Krishna Pandit Ojha

भरणी नक्षत्र : सम्पूर्ण गुण-दोष व इनमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Bharani Nakshatra in Hindi & Planetary Effects || Results of various planets present in it

Bharani Nakshatra in Hindi & Planetary Effects

भरणी नक्षत्र परिचय || Bharani Nakshatra Introduction

Bharani Nakshatra in Hindi & Planetary Effects || वर्तमान भारतीय ज्योतिष में भरणी नक्षत्र क्रम से दूसरा नक्षत्र हैं। भचक्र में 13° अंश 20′ कला से 26° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र भरणी नक्षत्र कहलाता हैं। ‘भरणी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ हैं ‘भरण करने वाला / वाली’ अर्थात यह नक्षत्र भरण-पोषण करने वाला हैं। संस्कृत के ‘भृ’ धातु से निष्पन्न शब्द ‘भरणी’ हैं। ‘ भृ ’ धातु (भृञ् भरणे) का अर्थ ‘पोषण करना’, ‘धारण करना’, ‘भरना’ या ‘भरण-पोषण करना’ हीं हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे 35, 39 और 41 एराइटिज् (35, 39 & 41 Arietis), अरबी नक्षत्र प्रणाली (Manzil al-Qamar) में इसे ‘अल-बुटेन / अल-बुतेन’ (Al-Butain), चाइनीज सियु में ‘वेई’ (Oei / Wèi – 胃) कहा गया हैं; जो ‘White Tiger of the west’ region का सियु (Xiu) हैं; जिसका अर्थ होता हैं— “पेट (Stomach)”। अर्थात यहांँ भी इसको पेट, भूख, भोजन/अन्न को धारण/संग्रह करने का प्रतीक, फसल, भंडारण आदि से संबंधित माना गया हैं। यह मुख्यतया 3 तारों का समुह हैं। जिससे ‘स्त्री की योनि / जननांग’ वा ‘त्रिकोण’ जैसी आकृति बनती हैं; जो स्त्री की प्रजनन क्षमता, गर्भ धारण और सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक है।

भरणी नक्षत्र मेष राशि अंतर्गत अश्विनी से पूर्व दिशा की ओर 13° अंश 20′ कला से लेकर 26° अंश ४०′ कला तक के विस्तार क्षेत्र लिए हुए हैं। इसका नक्षत्र स्वामी – शुक्र, देवता – यम (मृत्यु के देवता / मृतात्माओं के कर्मानुसार पुनर्जन्म देने वाले / मरणोपरांत जीवात्मा के न्यायाधीश), जाति – चाण्डाल, योनि – गज / हाथी, योनिवैर – सिंह, मनुष्यगण, मध्यनाड़ी, रजोगुणी, क्षति कारक / नाशक, राजसिक, स्त्री नक्षत्र हैं। यह पश्चिम दिशा का स्वामी हैं। यह उग्र (क्रूर), अधोमुखी, मध्यलोचन वा मध्याक्ष नक्षत्र हैं। इसमें अग्नि संबंधी कार्य यथा हवन, बिजली से संबंधित कार्य, कीटनाशक का छिड़काव, धातुकर्म, उग्र कार्य यथा तंत्र-मंत्र क्रिया, दूसरों को क्षति पहुंचाना, शत्रु नाशक प्रयोग करना, छल-कपट करना, धोखा देना, मुकदमा/कानूनी लड़ाई, शत्रु नाश, आक्रमणात्मक रणनीति, प्रतियोगिता, युद्ध जैसी गतिविधियाँ, विघ्न डालना, पुरानी चीजों का त्याग, रिस्ट्रक्चरिंग, रिन्यूअल, गंभीर निर्णय, अस्पताल/क्राइसिस सेवा, अंतिम संस्कार या मृत्यु संबंधी कार्य, न्याय/धर्म से जुड़े निर्णय, कुछ स्रोतों में मछली बाजार खोलना या मछली पकड़ना, खेती-बाड़ी, फसल काटना (harvesting), भूमि से जुड़े कार्य, उर्वरता अनुष्ठान (fertility rites), यौन संबंध (amorous/sexual), प्रजनन स्वास्थ्य, फर्टिलिटी राइट्स, गर्भधारण से जुड़े अनुष्ठान, बच्चों की देखभाल या जन्म संबंधी कार्य, नक्षत्र स्वामी शुक्र के होने से, कला, संगीत, नृत्य, चित्रकारी, फोटोग्राफी, फिल्म/वीडियो एडिटिंग, अभिनय, मॉडलिंग, फैशन डिजाइनिंग आदि कार्य, उपवास (fasting), शुद्धिकरण अनुष्ठान, आत्म-अनुशासन, योग/प्राणायाम, तपस्या आदि कार्य सिद्ध होते हैं।

Bharani Nakshatra in Hindi & Planetary Effects

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ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Bharani Nakshatra Symbolic Description

भरणी नक्षत्र के देवता ‘यम’ वैदिक काल से ही प्रमुख देवता हैं। ऋग्वेद (10.10) में यम-यमी संवाद प्रसिद्ध है। भारतीय पौराणिकता अनुसार यम— न्याय और धर्म के राजा, कर्मफल देने वाले, धर्मराज हैं। ऋग्वेद (10.135) के अनुसार यम पहले मनुष्य थे जिन्होंने स्वेच्छा से मृत्यु स्वीकार की और पितृलोक के राजा बने। उन्होंने पितरों (पूर्वजों) का मार्ग दिखाया, इसलिए उन्हें पितृपति कहा जाता है। ये समय और मृत्यु के स्वामी काल / मृत्यु / अन्तक, श्राद्ध और पितरों के स्वामी हैं। 

यम सूर्य (विवस्वान) और संज्ञा (छाया/सरण्यु) के पुत्र हैं। उनकी जुड़वां बहन यमी (यमुना) हैं। यमी भाई (यम) से विवाह की इच्छा रखती है, किन्तु यम धर्म की रक्षा करते हुए यमी का विवाह प्रस्ताव अस्वीकार कर देते हैं। यह संवाद धर्म की सर्वोच्चता और निषिद्ध संबंधों का प्रतीक है।

यम के 14 नाम व उनके अर्थ  || 14 Names of Yama and their Meanings

स्मृति ग्रन्थों में यम के 14 नामों के वर्णन मिलते हैं; जो इस प्रकार हैं–

1• यम (नियंत्रक या बंधनकर्ता)

2• धर्मराज (धर्म के राजा, जो कर्मों का न्याय करते हैं)

3• मृत्यु (मृत्यु का स्वरूप)

4• अन्तक (अंत करने वाला)

5• वैवस्वत (सूर्यपुत्र वा विवस्वान के पुत्र)

6• काल (समय का देवता)

7• सर्वभूतक्षय (सभी प्राणियों का क्षय करने वाला)

8• औदुम्बर [औदुम्बर (गुलर की लकड़ी का दण्ड धारण करने वाले]

9• दघ्न / दध्न (दग्द्ध करने वाला / दण्ड देने वाला/पीड़ित करने वाला)

10• नील (नीले वर्ण का)

11• परमेष्ठी (परम स्थान वाला)

12• वृकोदर (भेड़िये जैसे उदर वाला)

13• चित्र (चित्र या लेखा रखने वाला)

14• चित्रगुप्त (चित्रगुप्त, जो कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं / यमराज के सहायक/मंत्री के रूप में प्रतिष्ठित)

[ श्राद्ध पक्ष में पितृतर्पण के समय इन 14 यमराजों का तर्पण करने के पश्चात हीं पितरों के तर्पण का विधान हैं। ‘यम तर्पण’ किये बिना पितरों को तर्पण करने पर, तिल-जल आदि तर्पण पितरों को प्राप्त नहीं होता, कारण कि समस्त मृतात्माएं यमराज के आधीन हैं। ]

कठोपनिषद् में नचिकेता-यम संवाद सबसे गहन कथा है। नचिकेता तीन वरदान मांगते हैं – पिता का क्रोध शांत करना, स्वर्गलोक की अग्निविद्या, और आत्मा-ब्रह्म का ज्ञान। यम पहले परीक्षा लेते हैं (लोभ, भोग आदि), फिर अमरत्व, आत्मविद्या और ब्रह्मज्ञान का उपदेश देते हैं। यह संवाद मृत्यु को “अंत” नहीं, बल्कि “ज्ञान का द्वार” बताता है।

एक प्रसंग ऐसा हैं कि– सावित्री एक पतिव्रता स्त्री थी। उसके पति सत्यवान की मृत्यु हो गई। यमराज स्वयं सत्यवान की आत्मा लेने आए। सावित्री ने यम का अनुसरण किया और अपनी बुद्धिमत्ता, धर्म-ज्ञान तथा पतिभक्ति से यम को प्रभावित किया। यम ने उसे कई वरदान दिए (पिता का राज्य, संतान आदि), लेकिन अंत में सत्यवान के जीवन को वापस लौटाना पड़ा क्योंकि सावित्री ने चतुराई से वर मांगा कि “मैं सत्यवान से पुत्र प्राप्त करूँ”। 

इसी प्रकार रुरु और प्रमद्वरा की कथा महाभारत के आदिपर्व में आता हैं। जिसमें रुरु अपनी प्रेमिका, प्रमद्वरा को यम से वापस पाने के लिए आधा आयु दान करते हैं। यम दया दिखाते हैं। और रुरु को प्रमद्वरा वापस लौटा देते हैं।

चित्रगुप्त उनके दरबार में कर्मों का लेखा रखते हैं। अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म का निर्णय यम ही करते हैं। भागवत पुराण में वे बारह महाजनों (भागवताचार्यों) में से एक हैं और विष्णु के परम भक्त माने जाते हैं।

वैदिक काल में यम का सुंदर, हँसमुख, आकर्षक राजा (पूर्वजों के रक्षक) के रूप में वर्णन हैं। पौराणिक यम हरे-काले वर्ण के, लाल आँखें, लाल वस्त्र, भैंस पर सवार, हाथों में पाश (आत्मा बाँधने का फंदा), दण्ड (दंड देने वाली गदा/छड़ी) और तलवार लिए एक भयंकर उग्र पुरुष के रूप में वर्णित हैं। इनके संदेशवाहक कौए, कबूतर और चार आँखों वाले दो कुत्ते (यमलोक के द्वारपाल) हैं। अतः ये मृत्युलोक में ये यम के मूर्त प्रतीक हैं। इनकी पत्नी, धूमोर्णा (धूम्रवर्णी) को माना गया हैं।

ये रूप परिवर्तन (transformation) – सौम्य से भयंकर, जीवन से मृत्यु पुनः कर्मानुसार नवजीवन, अर्थात सृष्टि के लिए आवश्यक चक्र ‘मृत्यु’ के प्रतीक हैं। क्योंकि मृत्यु भी जीवन चक्र का आवश्यक अंग है। इसके अतिरिक्त ये गर्भाधान, धर्म युक्त नैतिकता के आधार के साथ-साथ उग्रता और कठोरता पूर्वक अनुशासनप्रियता के भी प्रतीक हैं। बावजूद इसके कर्म, अनुशासन और पूर्ण समर्पण पर वे दयावान अर्थात शुभता भी देने वाले हैं।

पतंजलि योगसूत्र में अष्टांग योग का प्रथम अंग “यम” (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह)। यम इन पाँच नियमों का पालन करने वाले प्रथम पुरुष माने जाते हैं।

अतः भरणी नक्षत्र के नक्षत्र देवता यम के होने से भरणी नक्षत्र में भी उपरोक्त वर्णित गुण-दोष होते हैं।

भरणी नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Bharani Nakshatra

रचनात्मकता, कलाप्रियता, संगीत और कला में रुचि, दृढ़ निश्चयी, धुन के पक्के, साहसी, स्वतंत्र, महत्वाकांक्षी और नेतृत्व क्षमता, सौंदर्यप्रिय, आकर्षक व्यक्तित्व, मृदुभाषी और मिलनसार, ईमानदार, सत्यप्रिय, परिवार और मित्रों के प्रति वफादार, कार्यों को शीघ्रता से पूरा करने की क्षमता, कट्टरता, अन्याय के विरुद्ध बिगुल फूंकना, क्रांतिकारी रवैया, विश्वसनीयता, चिंतामुक्त, रहस्यों में रुचिवान्, लेखन, साहित्य, अहंकार, विलासिता, जीवन-मरण के गहरे अनुभवों को समझने वाली गहन दृष्टि, नारी गुणों यथा पोषण, पालन, सहनशक्ति, आकर्षण, क्रोध, अस्थिरता या बेचैनी, जिद्दी, अधीर, चंचल, यौन संबंधों या भोग में अत्यधिक रुचि, ईर्ष्या/जलन, बलिदान या भय का भाव, गहरे भावनात्मक संबंध, लेकिन जुनून और नियंत्रण की चुनौतियां, कर्म-भोग, न्याय और परिवर्तन की समझ, निरंतरता, कठिन श्रम, तपस्या, परिवर्तन आदि में रुचि, कला, संगीत, फिल्म, फैशन, चिकित्सा (विशेषकर स्त्री रोग विशेषज्ञ), न्याय, कृषि, रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि, नेतृत्व भूमिकाओं में अच्छा प्रदर्शन आदि भरणी नक्षत्र की विशेषताएं हैं।

बृहत्संहिता में वराहमिहिर का कथन हैं कि— रक्तमिश्रित मांस खाने वाले, क्रूर, वध, बन्धन और ताड़न करने वाले, भूसी वाले धान्य, नीच कुल में उत्पन्न, उदारता आदि गुणों से रहित ये सब भरणी नक्षत्रगत पदार्थ है। इस नक्षत्र में उत्पन्न, अपने द्वारा आरंभ किये गए कार्य को पूरा करने वाला अर्थात जिस कार्य को करने का बीड़ा उठा ले, उसे अवश्य पूरा करे, सच बोलने वाला, स्वस्थ और सुखी होता हैं। 

जातक पारिजात का कथन हैं कि— भरणी नक्षत्रोत्पन्न जातक विकल, परस्त्रीगामी, क्रूर, कृतघ्न, व धनवान होता हैं।

पृथुयशस ‘होरासार’ में कहते हैं कि— भरणी नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति शांत स्वभाव वाला, विचारों में अस्थिर, स्त्रियों के प्रति आकर्षित, राजा का प्रिय (राजप्रिय) और मध्यम स्थिति वाला होता है।

लग्न में भरणी नक्षत्र के फल || Bharani Nakshatra Result in Ascendant

यदि लग्न में भरणी नक्षत्र हो तो जातक स्वस्थ, तेजस्वी, बहादुर, सुन्दर, सत्यभाषी, वचन का पक्का, ऊपर से कठोर भीतर से दयावान, अनुशासनप्रिय, परिवर्तन का समर्थक, प्रेम करने वाला, सहृदय, विपरीत लिंगीयों का प्रिय, आलोचना सुनने वाला, विलासितापूर्ण जीवन में रुचिवान्, नैतिक मूल्यों का धनी, कलात्मक कार्य क्षेत्र में अग्रणी, रचनात्मक कार्यों में निपुण, सौन्दर्यदर्शी, उद्यमी, उग्र, हँसमुख, रहस्यमय विद्याओं यथा तंत्र-मंत्र, अभिचार कर्म यथा मारण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि में अनुसंधान करने में रुचि वाला, लेखन, ललित कला, नृत्य-संगीत आदि में दक्ष, बुद्धिमान, धैर्यवान, नीतिज्ञ, संपत्तिवान, अल्प संतत्तिवान, उग्र, क्रूर, विनाशकारी, अहंकार से युक्त, सलाहकार वा मार्गदर्शक, परस्त्रीगमन वा वैश्याओं से संबंधों के कारण बदनाम, नशीले मादक द्रव्य और स्त्रियों के लिए लोलुप, सामान्य विश्वसनीय होते हैं। 

भरणी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष (Qualities of Male Chart/ Horoscope born in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक मध्यम कद-काठी के, ऊंचे माथा, अण्डाकार चेहरा, अल्प रोम, घने घुंघराले बाल, सुन्दर बड़ी आँखें, पंक्तिबद्ध दाँत, लम्बी गर्दन, लम्बे नाक, चौड़ा सुकोमल कंधा, गुलाबी गौरवर्णी होता हैं। सत्यवादी, अनुशासनप्रिय, निष्ठावान, निडर, सहृदय होने के बावजूद भी ये क्रूरतापूर्ण व्यवहार, स्पष्टवादिता, निष्ठुरता व स्वालप अहंकारी वृत्तियों के कारण सदैव किसी के प्रिय नहीं रह पाते। मैत्री संबंध ज़रुरतों से शुरू होकर ज़रुरतों पर टिकी रहती हैं। पुनः धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। जातक कुटनीतिज्ञ, रचनात्मक, परिजनों व मित्रों का मददगार, कभी-कभी मित्रों का भी अहित करने वाला होता हैं। जातक अल्प भोजन करने वाला किन्तु स्वाद लोलुप होता हैं। कृषि कार्य, बागवानी, अग्नि से संबंधित व उग्र कार्य करने में रुचवान, शिशु व महिला रोग विशेषज्ञ, प्रसूति विशेषज्ञ, आईवीएफ विशेषज्ञ, पशु चिकित्सा, अंत्येष्टि सेवाए, शवगृह प्रबंधन, वसीयत नियोजन, वकील, कानूनी सलाहकार, न्यायाधीश, पुलिस, अपराध जांच, जेल प्रबंधन, फिल्म, संगीत, नृत्य, अभिनय और मॉडलिंग, फैशन डिजाइनिंग, सौंदर्य प्रसाधन, फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग आदि क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पत्नी सद्गुणी, सुन्दर व गृहकार्य में दक्ष होती हैं। जातक के परस्त्री में रुचि के कारण वैवाहिक जीवन में यदा-कदा क्लेश होते रहते हैं।

भरणी नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष (Qualities of Female Chart/ Horoscope born in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र में उत्पन्न जातिका सुन्दर, हठी, चुलबुली होती हैं। शारीरिक सुंदरता चरम पर होती हैं; अर्थात शारीरिक बनावट (Figure) बहुत अच्छी होती हैं। चेहरा सामान्य, दाँत में दोष (या तो ऊंचा या उबड़-खाबड़) होता हैं। जातिका साफ विचारों वाली, आधुनिक खुले दिमाग वाली, अपने कार्य में दक्ष, सम्मानित, मधुर, मिलनसार, सभी का सम्मान करने वाली, परिहास करने पर आक्रामक, क्रोध में भारी क्षति पहुंचाने वाली होती हैं। पति के साथ मित्रवत संबंध होते हैं। रहस्यमयी बुद्धि व मौकापरस्त होने से ससुराल पक्ष से इनकी नहीं बनती, तथापि अल्प समय में ससुराल में स्वयं को स्थापित करके परिवार की मालकिन बनने की क्षमता होती हैं। ये क्षमाशील नहीं होती, अर्थात माफ़ नहीं करतीं, इनमें बदले की भावना होती हैं। नर्स, एयरहोस्टेस, प्रसुति विशेषज्ञ, सौन्दर्य चिकित्सा, दंतरोग विशेषज्ञ, इन्टीरियर डिजाइनर  आदि क्षेत्रों में सफल होती हैं।

प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Bharani Nakshatra Subtel Result Variations in all 4 Charan (Padas)

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण (Bharani Nakshatra First Charan/ Padas) : मेष राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से 16° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र भरणी का प्रथम चरण हैं। नवमांश सिंह होने से इस चरण का स्वामी सूर्य हैं। भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण पर मंगल-शुक्र-सूर्य का संयुक्त प्रभाव हैं। सृजनात्मक क्षमता, पुनर्जीवन, आक्रोश, दृढ़ प्रतिज्ञा, आत्मकेंद्रित, स्वाधिकार, पराक्रम युक्त श्रृंगार, स्वाभिमान युक्त कार्यक्षेत्र इस चरण के गुण हैं। 

भरणी के इस (प्रथम) चरण में उत्पन्न जातक अति पराक्रमी, शारीरिक सौष्ठव वाला, प्रतापी, क्रूरता पूर्वक देखने वाला, लम्बी मोटी नासिका वाला, घने सीधे बालों वाला, घनी भृकुटी, छोटे ललाट, चौड़ा सीना, घमण्डी, निष्ठुर, शत्रुंजय, विशाल हृदय, न्यायप्रिय, बलपूर्वक सबको साधने वाला, चोर-डाकू, मध्यम गति से गंभीरता पूर्वक चलने वाला होता हैं। सुसंस्कृत व शिक्षित होने से लोक कल्याण से संबंधित कार्य जिससे समाज का निर्माण होता हैं, यथा शिक्षक, गणक, न्यायिक अधिकारी, कैबिनेट मंत्री, बाल सुधारगृह प्रबंधक, नीति निर्माता, कृषि व बागवानी में अनुसंधानकर्ता आदि से संबंधित कार्यों में रुचि होती हैं।

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण (Bharani Nakshatra Second Charan/ Padas) : मेष राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से 20° अंश तक का विस्तार क्षेत्र भरणी नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश कन्या होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण पर मंगल-शुक्र-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। प्रबंधन व संगठन से जुड़े कार्य, जनसेवा, डिजिटल नवीकरणीय संसाधन, प्रेम करना, विपरीत लिंगीयों के प्रति सहज आकर्षण रखने वाला, विनोदी स्वभाव, परोपकार की भावना व कामुकता इसके गुण हैं। 

इस चरण में जन्मा जातक सांवले रंग का, मध्यम कद-काठी का, चंचल नयन, फुर्तीला, कमर से निचले हिस्से पतले, ऊपरी हिस्से अपेक्षाकृत चौड़े, हथेली व पैर का पंजा चौड़ा, संशयी, बातुनी, भयातुर, बुद्धिमान, आस्तिक, धनवान होता हैं। नृत्य-संगीत, चित्रकारी, मुर्तिकारी, आर्ट गैलरी, गिफ्ट्स, डिजिटल सर्विसेज, उर्वरक वा कीटनाशक से संबंधित व्यवुकसाय आदि क्षेत्रों में सबल होता हैं 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण (Bharani Nakshatra Third Charan/ Padas) : मेष राशि अंतर्गत 20° अंश से 23° अंश 20′ कला तक के विस्तार क्षेत्र, भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण का क्षेत्र हैं। इस चरण का नवमांश ‘तुला’ होने से इस चरण का स्वामित्व ‘शुक्र’ को प्राप्त हैं। अतः भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण पर मंगल-शुक्र-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। सफल व्यवसाय, भोगवृत्ति, योग व फिटनेस, दीर्घायुष्य और अत्यधिक कामेच्छा इसके मूल गुण हैं।

भरणी के इस चरण में उत्पन्न जातक सुन्दर, हृष्ट-पुष्ट, उग्र, वाचाल, जोशीला, हिंसक, घमण्डी, अपराध करने को उद्यत, योग, व्यायाम, फिटनेस प्रेमी, क्रूर मंत्रों का जाप करने वाला, व्यवसाय कुशल उद्योगपति, एक समय में दो या दो से अधिक कार्य करने वाला, महत्वाकांक्षी, अति कामुक, यौन क्रियाओं की लत वाला, व्याभिचारिणी स्त्री का पति अथवा संगी होता हैं।

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण (Bharani Nakshatra Fourth Charan/ Padas) : मेष राशि अंतर्गत 23° अंश 20′ कला से लेकर 26° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र भरणी नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। इस चरण का नवमांश वृश्चिक और चरण स्वामी मंगल हैं। अतः भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर मंगल-शुक्र-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। विस्फोटक उर्जावान, उग्र, समस्याओं में विचलित होकर रोने वाला, कलहप्रिय, हिंसक रतिक्रिया, प्राणी विज्ञान व शरीर विज्ञान, चुग़लख़ोरी, भेद जानने की उत्सुकता इस चरण के मूल गुण हैं।

इस चरण में उत्पन्न जातक कठोर चेहरे वाला, पिचके गाल, धँसें हुए आँखो वाला, रक्तिम-वर्णी, बालों व नखों में दोष वाला, हिंसात्मक गतिविधियों वाला, झूठा, दुर्जनों की संगति वाला, अहंकारी, शोध व अन्वेषण में रुचि वाला, शरीर विज्ञान का जानकार व रोगों का निवारण करने वाला, जाँच घर, फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (Forensic Medicine and Toxicology) विभाग या न्यायिक चिकित्सा विभाग, नार्कोटिक्स (Narcotics), सिनेमेटोग्राफी, डाक्यूमेंट्री फिल्म, spy agents आदि क्षेत्रों में Specialist Operators जैसे कार्यों में रुचिवान्, अत्यधिक मैथुन से जननांग में रोगों वाला होता हैं। कोई-कोई जातक धन कमाने व संग्रह करने में समस्याओं का सामना करता हैं।

भरणी नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Result of various Planets situated in different Charan/ Padas of Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो, जातक आत्मबली, स्वस्थ, हृष्ट-पुष्ट, प्रभावशाली, विद्वान, राजा के समान विलासी, सुखी, महंगें वाहनों वाला, तीव्र वेग से चलने वाला, दुष्यंत, विरोधियों का बलपूर्वक दमन करने वाला, धन-वंश से सम्पन्न, आक्रामक, यशस्वी, नेत्ररोग या आंँख पर चोट का निशान वाला, प्रशासनिक विभाग, एडमिनिस्ट्रेशन, डिप्लोमेट्स, सैन्य विभाग, वायुयान विभाग, अग्निशमन विभाग, ठेकेदारी, रत्नादि के व्यवसाय, ग्राम-प्रधान, सरपंच, खेती-बाड़ी, पशुपालन आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक फायरब्रांड राजनेता, परिजनों का हितैषी, पैतृक विरासत वाला, पत्नी से डरने वाला, समाज में कठोर, समाज का पथ-प्रदर्शक, धनिकों में अग्रगण्य, अपने कट्टर भाषणों से शत्रुओं की वृद्धि करने वाला, बदनामी से गर्वित, दृढ़प्रतिज्ञ, धन-धान्य व संतत्तियों से परिपूर्ण होता हैं। कुंडली में पंचम व सप्तम भाव सहयोगी रहें तो भरणी नक्षत्र का द्वितीय चरण प्रेम विवाह करवाने में सक्षम हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, ऑयल रिफाइनरी, कंटेनर, सौन्दर्य प्रसाधन, कन्सल्टेंसी बिजनेस, गायन-वादन, चित्रकारी, प्रेस, मीडिया, व्यंग्य लेखन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, वेब डेवलपमेंट आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता हैं। जुआ-लॉटरी, निवेश, दूर के रिश्तेदारों, पत्नी (ससुराल) वा मित्रों की संपत्ति भी प्राप्त होने की संभावना होती हैं। बवासीर, भगंदर, गले का ट्यूमर, जीभ से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक रजोगुणी, सुन्दर, हँसमुख, अनुरागी, बड़ी आँख, लम्बी नाक, लम्बी ठोढ़ी, फूले हुए गालों वाला, कलात्मक अभिरुचि वाला, बुद्धिमान, निर्णय लेने में देरी करने वाला, अपने जनों से अपमानित, अनियंत्रित खर्चीला, कामातुर, उतावला, डरपोक, कलही, झगड़ालू, वैवाहिक संबंधों में बेईमान, रिश्तों में बदनाम होता हैं। उच्च शिक्षित, विरासत में घने संबंधियों को पाने के बावजूद भी योग्यता अनुसार सफल नहीं होता। इस कारण आजीविका से संबंधित कर्मों के संबंध में चिड़चिड़ा होता हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के चौथे चरण में सूर्य हो तो जातक बाल्यकाल से संघर्षरत, अभिभावक हीन, निर्धन, समाज द्वारा प्रताड़ित, परिवार से दूर, मान-सम्मान हीन, दुःखी, अनेक रोग व कष्टों से पीड़ित, दुर्घटनाग्रस्त होता हैं। प्रेम संबंधों व जीवनसाथी द्वारा रिश्तों में विश्वासघात मिलता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Sun located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित सूर्य पर—

चन्द्रमा की दृष्टि हों तो जातक सौम्य, आकर्षक, प्रजाजनों का प्रिय, दयावान, नौकर-चाकर से युक्त, उत्तम वाहन वाला, जन कल्याणकारी, लोकनायक होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक युद्धकला में निपुण, शासनिक-प्रशासनिक विद्या में दक्ष, क्रूर, तानाशाह, बहुत से राज्यों का विजयी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक प्रकाण्ड पण्डित, शास्त्रज्ञ, नीतिज्ञ, विद्वानों द्वारा पूज्य, अचल संपत्ति वाला, दान-धर्म यज्ञादि कर्म करने वाला, किसी संगठन का प्रमुख, सफल राजनीतिज्ञ वा प्रशासनिक अधिकारी होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो पराक्रमी, क्रोध की अधिकता वाला, परिजनों से मतभेद, कार्यालय संबंधी कार्यों में दक्ष, कम मित्रों वाला, असाध्य बिमारियांँ का शिकार होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो अभिमानी, सत्ता लोलुप, प्रजा का शोषण करने वाला, जन विरोधी, छलिया, अनैतिक वृत्ति वाला, सुरा-सुंदरी का शौकीन होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक एकांतप्रिय, भौतिकता के प्रति उदासीन, धर्मनिष्ठ, पत्नी वा जीवनसाथी के प्रति अपराधिक गतिविधियों वाला, हिंसक, समाज में आदरणीय, प्रभावशाली, नेत्ररोगी होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक चंचल, उद्यमी, मेहनती, सुखी, वर्तमान में जीने वाला, समाज में आदरणीय, प्रभावशाली, मित्रों से युक्त, नेता, मंत्री, अधिकारी होता हैं। आँखें बड़ी, उन्नत ललाट, गाल पर तील अथवा निशान होता हैं। अनियोजित खर्च के कारण जीवन में एक बार भयंकर घाटा और दरिद्रता देखता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक चंचल, मधुरभाषी, मित्रों में प्रधान, विचारशील, दार्शनिक बुद्धि, साज-सज्जा का शौकीन, मिष्ठान व चटपटे पकवानों में रुचि रखने वाला, ख़ुश मिज़ाज, देव, गुरु, ब्राह्मणों का पूजक, धर्मात्मा, विनोदी, व्यवसाय करने में निपुण, कार्यस्थल पर सम्मानपूर्वक पदोन्नति करने वाला, धन के प्रति आसक्त, लेखनकला में सिद्धहस्त, विद्वान, बहुमुखी प्रतिभा का धनी होता हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक अत्यंत मनमोहन सुन्दर, बड़ी आँखों वाला, ऊंचे नितम्ब, सुकोमल शरीरी, ऊंचे वक्षस्थल वाला, संपत्तिवान, प्रचुर यौनसुखी, भांति-भांति प्रकार के मदिरा पान करने का शौकीन, दान-पुण्य करने में अग्रणी, शरीर के प्रति विशेष लगाव रखने वाला, परिजनों का प्रिय, संपत्तियों से सुखी, निष्ठावान पत्नी/ जीवनसाथी से सुखी, किसी-किसी जातक के के दो विवाह होते हैं, अथवा विवाहेत्तर संबंधों में होता है। 

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल(Result of Moon Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो, जातक कुरुप, पिचके बेडौल चेहरे वाला, शक्तिहीन, व्याभिचारी,  नीच स्त्रियों में रत,  प्रेम व वैवाहिक जीवन में असफल, मनोरोगी, अपराधिक वृत्तियों वाला, भाग्यहीन, नाना प्रकार के रोगों से ग्रस्त, जल से या शस्त्र से अकाल मृत्यु के योग बनते हैं। 

भरणी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Moon located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित चंद्रमा पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक निर्मम, विद्रोही, परिवार से मतभेद वाला, धार्मिक आचरण वाला, वस्त्राभूषणों का शौकीन, मिष्ठान प्रिय, दानशील, छोटे-मोटे अपराधों के लिए राजदण्ड से पीड़ित होता हैं। स्त्री लोलुपता के कारण समाज में बदनाम होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक पराश्रित, कठिन परिश्रम करने को विवश, जीवनसाथी द्वारा हिंसा का शिकार, अग्नि, शस्त्र, शत्रु आदि से भयभीत, बाल्यकाल में हीं शोषण का शिकार होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक विशेष चंचल, उत्साही, व्यवसाय – वाणिज्य में निपुण, सफल वक्ता, प्रसन्नचित्त, कीर्तिमान, सद्गुणी, धनवान्, अपने प्रेयसी का प्रिय, रतिक्रिया में निपुण होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक गौरवर्णी, उन्नत मस्तक, धनवान्, गौरवशाली, शिक्षा वा शैक्षणिक संस्थानों में अधिकारी, संपत्तिवान, दानशील, विद्वान, धार्मिक, अपने कार्यों में दक्ष, समाज में सम्मानित, विशाल हृदय, सुसंस्कृत विदुषी स्त्री का पति होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक दिव्य कांतिमान, आकर्षक, सौम्य, प्रचुर यौनसुखी, धनवान्, आज्ञाकारी संतान वाला, रुपवती पत्नी का पति, उत्तम भोजन व विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला, भूपति होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो परिपक्व, क्रूर, अतिवादी, धन कमाने को उद्यत, परिश्रमी, अपने से बड़ी उम्र की स्त्री में अनुरक्त, दुष्ट कर्म में रत, मध्यम स्वस्थ, सेवक होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो मलीन, नशेड़ी, अकारण विवाद करने वाला, अपशब्द युक्त भाषा वाला, कौटुंबिक व्याभिचार करने को इच्छुक, निर्धन होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जीवन के प्रति उदासीन, योग-जप करने वाला, परिश्रमी, ईश्वर भक्त, परिजनों से त्यक्त, नीच जनों का सेवक, अल्पाहारी, दरिद्र होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक क्रोधी, उद्विग्न, हिंसक, युद्ध कला में निपुण, उत्पीड़क, दूसरों का अधिकार छीनने वाला, पित्ताशय के रोग से पीड़ित, दुर्जनों की संगति वाला, दस्यु, धोखा देने वाला, निर्दयी होता है। लग्न बली न हो तो इस चरण में मंगल जातक को मध्यमायु देता हैं। 42 से 50 के उम्र में ज्वर, वाहन वा अग्नि दुर्घटना अथवा धारदार हथियार से मृत्यु प्राप्त होने की संभावना होती हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक गौरवर्णी, साधारण बलवान, चुस्त-दुरुस्त, व्यंग्यात्मक अथवा आक्रोशित शैली में बातें करने वाला, धन-संपदा से युक्त, मिलनसार, तार्किक उदाहरण के साथ बातें करने वाला, मजाकिया, लेखन, प्रकाशन आदि क्षेत्रों में सम्मानित, ज्ञानियों में आदरणीय प्रभावशाली व्यक्तित्व का धनी होता हैं। ल्यूकोडर्मा, कुष्ठ आदि विभिन्न चर्मरोगों व गुप्तांगों से संबंधित रोग दीर्घकालिक होते हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक साधारणतया नौकरी पेशा वाला, तुनकमिजाज, परिवार व शिक्षित जनों का प्रिय, कर्तव्यनिष्ठ, प्रियता से बोलने वाला, साधारणतया पूजा-पाठ करने वाला अर्थात धार्मिक, कामक्रीड़ा में निपुण, कामातुर, दरिद्र अथवा कठिनाई से धन संग्रह करने वाला होता हैं। 

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक सुन्दर, बलवान, उत्तम स्वास्थ्य से युक्त, ऊंचे पहुंच वाला, अपने विचारों का कट्टर, निडर, कलहप्रिय, युद्ध कला में निपुण, उद्विग्न, ईर्ष्यालु, जिद्दी, वक्त का पाबंद, शत्रुओं पर विजयी होता हैं । चिकित्सा, शस्त्र निर्माण, पशुपालन, मत्स्य पालन, जड़ी-बूटी से संबंधित कार्य, मधुमक्खी पालन, औषधियों के विनिर्माण, यौन रोग विशेषज्ञ, विदेश मंत्रालय से संबंधित नेतृत्व वा अधिकारी आदि क्षेत्रों से संबंधित होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mars located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक बलवान, संघर्ष से प्रतिष्ठित, परिजनों का हितैषी, परंपरावादी, देवताओं व पितरों का पूजक, मातृ-पितृ भक्त, जिम्मेदार, सैन्य, रक्षा, पुलिस आदि सेवा में उच्चस्तरीय अधिकारी वा दण्डपाल होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक हिंसक, उत्पीड़क, दूसरों की संपत्ति व स्त्री पर कुदृष्टि रखने वाला, धनवान्, निवेश से लाभार्जन करने वाला होता हैं। 

बुध की दृष्टि हो तो बड़बोला, अहंकारी, झड़प करने की आदत वाला, पशुधन का क्रय-विक्रय करने वाला, परस्त्रीगामी, चर्मरोगी वा रक्तविकारी होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो बलिष्ठ, प्रभावशाली, समाज का शासक, धर्मात्मा, क्रोधी, पुरोहित कर्म करने वाला, दान-पुण्य से लाभान्वित, विशाल हृदय होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो श्यामलवर्णी, परिवार का मुखिया, नौकरी पेशा करने वाला, सम्मानित, रतिक्रिया का लोभी, धन संग्रह करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो कृशकाय, चतुर, क्रोधी, बिजली या मशीनों का जानकार, खनन, भारी उद्योग, रंग उद्योग, चमड़ा उद्योग आदि से धनी, पत्नी वा जीवनसाथी से मतभेदों वाला होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक संक्रामक रोगों से ग्रस्त, कम बालों वाला, दिखावा करने वाला, क्रूर, आततायी, हत्या आदि कर्म करने को उद्यत, भयंकर अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जमींदार, प्रभावशाली, सेनानायक, स्वजनों का प्रिय, आक्रामक, परिवार में कलह करने वाला, तानाशाह, ईर्ष्यालु होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक दुबला-पतला, छोटे कद-काठी का, गोरा, उद्वेलित, जिद्दी, कलहप्रिय, चरित्रहीन, जुआ सट्टा आदि का लत वाला, मनोरंजन प्रिय, स्त्री सुख का लोभी, गाली-गलौच करने वाला, सौन्दर्य प्रेमी, वैश्याओं पर धन लुटाने वाला होता हैं। ठेकेदारी, डिजाइनर, बागवानी, फर्नीचर व्यवसाय, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इत्र व्यवसाय, शिक्षा के व्यवसाय, राजस्व, बैंकिंग, लोन विभाग आदि क्षेत्रों में सफल होता हैं। 

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक सुन्दर, मोहक, चिकनाई युक्त काया वाला, ख़ुशमिज़ाज, धनवान्, सदाचारी, अमृत युक्त संभाषण करने वाला अर्थात मीठा बोलने वाला, परोपकारी, दयावान, शास्त्रों का जानकार, टीका लिखने वाला, अच्छा वक्ता, मुर्तिकला, शिल्पकला आदि का जानकार, सबके लिए कल्याणकारी होता हैं। भरणी के द्वितीय चरण में बुध जातक को कलाओं का ज्ञाता, कुटनीतिज्ञ, घोटालेबाज, शरीर पर निशान वाला, राजनेता, जनता का सेवक, शराब का शौकिन होता हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक सुकोमल, सुन्दर, दीर्घायु, हँसमुख, भाग्यशाली, अधिक मित्रों वाला, कला-संस्कृति का पोषक, साहित्य प्रेमी, विपरीत लिंगी मित्रों से सहज सहयोग प्राप्त करने वाला, औषधि वा सौन्दर्य प्रसाधन के कार्य से लाभान्वित होता हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक क्रूर शक्ल-सूरत वाला, व्यर्थ प्रलाप करने वाला, बड़बोला, स्वमित्रों व परिजनों का अहित करने वाला, रक्तविकारों व चर्म रोग से पीड़ित, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, अधिवक्ता, स्टेज शो का वक्ता, फिल्मी वा नाटक आदि में डायलॉग लिखने वाला, धनवान्, शरीर पर घाव, दुर्घटना अथवा शल्यक्रिया के निशान, नस व तंत्रिकाओं से संबंधित दोष होते हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mercury located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित बुध पर यदि —

चन्द्र की दृष्टि हो तो जातक वाक्पटु, नृत्य-संगीत कला संस्कृति में रुचिकर, फिल्म व नाटक में नायक, रुपवान, भूमि-भवन का लाभी, उन्नतिशील मित्रों वाला, स्नेहशील स्त्रियों के सानिध्य वाला, धनवान्, उत्तम वाहन से युक्त, स्वर्ण आदि बहुमूल्य धातुओं का संग्रहकर्ता होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो राजस्व, शासन-प्रशासन में उच्चस्तरीय अधिकारी, व्यवसायिकों का नेता, उग्र, अग्नि से संबंधित वस्तुओं का विक्रेता, उत्तम शारीरिक सौष्ठव वाला होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो विवेकवान, विनोदी, सभ्य, सुसंस्कृत, मनोनुकूल पत्नी व संतान से युक्त, धनी, कामी, अचल संपत्तियों का स्वामी होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो परिपक्व, रोगी, प्रेम से वंचित, वैश्यावृत्ति में लिप्त, कठोर कर्म करने वाला, दास वृत्ति में संलिप्त, वृद्धा स्त्री से संभोग करता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक महा चालबाज, भ्रमणशील, मायावी, द्विअर्थी संवाद करने वाला, नक़ली आभूषणों का विक्रेता, बालकों का शोषण करने वाला, कागज़ व प्लास्टिक के फूलों – गुलदस्तों का व्यापारी होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो धर्मशाला, प्याऊ, मठ आदि का निर्माता, उपदेशक, कथावाचक, जंगलों व पहाड़ों में भ्रमणशील, अल्पकालिक संबंधों वाला, शवगृह कर्मचारी, श्मशानवासी होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक बलवान, हृष्ट-पुष्ट, स्वस्थ, धार्मिक, सहिष्णु, शास्त्रोक्त वचन बोलने वाला, तीर्थाटन करने का इच्छुक, मातृ-पितृ भक्त, राज्यमान, सलाहकार, देव, गुरु, साधु, ब्राह्मण आदि का आदर करने वाला, उपदेशक, विलासी, धनी, समाज में आदरणीय होता हैं। मोटापा व चर्बी से संबंधित शारीरिक दोष होने की संभावना होती है; व वृद्धावस्था में मतिभ्रम हो सकता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक चंचल, सुन्दर, तार्किक, अच्छी बौद्धिक कौशल वाला, वस्त्राभूषणों का शौकीन, दयालु, मित्रों में सम्मानित, ग्राम पंचायत अधिकारी, सरपंच, न्यायिक अधिकारी, विवादास्पद मुद्दों का निपटारा करने का गुण होता हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक कोमल अंगों वाला, दीर्घ शरीरी, लम्बी आयु वाला, मनमोहक सुंदर, बल और वीर्य से युक्त, प्रतापी, तेजस्वी, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त, धर्मात्मा, नीति नियमों का जानकार, वेद विशारदों में अग्रणी, अनेक स्त्रियों का स्वामी (यदि स्त्री हो तो, अनेक पुरुषों की स्वामिनी) होता हैं। समय-समय पर शत्रुओं से अरिष्ट की संभावना होती हैं।

Note :- अनेक स्त्रियों का स्वामी/ अनेक पुरुषों की स्वामिनी का तात्पर्य पति वा पत्नी नहीं, वरन् उनको रोजगार देने वाला/वाली, उनका पालक होना हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक बलवान, नीच वृत्तियों वाला, दुष्ट प्रकृति, बल व पद का दुरूपयोग करने वाला, वामपंथ के तंत्र-मंत्र का साधन करने वाला, निर्लज्ज, दुष्ट स्त्रियों का स्वामी, अनेक रोगों से पीड़ित होता हैं। 

भरणी नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Jupiter located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि —

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक दिव्य कांति वाला, ओजस्वी, समाजसेवी, पथ-प्रदर्शक, ज्योतिषी‌ वा गणक, सत्यवादी, महिलाओं का सम्मान करने वाला, देवता-गुरुओं का पूजक, मूल्यवान वस्तुओं का स्वामी होता हैं। धन व सामर्थ्य का सामाजिक कल्याण के लिए खर्च करने वाला होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो सफल, सुधर्मा, नीतिज्ञ, भावुक, दयावान, मित्रों का उद्धारक, सज्जन जनों का प्रिय, दानशील, वीर, धैर्यवान, पुजारी, धर्मगुरु, समृद्ध मठ का मठाधीश होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो खर्चीला, गर्वित, अहंकारी, शासन वा प्रबंधन में उच्च पदासीन, धनवान्, अनेक जनों का शासक वा नियंत्रणकर्ता होता हैं। यदा-कदा महिला कर्मचारियों से प्रेम-संबंधों में उनका शोषण करता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक असत्य भाषण करने वाला, क्रूर वचन बोलने वाला, सदैव युद्ध करने को उतारू, अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, आलोचक, सलाहकार पाखंडी, अनेक रमणिक स्त्रियों का भोग करता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो उच्च कोटि का विद्वान, विलासी, हृष्ट-पुष्ट, कामुक, रतिप्रिय, स्वस्थ, धन-धान्य से परिपूर्ण, भौतिक सुखों के प्रति आसक्त, उत्तम वाहन से युक्त, नौकर-चाकर से युक्त, प्रचुर लैंगिक सुख वाला होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कुटिल, आलस्यपूर्ण आचरण वाला, परिजनों में द्रोह करने वाला, कर्महीन, नैतिक आचरण से युक्त, गली-गली घूम-घूम कर वस्तुओं का विक्रेता, याचक, देवता, ब्राह्मण आदि की संपत्तियों का हरण करने वाला होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो आडंबरकारी, शैक्षणिक संस्थान, मंदिर, मठ आदि में दुष्कर्म करने वाला, लोभी, पाखण्ड युक्त कर्म करने वाला, दुराग्रही होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो पूजा-पाठ धर्म-कर्म जानने वाला, वेद व शास्त्रों के अनुरूप कथन करने वाला, ध्यान व योग में अभ्यस्त, कर्मकांड करने वाला, किन्तु व्यक्तिगत जीवन में दुराचारी होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक श्यामवर्णी वा रक्तिम वर्ण वाला, कला संस्थान का अधिकारी, म्यूजिक, नृत्य, नाट्यशास्त्र आदि का ज्ञान देने वाला, वाद्ययंत्रों वा नाटक आदि से संबंधित वस्तुओं का व्यवसायी, प्रसन्नचित्त, कामकला मे निपुण, रतिक्रिया में लिप्त रहता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक चंचल, सुमुख, विद्वान, नीतिज्ञ, भावनात्मक निर्णय लेने वाला, स्त्रियोचित आचरण वाला, घूमने-फिरने का शौकीन, खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने वाला, चटपटे भोजन का प्रेमी, रंग-बिरंगे कपड़ों का शौकीन, जिद्दी, नटखट होता हैं। 

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक मध्यम कद-काठी का, ठोस संगठित शरीर वाला, रत्नाभूषणों का शौकीन, अच्छे केश वाला, अधिक मित्रों वाला, धनवान्, प्रचुर यौनसुखी, दान-पुण्य यज्ञादि कर्म करने वाला, उत्तम वाहन भूमि-भवन से पूर्ण, विपरीत लिंगीयों का प्रिय, अनेक प्रेम संबंधों वाला, विवाहेत्तर संबंध में भी होने की संभावना होती हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक जल्दीबाज़, परदेसवासी, दानशील, मध्यम सुन्दर, धनवान्, कृषि कार्य व नर्सरी आदि में रुचि वाला, प्रकृति प्रेमी, विपरीत रति करने वाला, अति कामुक, हिंसक सम्भोग में रुचिवान् होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Venus located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि —

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक दिव्य आकर्षण से युक्त, सुकुमार, सौम्य, समाज में उच्च स्थान प्राप्त सम्मानित, धनी, वाहन सुख से युक्त, मधुरभाषी, स्त्रियों वा विपरीत लिंगीयों का प्रिय, तीर्थाटन करने वाला, सजग, दुराचार के कारण बदनामी होती हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक आक्रोशित, उद्विग्न, यात्रा प्रेमी, दुर्जनों का संगी, वैश्यागामी, पराई स्त्री पर धन खर्च करने वाला, आर्थिक स्थिति में भयंकर उतार-चढ़ाव देखने वाला, विचलित, रतिक्रिया में निपुण, बलात् हिंसक संभोग करने वाला होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक प्रखर विद्वान, शास्त्रज्ञ, पूजा-पाठ यज्ञादि कर्म करवाने वाला, ज्योतिषी, वेदांगो का जानकार, बहुभाषाविद्, म्लेच्छों के द्वारा भी पूजनीय होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक खनन व वन्य संपदा का अधिकारी, रिश्वतखोर, तस्कर, कालाबजारी करने वाला, स्वर्ण आदि बहुमूल्य धातुओं व रत्नों का संग्रहकर्ता, मिलनसार, उच्चस्तरीय अधिकारी व मंत्रियों का संरक्षण प्राप्त बाहुबली होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो विदेशी आय करने वाला, म्लेच्छों से मैत्री संबंध वाला, विमान यात्रा का शौकीन, परदेसवासी, नीच संगति वाला, मदिरा पान करने वाला, परस्त्रीगामी वा वैश्यागामी होता हैं। चर्म, नेत्र व नस से संबंधित व्याधियों से पीड़ित, त्रिदोष पीड़ित होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक विपुल संपत्तियों का स्वामी किन्तु अति खर्चीला, दार्शनिक विचारों वाला, धन को कम महत्व देने वाला, विश्वासी, मनमौजी, अल्प मैत्री वाला, विरोध में बेहतर प्रदर्शन करने वाला, रिश्तों में विश्वासघात करने वाला होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक परंपरावादी, धर्मग्रंथों के अध्ययन और उसी राह पर चलने वाला, परिजनों से द्रोह करने वाला, धन-धान्य कमाने को उत्सुक, पर्याप्त परिपक्व, उद्विग्न, चिंतित, चिड़चिड़ा स्वभाव का होता हैं। नेत्र, हृदय, श्वास, स्नायु तंत्र, भय आदि संबंधित मनोरोग की संभावना बनती हैं। कमर से ऊपरी हिस्से में अथवा सिर में घातक चोट, निशान वा ऑपरेशन की भी संभावना बनती हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक कृशकाय, चतुर, चीमर, स्वस्थ, सुन्दर, बुद्धिमान, अच्छी व्यवसायिक बुद्धि वाला, स्वतंत्रता प्रिय, उन्नतिशील, धर्मनिष्ठ, साहित्य में रुचिवान् अद्भुत विद्वान, काव्यात्मक शैली में बातें करने वाला, वक्ता, अधिवक्ता, न्यायिक वा प्रशासनिक क्षेत्र में अधिकारी, मैनेजमेंट, गणित, अर्थशास्त्र, कम्प्यूटर , इंजीनियरिंग आदि के क्षेत्र में प्रगतिशील होता हैं। आज़ाद ख्याल होने से ज्यादा जिम्मेदारियों का वहन नहीं करता, यौनांग व प्रजनन क्षमता से संबंधित व्याधियांँ पीड़ित करती हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल(Result of Saturn Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक सुन्दर, पराक्रमी, बाल्यकाल से उद्यमी, अनुभवी, यात्रा प्रेमी, सामान्य धार्मिक, युद्ध आदि वाद-विवाद में विजयी, स्त्री सुखी, परिजनों के सहयोग से वंचित, कम यौन क्षमता वाला, अनेक कष्टों व संघर्षों से सामना करते हुए जीवन में आगे बढ़ता हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल(Result of Saturn Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक उग्र, हिंसक, मानवता विरोधी, समाज द्वारा दलित समझा जाने वाला, क्रूर कर्मी, असमाजिक तत्वों का मित्र, चोर दस्यु तस्कर, अपराधिक गतिविधियों में रुचिवान्, आतंकवाद का समर्थक, दास वृत्ति करने वाला, घूमन्तु, पराधीन होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Saturn located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित शनि पर यदि —

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक पारंपरिक आजीविका के साधन वाला, रुढ़िवादी, परिजनों से मतभेद करने वाला, अल्प संतत्तिवान, पशुप्रेमी होता हैं। हड्डियों में चोट, घाव, सायटिका, कर्ण रोग व तंत्रिका संबंधी विकार होते हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो मलीन, विचलित, याददाश्त की कमी वाला, नीच जनों का सेवक, क्रूर, अशोभनीय कर्म करने वाला, निर्धन, डरपोक, मुंहचोर होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो कृतघ्न, स्वजनों का अहित करने वाला, सहयोगियों को धोखा देने वाला, कट्टरवादी, अनैतिक, धूर्त, सरकारी मुलाजिम, अविश्वसनीय, अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक शुद्ध आचरण युक्त, अभियांत्रिकी में रुचिवान्, सफल वक्ता, न्यायिक विभागों में कार्यरत, व्यवसाय करने वाला, समझौता करवाने में माहिर, बीमा कंपनी आदि में उच्च पदासीन, चतुर, मनभावन, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में सफल होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक सलाहकार, समाजसेवी, राजनैतिक पदों पर पदासीन वा राजनैतिक पक्ष से लाभान्वित, भूमि-भवन का सुख वाला, पर्यटक, दानी, विलासी, समृद्ध जनों का गुरु/स्वामी होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक विदेश यात्रा करने वाला, समृद्ध, विकासशील, धर्मानुरागी, अल्प यौनसुखी, मलीन वस्त्र धारण करने वाला, तेल, मशीनों के पूर्जे आदि का व्यवसाय करने वाला होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक धनवान, ब्याज के लेन-देन का काम करने वाला, तंत्र-ज्योतिष, अनुष्ठानिक सामग्रियों का व्यवसायी, अल्प वय की स्त्री का पति, वैवाहिक जीवन में मतभेद व क्लेश से विचलित रहता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक लोभी, स्वजनों के द्वेष से दुःखी, परदेसवासी, जीवनसाथी से मतभेद वा दूरी के कारण वियोगी, नीच साधनाओं में रत, गुरु से हीन, पथभ्रष्ट, अहंकारी, वृद्धावस्था आते-आते विभिन्न कष्टों से युक्त, भीषण पीड़ा युक्त मृत्यु को पाने वाला दुष्टात्मा होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक आकर्षक, समृद्धशाली, समाज में आदरणीय, शक्तिशाली, प्रतिष्ठित उद्यमी, पर्याप्त जनसमर्थन वाला, अतुलित संपत्तिवान, अपने जनों का नेता होता हैं। शत्रुभय, चोरभय, छल व हिंसक पशुओं से आघात होता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक असभ्य भाषण करने वाला, डरा हुआ, नीच व्यवसाय करने वाला, धनी, नेताओं व मंत्रियों का सेवक, सेकेंड हैंड वस्तुओं का विक्रेता, मांस-मदिरा का व्यवसायी, ब्याज पर मुद्राओं का लेन-देन करने वाला, देह व्यापार करने वा कराने वाला, चर्म व कुष्ठ रोगी होता हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक आकर्षक, मायावी अर्थात ऊपर से बहुत सुन्दर व सदाचारी दिखने वाला, धनवान्, छल-कपट करने में माहिर, मतलबी, कविता, साहित्य, कला, संगीत आदि में रुचि रखने वाला, वस्त्र उद्योग, सौन्दर्य प्रसाधन उद्योग, फ़िल्म उद्योग में प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर होता हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक क्रूर , मतलबी, हिंसक, रक्तिम छोटे नेत्र वाला, उबड़-खाबड़ दाँत वाला, व्यसनी, पशु व्यापारी, वन व औषधियों का व्यवसायी, दूसरों की संपत्ति व भूमि हड़पने वाला, झूठा, निर्दयी होता हैं। जीवनसाथी के साथ भी क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने वाला होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Rahu located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित राहु पर यदि —

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अहंकारी, भूत-प्रेत आदि बाधाओं से पीड़ित, सत्ता लोलुप, अधिकारियों का सेवक, चुगलखोर, निर्दयी, कमज़ोरों का उत्पीड़क, घूसखोर, शराबी, नीच स्त्रियों का सहयोगी होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अज्ञात भय से पीड़ित, मनोरोगी, वात विकारी, मातृकष्ट, चिंता, अनिद्रा, डिप्रेशन, त्वचा वा तंत्रिका विकार, लोभी, कुत्सित विचारों वाला, धोखेबाज होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक योद्धा, आंदोलनकारी, साहसी, भीषण रक्तपात करने के गुण वाला, आक्रामक, अपराधी होता हैं। लग्न व दशम के शुभ प्रभाव हो तो दण्डाधिकारी, शासकीय सेवाओं में प्रतिष्ठित होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो क्रूर व अश्लील भाषण करने वाला, लोभी, परस्त्रीगामी, बेईमान, समाज का द्रोही, सफल वक्ता, जुआ, सट्टा, बीमा आदि से धन कमाने वाला, विपुल संपत्तियों का मालिक होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक उपदेशक, शिक्षक, नीति-निर्माता, राजनीतिक पहुँच वाला, धनवान्, पापी, कुआचरणी, मजबूरों का शोषण करने वाला, अपनी विद्वत्ता का दुरूपयोग करने वाला होता हैं। 

शुक्र की दृष्टि हो तो आकर्षक, भूरे बालों वाला, मांस-मदिरा का शौकीन, परस्त्रीगामी, हिंसक, विचित्र वस्त्राभूषणों को धारण करने वाला, लघु उद्योग में रुचिवान्, मुख से रति करने वाला होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक आलसी, किंकर्तव्यविमूढ़, पिंगल नेत्र वाला, शनै शनै पराभव देखने वाला, विवाह वा प्रेम संबंधों में असंतोष, कोयला, लकड़ी, वन्य व खनिज संपदा का तस्कर, नास्तिक, रसोईया, नीच कर्म में रत, भूतविद्या में रुचिवान् होता हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in First Charan/ Padas in Bharani Nakshatra): भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक भयंकर अरिष्ट वाला, अल्पायु, सुख-सुविधाओं के प्रति उदासीन, परिजनों का त्याग करने वाला, निर्मोही, समाज का दोषी, व्यथित मन वाला, आक्रामक, पथभ्रष्ट, बकवादी होता हैं। ऐसा जातक जीता ही नहीं.. यदि जी जाए तो प्रौढ़ावस्था आते-आते संन्यास ले लेता हैं।

भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Second Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक क्रोधी, अधिक जीवटता वाला, धार्मिक मतांध, विष, स्मैक, रुद्राक्ष, माला, धार्मिकता से जुड़ी वस्तुओं आदि का व्यवसाय करने वाला, दुर्घटना, रक्तस्राव, क्षय, लकवा, सुनबहरी, मिर्गी आदि का रोगी, शुभ दृष्ट हो तो राजस्व अधिकारी होता हैं। इमानदार होने से प्रायः दरिद्र होता हैं।

भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Third Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो, विचित्र वस्त्र धारण करने वाला, आध्यात्मिक वृत्ति, ध्यानी, योग आदि क्रियाओं में निपुण, आयुर्वेद आदि जड़ी-बूटियों का जानकार, शरीर के मर्म स्थान व प्राण मार्ग का विशेषज्ञ, मंत्रज्ञ, देवता, यक्ष, लौकिक देवी-देवताओं की सिद्धियों वाला होता हैं।

भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Fourth Charan/ Padas in Bharani Nakshatra) : भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक कर्मठ, जोशीला, उग्र, आक्रामक, कठोर नयन नक्श वाला, भूमि-भवन, प्रॉपर्टी आदि में दलाली करने वाला, राज मिस्त्री, ठेकेदार, कृषि व पशुपालन से लाभान्वित, चमड़ा उद्योग, अग्नि कार्य, पत्थर उद्योग, शस्त्र निर्माण, कलपूर्जे निर्माण आदि से संबंधित क्षेत्रों में दक्ष होता हैं। चर्मरोग, एड़ी फटना व नेत्र ज्योति का कम होना जैसे शारीरिक दोष होते हैं।

भरणी नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Ketu located in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र स्थित केतु पर यदि —

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अहंकारी, क्रिएटिव, इंडल्जेंट (भोग-प्रिय) किन्तु वैरागी, न्यायप्रिय प्रशासनिक क्षेत्र में उन्नतिशील, अच्छी नेतृत्व क्षमता वाला सत्ता की इच्छा वाला किन्तु सत्ता-दुरुपयोग का खतरा भी, गर्भ-त्याग या संतान-कष्ट, पित्त संबंधी समस्या, आँखो व सिर में चोट आदि व्याधियांँ होती हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक भावुक, विरक्त, आध्यात्मिक खोज यथा (ज्योतिष, तंत्र, पुनर्जन्म, योग, मोक्ष) आदि को उन्मुख, बेचैन, चिंतित, शंकालु, चमड़ी, रक्त व पैर से संबंधित दोष, अवसाद रोगी होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक उग्र, हिंसक, सैन्य वा रक्षा बलों का सरदार या उच्च अधिकारी, शल्यचिकित्सक, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में सफल, शस्त्र वा अग्नि से दुर्घटनाग्रस्त, हिंसक संगठनों का सदस्य, आतंकवादी होता हैं। गर्भ वा संतान कष्ट होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक विश्लेषणात्मक बुद्धिमान, असाधारण अंतर्दृष्टि वाला, रहस्यात्मक वा आध्यात्मिक लेखन का शौकीन, काउंसिलिंग, ज्योतिष, तंत्र में रुचि वाला, गहरी सोच वाली व्यक्तित्व विकसित होती हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक विलक्षण प्रतिभा का धनी, ध्यानी, दूरद्रष्टा, वेद, विज्ञान आदि की गहरी समझ रखने वाला, उदार, समाजसेवी, पथ-प्रदर्शक होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक भ्रमित, बेचैन, भ्रमणशील, चर्म व धातुरोगी, अल्प दृष्टि, विवाह में देरी, अल्पकालिक प्रेम संबंध व मित्रों से घात होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक बाल्यावस्था से संघर्षशील, दुर्घटनाओं से ग्रस्त, भ्रमण से अनुभवी, हड्डियों, जोड़ों व‌ नसरोग से संबंधित असाध्य रोगों से पीड़ित, वियोगी, दार्शनिक बुद्धि, क्रूरभाषी होता हैं।

उपसंहार || Important Considerations

किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।

यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।

सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता। 

राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।

भरणी नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व ||

रोनाल्ड रीगन (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) — का चन्द्रमा भरणी नक्षत्र में था।

कार्ल मार्क्स (दार्शनिक, कम्युनिज्म के जनक) — का सूर्य व चंद्र दोनों भरणी नक्षत्र में थे। 

ऑड्रे हेपबर्न (मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री) — का सूर्य भरणी नक्षत्र में था।

मेरिल स्ट्रीप (मशहूर अमेरिकी अभिनेत्री) — का चन्द्रमा भरणी नक्षत्र में था।

समंथा प्रभु (मशहूर भारतीय अभिनेत्री) — का सूर्य और चन्द्रमा दोनो भरणी नक्षत्र में थे।

[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का भरणी में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]

~ Krishna Pandit Ojha..

   WhatsApp: 9135754051

नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या 

1• अश्विनी

2• भरणी

3• कृतिका 

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