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मृगशिरा नक्षत्र : संपूर्ण गुण-दोष व इसमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल रहस्य || Mrigashira Nakshatra in Hindi Introduction, Charan & Result of various Planets situated in it

Mrigashira Nakshatra in Hindi|| मृगशिरा नक्षत्र : संपूर्ण गुण-दोष व इसमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल रहस्य

मृगशिरा नक्षत्र परिचय || Introduction of Mrigashira Nakshatra in Hindi

Mrigashira Nakshatra in Hindi|| वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘मृगशिरा नक्षत्र’ क्रम से 5वां नक्षत्र हैं। भचक्र में 53°अंश 20′कला से 66°अंश 40′कला तक का विस्तार क्षेत्र ‘मृगशिरा नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘लैम्ब्डा और फाई ओरियोनिस {λ (Meissa),φ Orionis}’, अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-हक़अह (Al-Haq’ah या Al Hak’ah) — जिसका अर्थ “सफ़ेद धब्बा” (the white spot) या “ताज/मुकुट” (the crown/hair whorl) होता है। चाइनीज सियु में इसे ‘Zī xiù’ (ज़ी सियु) कहते हैं, जिसका अर्थ होता हैं— ‘कछुए की चोंच (Turtle Beak)’। प्राचीन चाइनीज सियु प्रणाली में त्से (Tsee) भी कहा गया हैं; जो पश्चिमी श्वेत बाघ (White Tiger of the west) का 20वां सियु हैं।

मृगशिरा शब्द का शाब्दिक अर्थ हुआ, ‘मृग / हिरण का सिर’। यह नाम नक्षत्र के आकृति पर आधारित है, जो Orion तारामंडल के शीर्ष के तीन मुख्य तारों ( λ, φ1, φ2 Orionis) से हिरण के सिर जैसा दिखने के कारण रखा गया प्रतीत होता है। जैसे हिरण जंगल में सिर उठाकर चारों ओर देखता, खोजता, भटकता रहता हैं ठीक वैसे हीं मृगशिरा नक्षत्र भी जिज्ञासा, सतर्कता, खोज और भटकने वाली प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता हैं। इसका एक नाम मार्गशीर्ष भी हैं। कुछ ग्रंथों में इसे “धनुष” (arched bow) के रूप में भी देखा जाता है, जो शिकार और लक्ष्य की खोज का प्रतीक है।

अतः वृषभ राशि अंतर्गत 23°अंश 20′ कला से लेकर मिथुन राशि 06°अंश 40′कला तक का विस्तार क्षेत्र मृगशिरा नक्षत्र हैं। इसका नक्षत्र स्वामी – मंगल, नक्षत्र देवता – सोम / चन्द्रमा, जाति – कृषक/शिल्पी, योनि – सर्प, योनिवैर – नकुल (नेवला), देवगण, अदि नाड़ी, तमोगुणी, शुभ, सात्विक, नपुंसक नक्षत्र हैं। इसको दक्षिण दिशा का स्वामित्व प्राप्त हैं। यह मृदु (मैत्र) संज्ञक, तिर्यकमुखी, मंदलोचन / मंदाक्ष नक्षत्र हैं। 

मृगशिरा नक्षत्र— खोज, अविष्कार, जिज्ञासा, कोमलता, सौन्दर्य, संवेदनशीलता, पर्यटन, घुमन्तू जीवनशैली, चंचल बुद्धिमत्ता, संपर्क साधने की कला, शंकालु स्वभाव, कलात्मकता, कोमल स्वभाव, भावुकता, संगीत, साहित्य, अभिनय, संग्रह करने की आदत, ख़रीददारी, मन की अस्थिरता, नए-नए अनुभवों की चाहत, मृगतृष्णा, मुक्ति की तलाश, ज्ञानार्जन, करुणामय, विनम्र किन्तु साहसी, मिलावट, भूमि, अचल संपत्ति (Real Estate), निर्माण कार्य, सुगंध, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, कीमती परिधान, कंदमूल फल, फूल, सोमरस (स्वादिष्ट पेय), हिरण आदि चंचल जीव, कामुकता, असंतुष्टि, सतर्कता, ऊर्जा, क्रियाशीलता, तेजी से सीखने की क्षमता, हास्यवृत्ति, बहुमुखी प्रतिभा, आशावाद, आँखें, भौंहें, नाक, कान, ठोड़ी (chin), लार, स्वरतंत्र, तालु, टाँसिल (Tonsils), ग्रीवा की नसें, गले की आवाज़, कंधे, बाजू, कंधों के पास की अस्थियांँ, ऊपरी पसलियाँ, व इन अंगों से संबंधित व्याधियाँ, इनके अतिरिक्त पेट की समस्याएं, रक्त संबंधी व धातु से संबंधित समस्याएं, सायटिका, मूत्र संबंधी संक्रमण आदि का द्योतक हैं।

यात्रा, अनुसंधान, ज्ञानार्जन संबंधी प्रयास, प्रेम प्रस्ताव, सैर-सपाटा, अध्ययन, पुस्तक लेखन, नया रचनात्मक प्रोडक्ट्स शुरू करना, स्वास्थ्य से संबंधित कार्य, चिकित्सा, सर्जरी, प्राकृतिक उपचार, नवजीवन, सामाजिक कार्यक्रम, मित्रों से भेंट, नई मैत्री संबंध का शुभारंभ, विवाह, घर बदलना, नई जगह बसना, नया नाम रखना, बागवानी, कृषि कार्य, बीज बोना, आध्यात्मिक वा धार्मिक अनुष्ठान कार्य, कामक्रीड़ा आदि कार्यों के आरंभ के लिए मृगशिरा नक्षत्र अनुकूल प्रभाव देने वाला हैं। 

बहुत भारी, स्थाई / स्थिरता वाले कार्य, बड़े निर्माण कार्य, उग्र कार्य, लड़ाई-झगड़े, विवाद, मुकदमेबाजी, वा अधिक जोखिम भरे कार्यों के लिए इस नक्षत्र का त्याग करना चाहिए। 

यह नक्षत्र दो राशियों के संधि क्षेत्र में आने से इसके प्रथम 2 चरण शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में, और अंतिम 2 चरण बुध की स्वामित्व वाली मिथुन राशि में आते हैं। अतः इसमें सौन्दर्य, आकर्षण, उच्च बुद्धिमत्ता वाले कार्य, अनुसंधानात्मक कार्य, सतर्कता से करना शुभप्रद परिणाम देने वाला हैं।

Mrigashira Nakshatra in Hindi

Table of Contents

ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Mrigashira Nakshatra Symbolic Description in Hindi

मृगशिरा नक्षत्र के उत्पत्ति के संबंध में पौराणिक (ऐतरेय ब्राह्मण/ स्कंद पुराण/शिव पुराण) कथानक हैं कि— सृष्टि के आरंभ में प्रजापति ब्रह्मा अपनी सृष्टि-शक्ति सरस्वती पर मोहित हो गए। ब्रह्मा का अनुचित आकर्षण (काम-मोह) देखकर सरस्वती भयभीत हो गईं और मादा हिरण (मृगी) का रूप धारण कर आकाश में भागने लगीं। ब्रह्मा भी हिरण (मृग) का रूप लेकर उनका पीछा करने लगे। यह पीछा सृष्टि के संतुलन को भंग करने वाला था।

देवताओं ने इस अनाचार को रोकने के लिए भगवान शिव (रुद्र रूप) को पुकारा। शिव क्रोधित होकर प्रकट हुए और अपने त्रिशूल या बाण से ब्रह्मा के पाँचवें सिर या हिरणरुपी सिर को काट दिया। कटा हुआ हिरण का सिर आकाश में उड़कर मृगशिरा नक्षत्र के रूप में स्थापित हो गया। इसीलिए नक्षत्र का नाम “मृगशिरा” (हिरण का सिर) पड़ा।

इस कथा का यौगिक अर्थ— निषिद्ध काम-वासना के नियंत्रण, सृष्टि-संरक्षण और दिव्य न्याय का प्रतीक है। ब्रह्मा का मोह सृष्टि की रचना-शक्ति को दर्शाता है, जबकि शिव का हस्तक्षेप संतुलन (धर्म) की रक्षा करता है। हिरण की चंचलता नक्षत्र की जिज्ञासु और भटकने वाली प्रकृति को इंगित करती है। ओरियन (Orion) तारामंडल के तारे इस कथा के दृश्य रूप माने जाते हैं — हिरण का सिर (मृगशिरा), तीर (ओरियन की बेल्ट) का प्रतीक हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम (चन्द्रमा) सोमरस धारी अर्थात दिव्य पेय (अमृत) के स्वामी हैं। देवी भागवत पुराण, पद्म पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों के एक अन्य कथानक के अनुसार— चन्द्रमा (सोम) ने बृहस्पति (गुरु) की पत्नी तारा पर मोह किया, उनका अपहरण कर लिया। इससे तारकामय युद्ध हुआ, अंत में ब्रह्मा या शिव के हस्तक्षेप से तारा वापस लौटीं। तारा से बुध का जन्म हुआ और यहीं से चन्द्रवंश की नीव पड़ी। गुरु-पत्नी से सम्भोग के कारण चन्द्रमा पर लांछन लगा; जो आज भी मृग जैसा (Moon Craters) दिखता हैं। मृगशिरा के नक्षत्र देवता ‘सोम / चन्द्रमा’ का होना, इससे भी जोड़ा जाता हैं। यह कथा भावुकता, अनियंत्रित इच्छा और ज्ञान के जन्म का प्रतीक है, जो मृगशिरा की भावुक-खोजी प्रवृत्ति से मेल खाती है।

एक अन्य कथानक के अनुसार चन्द्रमा की पत्नी व दक्ष प्रजापति की पुत्री ‘मृगशिरा’ ने अत्यधिक यौन उत्तेजना व चन्द्रमा के रोहिणी से अधिक प्रियतावश, ज्वलनशीलता के कारण, निकट संबंधियों से यौन-संबंध बना लिए थे। चन्द्रमा पर मृगरुपी लांछन इस बात का भी प्रतीक हैं।

अतः इन कथानकों से मृगशिरा के खोजी प्रकृति, प्रेम प्रस्ताव रखने अथवा बलात् प्रेम संबंधों को येन-केन प्रकारेण अपने पाले में करने, सुन्दरता के प्रति उत्कट इच्छा और आकर्षण, जीवन में अमृत की प्राप्ति अर्थात अलौकिक अद्वितीय सुख की खोज, मन का भटकाव, निकट संबंधों में यौनाचार वा व्याभिचार जैसे गुणों की प्रबलता के संकेत मिलते हैं।

मृगशिरा नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Mrigashira Nakshatra in Hindi

श्रीमन्नरामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि— मृगशिरा नक्षत्र तीन ताराओं के योग से सरल स्वरूप वाला, चन्द्रमा देवतावाला, कात्यायनी गोत्रवाला है। इसमें गृहस्थी, राजाभिषेक, शयन, आसन, काजल, गोदान, पृष्टता, वाहन (सवारी), धर्मादि, दान, विद्यारम्म सम्बन्धी कार्य करना चाहिये। इसमें प्रायः कर्मठ, दाता और सरल पुरुष का जन्म होता हैं। मृगशिरा नक्षत्र के आश्रित सुगन्धियुक्त द्रव्य, वस्त्र, जलोत्पन्न, फूल, फल, रत्न, वनवासी, पक्षी, हिरन, सोमरस पीनेवाला, गवैया, विषयी और पत्रवाहक ये पदार्थ हैं।

वराह मिहिर का कथन है कि— मृगशिरा जातक चंचल, चतुर, भयातुर, कुटनीतिज्ञ, उद्यमी, धनवान्, भोग-विलास में लिप्त होता हैं। सुगन्धित पदार्थ, वस्त्र, जलज द्रव्य, पुष्प, फल, रस आदि, वनवासी, पक्षी, मृगादि, सोमरस का पान करने वाले, विद्वान, प्रेम-प्रसंग में लिप्त रहने वाले, कामी, संचार करने वाले— ये सब मृगशिरा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।

अतः मृगशिरा के स्वामित्व मंगल के पास जाने, नक्षत्र देवता पुरुष सोम / चंद्र के होने, व राशि स्वामित्व शुक्र व बुध के पास जाने से, मृगशिरा जातक पर मंगल, चन्द्रमा, शुक्र और बुध का संयुक्त प्रभाव नज़र आता हैं। अतः खुबसूरत आकर्षक चेहरा खोचने का विचार, प्रेम प्रस्ताव, शादी का प्रस्ताव, बलात् प्रेम अपने पाले मे करने का विचार, इत्र (perfumes), फूल, फल, अगर, चंदन, वस्त्र उद्योग, फैशन संबंधी वस्तुएं, जलजनित वस्तुएं, कमल, जलाशय संबंधी, यथा कुआँ, बावड़ी, तालाब, नदी के किनारे आदि, जड़ी-बूटियाँ (healing herbs), खैर वृक्ष, सोम रस, नशा/मदिरा (brewery), नक्शा (map), समाचार पत्र, धनुष (arched bow), संगीत वाद्य, पशु/पक्षी संबंधी वस्तुएं, बीज, अनुसंधान और विज्ञान, रिसर्च, फार्मेसी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा एनालिसिस, कला और मीडिया, लेखन, पत्रकारिता, कविता, गायन, चित्रकला, अभिनय, फैशन, टेक्सटाइल, एडवरटाइजिंग, ब्रॉडकास्ट, पर्यटन, सेल्स, मार्केटिंग, ट्रेडिंग, बिजनेस (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स), शिक्षण, काउंसलिंग, ज्योतिष, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, सर्जरी, कृषि, वानिकी, लैंड डेवलपमेंट, सर्वे, हॉर्टिकल्चर, पशुपालन, वेटरिनरी, पेट्स, दर्शन, भौतिकी/खगोल, छोटी दुकानें, नर्सरी/प्ले स्कूल, ब्रुअरी/परफ्यूमरी, जेमोलॉजी, प्रशासन, सेना/पुलिस, वन, उद्यान, चारागाह, हिरण पार्क, खुले मैदान, बगीचे, कला/संगीत स्टूडियो, छोटी दुकानें, रिसर्च लैब, यात्रा स्थल, नक्शा/मानचित्र वाले क्षेत्र, नर्सरी, प्ले स्कूल, मंदिर, आँख, नाक, गला, कान, भौंहें, थायरॉइड, मासिक धर्म समस्या (महिलाओं में), प्रजनन अंग, पीनियल ग्लैंड, चिंता/अनिद्रा, शरीर में दर्द, कटना-घाव, कंधे और जोड़ों का दर्द आदि मृगशिरा नक्षत्र से संबंधित घटक हैं।

लग्न में मृगशिरा नक्षत्र के फल || Result of Mrigashira Nakshatra in Ascendant/Lagna

यदि लग्न में मृगशिरा नक्षत्र हो तो जातक सुदृढ़ शरीर वाला, गेहुंआ रंग का, आकर्षक, लम्बे चेहरे व नुकीले ठुड्ढी वाला, अधिक बोलने वाला, कुआचरणी, निरंतर खोज (प्रेम, सौन्दर्य, सत्य, ज्ञान, आनंद, मोक्ष) में संलग्न, उत्साही, अनुसंधान में व्यस्त, असंतुष्ट (कुछ और बेहतर चाहिए की भावना से ओत-प्रोत), जिज्ञासु, कल्पनाशील, बुद्धिमान, वाक्पटु, संवेदनशील, आत्मखोजी, सौम्य, सत्यप्रिय, सहानुभूतिपूर्ण, रचनात्मक सोच, विविधता की चाह, आध्यात्मिक जिज्ञासा, भावुक कल्पनाएँ, क्रय करने में रुचिवान्, वस्तुएं संग्रह करने का इच्छुक, अनैतिक संबंधों में लिप्त, आक्रामक, असहनशील, डरपोक, घात / विश्वासघात करने में निपुण, खेलकूद प्रतियोगिता में रुचि रखने वाला, सामान्यतया शांतिप्रिय किन्तु आवश्यकता पड़ने पर छद्म युद्ध कला में निपुण, मर्म स्थानों के ज्ञाता, नीतिज्ञ, गणित, दर्शन व न्याय शास्त्र के मर्मज्ञ, धन कमाने में चतुर, भोग-विलास में रुचिवान्, घुमन्तू, इत्र में रुचि रखने वाला, चन्द्रमा के प्रभाव से कभी-कभी अस्थिर/उद्विग्न मन, संदेहशील, नई-नई चीजों की चाहत रखने वाला, भ्रम (मृगतृष्णा), धैर्य की कमी हो सकती है।

मृगशिरा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष || Qualities of Male Chart/ Horoscope born in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक सुन्दर, आकर्षक, हृष्ट-पुष्ट शरीर वाला, मध्यम वर्णी, अच्छी कद-काठी वाला, लम्बी बाहें, लम्बे सुडौल पैरों वाला, निर्भीक, नाम कमाने वा मशहूर होने को उत्सुक, उत्साह से युक्त, बुद्धिजीवी, अल्प साहसी, अंदर से भयातुर, परिजनों से मोह करने वाला, सबको साथ लेकर, झुंड में चलने को आतुर, अस्थिर भावनात्मक जुड़ाव वाला, खाने-पीने में नखरे करने वाला, सौन्दर्यदर्शी, घूमने-फिरने का शौकीन, कलात्मक अभिरुचि वाला, लोभी, रहस्यात्मक प्रकृति का, अस्थिर मति, लेखनकला में सिद्धहस्त, वित्तीय उतार-चढ़ाव से ग्रस्त, बातुनी, इधर की बात उधर करने वाला, दूसरों से शीघ्र प्रभावित होने वाला, नम्र, साधारणतया उदार, मतलबी, अति कामुक, कभी-कभी कौटुंबिक व्याभिचार करनें की ओर प्रवृत्त होता हैं। 

मृगशिरा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Qualities of Female Chart/ Horoscope born in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातक दुबली-पतली, छरहरी बदन की, नुकीले नाक-नक्श वाली, चंचला, चतुर, फुर्तीली, तीक्ष्ण वचन बोलने वाली, शिक्षित, कलात्मक व रचनात्मक अभिरुचि वाली, पैसे-रुपए धन-संपत्ति के मामले में अति लालची, सुन्दर वस्त्र-आभूषणों की शौकीन, स्वाद लोलुप, पाक कला में निपुण, क्रोध करने पर भारी अपशब्दों का प्रयोग करने वाली, अश्लील विचारों को भी खुलकर बोलने वाली, निराशा (Frustration) में रोने-धोने वाली, प्रेम का जाल बुनने वाली, कामकला में निपुण, अनेक प्रेम-संबंधों वाली, बहुधा विवाहेत्तर संबंधों में भी संलिप्त पायी जाने वाली होती हैं; तथापि गृहकार्य, प्रबंधन, राज-काज के कार्यों में दक्षता से सम्मानित होती हैं। वैवाहिक जीवन में परिजनों व पति को वश में रखने वाली होती हैं। ऊपर-ऊपर से इतनी शालीन व गंभीर होती हैं कि, इनके अन्य संबंधों का पता दूसरों को आसानी से नहीं चलता।

प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Mrigashira Nakshatra Subtel Result Variations in all 4 Charan (Padas)

मृगशिरा नक्षत्र प्रथम चरण (Mrigashira Nakshatra First Charan/ Padas) : वृषभ राशि अंतर्गत 23°अंश 20′कला से लेकर 26°अंश 40′कला तक का क्षेत्र विस्तार मृगशिरा नक्षत्र का प्रथम चरण हैं। नवमांश सिंह ♌ होने से इस चरण का स्वामी सूर्य हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण पर शुक्र-मंगल-सूर्य का संयुक्त प्रभाव हैं। यह रचनात्मक निर्माण, अभेद्य व्युहरचना, अधिकार, हिंसात्मक गतिविधियांँ, अल्प श्रम अधिक लाभ की इच्छा, योजनबद्ध तरीके से जीवन में आगे बढ़ना मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का मुख्य गुण हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक सुन्दर, अंडाकार चेहरे वाला, नुकीले ठुड्ढी, चौड़े नाक, चौड़े कंधे व छाती, क्रूर उर्ध्व दृष्टि, नुकीले पंक्तिबद्ध दाँत, कठोर पुष्ट नाखून, भूरे बाल, हिंसक, भारी आवाज़ वाला, शिक्षित, प्रतिभाशाली, चतुर, अवेगी, सत्ता, प्रशासनिक व न्यायिक गतिविधियों में संशोधन का इच्छुक, साहसिक निर्णय लेने वाला, कम शारीरिक श्रम करने वाला, बातचीत करने में माहिर, सफल कुटनीतिज्ञ होता हैं। वैवाहिक जीवन से असंतुष्ट, ज्यादा बाहर रहना पसंद करता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र द्वितीय चरण (Mrigashira Nakshatra Second Charan/ Padas): वृषभ राशि अंतर्गत 26°अंश 40′कला से लेकर 30° अंश तक के विस्तार क्षेत्र मृगशिरा नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश कन्या ♍ होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण पर शुक्र-मंगल-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। यह सूक्ष्म गणित, व्यवसायिक समझ, व्यंग्यात्मक प्रहार, विश्लेषणात्मक अध्ययन, अपसारी चिंतन, स्वच्छंद विचरण का सूचक हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक सुकोमल अंगों वाला, बुद्धिमान, रचनात्मक बुद्धि वाला, डरपोक, निवेश में रुचिवान्, जुआ सट्टा में धन नाश करने वाला, ईर्ष्यालु, उच्च प्रबंधन के गुणों से युक्त, संग्रहकर्ता, अनुसंधान, गणित, खगोल, प्रयोगात्मक विद्या, गायन-वादन, संगीत आदि में रुचिवान, हँसमुख, षड्यंत्रकारी, मिलावट या नकली वस्तुओं का विक्रेता, पारिवारिक संबंधों में शंकालु, परस्त्रीगामी, धोखे से पीड़ित होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र तृतीय चरण (Mrigashira Nakshatra Third Charan/ Padas) : मिथुन राशि अंतर्गत 00°अंश से 03°अंश20′कला तक का क्षेत्र मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का होता हैं। नवमांश तुला ♎ होने से इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण पर बुध-मंगल-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। वाक्पटुता, सामाजिक न्याय, कुटनीतिज्ञता, भोग-विलास, श्रृंगार व सौन्दर्ययुक्त व्यवसाय मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण के मुख्य गुण हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक दुबला-पतला किन्तु लम्बा, रोम युक्त, गेहुंआ रंग का अथवा श्यामवर्णी, बाहें व पैर विशेष लम्बे, लम्बे नाक, घने केश, शौकीन, मिलनसार, तथ्य अन्वेषक, अधिक सोच-विचार करने वाला, कल्पनाशील, सामाजिक, प्रेम संबंधों में अधिकता वाला, कामुक, न्यायिक वा प्रशासनिक क्षेत्र में उच्चस्तरीय अधिकारी, फील्ड में काम करने वाला, अधिक जनसंपर्क वाला, अनेक अस्थिर कामुक संबंधों वाला होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र चतुर्थ चरण (Mrigashira Nakshatra Fourth Charan/ Padas): मिथुन राशि अंतर्गत 03°अंश 20′कला से लेकर 06°अंश 40′कला तक का विस्तार क्षेत्र मृगशिरा नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। नवमांश वृश्चिक ♏ होने से इस चरण का स्वामी मंगल हैं। अतः मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर बुध-मंगल-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। आवेगपूर्ण निर्णय, कटु भाषा, तर्क-वितर्क, शंकालु स्वभाव, महात्वाकांक्षा, हिंसक व्यवहार, अपशब्द युक्त वक्तव्य मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का मुख्य गुण हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक बड़े माथा वाले, बलवान, उग्र, चिड़चिड़ा, हिंसक, अधिक बोलने वाले, लक्ष्य हेतु निरंतर प्रयत्नशील, किसी पर भरोसा ना करने वाले, अत्यधिक शंकालु, खोजबीन करने में माहिर, तर्कशील, सैन्यकर्मी, गुप्तचर, गणक, ज्योतिषी, बीमा एजेंट, पार्टी प्रवक्ता, छात्र नेता, लोन कर्मचारी, ब्याज पर धन लेन-देन करने वाला, शोषण करने को उन्मुख होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Result of various Planets situated in different Charan/ Padas of Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक हृष्ट-पुष्ट, सुन्दर, बलवान, सम्मानित, मित्रों से युक्त, आकर्षक, फल, फूल, सुगन्धित द्रव्यों में रुचिवान्, समाज में प्रभावशाली, राज्याधिकारी होता हैं। पत्नी पर विशेष प्रभाव जमाने से गृहक्लेश होता हैं। संतान को प्रारंभिक जीवन में कष्ट होते हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक सुन्दर, कलात्मक, व्यंग्यात्मक शैली वाला, कार्टूनिस्ट, आलोचनात्मक लेखन करने वाला, नेता, विलासी, संगीत व हास्य-व्यंग्य में रुचिवान्, नये वस्त्राभूषणों का शौकीन, पत्नी भक्त, विशेष मनोहर, रम्य होता हैं। विवाह के पश्चात जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल(Result of Sun Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक लम्बा, आकर्षक, जनसंपर्क साधने में निपुण, अति बुद्धिमान, अपने जनों का मुखिया, नृत्य-संगीत, कला, अभिनय में रुचिवान्, वित्तीय अधिकारी, प्रबंधन के खास गुण वाला, भवन निर्माण व इंटिरियर से संबंधित वस्तुओं का व्यवसायी होता हैं। कर्ण व नासिका से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक चंचल, आक्रामक, खेलकूद, भागदौड़ करने में निपुण, राजनैतिक पहुंच वाला, कठिन परिश्रम से सफल, भूमि-भवन से सुखी, रहस्यात्मक प्रकृति का, तंत्र-मंत्र, ज्योतिष, सम्मोहन, आदि का जानकार, कुशल सैनिक व रक्षा विभाग में अधिकारी होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Sun located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत रुपवान, सौम्य, थोक व्यापारी, ठेकेदार, लघु उद्योग करने वाला, अनेक स्त्रियों का स्वामी या पालक होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक गुप्तचर, स्पेशल फोर्सेज, उच्च स्तरीय प्रहरी, सैन्य विभाग में कार्यरत, समाजसेवी, बाग़ी होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक मान्यता प्राप्त पदों पर आसीन, राज्याधिकारी, मंत्री, सभासद, राजदूत होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कलुषित विचार का, दीन-हीन, वृद्धा स्त्री से संसर्ग करने वाला, परिजनों के नाम कलंकित करने वाला, स्वजनों का द्रोही होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक आत्मबल से हीन, नीच वृत्तियों में लीन, सिर दर्द, अनिद्रा, रक्तचाप से पीड़ित, शत्रुओं से घिरा, दुर्घटनाओं से ग्रस्त होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक राजनयिक, समाज में प्रतिष्ठित, साधुओं व सज्जनों का आदर करने वाला, विद्या की ओर उन्मुख, अस्पताल, औषधि, स्वास्थ्य उपकरणों से संबंधित कार्यों में संलग्न होता हैं। नेत्र, नासिका व दाँत से संबंधित व्याधियांँ पीड़ित करती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सामान्य सुन्दर, प्रसन्नचित्त, विद्वान, विदेशी संपर्क से लाभान्वित, फुर्तीला, लोकमान्य, सफल, सार्वजनिक जीवन में व्यस्तता वाला होता हैं। जीवनसाथी व ससुराल पक्ष से लाभान्वित, सहिष्णु, अधिक कन्या संतानों वाला, परोपकारी, दानशील होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक कोमल मुखाकृति, सौम्य, बहुमुखी प्रतिभा का धनी, साहित्य, लेखन, संचार, मीडिया इन्फ्लूएंसर आदि क्षेत्रों से नाम कमाने वाला, धन संग्रह व प्रबंधन करने में निपुण, गौरवशाली, ललित कलाओं का ज्ञाता, कुलीन परिवारों से मैत्री संबंध वाला, मित्रों की पत्नियों में रत होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक व्यापार-व्यवसाय की ओर उन्मुख, श्रृंगार प्रिय, पर्यटक, संघर्ष से धीरे-धीरे प्रगतिशील, कभी-कभी चिंतित, परिवार के सहयोग से वंचित, तम्बाकू व मादक पदार्थों का सेवन करने वाला, वाचाल, बड़बोला होता हैं। जीवनसाथी से असंतुष्ट होने से घरेलू विवाद से पीड़ित होता हैं। मुख, गला, नाक से संबंधित व्याधियांँ होने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक शारीरिक रूप से बलवान, किन्तु मानसिक रुप से विपन्न, ओछी मानसिकता वाला, अज्ञात भय से पीड़ित, नीच कर्म करने को उद्यत, दवा, उर्वरक, सौन्दर्य प्रसाधन, अनुष्ठानिक सामग्रियों का व्यवसायी, अति कामुक, मैथुन प्रिय, Bisexual होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Moon located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अनाजों का व्यापारी, पशुधन व दुग्ध व्यवसाय करने वाला, कृषि कार्य व बागवानी करने वाला, सुन्दर भूमि-भवन से युक्त, धनवान् होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक आवेगी, चंचल, निवेश, धन-संपत्ति के मामले में त्वरित निर्णय लेकर नुकसान उठाने वाला, स्व-माता के प्रति भी क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने वाला, अनैतिक संबंधों के वशीभूत, जीवनसाथी का निरादर करने वाला, वृद्धावस्था में दुःखी होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक निकट संबंधों में यौनाचारी, सौम्य, विनोदी, धनाढ्य, संततिवान, राजमान्य, भोग-विलास में सफल, सुनियोजित तरीके से कार्य करने वाला, सर्वगुण संपन्न होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक हृष्ट-पुष्ट, लम्बे कद-काठी का, मतवाला, अपनी शर्तों पर जीने वाला, धन-धान्य, संतति सुख से परिपूर्ण, समाज में प्रभावशाली, एकपत्नीव्रती, लोक में विख्यात होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक आकर्षण से युक्त, पंक्तिबद्ध दाँत वाला, सुगन्धित द्रव्य आदि का उपभोगी, कामुक, कुलीन स्त्रियों का मित्र, मातृपक्ष वा ससुराल से धन प्राप्त करने वाला, सर्वांगीण विकास से सुखी होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक विविध व्यसनों का शिकार, परिजनों से क्लेश करने वाला, नास्तिक, धन के अभाव से ग्रस्त, असाध्य रोगों से पीड़ित रोगी, माता के लिए अनिष्टकारी होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक परदेस में सफल, विदेशी आय वाला, स्वजनों से दूर, विचलित, उद्विग्न, इधर-उधर भटकने वाला, अति भौतिकतावादी, इन्द्रिय सुखों के आधीन अपराधिक वृत्तियों में लिप्त रहता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक तीर्थाटन वा पर्यटन में रुचिवान्, परिजनों के प्रति निर्मोही, क्लेशपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला, निकट संबंधों में बेईमान, जीवनसाथी के प्रति धोखेबाज होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक लड़ाकू, चंचल, अधिक बोलने वाला, एकांतप्रिय, घुमक्कड़, कठोर हृदय, कटुभाषी, धन संग्रह में परेशानियों का सामना करने वाले, अल्प शिक्षित, कम बुद्धिमत्ता वाले, जिद्दी, हिंसक, अत्यधिक मैथुनी, विपरीत लिंगीयों के प्रति प्रबलता से आकर्षित, लोभी, परिजनों से मतभेद वाला, दुर्घटनाओं से ग्रस्त, मित्रों का भी अपकार करने वाला, गालीबाज होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक चंचल, बतोलेबाज, उद्विग्न, उपेक्षित, झगड़ालू, अपराधिक मानसिकता वाला, स्त्रियों को हेय दृष्टि से देखने वाला, कभी-कभी अपनी माता का भी अनादर करने वाला, उदण्ड, उतावला, जीवन में एक बार राजदण्ड वा कारावास वा न्यायिक हिरासत में जाने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्रके तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक नौकरी पेशा वाला, उद्वेलित, दुःखी, रतिक्रिया में लिप्त, एक से अधिक आय के स्रोत वाला, अनियंत्रित खर्चीला, शत्रुओं से घिरा हुआ, मित्रों से वैमनस्य रखने वाला, अति शंकालु, रक्त, चर्म वा यौनरोग से पीड़ित होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक असमाजिक तत्वों का मित्र, हिंसक, परिजनों के लिए कष्टकारी, शिक्षित, रहस्यमय, उच्च पदासीन अधिकारियों व नेताओं से संपर्क रखने वाला, ग्राम वा पंचायत अधिकारी, जन संपर्क अधिकारी आदि क्षेत्रों से धनवान होता हैं। पाप कर्म में लीन होने से वैवाहिक जीवन असंतोषपूर्ण होता हैं। 

मृगशिरा नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mars located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक स्वच्छंद भटकने वाला, आततायी, अपने लक्ष्य की ओर उन्मुख, एकांकी, महिलाओं को हेय दृष्टि से देखने वाला, अव्यवहारिक, आत्ममुग्धता में डूबा होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक विचारशील, जीवन में आदर्श स्थापित करने वाला, माता से विशेष स्नेही, धनवान्, स्वजनों का सहायक, विपत्तियों और परेशानियों से घिरा, वैश्याओं में आसक्त, बदनाम होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक कलात्मक शोधों में रुचिवान्, कला व संस्कृति का पोषक, मंदिरों व प्राचीन वास्तुकला पर शोध-पत्र लिखने वाला, नये संगीत व वाद्ययंत्रों से नई कलात्मक रुझान पैदा करने वाला होता हैं। आजीविका से संबंधित कर्मों में समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक अल्प श्रम से सफल, सुदृढ़ प्रतिष्ठा प्राप्त, शिक्षा, कर्मकांड, शास्त्र आदि का टीकाकार, कुरीतियों का खण्डन करने वाला, समाज का नेतृत्वकर्ता होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक शक्ति प्राप्ति की ओर उन्मुख, न्यायिक, प्रशासनिक वा राजनैतिक पदों पर उच्च ख्यातिप्राप्त, भोग प्रधान, भ्रमणशील, मादक पेय पदार्थों में रुचिवान्, परस्त्रीगामी वा वैश्यागामी होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक ईर्ष्यालु, लोगों को गलत राह दिखाने वाला, अकारण विवादास्पद बयान देने वाला, असमाजिक तत्वों से सहायता प्राप्त, दुष्ट, स्त्रियों के मान-सम्मान का घातक होता हैं। पैर, पिंडलियों व घुटने में दर्द या चोट से पीड़ित होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक चोर, गुंडों का मुखिया, बड़े अपराध का मास्टरमाइंड, छिप कर हमला करने वाला, अतुल धनवान्, कुख्यात तस्कर, सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने वाला होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक सैनिक वा सैन्य अधिकारी, ओजस्वी संभाषण करने वाला, राष्ट्र के प्रति समर्पित, समाजसेवी, परोपकारी होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक अत्यंत मेधावी, सुन्दर, बल-वीर्य से पुष्ट, विविध भाषाओं का जानकार, प्रकाण्ड पण्डित, अर्थशास्त्र व लेखाशास्त्र का ज्ञाता, चरित्रवान्, सम्मानित, सरल व्यक्तित्व का, परोपकारी, परिजनों का पोषक होता हैं। ऐसा जातक शतायु अर्थात 100 वर्ष जीता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक प्रतिस्पर्धी स्वभाव का, अल्प ईर्ष्यालु, सफल राजनीतिज्ञ, भोगी, कामी अनेक संसाधनों से युक्त होता हैं। प्रारंभिक जीवन में साहित्यिक दृष्टिकोण का, साधारण नौकरी पेशा वाला होता हैं। जीवन के मध्यावस्था में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल(Result of Mercury Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक अत्यंत मोहक आकर्षक, मध्यम कद-काठी का किन्तु हृष्ट-पुष्ट, विपुल संपत्तियों का स्वामी, व्यवसाय कुशल, रत्नजड़ित आभूषणों का शौकीन, अनेक रमणियों से प्रेम संबंधों में होते हुए भी अपनी पत्नी का विशेष सम्मान करने वाला, घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाला होता हैं। जीवन के उत्तरार्ध में मधुमेह, दमा, जननांगों से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल(Result of Mercury Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक कृशकाय किन्तु बड़ा पेट वाला, क्रोधी, अल्प शिक्षित, आशावादी, परिश्रमी, कारीगर वा शिल्पी, हस्तकला का जानकार, धीरज से काम लेने वाला, ईमानदार, ईश्वर भक्त, एक से अधिक विवाह करने वाला या विवाहेत्तर संबंधों वाला होता हैं। रक्तचाप, दुर्घटना, क्षय रोग, गले वा स्वरतंत्र से संबंधित दोष होने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mercury located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक सौम्य, गोलाकार मुखाकृति, चंचल, काल्पनिक कथाओं व साहित्यों का प्रतिष्ठित लेखक, उच्च व कुलीन वर्गों से मैत्री संबंध वाला, दार्शनिक बुद्धि, सुखी, सुन्दर पत्नी व संततियों से सुखी, विनोदी होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता वाला, सचार, लेखन, तकनीकी शिक्षा से आजीविका वाला, त्वरित निर्णयों से कभी-कभी भारी नुक़सान करके पछताने वाला, जिद्दी, कटुभाषी होता हैं। ज्ञानेन्द्रियों (आँख, कान, नाक, जिह्वा, त्वचा) से संबंधित बिमारियांँ होने की संभावना होती हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक नई तकनीक में रुचिवान्, उच्च शिक्षित, भिन्न-भिन्न विषयों में संस्थानिक उपाधियों से विभूषित, बहुभाषाविद्, शिक्षित व कुलीन वर्गों का मुखिया, नीतिज्ञ, प्रतिष्ठित, प्रभावशाली होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक स्वजनों से दुःखी, जीवन में विभिन्न अड़चनों से पीड़ित, अधिक परिश्रम से कम या असंतोषजनक फलों की प्राप्ति, विवाह और आजीविका संबंधी कर्मों में अधिक देर से सफल, जीवनसाथी से असंतुष्ट होता हैं। चिड़चिड़ापन के याददाश्त कमजोर होती हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक अनेक सुन्दरियों से युक्त, जुआरी, अपने फायदे के लिए स्वजनों का अहित करने वाला, ठग, नशीले पदार्थों का व्यापारी, दूसरों की पत्नियों के साथ साहचर्य में लिप्त रहता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक प्राणायाम, योग, व्यायाम करने वाला, बलिष्ठ, चंचल, कर्कश भारी आवाज़ वाला, किन्तु मधुरभाषी, वन्य पदार्थों, फल-फूल आदि का व्यवसाय करने वाला, अगरबत्ती, धूप आदि का व्यवसायी, बैचैन, क्रोध में वस्तुओं को तोड़फोड़ करके प्रसन्न होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक लम्बे कद-काठी का, थुलथुले शरीर वाला, स्वाध्ययन से विद्वान, संगीत में रुचि रखने वाला, अस्थिर मति, शासन वा प्रबंधन में उच्च पदासीन, हर प्रकार के लोगों के प्रेम का पात्र, राजनेता, अभिनेता वा विश्वप्रसिद्ध कलाकार, पब्लिक फिगर होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक सुन्दर, अधिक मित्रों वाला, धनिकों में सम्मानित, सुन्दर रंगीन वस्त्राभूषणों से युक्त, विविध विद्याओं का ज्ञाता, कानून व व्यवसायिक नियमों का जानकार, शास्त्रों का ज्ञाता, उच्चस्तरीय अधिकारियों व राजनयिकों से मधुर संबंधों वाला होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक सुन्दर वक्ता, अपने पाण्डित्य का प्रदर्शन करने वाला, वस्त्रों, रत्नों व सौन्दर्य प्रसाधनों का व्यवसायी, पुरोहित, धर्म-कर्म आदि कर्मकांड करने वाला, लोभी, कंजूस, परिजनों में निंदनीय, पत्नी द्वारा छला जाता हैं। हृदय व स्नायु तंत्र से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक जातक ने रहस्यमय विद्याओं में अनुसंधान करने वाला, लुक-छिपकर कर क्षूद्र शक्तियों को आवाहित करने वाला, भूमि-भवन से सुखी, धनवान्, खेती-बाड़ी करने वाला, योगीभेष वाला, रहस्यमय प्रकृति का, लोककल्याण हेतु सरकार से सम्मानित, समाज में आदरणीय होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Jupiter located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक विद्वान, आध्यात्मिक गुरु वा शास्त्रज्ञ होता हैं। समाज के प्रतिष्ठित जनो से पूजित, विपुल संपत्तिवान्, प्रभावशाली, शासन-प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप करने की क्षमता रखने वाला होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक लम्बा चौड़ा, सुकोमल अंगों वाला, विपुल संपत्तियों का स्वामी, भूमि-भवन, उत्तम वाहनों से युक्त, निकट संबंधों में अवैध संबंधों वाला, समाज में बदनाम, दान-पुण्य करने वाला, राजनीतिक पहुँच वाला होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक अध्ययनशील, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाला, कानून का जानकार, समाजसेवी, परिजनों में आदर का पात्र किन्तु अत्यधिक यात्रा व व्यस्तता के कारण वैवाहिक जीवन असंतोषपूर्ण होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, शास्त्रों का ज्ञाता, नये अनुसंधान के शोध-पत्र में रुचिवान्, विदेशी मित्रों वाला, धन-धान्य से परिपूर्ण, अपनी सभ्यता व संस्कृतियों का कुशल प्रचारक होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक आकर्षक व्यक्तित्व वाला, धन-वैभव से युक्त, अनेक कुलीन स्त्रियों से निकट संबंधों वाला, वस्त्र, आभूषणों व सौन्दर्य प्रसाधनों का व्यवसायी, ललित कलाओं से प्रसिद्धि पाता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत परिपक्व, अनुभवी, बहुभाषाविद्, सलाहकार, सफल कुटनीतिज्ञ, ग्राम-समाज का मुखिया, सभासद, क्रूर जीवनसाथी की संगति होती हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक ज्ञान के प्रति असहज उन्मुख, प्रयोगात्मक विचार वाला अर्थात स्वयं प्रयोग करके सीखने वाला, धन के लिए नीच कर्म करने से भी नहीं हिचकने वाला, धुर्त, आडंबर युक्त भेष-भूषा वाला, क्षूद्र शक्तियों का साधक, पथभ्रष्ट, शास्त्रों में मिलावट करने वाला होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक के शिक्षा में बाल्यकाल में हीं व्यवधान पड़ता हैं, तथापि उच्च शिक्षित, कर्मठ, आजीविका हेतु कर्म में देरी से सफल, आयुध निर्माता, प्रहरी वा किसी धार्मिक संगठन का सक्रिय कार्यकर्ता होता हैं। धन कमाता तो हैं, लेकिन उसका मूल्य नहीं समझता, जातक वर्तमान में जीने वाला, भविष्य के प्रति लापरवाह होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक रजोगुणी प्रधान, सुन्दर, काव्यात्मक शैली में बातें करने वाला, सम्मानित, ललित कलाओं में पारंगत, सांस्कृतिक उपक्रमों के लिए विख्यात, कुशल अभिनेता, कामुक, व्यसनी, आकर्षक व्यक्तित्व का धनी, धनवान्, सरकार व विभिन्न मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा सम्मानित होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक कोमल अंगों वाला, अपने आयु से कम उम्र का दिखने वाला, विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला, मादक द्रव्यों का सेवन करने में रुचिवान्, अनेक विपरीत लिंगीयों से निकट संबंधों वाला, दयालु, विनयशील, परोपकार करने को उद्यत होता हैं। यकृत, किडनी, गुदा द्वार से संबंधित रोग व मित्रों द्वारा धोखा खाने की संभावना होती हैं। 

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक शास्त्रार्थ करने में निपुण, मृदुभाषी, धर्म-कर्म में अनुरक्त, दर्शन, विज्ञान, विविध पंथों का विद्वान, कलात्मक अभिरुचि वाला, धनवान्, अनेक सुन्दरियों का प्रिय, व्यवसायिक संगठनों का प्रमुख, वित्तीय विभागों का कर्मचारी, शत्रुंजय, रत्नादि आभूषणों से युक्त होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक रक्तिम वर्णी, मांस-मदिरा का भक्षण करने वाला, काम शास्त्र का विशेषज्ञ, कामोत्तेजक साहित्यों, पत्रिकाओं वा चलचित्रों में रुचिवान्, लोभी, हिंसक रतिक्रिया प्रिय, औषधियों व वन्य उत्पादों का व्यवसाय करने वाला होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Venus located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक सुकोमल, स्त्रियों जैसी ममत्व वाला, पर्यटन प्रेमी, अल्प वय से धनार्जन करने वाला, प्रसिद्धि प्राप्त, विरांगना की संतान अर्थात जातक की माता प्रसिद्ध, सम्मानित होती हैं। स्त्री जातक विवाह से पूर्व ही अनेक संसर्गों वाली, गर्भवती होने की संभावना होती हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक बलिष्ठ, वस्त्राभूषणों का शौकीन, खुबसूरती के पीछे भागने वाला, पसंद आई वस्तुओं की मुंहमांगी रकम देने वाला, स्त्री लोलुप, अनेक प्रेम-प्रसंग मे लिप्त, महंगे उपहार देने वाला, अनियंत्रित कामवासना का शिकार होता हैं। विवाहेत्तर संबंधों में धन का नाश करने वाला होता हैं।

यदि गुरु की दृष्टि हो तो जातक सद्गुणी, सौभाग्यशालिनी पत्नी वाला, अनेक संततिवान्, संयुक्त परिवार वा कुटुम्बियों में सबसे धनी, मानी प्रतिष्ठित होता हैं। पारिवारिक व्यवसाय से अलग, नये रुझान वाले कार्यक्षेत्रों से धनार्जन करता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल से अस्थिर, स्वजनों के सुख व सहयोग से वंचित, अनेक कार्यक्षेत्रों में स्वयं को आजमाने वाला, आर्थिक विपन्नता वाला, विवाह में देरी व निष्ठुर जीवनसाथी वाला होता हैं। वृद्धावस्था में कफ, शक्तिहीनता, शीत जनित रोगों से पीड़ित मृत्यु को प्राप्त होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक कलात्मक अभिरुचि का दीवाना, प्रचुर संसर्ग सुख में लिप्त, धन कमाने को उद्यत, विलासितापूर्ण जीवन के पीछे भागने वाला, देह व्यापार में संलग्न होता हैं। स्त्री जातक के विवाह से पहले गर्भवती होने के योग बनते हैं। चर्मरोग, श्वेत कुष्ठ, व नाखून से संबंधित व्याधियांँ पीड़ित करती हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक नास्तिक, पाप कर्म में लिप्त, परदेस में आर्थिक रुप से सफल, स्वजातिय विवाह करने वाला, कौटुंबिक व्याभिचार को उन्मुख, म्लेच्छों से संसर्ग करता हैं। जीवन के उत्तरार्ध में विभिन्न कष्टों से युक्त, निर्धन होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक श्यामवर्णी, दुबला-पतला, लम्बा छरहरा बदन वाला, काले घुंघराले बालों वाला, परिश्रमी, परिजनों खास कर के पिता से मतभेद वाला, प्रायः विवशतापूर्ण स्थितियों में फँसने वाला, चर्मरोगी होता हैं। आत्मबल के अभाव के कारण जोखिम लेने से डरता हैं, फलतः निर्धन या सामान्य जीवनयापन जितना ही धनार्जन कर पाते हैं। प्रेमिका व पत्नी से विश्वासघात की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक संस्कार विहीन, नीच की संगति वाला, नीच स्त्रियों में रत, कठिन परिश्रमी, रात में विशेष सक्रिय, अनियोजित खर्च से आर्थिक तंगी झेलने वाला, नींद में बड़बड़ाने वाला होता हैं। बचपन में रोग से पीड़ित, जवानी में भोग में लिप्त, बुढ़ापा विभिन्न कष्टों में गुज़रता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक उच्च शिक्षित, कानून का जानकार, सिविल सेवा, न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक विभाग में उच्च पदासीन, दण्डपाल होता हैं। अधिक शक्तिशाली होने से बलात् शोषण करने वाला होता हैं। स्त्री जातक का अल्पायु में हीं कौमार्य भंग होता हैं व अनेक पुरुषों के साथ बुढ़ापे तक संसर्ग करते रहती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक बाल्यकाल से ही परदेसवासी, परिजनों से दूर, अग्नि आदि से दुर्घटना ग्रस्त, अंगों में विकृती वाला, समाज द्वारा शोषित, पाप कर्म में लिप्त, भटकने वाला होता हैं। किशोरावस्था आते-आते अनैतिक आचरण से लिप्त, दुराचार व अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Saturn located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल से परिपक्व, गंभीर, गुढ़ ज्ञान व दर्शन का ज्ञाता, परम विद्वान, तेजस्वी होता हैं। तथापि धनवान् नहीं होता, लोककल्याण में जीवन व्यतीत करते हुए, आजीवन दैनिक आवश्यकताओं के लिए भी संघर्षशील होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक न्याय शास्त्र का ज्ञाता, तत्त्वमीमांसक, राजनैतिक समझ वाला, लक्ष्यभेदी, किसी संगठन अथवा समुह का प्रधान, प्रशासनिक विभाग आदि में उच्च पदासीन होता हैं। तीर्थाटन व दान-पुण्य के कार्यों में रुचि रखता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक विपुल पैतृक संपत्ति वाला, शासन के गुणों से युक्त, बाल्यकाल से प्रतिस्पर्धी स्वभाव का, सैन्य वा सुरक्षा विभाग में सफल, समाज में प्रतिष्ठित, कुलभूषण होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक छिछले स्वभाव का, स्वाभिमान से हीन, दास वृत्ति में संलिप्त, निर्लज्ज, अपने व अपने अधीनस्थ अधिकारियों के सम्मान का सौदागर, चरित्रहीन पत्नी व संतान से समाज में बदनाम होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक तत्वज्ञानी, धर्मात्मा, परोपकार में रुचिवान्, स्वजनों का सहायक, औषधियों व शारीरिक मर्म स्थानों का ज्ञाता, यौगिक क्रियाओं व साधनाओं में दक्ष, अघोर विद्या अध्ययनी होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अनेक भवनों का स्वामी, जमींदार, ख़ानदानी प्रतिष्ठित, ज्योतिष, खगोल, भौतिकविज्ञान का ज्ञाता, जीवंत अभिनय में निपुण, सरकारी वा निजी क्षेत्र में उच्च पदासीन, वृद्धावस्था तक चरित्रहीन, मादक पदार्थों का सेवनकर्ता, अपने अनुयायियों के साथ लैंगिक संबंधों वाला, दुराचारी होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक अनुशासनहीन, जल्दीबाज़, त्रुटिपूर्ण कार्य करने वाला, अनियंत्रित जोखिम लेने वाला, बाल्यकाल से दुर्घटना ग्रस्त, स्नायु तंत्र व लकवा आदि रोगों से पीड़ित, क्लिष्ट भाषा बोलने वाला, धोखे से ज़हर देने वाला होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक पारिवारिक जीवन में उदासीन, हिंसक, दूसरों को कष्ट देकर प्रसन्न होने वाला, अस्थिर चित्त, अग्नि वा वाहन दुर्घटना से पीड़ित, भिक्षाटन करके जीवन जीने वाला होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक कुलीन परिवार से संबंध रखने वाला, धनवान्, कलाकार, सहृदय, समाज कल्याण व जनसेवा कार्य से समाज में प्रभावशाली, अल्प अहंकारी होता हैं। मिर्गी, अपस्मार, कुष्ठ, चर्मरोग, उदर रोग, मनोरोग, भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित, पिता के लिए अनिष्टकारी होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक विकृत बुद्धि, वाचाल, अधीर, जल्दीबाज़, छल-कपट करने में माहिर, राजनीतिक वा प्रभावशाली लोगों का सेवक, शेयर, निवेश, जुआ सट्टा आदि से धनवान्, नशेड़ी, मतलबी होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक उच्च स्तरीय पहुंच वाला, अल्प शिक्षित, बहुभाषाविद्, अनैतिक कार्यों से धनी, हीरा, पन्ना आदि मूल्यवान रत्नों वा वस्तुओं का व्यवसायी, दूसरों को क्षति पहुंचा कर लाभान्वित, मित्रघाती, लोभी किन्तु पराक्रमी होता हैं। 

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक चिड़चिड़ा, शंकालु, अस्थिर रिश्तों वाला, किसी को क्षमा नहीं करने वाला, संदिग्ध चरित्र वाला, अस्थायी अनेक प्रेम संबंधों में लिप्त, बाल्यकाल से दुर्घटना, चर्मरोग व तंत्रिका तंत्र से संबंधित दीर्घकालिक वा असाध्य रोग से पीड़ित, माता-पिता का सेवक किन्तु मातृ स्नेह से वंचित, अपनी पत्नी को दुलार करने वाला तथापि यदा-कदा शंकालु होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Rahu located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक स्वयं को सिद्ध करने को इच्छुक, अभीष्ट को पाने के लिए प्रयत्नशील किन्तु प्राप्त हो जाने पर उसका मूल्य न समझने वाला, धन व वित्तीय असुरक्षा से भयातुर, अनावश्यक यात्राओं में भटकने वाला, मलीन व्यक्तित्व का, परिजनों से द्वेष रखता हैं। सिर मे चोट व हृदय संबंधी व्याधियों से जातक पीड़ित होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक दिखावा करने वाला, मादक पदार्थों का उत्पादनकर्ता वा विक्रेता, रसायन व दवाओं का जानकार, शल्यचिकित्सक होता हैं। व्यक्तिगत जीवन में असंतुष्ट, जीवनसाथी से वैमनस्य या तलाक़ होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक झूठा, नये-नये प्रयोग करने को उद्यत, आवेगपूर्ण निर्णय लेने वाला, अनियंत्रित खर्चीला, दूसरों की भूमि-भवन को हड़पने वाला, तेज दिमाग, बहसबाज़ होता हैं। जीवन में जबरदस्त आर्थिक उतार-चढ़ाव देखने के साथ-साथ निकट संबंधों में भी बिखराव पैदा कर लेता हैं। स्त्री जातक के दो या दो से अधिक विवाह, व बार-बार गर्भपात होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक उन्नतिशील, अनेक आय के स्रोत वाला, निवेश व व्यवसाय से लाभी, चापलूस, नेटवर्किंग व कम्युनिकेशन क्षेत्र में सफल, कंटेंट राइटर, टेक्निकल स्किल्स, चतुराई से युक्त मीठा संवाद का गुणी होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक व्यवहारिक समझ वाला, विदेशी आय वाला, ईश्वर भक्त, कुशल योद्धा, राजनेता, शास्त्रार्थ का आयोजक, समाज में विवादित प्रतिष्ठित, अपने मतों का कट्टर होता हैं। उदर, चर्बी, मोटापा जनित रोग होते हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक चतुर, भोगी, कामी, सौन्दर्य प्रसाधन का व्यवसायी, फैसन डिजाइनर, गिफ्ट्स आदि का व्यवसाय करने वाला होता हैं। विवाह अपेक्षाकृत जल्दी हो जाता हैं, तथापि नये-नये संबंधों में लिप्त रहता हैं। रिश्तों में धोखा देना वाला व धोखा खाने वाला दोनों होता हैं। जननांग संबंधी रोगी वा मनोरोगी होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक मज़दूरों का नेता, मादक पदार्थों के व्यापारियों का रक्षक, जुआ-सट्टा आदि का आयोजक, नशेड़ी, अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता हैं। जीवन में एक बार कारावास वा न्यायिक हिरासत में जाने के योग बनते हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in First Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक अंतर्मुखी, बाल्यकाल में निर्धनता से क्षोभित, अल्प संस्थागत शिक्षा वाला, स्वाध्ययन से विभिन्न विषयों का ज्ञाता, कठिन परिश्रम से अल्प धनी होता हैं। जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव से पीड़ित होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Second Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra): मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक क्रुर, प्रेम संबंधों में धोखा खाने वाला, परदेसवासी, ईश्वर भक्त, भौतिकता में अल्प लगाव वाला, पशुओं व अपाहिजों का मददगार, बच्चों का डॉक्टर या आँख, कान, गला रोग का विशेषज्ञ होता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Third Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक न्यायप्रिय किन्तु क्रूर, ईर्ष्यालु, अल्प मित्रों वाला, वनों व पहाड़ों की यात्रा करने वाला, धन का संग्रह करने में रुचि नहीं रखने वाला, संन्यासी वा आध्यात्मिक गुरु होता हैं। वृक्षों व वन्यजीवों की सेवा में समय लगाता हैं।

मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Fourth Charan/ Padas in Mrigashira Nakshatra) : मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक हिंसक, दूसरों की संपत्ति का लोभी, कर्कश आवाज वाला, अपराधिक गतिविधियों वाला, चरित्रहीन, क्रूर कृत्यों में लिप्त, नीच जनों का सेवक होता हैं। अकाल मृत्यु वा दुर्घटना जनित मृत्यु की संभावना होती हैं।

मृगशिरा नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Ketu located in Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक पित्त प्रकृति, गुढ़ विषयों में रुचिवान्, पिता व गुरु से वैमनस्य, स्वबोध में विकृती, अस्थिर निर्णयों से पश्चाताप, पथभ्रमित होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक जातक क्षोभित, अस्थिर भावनात्मक संघर्ष से पीड़ित, मनोरोगी, चिंतित, कुछ बेहतर पाने के आशा में कंगाल, अकेला, पैशाचिक वृत्ति का आसाध्य रोगों से पीड़ित होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक उग्र, आक्रामक, रक्तपात को उद्यत, असमाजिक तत्वों से संबंध रखने वाला, धातक, आत्महत्या को प्रेरित, जिद्दी, बलिष्ठ, रक्त विकारी होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक हठी, शिक्षा से वंचित वा अल्प शिक्षित, स्वयं के विचारों से कभी-कभी असहमत, आंतरिक द्वंद, अधिक सोच-विचार करने वाला, निर्णय लेने में असमर्थता का अनुभव करता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक संबंधों की गहरी समझ रखने वाला, दार्शनिक लेखन में सक्रिय, मूल्यों व धन के मामले में संयमित, स्पष्ट विचारों वाला, शिक्षक वा शैक्षणिक संस्थानों में अधिकारी होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर शारीरिक सौष्ठव वाला, सच्चे प्रेम के तलाश में अनेक संबंधों में अस्थाई रूप से लिप्त, विचलित मानसिकता से ग्रस्त, कर्मकांड करने वाला, पाखंडी, असंतोषी होता हैं। जीवन के उत्तरार्ध में पथरी आदि किडनी व मुत्राशय के रोग होने की संभावना होती हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कठोर हृदय, शंकालु, नास्तिक, रिश्तों में अनजान भय से पीड़ित, स्वकर्मों के परिणामों को लेकर चिंताग्रस्त, बार-बार इष्ट व पंथ बदलने वाला, भड़कीला स्वभाव का, अकर्मण्यता के भाव से ग्रस्त होता हैं।

उपसंहार || Important Considerations

किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।

यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।

सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता। 

राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।

जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।

मृगशिरा नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personalities Born in Mrigashira Nakshatra

देवी पार्वती (देवी भागवत पुराण के अनुसार) – का जन्म मृगशिरा नक्षत्र में हुआ था।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति) – का चन्द्र मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।

डॉ. बी.वी रमन (प्रसिद्ध ज्योतिषी व लेखक) – का चन्द्र मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।

ब्रुक शील्ड्स [(Brooks Shields) प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेत्री व मॉडल] – का चन्द्र मृगशिरा द्वितीय चरण में था।

राहुल गांधी (भारतीय राजनीतिज्ञ) – का सूर्य मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का मृगशिरा में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]

~ Krishna Pandit Ojha..

   WhatsApp: 9135754051

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नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या 

1• अश्विनी

2• भरणी

3• कृतिका 

4• रोहिणी 

5• मृगशिरा 

6• आर्द्रा 

7• पुनर्वसु 

8• पुष्य 

9• आश्लेषा 

10• मघा 

11• पूर्वा फाल्गुनी 

12• उत्तरा फाल्गुनी 

13• हस्त 

14• चित्रा 

15• स्वाति 

16• विशाखा 

17• अनुराधा 

18• ज्येष्ठा 

19• मूल 

20• पूर्वाषाढ़ा 

21• उत्तराषाढ़ा 

22• श्रवण 

23• धनिष्ठा 

24• शतभिषा 

25• पूर्वा भाद्रपद 

26• उत्तरा भाद्रपद 

27• रेवती

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