक रक्तिम वर्णी, चौड़ा माथा, घनी पलकें, मजबूत जबड़ा, सीधी नुकीली नासिका, मजबूत कंधे व भुजाओं वाला होता है। ये तीक्ष्ण प्रभाव वाला, सतर्क, आलस्य विरोधी, कार्यकुशल, त्वरित कार्रवाई करने वाला, स्पष्टवादी, हास्य-व्यंग्यात्मक शैली में बोलने वाला, प्रतिस्पर्धा में विजयी, चतुर, तर्क-वितर्क में निपुण, छल-कपट करने वाला, इंजीनियरिंग, शल्यक्रिया, सैन्य उपक्रम, समाजसेवा, कृषि उत्पाद, वस्त्र व्यवसाय, औषधि व्यवसाय, खाद्य विभाग, लेखा विभाग, पत्रकारिता, संपादन, तकनीकी व वीररस से संबंधित लेखन, ब्लॉगिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग, शिल्पकला (खासकर धातु, आग या काटने वाले उपकरणों से), युद्ध कला, मार्शल आर्ट्स या एथलेटिक्स जैसी गतिविधियों में रुचिवान् होता हैं ।
परस्परस्त्रीगमन, अधीरता, छिन्द्रान्वेषण, क्रोधी व आवेशपूर्ण अभिव्यक्ति, दुर्घटना, रक्त संबंधी विकार, यात्रा में कष्ट व असमाजिक तत्वों से मैत्रीपूर्ण संबंध हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण की कुछ दुर्गुण हैं।
हस्त नक्षत्र द्वितीय चरण (Hasta Nakshatra in Hindi Second Charan / Padas) : कन्या राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से लेकर 16° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र हस्त नक्षत्र का द्वितीय चरण है। नवमांश वृषभ ♉ होने से इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। अतः हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण पर बुध-चन्द्र-शुक्र का संयुक्त प्रभाव है। यह एक पुष्कर नवमांश भी हैं। शुभ ग्रहों की यहाँ स्थिति संबंधित भावों की शुभता में कई गुना वृद्धि कर देती हैं। प्रबुद्ध विचार, उच्चस्तरीय विश्लेषणात्मक क्षमता, प्रसन्नता, सौन्दर्य बोध, व्यवहारिक ज्ञान, कलात्मकता, भौतिकवाद, संपत्ति संग्रह, सुगन्धित पुष्प, फलदार वृक्ष, औषधीय लताएँ, सौन्दर्य युक्त वाणिज्य, आतिथ्य सत्कार आदि हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण के मुख्य गुण हैं।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक गोल अंडाकार मुखाकृति, लम्बी काया, मोटे अधर, सुकोमल अंगुलियों, नरम व मोटी कलाई, उन्नत वक्ष स्थल, मोटी जांघें, मांसल पिंडलियों वाला, घीमी गरिमामय चाल वाला, धैर्यवान, मधुरभाषी, वचन के पक्के, सौन्दर्य-प्रिय, मिलनसार, कलाप्रेमी, भरोसेमंद, स्वाद लोलुप, जिद्दी, खर्चीला, आराम पसंद, आलोचना बर्दाश्त नहीं करने वाला, व्यसन प्रिय, उपहार आदि देने-लेने को प्यार समझने वाले, भौतिकतावादी, दूसरों पर नियंत्रण करने को उत्सुक होता हैं।
फ़ैशन, सौन्दर्य, कलात्मक क्षेत्रों, वस्त्र व खाद्य पदार्थों से संबंधित व्यवसाय, अभिनय, एंकरिंग, मॉडलिंग, भावनात्मक व कल्पनाशील लेखन, होटल व्यवसाय, इवेंट मैनेजमेंट, भाषा, साहित्य, संगीत अध्यापन, वित्तीय सलाह, इंटीरियर व एक्सटीरियर डिजाइनिंग, आयुर्वेद, आहार विज्ञान, त्वचा रोग विशेषज्ञ आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण के कुछ सामान्य दुर्गुणों में यह हैं कि — ससुराल के संबंधों से तालमेल बिठाने में समस्या आती है। जिद्दी स्वभाव और आत्ममुग्धता की प्रवृत्ति आंतरिक संबंधों में झगड़े व तनाव का कारण बनती हैं।
हस्त नक्षत्र तृतीय चरण (Hasta Nakshatra in Hindi Third Charan / Padas): कन्या राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से लेकर 20° अंश तक का विस्तार क्षेत्र हस्त नक्षत्र का तृतीय चरण है। नवमांश मिथुन ♊ होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। अतः हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण पर बुध-चन्द्र-बुध का संयुक्त प्रभाव है। विश्लेषणात्मक बुद्धि, विवेकशील वाणी युक्त कार्य व्यवसाय, संचार कुशलता, धूर्तता, चालाकी, आत्मबोध, तर्क क्षमता, चंचलता, लेखन, अस्थिरता, चिंता, जनसंपर्क, खोजबीन, अनुसंधान, भावुकता से लैस बौद्धिक विमर्श आदि हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का मुख्य गुण हैं।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक गोल मुखड़ा, तीखे नयन-नक्श, अपने आयु से कम आयु का दिखने वाला, साफ़ त्वचा, चंचल चमकदार आँखों वाला, पतली सीधी नूकीली नासिका, आकर्षक होठ, कृशकाय, सुन्दर हाथ व कलाई वाला, तेज-तर्रार, सार्थक उद्देश्यों के प्रति सजग, तेज़ दिमाग, वाकपटु, जिज्ञासु, भावनाओं को कलात्मक ढंग से लेखनशैली में ढालने में कुशल, प्रत्येक परिस्थितियों के प्रति अनुकूलनशील, हास्यप्रिय, नेटवर्किंग में माहिर, बहुमुखी प्रतिभा का धनी होता हैं। प्रेम-संबंधों में उत्साहित किन्तु जल्दी हीं ऊब जाने वाला, बातुनी होता है।
लेखन, मीडिया, अध्यापन, प्रशिक्षण, कोचिंग व्यवसाय, प्रोग्रामर, डेटा विश्लेषक, UX डिजाइनर, मध्यस्थता कराने में निपुण गुणों वाला, दलाली, आयात-निर्यात, वकील, वक्ता, न्यायिक व आर्थिक सलाहकार, PR, मार्केटिंग, विज्ञापन, विपणन, गणित आधारित तार्किक ज्योतिषी, अनुवादक, मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता, भाषा विशेषज्ञ आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व विशेष सफल होता हैं। चिंता, अनिद्रा, तनाव, अत्यधिक वाचालता कभी-कभी समस्याओं का कारण बनता हैं।
हस्त नक्षत्र चतुर्थ चरण (Hasta Nakshatra in Hindi Fourth Charan / Padas): कन्या राशि अंतर्गत 20° अंश से लेकर 23° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र हस्त नक्षत्र का चतुर्थ चरण है। नवमांश कर्क ♋ होने से इस चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। अतः हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर बुध-चन्द्र-चन्द्र का संयुक्त प्रभाव है। भावनात्मक लगाव, परिवार, कुटुम्ब, जन्मस्थली, जाति-बिरादरी आदि से लगाव, सामाजिक उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता, कला व संस्कृति के प्रति झुकाव, पारदर्शिता, आवेग, गोपनीयता, संकोच आदि हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का मुख्य गुण हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक गौरवर्णी, गोल भरा हुआ कोमल छोटा मुखड़ा, नमीयुक्त त्वचा, बड़ी गहरी भावपूर्ण नेत्र, छोटी गोलाकार नासिका, मोटे होठ, नरम गद्देदार हथेली, मोटा बड़ा पेट, ऊंचे वक्षस्थल व कंधे, लम्बी भुजाओं व लम्बे पैर, धीमी शांत लहराती हुई चाल वाला, मजबूत पाचनतंत्र वाला, अत्यंत दयालु, सेवाभावी, दिव्य अंतर्ज्ञान से युक्त, मातृ-स्वभावी, तीव्र स्मरण शक्ति वाला, कोमल व व्यवसायिक कल्पनाओं वाला, निष्ठावान, धर्म-कर्म में अनुरागी, परिजनों के प्रति अति जिम्मेदार, समाज द्वारा सम्मानित, मोटे तौर पर सोचने वाला, साधारण शिक्षित, घर-परिवार के लिए पूर्णतया समर्पित होता हैं।
चिकित्सा, सेवा, स्वास्थ्य सलाहकार, मनोविज्ञान से संबंधित कार्य यथा मनोचिकित्सक, बाल मनोविज्ञानी, अनाथालय, वृद्धाश्रम सेवा, NGO, खाद्य उद्योग, होटल, रेस्तरां, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, जलीय व्यवसाय, कविता-उपन्यास आदि भावुक लेखन, ज्योतिषी, पुरोहित, आध्यात्मिक परामर्शदाता, इंटीरियर डिजाइन, हस्तशिल्प, रासायनिक क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र का यह चतुर्थ चरण भावनात्मक रूप से अत्यंत अस्थिर हैं। जातक को अकेले निर्णय लेने में डर लगता है, अतः व अपने निर्णयों में दूसरों के समर्थन की आवश्यकता महसूस करता हैं। प्रबल स्मरण शक्ति व भावनात्मक प्रबलता के कारण भूतकाल के दुःख, अपमान आदि नहीं भूल पाते। इनके लिए प्रेम का तात्पर्य अत्यंत देखभाल करना, खिलाना-पिलाना, भावनात्मक सहारा देना हैं। ये अपने साथी की देखभाल में स्वयं की उपेक्षा करने वाले होते हैं। इन्हें प्रेमी जीवन में प्रवेश करने से पहले, काफ़ी सोच-विचार करना चाहिए; कारण कि विश्वासघात को ये सह नहीं पाते, और दयालुता के कारण आक्रामक बदला भी नहीं ले पाते, अतः इन्हें उबरने में काफ़ी समय लगता हैं, अथवा विक्षिप्त हीं हो जाते हैं।
हस्त नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Results of various planets situated in different Charan /Padas of Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक प्रबल नेतृत्व क्षमता वाला, आत्मविश्वासी, महात्वाकांक्षी, निर्णायक बिंदुओं पर पहुंचने वाला, स्वाभिमानी, क्रोधी, सफल होने पर अहंकारी, व्यसन प्रिय, बलपूर्वक दूसरों का अधिकार छीनने वाला, चिकित्सा, खेल, व्यायाम, शासन-प्रशासन, रक्षा सेवा, कल-कारखाने में उच्चाधिकारी, निर्माण, लोहा-इस्पात आदि भारी धातुओं से संबंधित कार्य व्यवसाय में सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक दिखावा पसंद, बाहर से आत्मविश्वासी दिखने वाला किन्तु भीतर से असुरक्षा की भावना वाला, धन कमाने के लिए अनैतिक वा अवैध रास्ते अपनाने वाला, प्रेम व वैवाहिक जीवन में दुविधाओं का सामना वाला, कंजूस, विभिन्न कलात्मक क्षेत्रों में अस्थाई रूप से प्रयोग करने वाला, वित्तीय क्षेत्र, भूमि-भवन व संपत्ति से संबंधित व्यापार व्यवसाय, खेती, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, आभूषण, वस्त्र, सुगंध आदि के व्यापार-व्यवसाय में सफल होता है। कोई-कोई जातक हाथ की सफाई वाले कार्यों यथा जादूगरी, चित्रकारी, पेंटिंग, सौन्दर्य चिकित्सा, आकर्षक लेखन, पॉकेटमारी आदि कार्यों में संलिप्त होता है। नेत्र, किडनी व हृदय से संबंधित व्याधियों से पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक तेज दिमाग, कटुभाषी, दलाली प्रवृत्ति वाला, आत्ममुग्ध, वाद-विवाद में विजयी, विद्वान, अहंकारी, मादक पदार्थों का सेवन करने वाला, सरकारी पदों पर हो तो जनता को लूटने वाला, मतलब के संबंधों में रुचिवान्, पारंपरिक रीति-रिवाजों में अविश्वासी, अनुसंधानिक बुद्धि वाला, मीडिया व पत्रकारिता, शिक्षा, कानून, IT व तकनीकी क्षेत्र, सरकारी वा निजी संचार, आयात-निर्यात, मध्यस्थता की भूमिका आदि से धनागम करने वाला होता है। लेखन व प्रभावशाली वाणी से समाज में सम्मानित होता हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक आत्मबली, गमखोर, संवेदनशील भावनाओं वाला, जनसाधारण के आकर्षण का केन्द्र, स्त्रियों का विशेष आदर करने वाला, सहज करिश्माई, भरोसेमंद, स्वयं को अभिव्यक्त करने में संकोची, स्वजनों के छल-प्रपंच का शिकार होता है। जनकल्याणकारी क्षेत्रों, स्वास्थ्य, बालरोग, मनोरोग, नर्सिंग, शिक्षा, प्रकृति संरक्षण, राजनीति, कला व साहित्यिक क्षेत्रों, ज्योतिष, आध्यात्म, दर्शन, सिंचाई, डेयरी, खाद्य उद्योग आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Sun located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक शिष्टाचार युक्त, कोमल वृत्तियों वाला, उन्नत जनसंपर्क वाला, भावुक, आय के एक से अधिक स्रोत वाला, परदेसवासी, धन-धान्य से युक्त, उन्नत निर्माण कौशल वाला, लेखन, सृजन, सेवा, लोककल्याण के कार्यों से प्रसिद्ध, जनप्रिय नेता होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक दुस्साहसी, प्रबल आत्मविश्वासी, अधीर, तीखा बहसबाज, शल्यचिकित्सा, यंत्र, मशीनी कार्य, प्रतिस्पर्धात्मक क्षेत्रों में तीव्र उन्नतिशील, अहंकारी, परिजनों व जीवनसाथी पर कठोर नियंत्रणकारी, कलहप्रिय, शत्रुओं व मुकदमेबाजी से परेशान, दुर्घटनाओं व त्वचा रोग से पीड़ित होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक धर्मात्मा, अपने जनो के लिए कल्याणकारी, कुशल समाजसेवी, प्रशासन, शिक्षा, परामर्श आदि क्षेत्रों में प्रतिष्ठित, सुसंस्कृत परिवारों में संबंध रखने वाला, नैतिक मूल्यों का धनी, ज्योतिष आदि गूढ़ विषयों में रुचिवान् होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक दबाव में जीने वाला, कार्यक्षेत्रों में अधिक परिश्रम के बावजूद अल्प सफलता वाला, श्रेय हीन, परिजनों व खानदान के नाम को धूमिल करने वाला, आत्मग्लानि से युक्त, पारिवारिक असंतोष से पीड़ित होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक दूसरों का श्रेय हड़पने वाला, अनैतिक तरीकों से उच्च पदासीन, राजनैतिक लोगों का सेवक, उच्च वर्ग वा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सांझा अवैध कर्म करने वाला, प्रबल शत्रुओं से पीड़ित, निकट संबंधों से अनुचित लाभ उठाने वाला होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक स्वबोध से युक्त, मान्यताओं के प्रति तीखी बेरुखी वाला, जोखिम भरे निर्णयों से शत्रु बनाने वाला, अस्थिर प्रेम संबंधों वाला, दुर्घटना ग्रस्त, व्यसन-प्रिय, धन संचय करने में असमर्थ होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक रक्तिम वर्णी, लम्बा चेहरा, चंचल आवेगपूर्ण नेत्रों वाला, स्फूर्तिवान, मान-सम्मान की परवाह नहीं करने वाला, उग्र कार्यों में दक्ष, अनेक स्त्रियों में रुचिवान्, कर्मठ, चोरी तस्करी में रुचिवान्, प्रेम संबंधों में धोखा देने वाला, मादक पेय पदार्थों का शौकीन, कृषि, मत्स्य पालन, मोती वा अन्य जलीय उत्पादों के उत्पादन, आपातकालीन सेवाकर्मी, मशीनरी, इंजीनियरिंग, साहसिक व्यवसाय, नये उद्यमी क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। भावनात्मक आघात व रक्तचाप से संबंधित व्याधियां पीड़ित करती हैं।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक गोल अंडाकार मुखाकृति, गौरवर्णी, तीखे नयन-नक्श वाला, मनमोहक, बड़े नेत्र, छोटी गोलाकार सुडौल नासिका वाला, प्रसन्नचित्त, स्थूल शरीर वाला, कोमल गुलाबी हथेलियों वाला, बिना श्रृंगार के भी आकर्षक, मधुरभाषी, बाल्यकाल से यौनाचारी, परिपक्व अनुभवी, कला व सौन्दर्य के प्रति सहज आकर्षण वाला, नैतिक मूल्यों का धनी, स्वाद लोलुप, जिद्दी, विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला होता है। कला, संगीत-नृत्य, चित्रकारी, डिजाइनिंग, खाद्य उद्योग, वित्तीय विभाग, फैशन, आतिथ्य सत्कार क्षेत्र यथा होटल आदि व्यवसाय, त्वचा, आहार-विहार, आयुर्वेद आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। मधुमेह व मोटापे के कारण जीवन के उत्तरार्ध में पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक लंबा मुखड़ा, पतला, ललाट पर उभरी स्पष्ट रेखाओं वाला, गेहूंआ रंग वाला, तीव्र व चंचल चाल वाला अर्थात द्रुतगामी, सफल कुटनीतिज्ञ, बोलने व लिखने में कुशल, जिज्ञासु, परिस्थितियों के अनुसार आचरण करने वाला, विपरीत लिंगियों के प्रति आसक्त, अस्थिर संबंधों वाला, शिक्षा, मनोविज्ञान, लेखन, कंटेंट क्रिएशन, डेटा विश्लेषक, प्रोग्रामर, मौसमविद्, भाषा व साहित्यिक क्षेत्रों, ज्योतिष, खगोल, गणित, शेयर, निवेश आदि क्षेत्रों से लाभान्वित होता है।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक स्थूल शरीरी, कोमल, माधुर्यपूर्ण व्यवहार करने वाला, प्राकृतिक चिकनाई युक्त चमड़ी, भावपूर्ण नेत्र, मोटे कोमल अधर, भावुक प्रेम करने वाला, दूसरों के अंतर्मन में सहज स्थान बनाने वाले गुणों से युक्त, देव-ब्राह्मण आदि का आदर करने वाला, सत्कर्मी, कलात्मक व रचनात्मक क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा का धनी, विलक्षण स्मरण शक्ति वाला, दूसरों के प्रभाव से प्रभावित, तीर्थाटन आदि करने वाला, राजनीति, कलात्मक व रचनात्मक क्षेत्रों, समाजसेवा, साहित्य लेखन, पुरोहित कर्म, प्राकृतिक वस्तुओं के व्यवसाय से लाभान्वित, लोकप्रसिद्ध होता है। इन्हें निकट संबंधों में धोखा, ठगी, विश्वासघात का सामना करना पड़ता है।
हस्त नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Moon located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक स्वाभिमानी, भावना प्रधान, मधुर व्यवहार करने वाला, आत्मगौरव से युक्त, जनसेवा, समाज कल्याण आदि कार्यों में रुचिवान्, नियम-कानून का ज्ञाता, अनेक विषयों में निपुण, धन संग्रह हेतु संघर्षशील होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक पढ़ने-लिखने का शौकीन, व्यवस्था प्रिय, परिजनों का दुलारा, चिड़चिड़ा स्वभाव वाला, ईर्ष्यालु, रक्त व हार्मोनल विकार से पीड़ित, धन-धान्य से युक्त, समाज में सम्मानित, लोकप्रिय होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक संवाद कुशल, कोमल वृत्तियों वाला, बौद्धिक गतिविधियों से धनवान, लेखन, परामर्श, संचार, नवाचारी क्षेत्रों में रुचिवान्, बहुमुखी प्रतिभा का धनी, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सम्मानित होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, विरासत का लाभी, स्वस्थ, विशाल काया वाला, अहंकार से युक्त, उच्च शैक्षणिक, न्यायिक व प्रशासनिक उपलब्धियों वाला, सम्मानित जीवनसाथी वाला होता हैं।
शुक की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत रुपवान, थुलथुले बदन वाला, कल्पनाशील, विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला, सौन्दर्य बोध से युक्त, कला, निर्माण, चिकित्सा, सौन्दर्य, खाद्य उद्योग, होटल, वित्तीय प्रबंधन आदि क्षेत्रों में उत्कृष्ट सफलता वाला होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक परिजनों के सुख से वंचित, अल्प वय से जीविकोपार्जन करने वाला, परिश्रमी, जीवन के पूर्वार्द्ध में दर-दर भटकने वाला, जीवन के उतरार्द्ध में साधारण धनी, पारिवारिक क्लेश से दुःखी, विवाह व संतान प्राप्ति में विलंब वाला होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक उतावला, झगड़ालू, अस्थिर नौकरी पेशा वाला, नीच कर्मों में रत, प्राचीन परंपराओं व शास्त्रों में फेर-बदल करने वाला, उदासीन संबंधों वाला, अज्ञात भय से ग्रस्त, सौन्दर्य से संबंधित बिमारियों से पीड़ित, कौटुंबिक व्याभिचार करने वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत चालाक, धूर्त बुद्धि वाला, भावनात्मक शिकार बनाने वाला, स्वार्थी संबंधों में लिप्त, उच्च पदासीन, उदर व मानसिक अवसाद से पीड़ित, रिश्वतखोर अधिकारी वा अनुचित मुनाफ़ाख़ोर व्यवसायी होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra): हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक रक्तिम वर्णी, बलिष्ठ, मांसल शरीर वाला, नेत्र में लालिमा युक्त, चौड़ी हथेली, मजबूत पकड़ वाला, द्रुतगामी, साहसिक कार्यों में दक्ष, त्वरित निर्णय लेने वाला, धनार्जन में तत्पर, महात्वाकांक्षी, लक्ष्य केंद्रित, स्पष्टवादी, कठोर प्रशासक, स्वाभिमानी, अनियंत्रित कामुक वृत्ति व क्रोधी प्रवृत्ति वाला, चिकित्सा, शासन-प्रशासन वा सरकारी क्षेत्रों में दस्तावेजी कार्य करने वाला, भारी मशीन, धातु, लकड़ी आदि कठोर वस्तुओं से संबंधित निर्माण कार्य में रुचिवान्, पहलवानी, मुक्केबाजी, निशानेबाजी, आपदा प्रबंधन आदि कार्यों में निपुण होता हैं। छोटी-मोटी दुर्घटनाओं, विवाद, अस्थिर मैत्री संबंधों से परेशान होता रहता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक गेहूंआ रंग वाला, त्वचा पर दाग-धब्बे युक्त वा संवेदनशील त्वचा वाला, भारी पलकें, बलिष्ठ किन्तु आलस्य युक्त, दिखावा पसंद, सहनशील, भारी व टिकाऊ निर्माण कार्य में रुचि रखने वाला, घर-परिवार के प्रति समर्पित, प्रेम-संबंधों में कलहप्रिय, अनेक प्रेम-संबंधों में संलिप्त, अनेक आसनों में रतिक्रिया करने वाला अर्थात कामक्रीड़ा में निपुण, खर्चीला, व्यसन प्रिय, दबी-जुबान से विद्रोही स्वर वाला, चिकित्सा, समुद्री व्यवसाय, सिविल इंजीनियरिंग, ठेकेदारी, भवन निर्माण, विवादित संपत्तियों की खरीद-बिक्री करने वाला, खाद्य पदार्थों से संबंधित व्यापार-व्यवसाय, आभूषण आदि से संबंधित कार्य व्यवसायों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक सुन्दर, तमतमाता चेहरे वाला, लम्बा मुखड़ा, दुबला-पतला किन्तु फुर्तीला, चंचल, लेखनकला में अत्यन्त निपुण, जल्दी-जल्दी कार्य करने वाला, विकसित व नवाचारी सोच वाला, जटिल यंत्रों व तकनीकी की अच्छी समझ रखने वाला, साहसिक लेखन वा विवादास्पद सच बोलने व लिखने की आदत वाला, सुरक्षात्मक, शंकालु, कठोर भाषण से अनेक जनों का अप्रिय, अनेक पेशेवर कार्यों पर समय निवेश करने वाला, झूठ बोलने में निपुण, अनेक चेहरे वाला, धन-वैभव से युक्त, तकनीकी, कानून, IT सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दलाली व मध्यस्थता से संबंधित कार्य, खेल पत्रकारिता, विश्लेषक, कमेंटेटर, खोजी पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक दृढ़, स्थूल शरीर वाला, आकर्षक, पीतवर्णी, भावनात्मक रूप से संवेदनशील, धैर्यवान, अत्यधिक सोच-विचार करने वाला, निर्णय लेने में असमर्थ वा भावुक निर्णयों से हानि उठाने वाला, परिजनों वा पत्नी पर निर्भर, कफ संबंधित व्याधियों वाला, समाज में प्रतिष्ठित, परिजनों से स्नेही, उच्च नैतिक मूल्यों वाला, दयालु, भौतिक सुखों से युक्त, नर्स, पैरामेडिकल, आपातकालीन सहायक, थेरेपिस्ट, काउंसलर, नौसेना, जलीय उद्योग, पुनर्वास केन्द्र संचालक, पारंपरिक कलात्मक निर्माण व संग्रहण, रसोई आदि से संबंधित कार्यों में रुचिवान् व सफल होता है। जीवन में विश्वासघात के अनेकों मर्म झेलने पड़ते हैं।
हस्त नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Mars located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक निर्भीक, लकड़ी, धातु आदि भारी निर्माण कार्यों में निपुण, वरिष्ठों से सहयोग प्राप्त, सुरक्षा व तकनीकी क्षेत्रों में नेतृत्वकर्ता, घूमने-फिरने का शौकीन, धन-धान्य से युक्त, व्यसनी, अनेक स्त्रियों से संसर्ग करने वाला होता है।
चंद्रमा की दृष्टि हो तो जातक आवेगी, लक्ष्मीवान, मधुर व्यवहारी, अनेक स्त्रियों का प्रिय, उच्च नैतिक आदर्शों वाला, चिकित्सा, जलीय व्यवसाय, आपातकालीन सेवा क्षेत्र आदि में सफल, अति कामुक, विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक मिथ्याभाषी, जिद्दी, अत्यंत आवेगी संभाषण करने वाला किन्तु अंदर से कायर, गणित, खगोल, विज्ञान, तकनीक आदि विषयों में निपुण, काव्य लेखन, व्यवसाय, तकनीकी क्षेत्र में सफल, रक्तचाप का रोगी होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक शैक्षणिक, धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों का निर्माता, न्याय, शिक्षा, सुरक्षा, प्रशासन व राजनैतिक क्षेत्रों में साहसिक बदलाव करने वाला, जीवनसाथी व परिजनों के प्रति समर्पित, दूर-दूर तक कीर्तिमान स्थापित करने वाला होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सौम्य, दयालु, परोपकारी, इंजीनियरिंग, सौन्दर्य चिकित्सा, उपहार, भोग-विलास संबंधी वस्तुओं का व्यवसायी, भोग प्रिय, कलात्मक व रचनात्मक निर्माण में उल्लेखनीय योगदान करने वाला, एक से अधिक वैवाहिक संबंधों वाला व अनेक स्त्रियों से संसर्ग वाला होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक कुंठित, ईर्ष्यालु, दूसरों का अहित करके प्रसन्न होने वाला, झूठ-फरेब से आजीविका वाला, क्रूर अपराधिक मानसिकता वाला है। वैवाहिक जीवन अव्यवस्थित, क्रूरतापूर्ण हिंसक व्यवहार करने वाला होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अति आवेगी, विध्वंसक निर्माण कार्य करने वाला, सेना, पुलिस आदि रक्षा क्षेत्रों में उच्च पदासीन, प्रतिष्ठित राजनैतिक सफलता वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक सत्ता लोलुप, अवैधानिक कृत्यों से धनागम करने वाला, प्रतिस्पर्धा में विजयी, निकट संबंधों में नियंत्रणकारी, अपने बलबूते प्रबल सफलताओं वाला होता हैं।
हस्त नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक पतला लंबोतरा चेहरे वाला, अपने विचारों में लीन, रूखी त्वचा, चंचल नेत्र, नुकीली उभार लेती हुई नासिका, कृशकाय, सदैव सक्रिय, फुर्तीला, असाधारण तर्कशक्ति वाला, अवैधानिक कृत्यों में रुचिवान्, ईर्ष्यालु, व्यवहारिक, जल्दीबाज़, अकेला होने पर विचलित, धारदार हथियारों, मशीनों वा वाहन दुर्घटना से पीड़ित होता है। कार्टूनिस्ट, व्यंग्यात्मक लेखन, दलाली, न्यायिक विभाग, शस्त्र निर्माण, मार्केटिंग, मुंशी, लेखाशास्त्री आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध अपने परमोच्च अंश को प्राप्त होता हैं; अतः हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो, जातक गौरवर्णी, सुन्दर, विलासी, बड़ी चमकदार आँखें, प्रभावशाली व्यक्तित्व, लम्बी उंगलियांँ, कलात्मक अभिरुचि वाला, आत्मविश्वासी, गौरवशाली, मधुरभाषी, व्यवहारकुशल, सामाजिक समर्थन वाला, कम श्रम से बौद्धिक कार्यों से धनागम करने वाला, दानशील, परिजनों व मित्रों का हितैषी, स्त्री लोलुप, व्यसन-प्रिय, अपने वचनों का पक्का, वाणिज्य व व्यापारिक क्षेत्रों, फैशन व डिजाइनिंग, लेखन, विज्ञापन, वित्तीय विश्लेषक, आयुर्वेद व सौन्दर्य चिकित्सा, संगीत शिक्षण, मॉडलिंग आदि क्षेत्रों में सफल, राजनीति, कुटनीति आदि क्षेत्रों में भी परदेस में सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक सुन्दर, सज्जन, सुकोमल अंगों वाला, विश्लेषणात्मक बुद्धि से युक्त, हँसमुख, उदारवादी, पराक्रमी, अद्भुत लेखन क्षमता वाला, अनेक भाषाओं और साहित्यिक दर्शन का ज्ञाता, बहुभाषाविद्, सभी प्रकार के परिस्थितियों में अनुकूलता वाला, सूचना व प्रौद्योगिकी, लेखन, साहित्य रचना, अनुवादक, शिक्षण-प्रशिक्षण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी व नवाचारी कार्य, कानून, ज्योतिष, गणित, खगोलीय अनुसंधानकर्ता, मीडिया व PR आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। चिड़चिड़ापन, आक्रोशित संवाद, अनिद्रा, चिंता आदि कुछ दुर्गुण होते हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक चंचल, आकर्षक, स्थूल शरीर वाला, उलझी हुई गहरी हस्तरेखाओं वाला, मृदुभाषी, भय व आशंका से ग्रसित, शत्रुंजय, भावनात्मक समझ में निपुण, तीव्र अंतर्ज्ञान से युक्त, असाधारण स्मरण शक्ति वाला, सेवाभावी, मनोविज्ञान, ज्योतिष, आध्यात्मिक साधना, आयुर्वेद आदि विषयों में रुचिवान्, रहस्यात्मक लेखन वाला, गुढ़ ज्ञान के प्रति समर्पित, चिकित्सा, परामर्श, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, डिटेक्टिव, भावनात्मक लेखन, बाल शिक्षा वा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रशिक्षण आदि क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला होता है। पाचनतंत्र व नींद से संबंधित साधारण समस्याएं हो सकती है।
हस्त नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Mercury located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कोमल, सौन्दर्य युक्त, मृदुभाषी, व्यवहारिक, दयालु, परोपकारी, जनसंपर्क, संचार, लेखन, पत्रकारिता, सेवा, भावनाप्रधान व्यवसाय में रुचिवान्, सरकारी तंत्र से लाभान्वित, अनेक मैत्री संबंध वाला, घुमक्कड़ होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक अनेक कलाओं का ज्ञाता, ओजस्वी भाषण करने वाला, उच्चस्तरीय व्यवसायिक सफलता वाला, विभिन्न संस्कृतियों से व्यापारिक मैत्री वाला, तकनीकी व सुरक्षा क्षेत्रों से आजीविका वाला होता हैं। जीवन के पूर्वार्द्ध में अनेक असफल प्रेम संबंध बनते हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, पारिवारिक विरासत वाला, कुलीन संभ्रांत परिवार से संबंधित, स्वाध्ययन से अनेक विषयों का ज्ञाता, राजनैतिक क्षेत्रों में रणनीतिकार, व्यवसायिक व आध्यात्मिक क्षेत्रों में परामर्शदाता होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल से परिपक्व, कला व निर्माण के प्रति संवेदनशील, परिजनों व कुटुंबियों का पोषक, अनेक लोगों का भाग्य भविष्य तय करने की क्षमता वाला, लेखा परीक्षण, अनुसंधानात्मक कार्य, दीर्घकालिक तकनीकी परियोजनाओं में उत्कृष्ट सफलता वाला,
राहु की दृष्टि हो तो जातक थोक व्यवसाय करने वाला, सूक्ष्म तकनीकी ज्ञान वाला, नवाचारी तकनीक व संचार सेवा से लाभान्वित, स्पष्ट वक्ता, पुरोहित आदि कर्म में रुचिवान्, तत्वमीमांसक होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक सूक्ष्म विश्लेषणात्मक बुद्धि वाला, छिन्द्रान्वेषी, विस्तारवादी, नवाचारी तकनीक से संबंधित कार्य व्यवसाय में रुचिवान्, स्नायु-तनाव व मानसिक तनाव से ग्रस्त होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक भारी-भरकम, स्वस्थ आभा, चौड़े कंधे, भरा हुआ चेहरा, आत्मविश्वासी, स्वार्थी, दूसरों पर नियंत्रण व दबदबा बनाने वाला, व्यसन-प्रिय, सुन्दर विपरीत लिंगियों पर आसक्त, अवैध संबंधों में लिप्त, दूसरों के धन व स्त्री पर अधिकार जमाने वाला, समाज में प्रभावशाली, पंच-पंचायत का मुखिया, तत्काल क्रियाशील, परोपकार कर्म करने वाला, व्यवहार में हिसाब-किताब नहीं करने वाला, धनार्जन में निपुण किन्तु संग्रह करने में लापरवाह, अल्प अहंकार वा उच्च स्वाभिमान से लैस, धर्म व दर्शन क्षेत्र यथा पुरोहित कर्म, धर्मगुरु, वेदशास्त्र अध्ययन-अध्यापन कर्म, कानून, सेना व प्रशासन में नेतृत्वकारी भूमिका में प्रतिष्ठित, प्राध्यापक, शोध, चिकित्सा, ज्योतिष, ग्राम प्रधान, पंचायती राज पदों, ग्रामीण विकास आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक थुलथुले शरीर वाला, गौर वा अल्प पीतवर्णी, गंभीर चाल वाला, उदार, शिक्षित, विभिन्न हस्त कलाओं का ज्ञाता, कलात्मक ज्ञान व सौन्दर्य विज्ञान की सूक्ष्म समझ रखने वाला, धैर्यवान, परम तेजस्वी, आतिथ्य सत्कार करने में आनंदित, समाज में प्रतिष्ठित, धन-धान्य से युक्त, बड़े परिवार वाला, विरासत का लाभी, जीवनसाथी के साथ असामंजस्य की समस्याओं वाला, अध्यापन, प्रशिक्षण, कला व सांस्कृतिक विकास, दर्शन, ऐतिहासिक शोध, भजन, शास्त्रीय संगीत, कलात्मक वा व्यवसायिक आध्यात्म, जादूगरी, हाथ की सफाई, चामत्कारिक प्रदर्शन, हर्बल उत्पाद, जैविक खेती, भूमि प्रबंधन, ट्रस्ट, धर्मार्थ संस्थानों से लाभान्वित होता है। विवाह में देरी वा वैवाहिक जीवन में वैमनस्य बना रहता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक सुशिक्षित, पठन-पाठन में रुचिवान्, शास्त्रार्थ कुशल, विलक्षण प्रतिभा का धनी, वाद-विवाद, तर्क-वितर्क में निपुण, दयालु किन्तु व्यवहारिक, यश व प्रतिष्ठा के लिए महात्वाकांक्षी, गहरी अभिव्यक्ति वाला, अनेक भाषाओं में दक्ष, श्रेष्ठ वक्ता, जटिल विषयों को सरलता से व्यक्त करने वाला, अनियंत्रित खर्चीला, उपदेशक किंतु स्वयं किसी भी नियम नीति के जाल से मुक्त, लेखन, संपादन, अनुवादन, शैक्षणिक व वित्तीय क्षेत्र, ज्योतिष वा गूढ़ विद्याओं, विधि, पत्रकारिता, शास्त्र व्याख्या, प्रवचन कार्य आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। ये एक से अधिक प्रेम संबंधों मे संलिप्त, अपने पदों पर आसीन अपने अनुयायियों का शोषक होता है। यकृत, वायुदोष, धातुदोष, तंत्रिका विकार आदि स्वास्थ्य समस्याएँ पीड़ित करती हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक गोल मुखाकृति, स्थूल शरीरी, गौरवर्णी, प्रसन्नचित्त, करुणामय, जनकल्याणकारी, कुशल मार्गदर्शक, दूरद्रष्टा, धर्मयुक्त आचरण वाला, अंतर्ज्ञान से युक्त किन्तु भावनाप्रधान, खाने-पीने का शौकीन, अनेक स्त्रियों द्वारा सहायता प्राप्त, पर्यटन आदि का शौकीन, शैक्षणिक व आध्यात्मिक व्यवसाय, ज्योतिष, गणित, रहस्यवाद, चिकित्सा, समाजसेवा, साहित्य, रत्न व्यवसाय, परामर्श, पर्यटन आदि क्षेत्रों से लाभान्वित होता है। हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु प्रेम विवाह वा पहले से जाने-पहचाने व्यक्ति से विवाह में सहायक है।
हस्त नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Jupiter located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक शिक्षित, उदारवादी, आलोचनात्मक लेखक वा टीकाकार, धन व कुटुंबियों से संपन्न, राजनैतिक वा प्रशासनिक नेतृत्व में प्रतिष्ठित, वरिष्ठों व विद्वानों से मैत्रीपूर्ण संबंधों वाला, सुपरविजन, ठेकेदारी, समाज के नीति-निर्माता जैसे पदों की भूमिका वाला होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक सद्व्यवहारी, उत्तम शील युक्त, विविध विषयों व कलाओं का ज्ञाता, पाक कला में विशेष रुचिवान्, पुरोहित कर्म वाला, शिक्षा, परामर्श, जनकल्याण, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में प्रतिष्ठित, अपने जनों में प्रसिद्ध होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक सिद्धांतवादी, जनजागृति फैलाने वाला, न्याय, सुरक्षा, धार्मिक सामाजिक आंदोलन में सक्रिय व साहसिक भूमिका वाला, वीर-रस से युक्त रचना व संभाषण करने वाला होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक व्यवहारिक, पर्यटन प्रेमी, माता-पिता का प्रिय, आनन्द उन्मुख, वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला, अल्प अहंकारी, स्वाद लोलुप, तकनीकी क्षेत्र, प्रशिक्षण, ज्योतिष, गूढ़ विद्याओं पर अनुसंधान आदि कार्यों में रुचिवान् होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक शिक्षित, उच्च पदासीन, दोहरे चरित्र वाला, पराई स्त्रियों पर धन अपव्यय करने वाला, मान-सम्मान की परवाह नहीं करने वाला, अनैतिक आचरण वाला, जीवनसाथी का व्यवसायिक सफलताओं के लिए उपयोग करने की मानसिकता वाला, भूमि-भवन व उत्तम वाहन सुख से युक्त होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत परिपक्व, समाजिक व्यवहार का सूक्ष्म अन्वेषक, व्यवहारकुशल, सबकों अपने वशीभूत करने वाला, जमीन से जुड़ा नेता, आध्यात्मिक उन्नति वाला होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक शास्त्रों वा प्राचीन ग्रंथों का टीकाकार, उच्च शिक्षित, प्रखर विद्वान, व्यवसायिक सफलता वाला, वैवाहिक संबंधों से दूरी वा जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, अध्यापन कार्य वा प्रशिक्षण संस्थानों में प्रतिष्ठित, विदेशी आय व विदेशी संपर्क से लाभान्वित, शंकालु स्वभावी, यकृत, वसा, चयापचय से संबंधित व्याधियों से पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra): हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक चौकोर चेहरा, गेहूंआ रंग का, क्रूर दृष्टि, मध्यम कद-काठी वाला, ईर्ष्यालु, मित्रों व कुटुंबियों से द्वेष करने वाला, मिष्ठान प्रेमी, अति कामुक, पर-पुरुष वा परस्त्रीगामी, भारी कलात्मक क्षेत्रों यथा मूर्तिकला, धातुकर्म, सर्जरी, रसायनशास्त्री, होटल व रेस्तरां व्यवसाय, बागवानी, रत्न व्यवसाय, वस्त्र उद्योग, आभूषण व्यवसाय, स्थापत्य व निर्माण, खेल प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, फ़ॉरेंसिक व जासूसी कार्य, देह व्यापार, आदि क्षेत्रों में संलिप्त होता है। प्रेम संबंधों में इनका शारीरिक शोषण होता रहता हैं। जीवन में अनेकों बार भावनात्मक व शारीरिक शोषण का शिकार होता हैं। स्त्री जातकों के धोखे से विवाह और विकृत संतान होने की संभावना होती है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक कोमल अंगों वाला, आकर्षक आभा से युक्त, दीप्तिमान त्वचा वाला, सुन्दर केशों वाला, भावुक चतुराई लिए मादक नेत्र, सुगठित आकर्षक अनुपात में स्पष्ट अंग-प्रत्यंगों वाला, असाधारण सौन्दर्य बोध से युक्त, मनमोहक, भावनात्मक रुप से परिपक्व अर्थात प्रेम में गहरा किन्तु विवेकशील, धन-धान्य से युक्त, अनेक मित्रों वाला, परिजनों से लाभी, अनेक स्त्रियों के प्रेम का पात्र, निष्ठावान प्रेमी वाला सौभाग्यशाली होता हैं। गायन, वादन, नृत्य-संगीत, फैशन, डिजाइनिंग, सौन्दर्य प्रसाधन उद्योग, सिनेमा व मनोरंजन व्यवसाय, सुगंधित पदार्थों के व्यवसाय, खाद्य कला, वित्तीय प्रबंधन, एडमिनिस्ट्रेशन, मार्केटिंग आदि क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला होता है। जीवन में एकाध बार प्रेम में धोखा अवश्य मिलता हैं।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक चंचल, विलासितापूर्ण जीवन जीने वाला, वाद-विवाद में निपुण, दार्शनिक विचारों वाला, प्रखर विद्वान, स्त्रियोचित गुणों से युक्त, समाज का पथ-प्रदर्शक, सबका प्रिय, परदेसवासी, स्पष्ट किन्तु मृदुभाषी, लालची, सुवक्ता, कलात्मक विश्लेषण युक्त वार्ता करने वाला, सामाजिक कुशलता वाला, मित्रों में प्रसिद्ध, कलात्मक निर्माण व व्यवसाय में रुचिवान्, मीडिया, विज्ञापन, फैशन पत्रकारिता, संगीत व मनोरंजन, भाषा विज्ञान, सौन्दर्य परामर्शदाता यथा स्टाइलिस्ट, इमेज़ कंसल्टेंट आदि क्षेत्रों में प्रसिद्धि प्राप्त करता है। साझेदारी के व्यवसाय में इन्हें सावधानी रखनी चाहिए, साझेदार से धोखाधड़ी की संभावना होती हैं। एक से अधिक प्रेम प्रसंग बनते है; स्थाई संबंध देर से बनता है। एक से अधिक विवाह की भी संभावना होती हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत मनमोहक सुन्दर, बड़ी आँखें, छोटी सुडौल नाक, भरे कोमल अधर, सुडौल उंगलियांँ, लम्बे हाथ-पैर, भारी जांघ, लहराती चाल वाला, कोमल विचारों वाला, ममतामय, प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति वाला, मादक पदार्थों का सेवन करने वाला, पाक-कला में निपुण, कामक्रीड़ा में प्रवीण, यात्रा व पर्यटन प्रेमी, मसाज थेरेपी, नर्सिंग, उपचार, संगीत व काव्य, मिडिया, विज्ञापन, रेस्तरां वा होम बेकरी, इंटीरियर, फ्लोरल डिजाइनिंग, बाल रोग विशेषज्ञ, मनोविज्ञान, मनोगत शिक्षण, महिला कल्याण, वृद्धाश्रम, NGO आदि क्षेत्रों में संलग्न, लोकप्रिय होता है। किडनी, पाचनतंत्र, कफ जनित व्याधियों से पीड़ा की संभावना होती हैं।
हस्त नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Venus located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कला प्रिय, कल्पनाशील, रोमांटिक, भोग प्रिय, अनेक कामुक संबंधों वाला, यात्रा, पर्यटन, सोशल मीडिया, हस्तशिल्प, संगीत-नृत्य, अभिनय आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं। साथी पर संदेह व गलतफहमियाँ वैवाहिक संबंधों में कटुता ला सकती हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक चंचल, आवेगी, अत्यंत कामुक, अनैतिक वृत्ति वाला, कौटुंबिक व्याभिचार को उद्यत, धन कमाने में निपुण, आर्किटेक्चर, इंटीरियर, भवन वा लग्जरी निर्माण, वाहन उद्योग आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, कोई-कोई जातक समलैंगिक वा पीडोफाइल होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक शिक्षित, कला प्रेमी, प्रकृति से गहरा जुड़ाव वाला, धार्मिक अनुष्ठानों व कर्मकांड में रुचिवान्, समस्त भौतिक सुखों से युक्त, विवाहेत्तर संबंधों वाला होता हैं। बहुधा ऐसी स्थिति में जातक अपने जीवनसाथी के भाई-बहनों के साथ अनैतिक संबंधों में लिप्त होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक आलस्य युक्त, दूसरों का श्रेय चुराने वाला, सामाजिक रुप से बलहीन, बलवानों द्वारा शोषण का पात्र, ऐसा जातक स्वार्थवश वा विवशता-वश वृद्ध पुरुष / वृद्धा स्त्री के साथ संसर्ग में लिप्त होता हैं। मूत्र वा जननांग संबंधी रोग होते हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत आकर्षक, बाल्यकाल में लैंगिक शोषण वाला, कलात्मक अभिरुचि वाला किन्तु अल्प सफलता वाला, अनेक व्यवसायिक गतिविधियों में प्रयोग करने वाला, असफल प्रेमी, अनिश्चित कार्यक्षेत्र से आजीविका वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक परंपरागत मान्यताओं का विरोधी, विलासिता हेतु छल-प्रपंच करने वाला, दिखावा पसंद, अनेक गुप्त अवैध संबंधों में लिप्त, विवाहेत्तर संबंधों में रुचिवान्, छलपूर्वक वैवाहिक संबंध बनाने वाला वा रति करने वाला, देह व्यापार में संलिप्त हो सकता है।
हस्त नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक कृशकाय, कठोर अंगो वाला, कुरुप, धंँसी हुई गंभीर नेत्र, घनी भौंहें, चौड़े कंधे, मजबूत कलाई, खुरदरे हाथ, चौकोर पंजा, उभरी हुई अस्थियों वाला, अति परिश्रमी, साहसिक कार्यों में निपुण, अनुशासनप्रिय, ठोस व तर्कसंगत सोच वाला, दृढ़निश्चयी, क्रूर, हठी, भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ, एकांतप्रिय, माता-पिता के सहयोग से वंचित, अल्प वय से रोजी-रोटी कमाने वाला, परस्त्री में आसक्त, शंकालु, बेईमान होता हैं। फोर्जिंग, वेल्डिंग, उत्खनन, सिविल इंजीनियरिंग, ठेकेदारी, वास्तु व स्थापत्य कला, पेट्रोकेमिकल्स, रेलवे, पनडुब्बी, ट्रांसपोर्ट, कृषि, न्यायिक व प्रशासनिक विभाग, हड्डियों, दाँत वा नस रोग विशेषज्ञ, ऑडिटर, कर सलाहकार, लेखा-जोखा आदि क्षेत्रों में निपुण होता है। वाहन वा मशीनों से दुर्घटना, नसों व जोड़ों के दर्द से पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक परिपक्व विद्वान, सुन्दर, श्यामवर्णी, लम्बा कद-काठी वाला, बलिष्ठ, अपने वचनों का पक्का, परदेसवासी, हस्तशिल्प का जानकार, व्यवहारिक सौन्दर्य बोध वाला, परिवार के प्रति समर्पित, कम बोलने वाला, परिवर्तन से भयभीत, जिद्दी, विलासी, जागरूक, सफल प्रेमी किन्तु गंभीर, हस्तशिल्प व कलात्मक निर्माण, वास्तु, वाद्ययंत्र वादक, बागवानी, भूमि-भवन से संबंधित व्यवसाय, बैंकिंग, बीमा, दीर्घकालिक निवेश, रत्न व आभूषण व्यवसाय, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों से धनागमन करने वाला होता है। बहुधा दूसरों के आधीन कार्य करने वाला होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक सुवक्ता, विश्लेषणात्मक बुद्धि वाला, लेखन व प्रकाशन में रुचिवान्, प्रबल स्मरण शक्ति वाला, दीर्घकालिक योजनाकार, निष्पक्ष निर्णायक, व्यंग्यात्मक शैली में बोलने वाला, संबंधों में उदासीन, अंतर्मुखी, अत्यधिक आलोचनात्मक, शोधकार्य, तकनीकी लेखन, इतिहासकार, कार्टूनिस्ट, पत्रकारिता, न्यायिक विभाग, अध्यापन, दर्शन, विश्लेषक, IT व डेटा, सिस्टम एनालिस्ट, डाटा साइंटिस्ट, CA, ऑडिटर, टैक्स विशेषज्ञ, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र आदि क्षेत्रों का विशेषज्ञ होता हैं। चिंता, अनिद्रा व बहुत ज़्यादा सोचने की आदत से कभी-कभी अशांति का अनुभव करते हैं। तंत्रिका व स्नायु तंत्र से संबंधित परेशानियांँ हो सकती हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक शुष्क, उलझन युक्त, तनी हुई भौहें, क्रूर, निर्दयी, धूर्त, बेईमानी से धन कमाने वाला, परिजनों से दुराग्रही, अवैधानिक कृत्यों में रुचिवान्, व्यसन-प्रिय, फेफड़ा, श्वसन तंत्र वा स्नायु तंत्र से संबंधित व्याधियों वाला, अवसाद से ग्रस्त, नर्सिंग, सफ़ाई कर्मचारी, पशु चिकित्सा, कृषि व जल संबंधी कार्य, राजमिस्त्री, कारीगरी, भवन निर्माण, कानून संबंधी कार्य, निम्न से मध्यम स्तर की सरकारी नौकरी, किराना, दैनिक उपयोग की वस्तुएंँ, लघु व कुटीर उद्योग आदि क्षेत्रों में सफलता वाला, प्रेम व वैवाहिक संबंधों में कर्तव्यों का निर्वहन करने वाला किन्तु कलहप्रिय, वैवाहिक जीवन में भावनात्मक शीतलता वाला होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Saturn located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अनुशासनहीन, मनमौजी, दूसरों का अपमान करने वाला, जिद्दी, परिजनों से द्वेष युक्त व्यवहारी, घर छोड़कर पलायन करने की मानसिकता वाला, असमाजिक तत्वों वा नीच जनों की संगति वाला, मानसिक उद्वेग से प्रभावित होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कोमल वृत्ति, जनकल्याणकारी, परिजनों व कुटुंबियों का सहायक, प्रकृति प्रेमी, जीव-जंतु – पशु-पक्षियों की सेवा करने वाला, शोषितों-वंचितों के अधिकारों का रक्षक, नर्सिंग, सामाजिक कार्य, सरकारी सहायता से जनकल्याण करने वाला होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक कठोर कर्म करने वाला, शल्यचिकित्सा वा पारंपरिक विधि से हड्डियों के जोड़-तोड़ का विशेषज्ञ, सूक्ष्म इंजीनियरिंग व श्रम प्रधान कार्यों में निपुण, लड़ाई-झगड़ा करने वाला, दुर्घटनाओं से ग्रस्त, वैवाहिक जीवन में विफलता वाला, दमनकारी विचारों वाला होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक तर्क-वितर्क करने वाला, परिपक्व, प्राचीन विद्याओं में रुचिवान्, अर्थशास्त्र, लेखा-परीक्षण, शेयर बाजार, व्यवसाय प्रबंधन, मोटिवेशनल स्पीकर, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, अनुष्ठानिक कर्म, आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। ये व्यवसायिक संबंधों को ज्यादा वरीयता देते हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक परिश्रमी, ईमानदार, धर्म-कर्म में अनुरक्त, रुढ़िवादी, ऐतिहासिक गौरव में लीन, पारंपरिक शिक्षा, न्याय, दर्शन, गणित, ज्योतिष आदि विषयों में रुचिवान्, कल-कारखानों व औद्योगिक क्षेत्रों के विकास कार्य, नगरीकरण आदि विकास संबंधी सरकारी क्षेत्र से संबंधित होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अतुलित धनवान, कुशल व्यवसायी, बहुमूल्य धातुओं व रत्नादि से संबंधित व्यवसाय वाला, डिजाइनर, मादक पदार्थों से संबंधित व्यवसाय, पुष्प बागवानी, सुगंधित द्रव्य निर्माण, तंत्र सामग्री आदि से संबंधित व्यवसाय में संलग्न, व्यसन-प्रिय, नीच स्त्रियों की संगति वाला वा वैश्यागामी होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अनुशासित सेवा भाव वाला, एकाकी, आलोचना सुनने वाला, श्रम-प्रधान क्षेत्रों से आजीविका वाला, निर्दयी, कठोर अपराधिक मानसिकता वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक मलीन वेशभूषा वाला, दुःखी, आसाध्य रोगों से पीड़ित, परिजनों के सुख से वंचित, जीवन के उत्तरार्ध में गृहत्यागी होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक तीव्र आवेगी, असाधारण साहसी, लड़ाई-झगड़ा करने वाला, अति महात्वाकांक्षी, नई तकनीकी शिक्षा में रुचिवान्, जोखिम लेने वाला, अपरंपरागत विचारों वाला, शंकालु, नशीले पदार्थों का शौकीन, दूसरों की संपत्ति व स्त्री पर कुदृष्टि रखने वाला, जुआ सट्टा आदि से धन का लाभी, अंतर्जातीय वा असामान्य प्रेम प्रसंगों में संलिप्त, चोट, दुर्घटना व अंग-भंग की संभावना होती है। तकनीकी क्षेत्रों, खुफिया एजेंसी, जासूसी, शेयर बाजार, राजनीति, अपरंपरागत चिकित्सा यथा तंत्र, सम्मोहन, वैकल्पिक उपचार, स्टिंग ऑपरेशन आदि कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शनकारी, लोकप्रिय होता हैं।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक अत्यंत आकर्षक, व्यवहारिक बुद्धिमत्ता वाला, अनेक जनों का प्रिय, कलात्मक व रचनात्मक अभिरुचि वाला, समस्त भौतिक सुखों को प्राप्त करने में सक्षम, सामाजिक कुशलता वाला, अनेक चेहरे वाला, संबंधों में भ्रम से अपना हित साधने में निपुण, खर्चीला, सरकार व सरकारी तंत्र से लाभान्वित, अनेक स्त्रियों संग संसर्ग करने वाला, विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त, घूसखोरी वा अवैधानिक कार्यों से धनवान्, मनोरंजन क्षेत्र, फैशन व सौन्दर्य, आयात-निर्यात, विलासिता सामग्री, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया, संपत्ति व विलासिता संबंधित व्यवसाय, निवेश, राजनीति आदि क्षेत्रों में प्रसिद्ध होता है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक गेहूंआ वर्ण वाला, बड़ी चमकीली आँखें, पतले बेलनाकार हाथ, लंबी उंगलियांँ, फुर्तीला, वाकपटु, अति बुद्धिमान, तकनीकी शिक्षा व आधुनिक माध्यमों में निपुण, हर वर्ग में संपर्क, हर जगह पहुंँच वाला, मिथ्या भाषण करने वाला, षड्यंत्रकारी, दोहरे व्यक्तित्व वाला होता हैं। ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, गूढ़ विद्या, न्यायिक व वित्तीय विभाग, मीडिया, संचार, पत्रकारिता, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, साइबर, विज्ञापन, राजनीति, रणनीति, प्रचार विशेषज्ञ आदि क्षेत्रों में विशेष सफल व सम्मानित होता है। ये प्रेम में नहीं व्यवसायिक लाभ में विश्वास करते हैं। भावनात्मक लगाव इन्हें मुर्खतापूर्ण बातें लगती हैं।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक गंभीर मुख मुद्रा वाला, उदास, श्यामवर्णी, आँखों के नीचे गहरे घेरे वाला, भारी हथेली व नरम उंगलियों वाला, भ्रमणशील, बेचैन मन वाला किन्तु प्रबल छठी इंद्री, स्वार्थ परक सेवाओं का प्रदाता, व्यवहारिक, अज्ञात भय व शंका से ग्रस्त, परिजनों व कुटुंबियों से मधुर संबंध कायम करने में संघर्षशील, बुरे स्वप्न व अनिद्रा से पीड़ित, झूठा, मिथ्या अहंकार से ग्रस्त, अस्पताल, अनाथालय, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र, आध्यात्म व तंत्र, जलीय व्यवसाय, मनोविज्ञान, खुफिया सेवा, अवैधानिक कृत्यों आदि से संबंधित क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। विवाह में देरी, असफल प्रेम संबंध व वैवाहिक जीवन में मानसिक प्रताड़ना का शिकार होने की संभावना होती हैं।
हस्त नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Rahu located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अहंकारी, हठी, प्रदर्शन-प्रिय, भयभीत, सरकार व प्रशासनिक व्यवस्था से असंतुष्ट, बागी, उत्तम मध्यस्थ, कानून विशेषज्ञ, कुशल रणनीतिकार होता हैं। नेत्र, हृदय, अस्थि संबंधित विकार होते है। पारिवारिक मतभेद के कारण वैवाहिक जीवन असामान्य होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक चपल, भ्रम युक्त, शत्रुओं से पीड़ित, विभिन्न मानसिक प्रताड़नाओं से ग्रसित, रोजी-रोटी के लिए भटकने वाला, विवादों व कर्ज से परेशान, जीवन के उत्तरार्ध में भूमि-भवन से संपन्न होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक दुस्साहसी, रक्तपात प्रेमी, अधीर, विवादास्पद कार्यों में रुचिवान्, शल्यक्रिया, यंत्र वा हथियार संबंधी कौशल में दक्ष, सहोदरों वा कुटुंबियों से विवाद वाला, दुर्घटनाओं से ग्रस्त, मुकदमेबाजी से पीड़ित होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक मतलबी, छल-कपट करने वाला, विश्लेषणात्मक सोच वाला, वाक्-चातुर्य से युक्त, ससुराल से लाभान्वित, वाणिज्य, लेखन, तकनीकी क्षेत्र, हस्तशिल्प, नवाचारी क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलताओं वाला होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक विदेशी सभ्यताओं व संस्कृति में रुचिवान्, उच्च शिक्षित, कुरीतियों का प्रबल विरोधी, अध्यापन, परामर्श, वित्तीय लेन-देन, गैर भाषाई साहित्यों का अनुवाद, कानून, असाध्य रोगों पर कार्य करने वाला, अंतर्जातीय वा अपरंपरागत वैवाहिक जीवन वाला हो सकता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर, अनेकर रमणियों में आसक्त, विलासिता प्रिय, कलात्मक अभिरुचि वाला, घूमने-फिरने व मादक पदार्थों का शौकीन, अनैतिक संबंधों में लिप्त, अय्याश होता है। रत्न, आभूषण, फ़ैशन, जुआ, शेयर, क्रिप्टो, वाहन, उपहार सामग्री, मद्य विक्रय, भवन निर्माण सामग्री आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल से शोषित, मानसिक अशांति से पीड़ित, परिजनों के सहयोग से वंचित, सहायक कर्मचारी, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में कार्यशील होता है। निकट संबंधों में अनियमितता, धूर्तता व उत्पीड़न का शिकार होता है। वात संबंधी रोग, नस, जोड़ व त्वचा संबंधी दीर्घकालिक विकारों से पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in First Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक कठोर मुखमुद्रा वाला, साँवला, भड़कीला, चुस्त शारीरिक गठन वाला, आवेगी, असाधारण अंतर्ज्ञान से युक्त, निर्भीक, गहरी आध्यात्मिक समझ वाला, सूक्ष्म तकनीकी ज्ञान व कला में निपुण, स्वतंत्र विचार रखने वाला, सामाजिक दायरे से भिन्न, शरीर पर चोट व घाव के निशान वाला, माता-पिता से मतभेद वाला, पशुपालन, पारंपरिक व्यवसाय, वैकल्पिक चिकित्सा यथा आयुर्वेद, एक्यूपंक्चर, रेकी, सैन्य वा पुलिस विभाग, खजांची, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूक्ष्म यंत्र, रोबोटिक्स, बिजली विभाग, अग्निशमन, कल-कारखानों में मशीन ऑपरेटर आदि क्षेत्रों से आजीविका वाला होता है। भावनात्मक संबंधों में असफल, चोट-चपेट, अग्नि दुर्घटना से पीड़ित होता है।
हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Second Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक उदासीन, भावशून्य नेत्रों वाला, मध्यम कद-काठी वाला, आदर्श प्रेमी, सूक्ष्म कलात्मक बोध वाला, वास्तविक राग-वैराग्य के सीमा पर दोलन करने वाला, आर्थिक निर्लिप्तता से युक्त, प्रकृति प्रेमी, निर्णय लेने में दूसरों पर निर्भर, स्वास्थ्य की उपेक्षा करने वाला, मूर्तिकारी, नक्काशी, सूक्ष्म कारीगरी, प्राकृतिक चिकित्सक, योग प्रशिक्षक, जैविक खेती, प्रकृति संरक्षण, संन्यास वृत्ति, आश्रम संचालन आदि कार्यों में रुचिवान् होता है। प्रेम संबंधों में बार-बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। विवाह में देरी संभव है।
हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Third Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक लम्बा छरहरा, बलिष्ठ शारीरिक सौष्ठव वाला, फुर्तीला, उच्च शिक्षित, कुशल प्रभावशाली लेखक, ज्योतिष, तंत्र, वेद, दर्शन आदि गूढ़ विषयों में सहज रुचिवान्, प्रबल स्मरण शक्ति वाला, निःस्पृह वक्ता, तर्कशील अंतर्ज्ञानी, छल-प्रपंच को आसानी से समझने वाला अर्थात मायाजाल से मुक्त, कम मित्रों वाला, ज्योतिषाचार्य, हस्तरेखाविद्, प्रवचनकार, लेखक, आध्यात्मिक गुरु, गहन अनुसांधानिक कार्य, सूक्ष्म विज्ञान, प्राचीन भाषाएँ, पांडुलिपि शोध, उच्च शैक्षणिक क्षेत्रों, राजकीय सेवा आदि क्षेत्रों में उच्च पदासीन होता है।
हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Fourth Charan /Padas of Hasta Nakshatra) : हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक निःस्वार्थ सेवाभावी, सहनशील, परमज्ञानी, धैर्यवान, धीर शैली में गंभीर बातें करने वाला, सामाजिक, सत्यनिष्ठ, पशु-पक्षी व प्रकृति से गहरा लगाव रखने वाला, साधु, संन्यासी, तपस्वी, अनाथालय, वृद्धाश्रम, मानसिक रोग सेवा, वन सेवा, जल संरक्षण, पशु सेवा, प्रकृति संरक्षण, तंत्र-मंत्र, प्राकृतिक उपचार, उपेक्षित जनों की सेवा, एकाकी जीवन में भूमि सेवा में रुचिवान् होता है। जातक व्यक्तिगत जीवन में परिजनों के सुख से हीन, प्रेम में दुत्कारा हुआ होता हैं।
हस्त नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Ketu located in Hasta Nakshatra
हस्त नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक तेजस्वी, अपने हस्त कौशल पर आत्मविश्वासी, अपने कार्यक्षेत्र में लोगों के प्रेरणा का पात्र, अहं प्रधान विरक्त, स्वाभिमानी, स्वच्छंद विचरण करने वाला, प्रशासन, चिकित्सा, खेल, सरकारी सेवा, हाथ की सफाई में नेतृत्वकर्ता, देरी से विवाह वाला, प्रेम संबंधों में स्वाभिमान प्रधान होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक लोभ व मोह से रहित, जीवदया करने वाला, परोपकारी, कर्मकांड से संबंधित आध्यात्मिक मार्ग वाला, संवेदनशील सेवाभावी, अस्थिर प्रेम वा वैवाहिक संबंधों वाला, कला, परामर्श, गृह-उद्योग, खाद्य वा पाक कला विशेषज्ञ, जन-कल्याण, पशु कल्याण, प्रकृति संरक्षण से संबंधित क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक उग्र, साहसी, जोखिम लेने वाला, फुर्तीला, आवेशपूर्ण अभिव्यक्ति वाला, एकांतप्रिय, अस्थिर मैत्री, क्रूरतापूर्ण रति करने वाला, सर्जन, धातु, लकड़ी, यांत्रिक कारीगर, सेना-पुलिस, टेक्निकल ट्रेड्स आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक तीक्ष्ण बुद्धि वाला, कम बोलने वाला, कटुभाषी, षड्यंत्रकारी, चंचल, अस्थिर मति वाला, अपने धुन का पक्का, शास्त्र व प्राचीन ग्रंथों पर टीका लिखने वा विचार-विमर्श करने वाला, प्रियतमा पर संदेह करने वाला, लेखन, गणना, थोक व्यवसाय, तकनीकी कार्य, मंत्रोच्चार, बहुक्षेत्रीय कार्यों में संलग्न होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, उच्च आदर्शों वाला, धर्म-कर्म में अनुरक्त, उदार, दान-पुण्य आदि कर्म करने वाला, धर्मपरायण, शिक्षा-प्रिय, उत्तम जीवनसाथी वाला, यज्ञादि कर्मों में कुशल, शिक्षण, परामर्श, चिकित्सा, आध्यात्मिक शिल्प, गूढ़ विद्या आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक उत्तम सौन्दर्य बोध वाला, आध्यात्मिक वेषभूषा वाला, रीति-रिवाजों के मामले में कट्टर, कलाप्रेमी, बुनकरी, सुनारी आदि सूक्ष्म कलाओं में पारंगत, अपनी दिनचर्या में मशगूल, प्राचीन जीवनशैली, आभूषण, गंभीर चित्रकारी, हस्तशिल्प, सौन्दर्य उद्योग, यात्रा व पर्यटन आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। सुफियाना इश्क करने वाले होने की वज़ह से आदर्श जीवनसाथी ढूंढने में वैवाहिक जीवन देर से शुरू करते हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक क्रूर, मलीन वेशभूषा वाला, उदासीन, विलंबकारी, अकर्मण्य, नीरस, पारंपरिक शिल्प, निर्माण, दीर्घकालिक तकनीकी कार्य, सेवा-श्रम, साधारण तंत्र-मंत्र, चौकीदारी, पुरोहित कर्म आदि जैसे अस्थायी कार्यों से आजीविका वाला होता है।
उपसंहार || Important Considerations
किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।
यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।
सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता।
राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।
जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।
हस्त नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personalities born in Hasta Nakshatra
डा• मनमोहन सिंह (प्रखर अर्थशास्त्री व भारत के 13वें प्रधानमंत्री) – का सूर्य हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
लियोनार्डो डिकैप्रियो (मशहूर अमरीकी अभिनेता व फिल्म निर्माता) – का चन्द्रमा हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।
आर्थर मिलर (प्रसिद्ध अमेरिकी नाटककार व निबंधकार) – का लग्न हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण में था।
ऋचा घोष (मशहूर भारतीय महिला क्रिकेटर) – का सूर्य हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
अजय देवगन (मशहूर हिन्दी सिनेमा अभिनेता) – का चन्द्र हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का हस्त में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]
~ Krishna Pandit Ojha..
WhatsApp:9135754051
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नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या
1• अश्विनी
2• भरणी
3• कृतिका
4• रोहिणी
5• मृगशिरा
6• आर्द्रा
7• पुनर्वसु
8• पुष्य
9• आश्लेषा
10• मघा
11• पूर्वा फाल्गुनी
12• उत्तरा फाल्गुनी
13• हस्त
14• चित्रा
15• स्वाति
16• विशाखा
17• अनुराधा
18• ज्येष्ठा
19• मूल
20• पूर्वाषाढ़ा
21• उत्तराषाढ़ा
22• श्रवण
23• धनिष्ठा
24• शतभिषा
25• पूर्वा भाद्रपद
26• उत्तरा भाद्रपद
27• रेवती