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अश्विनी नक्षत्र: सम्पूर्ण गुण-दोष व इनमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Ashwini Nakshatra in Hindi & Results of Various Planets Situated in Ashwini Nakshatra:

Ashwini Nakshatra In hindi with results of different planets situated in it

अश्विनी नक्षत्र परिचय || Ashwini Nakshatra Introduction

भचक्र में 00° अंश से 13° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र अश्विनी नक्षत्र हैं। ‘अश्विनी’ शब्द संस्कृत भाषा स्त्रीलिंगी हैं, जिसका अर्थ होता हैं— ‘घोड़ी’ या ‘घोड़े से संबद्ध’। पाश्चात्य ज्योतिष में इन्हें ‘बीटा और गामा एराइटिज्’ (β and γ Arietis), अरबी नक्षत्र प्रणाली (Manzil al-Qamar) में इसे ‘अल-शरातैन’ (Al-Sharatain) या ‘अश-शरातैन’ (Ash-Sharatan), चाईनीज सियु में ‘लोउ’ (Lou – 娄) कहते हैं; जो ‘White Tiger of the West’ region का सदस्य हैं। यह मुख्यतया तीन तारों का समुह हैं, जो दो जुड़वां अश्वमुख जैसी आकृति बनाते हैं।

अश्विनी— मेष राशि अंतर्गत, नक्षत्र स्वामी – केतु, देवता – अश्विनी कुमार (देवलोक के चिकित्सक), जाति – वैश्य, योनि – अश्व, योनिवैर – महिष (भैंसा), देवगण, आद्य नाड़ी (मतांतर से मध्य नाड़ी), तमोगुणी प्रधान, शुभ, सात्विक, पुरुष जाति का नक्षत्र हैं। इसको दक्षिण दिशा का स्वामित्व प्राप्त हैं। यह लघु (क्षिप्र), तिर्यकमुखी, मंदलोचन नक्षत्र हैं। यह सत्यता युक्त, निर्मल, निश्चित, कार्यों यथा नई परियोजनाओं या कार्यों की शुरुआत करना, नींव रखना, बीज बोना अथवा रोपण कार्य, स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी कार्य, यात्रा, वाहन, वस्त्राभूषणों का क्रय-विक्रय, गृह प्रवेश, रहस्यविद्या, आध्यात्मिक या नई साधना की शुरुआत आदि के लिए उपयुक्त व शुभप्रद फल देने वाला हैं।

इसके अतिरिक्त यह एक गण्ड-मूल नक्षत्र हैं। अतः इस नक्षत्र में उत्पन्न हुए शिशु का नक्षत्र शांति आवश्यक हैं। इस नक्षत्र का प्रथम चरण (मतांतर से पहली 2 घटी) विशेष घातक हैं। इसमें जन्मा शिशु विशेष रूप से पिता को दुर्घटना, हानि, क्षय देता हैं। कुटुम्ब में भय व्याप्त होता हैं। शिशु जन्म के 10वे (अनुजन्म), 19वे (त्रिजन्म) वा 28 वे दिन जब पुनः आश्विनी नक्षत्र (जन्म नक्षत्र) आए, तब इसकी विधिवत शांति करवाने से गण्ड-मुल का दोष बहुधा कम हो जाता हैं।

Ashwini Nakshatra in Hindi

Table of Contents

ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Ashwini Nakshatra Astrological Symbolic Description

Ashwini Nakshatra in Hindi || अश्विनी नक्षत्र के नक्षत्र देवता ‘अश्विनी कुमार’ को माना गया हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं में 33 कोटि देवताओं में इन कुमारों की गिनती होती हैं। इन्हें दो जुड़वां अश्वमुखी भाई (मतांतर से दो अश्वमुख और धड़ मनुष्यों जैसा) कहा गया हैं जो स्वर्ग व मृत्युलोक के पहले वैद्य/चिकित्सक हैं। 

अश्विनीकुमारों का सबसे प्राचीन और विस्तृत वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। यहां इनका उल्लेख लगभग ४०० बार हुआ है, और ५० से अधिक सूक्त केवल इन्हीं की स्तुति में हैं। इन्हें “द्यौस के पुत्र” (दिवो नपाता) कहा गया है। ये प्रभात के देवता हैं, जो रथ पर सवार होकर आते हैं, रोग निवारण करते हैं, और दुखियों की रक्षा करते हैं। इन्हें सुन्दर, युवा और अश्वों से संबंधित बताया गया है।

इनके बारे में कथानक ऐसा हैं कि— भगवान सूर्य (विवस्वान या मार्तंड) का विवाह विश्वकर्मा (त्वष्टा) की पुत्री संज्ञा (सरण्यु या प्रभा) से हुआ। संज्ञा सूर्य के प्रचंड तेज को सहन नहीं कर पाती थीं। एक बार वे सूर्य के तेज से त्रस्त होकर अपने पिता के घर चली गईं। जाते समय उन्होंने अपनी छाया (छाया या संध्या) को सूर्य के पास छोड़ दिया, ताकि सूर्य को पता न चले। छाया से सूर्य को, शनि और तपती जैसे पुत्र-पुत्री प्राप्त हुए। जब सूर्य को संज्ञा के चले जाने का पता चला, तो उन्होंने संज्ञा की तलाश की। संज्ञा उत्तर कुरु (उत्तरी क्षेत्र) में घोड़ी (अश्विनी) का रूप धारण करके कठोर तपस्या (मतांतर से वन में विचरण) कर रही थीं। सूर्य ने भी घोड़े (अश्व) का रूप धारण किया और संज्ञा के पास पहुंचे। दोनों के मिलन से दो जुड़वां पुत्रों का जन्म हुआ। चूंकि ये घोड़े (अश्व) और घोड़ी के रूप में हुए मिलन से उत्पन्न हुए, इसलिए इनका नाम अश्विनी कुमार (अश्व से उत्पन्न कुमार) पड़ा। इनके नाम नासत्य (सत्यवादी या नासिका से संबंधित) और दस्र (अद्भुत कार्य करने वाले) हैं। ये आधे घोड़े व आधे  मनुष्य स्वरूप वाले बताए जाते हैं।

कुछ पुराणों (जैसे ब्रह्म पुराण, स्कंद पुराण, भविष्य पुराण) में थोड़े भिन्न विवरण हैं, लेकिन मूल कथा यही है कि ये सूर्य के औरस पुत्र हैं, जिनकी उत्पत्ति अश्व रूप में हुई।

महाभारत के अनुसार पांडवों की माता ‘माद्री’ ने इनकी कृपा से जुड़वां पुत्र नकुल और सहदेव प्राप्त किए (इन्हें अश्विनेय भी कहते हैं)। यही कारण हैं कि, नकुल व सहदेव में इनकी छाप दिखती है। (नकुल अश्वविद्या में निपुण, सहदेव ज्योतिष में)। च्यवन ऋषि को युवा बनाने और उनकी दृष्टि लौटाने वाली कथा भी महाभारत में इनसे जुड़ी है; जिसके बदले में च्यवन ऋषि ने इन्हें सोमरस पीने का अधिकार दिलाया। कुछ स्थानों पर इन्हें पूषन के पिता और उषा (प्रभात की देवी) का भाई भी कहा गया है। 

एक कथानक के अनुसार— ‘आश्विनी कुमार’ जब सूर्य से चिकित्सा शास्त्र की शिक्षा ले रहे थे, तब देवराज इन्द्र ने इसमे विघ्न डाली थी। किन्तु अपनी लगन व कठिन परिश्रम से इन्होंने चिकित्सा शास्त्र की विद्या प्राप्त की। एक अन्य कथानक के अनुसार— जब ऋषि च्यवन ने अश्विनी कुमारों को सोमरस का भाग देने के लिए पात्र उठाया तब इन्द्र क्रोधित हो गए। उन्होंने च्यवन ऋषि को रोका और कहा कि अश्विनीकुमार सोमरस के अधिकारी नहीं हैं। इन्द्र ने यहांँ तक धमकी दी, कि वे यज्ञ भंग कर देंगे। ऋषि च्यवन ने तपोबल से इन्द्र को चुनौती दी। उन्होंने यज्ञ की अग्नि से एक भयंकर असुर (मद वा मधु या अन्य) उत्पन्न किया, जो इन्द्र को मारने को तैयार हुआ। इन्द्र घबरा गए; और अंत में इन्द्र ने च्यवन ऋषि से क्षमा मांगी और अश्विनीकुमारों को सोमरस पीने का पूरा अधिकार दे दिया। इस प्रकार अश्विनीकुमार यज्ञ भागी बने। एक अन्य कथानक अनुसार— अश्विनी कुमार दधिची (दध्यंग) ऋषि से मधु विद्या (अमृत या संजीवनी संबंधी ज्ञान) सीखते हैं। इन्द्र ने दधिची को यह विद्या किसी को न सिखाने की शपथ दिलाई थी, लेकिन अश्विनी कुमारों ने चतुराई से (घोड़े का सिर लगाकर) ज्ञान प्राप्त किया। संभवतः इसी कारण से अश्विनी नक्षत्र के जातकों का , ज्येष्ठा नक्षत्र (देवता – इन्द्र) से भयंकर विरोध और तनाव रहता है। व्यवहार में देखने को आता हैं कि— ज्येष्ठा वाले जातक अश्विनी वालों की उतावली या आवेगी प्रकृति से टकराव महसूस करते हैं, जबकि अश्विनी वाले ज्येष्ठा की आधिपत्य व ईर्ष्या वाली प्रवृत्ति से बहुधा परेशान हो जाते हैं।

इस प्रकार इन पौराणिकताओं से इस तथ्य को बल मिलता हैं कि, अश्विनी कुमार— स्वास्थ्य, चिकित्सा, उपचार, सौन्दर्य, पुनर्जीवन आदि के प्रतीक हैं, अतः अश्विनी नक्षत्र में इन गुणों व क्षमताओं के प्रति सहज बोध होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Ashwini Nakshatra

जीवन शक्ति, युवावस्था, शारीरिक स्वरूप, चुस्ती, आकर्षण, स्थूल शरीर, धनवान, तेज़ बुद्धि, साहस, हाजिर-जवाबी, नवाचार, अनुसंधान,कार्यकुशल, स्वतंत्र, पहल करने में अग्रणी, सेवा भाव, दयालु, सौम्य लेकिन तेज़, स्वच्छता, अच्छा स्वास्थ्य, आशावादी स्वभाव, चिकित्सा, खेल, सेना, पुलिस, कमाण्डर, इमरजेंसी सर्विसेज, इंजीनियरिंग, उद्यमिता, लोकप्रियता, घोड़े/पशु संबंधित व्यापार, परिवहन, टेक्नोलॉजी (तीव्र गति वाली), यात्रा, वाहन, घोड़े/घुड़सवारी, रेसिंग, वाहन उद्योग, एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स, आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा, सर्जरी, फिजियोथेरेपी, वैकल्पिक चिकित्सा, डॉक्टर, हीलर, स्वास्थ्य सेवक, दुखियों की मदद, रोग निवारण, मानव सेवा, (नक्षत्र देवता – अश्विनी कुमार के कारण), उतावलापन, जल्दबाजी, जिद्दी, आवेगी, सलाह न मानने, अहंकार, नक्षत्र स्वामी ‘केतु’ के प्रभाव से मोक्ष, अंतर्ज्ञान, आध्यात्मिक खोज (कभी-कभी विरक्ति भी) आदि अश्विनी नक्षत्र की विशेषताएं हैं। 

इस नक्षत्रोत्पन्न जातक चंचल, उग्र किन्तु दयालु, अपनी छवि के प्रति सचेत (Image Conscious), सुन्दर, शारीरिक गठन पर ध्यान देने वाला अर्थात कसरती, फिटनेस, योगा आदि के प्रति झुकाव रखने वाला, जिद्दी, आक्रामक, समझदार, आवेगी, जल्दबाज, विशेष साहसी होता हैं।

श्रीराम देवज्ञ का कथन हैं कि— अश्विनी नक्षत्र में जन्मा जातक अश्वारोही, सेनापति, वेद्य वा चिकित्सक, कार्यकुशल, मेधावी होता हैं।

देवर्षि नारद के अनुसार— अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न व्यक्ति आकर्षक, चतुर, धनी, सुशील, कुशाग्रबुद्धि, भाग्यशाली, सत्यवक्ता, सजने-संवरने और आभूषणों का शौकीन, स्त्री-प्रेमी तथा साहसी होता है।

वरः मिहिर के शब्दों में— अश्विनी नक्षत्रोत्पन्न जातक श्रृंगारप्रिय, कार्य करने में निपुण, प्रायः सबका प्रिय, रसायन व औषधियों का जानकार, युद्ध कला में निपुण, सेवाकर्मी, अश्व, रथ, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वाहन खरीदने-बेचने वाला, अर्थात अदल-बदल कर विभिन्न वाहनों का उपभोग करने का इच्छुक, सक्षम, साहसी होता हैं।

लग्न में अश्विनी नक्षत्र के फल || Ashwini Nakshatra Results in Ascendant

यदि लग्न आश्विनी नक्षत्र में हो और उस पर कोई अशुभ प्रभाव न हो तो, जातक कर्मठ, बुद्धिमान, घमण्डी, स्वाभिमानी, अनुशासनप्रिय, आक्रामक, चंचल, लड़ाकू, शर्मीला, जिद्दी, यात्रा प्रेमी, घुमक्कड़, आकर्षण युक्त, सेवाकर्म अर्थात नौकरी पेशा में दक्ष, विचारशील, वस्त्राभूषणों का शौकीन, खर्चीला, पद-प्रतिष्ठा का इच्छुक, शक्तिशाली लोगों से मैत्री संबंध वाला, नेता-मंत्री आदि से अच्छी पहुंच बनाने वाला, साधारण आस्थावान, बहादुर, धनवान, लोक में मशहूर होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष (Qualities of a Male Chart/Horoscope born in Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र में जन्मे पुरुष मध्यम कद-काठी का, सुन्दर मुखाकृति लिये लम्बे चेहरे वाला, उभरे हुए उन्नत ललाटों वाला, लम्बे गोल नाक व बड़ी आँखों वाला, सीधे केश, चुस्त शरीर, फुर्तीला, जांबाज होता हैं। स्वभावत: जिद्दी, स्वाभिमानी, लड़ाकू, कम मित्रों वाला, अनुशासनप्रिय, क्रोधी, उतावला, मित्रता आदि विषयों में कम विश्वसनीय, गोपनीयता से अपने लक्ष्य को भेदने वाला, नवाचारी, गणित, विज्ञान, खगोल व आधुनिक तकनीकी में रुचिवान, अपनी पत्नी की सेवा करने वाला, यदा-कदा परस्त्रीगामी होता हैं। ये नौकरी में विशेष सफलता हासिल करते हैं। रक्षा, अनुसंधान, जोखिम भरे कार्यक्षेत्र व समय के पाबंद सरकारी क्षेत्रों में ये विशेष मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। जीवन के उत्तरार्ध में विशेष सुखी व समृद्ध होते हैं। कुंडली के 2सरे, 7वे व 11वे भाव का संबंध अश्विनी नक्षत्र युक्त लग्न से हो तो रक्षा, अग्नि युक्त कार्य, वाहन, भूमि-भवन आदि निर्माण कार्य, इंजीनियरिंग, गणितज्ञ, डेटा संबंधित कार्य व्यवसाय में सफलतापूर्वक धनार्जन करते हैं।

अश्विनी नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष (Qualities of a Female Chart/Horoscope born in Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्रोत्पन्न जातिका के भी मूल गुण-दोष थोड़े-बहुत अंतर के साथ, पुरुष जातक के तुल्य हीं होते हैं। अश्विनी नक्षत्र में जन्मी कन्या पुरुषार्थी, किसी भी कार्य की पहल करने वाली, साधारण सहनशील, शुद्ध अंतःकरण वाली, सत्यवादिनी, अल्प दयालु, रचनात्मकता, संगीत-नृत्य या कला में रुचि रखने वाली, ईश्वर भक्त वा आध्यात्मिक झुकाव वाली, सभ्य, सुसंस्कृत, शिक्षित, मछली जैसी लम्बी तनी हुई आँखों वाली, चौड़ा माथा, चुंबकीय आभा व सुंदर रूप-रंग वाली होती हैं। वे प्राकृतिक रूप से आकर्षक और चुस्त-दुरुस्त होती हैं। वाणी में कोमलता और गहराई होती है। प्रायः स्वावलंबी, प्रशासनिक कार्यों, चिकित्सा, सेवा या नेतृत्व वाली भूमिकाओं, चिकित्सा (डॉक्टर, हेलर), प्रशासन, सेवा क्षेत्र, कला, खेल, परिवहन या उद्यमिता में सफलता पातीं हैं। व्यवसायिक जीवन के साथ-साथ घर भी अच्छा संभालने का गुण होता हैं। क्रोध की अधिकता, हिंसक प्रवृत्ति और अत्यधिक कामुकता, संतान होने में देरी जैसे कुछ दोष शास्त्रकारों ने कहे हैं।

प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Ashwini Nakshatra Subtel Results Variations in all 4 Charan (Padas)

अश्विनी नक्षत्र प्रथम चरण (Ashwini Nakshatra First Charan / Padas) : मेष राशि में 00° अंश से 03° अंश 20′ कला का क्षेत्र अश्विनी का प्रथम चरण हैं। नवमांश मेष होने से यह वर्गोत्तम नवमांश का क्षेत्र हैं। अश्विनी के प्रथम चरण का स्वामी ‘मंगल’ हैं। इस क्षेत्र पर मंगल-केतु-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। शारीरिक सौष्ठव, स्वस्थ, उत्साही, उतावलापन, क्रूर, निर्मोही, पराक्रम युक्त, एकांतप्रिय, विस्फोटक, उग्र, निर्दयी इस चरण के गुण हैं।

अश्विनी के गण्ड-मूल होने का सर्वाधिक कष्ट-फल इसी चरण में पूर्वाचार्यों ने कहे हैं। अश्विनी के प्रथम चरण में जन्म जातक— अधिक जीवटता वाला, बलिष्ठ, पराक्रमी, पहल करने वाला, अति साहसी होता हैं। जातक गठन युक्त मध्यम कद-काठी वाला, मोटी चमड़ी वाला, छोटी गहरी आँखो वाला, कठोर मुखाकृति वाला, छोटे नाक-नक्श, पतला चीमर शरीरी, निडर, क्रूर भाषण करने वाला, लम्बे जबड़े वाला होता हैं। बाल्यकाल में अग्नि अथवा शस्त्र से शरीर पर घाव के निशान होते हैं। इस भाग में शुभ कारक ग्रहों के होने पर जातक खर्चीला, राजकर्मचारी, भोग-विलास में लिप्त, अति कामुक होता हैं। ये चरण कुटुम्बियों (विशेष कर पिता) के लिए कष्टकारी हैं।

अश्विनी नक्षत्र द्वितीय चरण (Ashwini Nakshatra Second Charan / Padas) : मेष राशि में 03° अंश 20′ कला से 06° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र अश्विनी का द्वितीय चरण होता हैं। इस चरण का नवमांश वृषभ और चरण स्वामी शुक्र हैं। अश्विनी के द्वितीय चरण पर मंगल-केतु-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। धार्मिकता, प्रसन्नचित्त, धनी, मानी, सुन्दर कल्पना, अग्नि, धातु, आदि से कठिन नक्काशी वा निर्माण कार्य, प्रीतिकर, सद्भावना युक्त, परोपकार, वस्त्राभूषण प्रिय, सुन्दर विलासितापूर्ण वाहन आदि अश्विनी द्वितीय चरण के कारकत्व हैं।

अश्विनी के द्वितीय चरण में जन्मा जातक— सांवला रंग, घुंघराले बाल, लम्बी नाक, छोटी नासिका छिद्र, छोटा किन्तु उच्च ललाट, चौड़े कंधे, लम्बी बाहें, रसिक-प्रिय, नृत्य-संगीत का शौकीन, कलात्मक रुचि वाला, यात्रा प्रिय, किस्से कहानियों मे रुचि रखने वाला, शास्त्र का जानकार होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र तृतीय चरण (Ashwini Nakshatra Third Charan / Padas): मेष राशि अंतर्गत 06° अंश 40′ कला से 10° अंश तक का विस्तार क्षेत्र अश्विनी नक्षत्र का तृतीय चरण होता हैं। इस चरण का नवमांश मिथुन और चरण स्वामी बुध होता हैं। अतः अश्विनी के तृतीय चरण पर मंगल-केतु-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। क्रय-विक्रय, लेन-देन, कठोर शैली में वाकपटुता, हँसमुख, मजाकिया, गणित, व्यवसायिक बुद्धिमत्ता, चुम्बकीय आकर्षण, बौद्धिक सक्रियता अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण के कारकत्व हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक रक्तिम गौर वर्णी, काले घुंघराले बाल, चंचल आँखों वाले, बातूनी, लम्बी सीधी वा छोटी गोल नाक वाले, कमर से ऊपरी हिस्से चौड़े व कमर से निचले हिस्से अपेक्षाकृत पतले व लचकदार, फुर्तीला, मतलबी, अपना काम निकालने में माहिर, विद्वतापूर्ण बातें करने वाला, स्वाद लोलुप, तर्क-वितर्क करने वाला, हठी, लोभी, मायावी अर्थात छलिया होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र चतुर्थ चरण (Ashwini Nakshatra Fourth Charan / Pada) : मेष राशि में 10° अंश से 13° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र, अश्विनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण / पद होता हैं। इस चरण का नवमांश कर्क व चरण स्वामी चन्द्रमा होता हैं। अतः अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल-केतु-चन्द्र का संयुक्त प्रभाव होता है। भावुकता, ध्यान, कल्पनाशीलता, आवेग, क्रोध, क्षोभ, आध्यात्मिक चेतना, त्वरित निर्णय अश्विनी के चतुर्थ चरण के गुण हैं।

अश्विनी के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक, कोमल हृदयी, मांसल रोम युक्त शरीर, ठिगने कद का, उदासीन नेत्र, दार्शनिक बुद्धि वाला, आस्तिक, मेहनती, निवेश से लाभार्जन करने वाला, आय से संबंधित व्यापक उतार-चढ़ाव देखने वाला, कामकला में निपुण, सद्चरित्र होता हैं। व्यग्रता, आवेश, पेट व चमड़ी के रोग से पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Results of various planets situated in different Charan /Padas of Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र में सूर्य फल || Result of Sun in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक आत्मविश्वासी, बलवान, ओजपूर्ण संभाषण करने वाला, शासन-प्रशासन में उच्च पदासीन, ग्राम-समाज का मुखिया वा सम्मानित, आध्यात्मिक, वैभवशाली, तीर्थाटन करने वाला, सत्यवादी होता हैं। वैवाहिक जीवन सुखमय होता हैं। सामान्यतया स्वस्थ, आंशिक रूप से पित्त दोष पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो, जातक धनी, खर्चीला, विवादित आचरण वाला, प्रेम संबंधों में कलह करने वाला, कोर्ट-कचहरी के कार्रवाई से पीड़ित व धन नाश करने वाला, उच्च पदाधिकारियों से संपर्क व मैत्रीपूर्ण संबंध वाला, नेत्र व वीर्य संबंधित दोष से पीड़ित, कुटुम्बियों से मतभेद होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक धनी किन्तु अहंकारवश सम्मान विहीन, अनर्गल प्रलाप करने वाला, सट्टा-दलाली-निवेश से धनी किन्तु यदा-कदा भयंकर आर्थिक नुकसान झेलने वाला, परिश्रमी, वाक्पटु, होशियार, कृषि, ब्याज पर पैसे के लेन-देन, तकनीकी शिक्षा से धनवान होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के चतुर्थ चरण मे 10° अंश पर सूर्य उच्च का होता हैं; अतः यहाँ सूर्य के विशेष शुभ फल कहे गये हैं। अश्विनी के चतुर्थ चरण में सूर्य वाला जातक दानी, धनी, सेना, पुलिस, नेतृत्व क्षमता के विशेष गुण से नेता अथवा राजकर्मचारी, कुटुम्बियों का प्रिय, आध्यात्मिक वृत्ति, यात्राओं का शौकीन, पत्नीव्रती होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Sun located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक सफल, दयावान, परोपकारी, गंभीर, धन कमाने के लिए प्रयत्नशील, नीति-निर्माता होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य से पर यदि मंगल की  दृष्टि हो तो जातक उष्णता वाला, रक्तविकारों वाला, राजा तुल्य धौस जमाने वाला, रक्तिमता लिये चेहरे वाला, क्रोधी, क्रूर विचारों वाला, धनवान होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि गुरु की दृष्टि हो तो जातक लम्बे कद-काठी का, विद्वतापूर्ण बातें करने वाला, धनी, सुखी, आस्तिक, धर्म-कर्म में अनुरक्त, राजनीतिक पहुँच रखने वाला, सद्चरित्र होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि शनि की दृष्टि हो तो धनार्जन में कठिनाई, अपनी उम्र से अधिक वय का दिखने वाला, आलसी, विकृत बुद्धि, स्नायु तंत्र, हृदय, नेत्र आदि अंगों में दीर्घकालिक रोग होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि राहु की दृष्टि हो तो जातक सरकार वा सरकारी अधिकारियों से पीड़ित, मुकदमेबाजी से परेशान, परिवार से सहयोग ना मिलने के कारण कठिनाइयों का सामना करने वाला, परदेशवासी, मलिन, क्रूर, निष्ठुर हृदयी होता हैं। सिरदर्द व हृदय विकारों से हताहत होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि केतु की दृष्टि हो तो जातक शिक्षित, विचारवान, उद्यमी, आध्यात्मिक वृत्ति वाला, जिद्दी होता हैं। उसके कारण कई लोगों के घर में चूल्हा जलता हैं, अर्थात बहुत से परिवारों का भरण-पोषण उसकी वज़ह से होता हैं। लग्न पीड़ित होने पर जातक मध्यम आयु वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा जातक को सामान्य मासुमियत लिए सुन्दर, कृशकाय दुर्बल शरीरी, पित्त व कफ रोग से पीड़ित, कुटुम्बियों से घात करने वाला, माता-पिता का द्रोही व कष्टकारी, धनवान, अति कामुकता वश प्रेम-संबंधों में कलह करने वाला, स्वर्ण-द्रव्य आदि का संग्रहकर्ता, भूमि-भवन का लाभ वाला, सरकारी वा सहकारी क्षेत्रों में सफल होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सुकोमल, अत्यंत मोहक रुपवान, अपेक्षाकृत लम्बे वा मध्यम कद-काठी वाला, बड़े नेत्रों वाला, महात्वाकांक्षी, कलात्मक कार्यों में रुचि रखने वाला, मधुरभाषी, वैभवशाली, मादक पदार्थों का सेवन करने वाला, आस्तिक, औषधि, रसायनशास्त्र का ज्ञाता, विपरीत लिंगीयों के आकर्षण का केन्द्र, स्वार्थी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक, डील-डौल युक्त दृढ़ शरीरी, गोरा गोल चेहरा, प्रसन्नचित्त, व्यवसाय कुशल, बुद्धिमत्तापूर्ण भाषण करने वाला, बातुनी, द्विअर्थी बातें करने में निपुण, मजाकिया होता हैं। अशुभ प्रभाव हो तो नख, चर्म, बालों से संबंधित रोग होते हैं। कोई-कोई जातक चर्मरोग विशेषज्ञ वा गणक (ज्योतिषी) होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सौम्य, उदार, गोरा थुलथुले बदन वाला, सुन्दर केश, राज्य वा सरकार से सम्मानित, विनयशील, चिकित्सक, हृदय वा महिला रोग विशेषज्ञ, कीर्तिमान स्थापित करने वाला, विपरीत लिंगीयों का प्रिय, बहुत से प्रेम संबंधों वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Moon located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक समाज में प्रभावशाली, उच्च पहुंँच रखने वाला, धनवान, आस्तिक, अहंकारी, परोपकारी, दानशील, परिवार व माता-पिता के लिए जिम्मेदार होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक जोखिम लेने वाला, निडर, साहसी, लक्ष्मीवान्, आँख, कान, दाँत व भाव में स्थिति अनुसार अंगों में रोग, पीड़ा व कष्ट होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि बुध से दृष्ट हो तो जातक वाचाल, प्रसिद्ध, सुखी, विनोदी, व्यवसाय से धनी, चतुर, मित्रवान, व स्वकर्मों से धनी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक शास्त्रों का ज्ञाता, धर्मात्मा, विद्वान, सलाहकार, समाजसेवी, समृद्ध होता हैं। कोई-कोई जातक मोटापा व पेट संबंधी रोग से पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि शुक्र से दृष्ट हो तो जातक स्त्रियों के संग मैत्री वाला, वस्त्राभूषणों का शौकीन, स्त्रियों जैसी आदतों वाला अर्थात स्त्रियोचित गुणों वाला होता हैं। नृत्य-संगीत, कलात्मक रुचि, व लचक दिखाकर कर चलने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक उद्विग्न, चिंतित, निर्धन, नाना प्रकार के रोगों से पीड़ित, चिड़चिड़ा वा एकांतप्रिय होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि राहु से दृष्ट हो तो जातक लोभी, षड्यंत्रकारी, असमाजिक तत्वों से पीड़ित, बाल्यकाल में शोषित होता हैं। उम्र के 8 वर्ष तक अरिष्ट व दुर्घटना की सम्भावना रहती हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा यदि केतु से दृष्ट हो तो जातक कठोर, दार्शनिक बुद्धि वाला, ध्यानी, तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाला, सांवला, कोई-कोई जातक नीच कर्म करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल का फल (Result of Mars situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक बलिष्ठ, निडर, उद्दंड, महात्वाकांक्षी, घमण्डी, युद्ध कला में निपुण, कलहप्रिय, दूसरों को प्रताड़ित करने में सुख का अनुभव करने वाला, व्याकुल, उद्विग्न, सज्जनों से द्वेष करने वाला, शासन-प्रशासन में उच्चस्तरीय अधिकारी, दण्डपाल, सेनानायक, हिंसक, तानाशाह वृत्ति का, प्रचण्ड घातक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल का फल (Result of Mars situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो, जातक बलवान, वीर्यवान, सुन्दर, मोहक, परिजनों का प्रिय, कामक्रीड़ा में प्रवीण, धन-धान्य से युक्त, धार्मिक, दानशील, प्रचुर लैंगिक सुख वाला होता हैं। दुर्घटना व अत्यधिक कामुक संबंधों के कारण प्रौढ़ावस्था तक रोगों की संभावना होती हैं। कन्या संतान ज्यादा होती हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल का फल (Result of Mars situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक रक्तिम गौरवर्णी, आवेशपूर्ण बातें करने वाला, अधिक शत्रुओं वाला, शिक्षित व ज्ञानियों के प्रति सहृदयी, मातृद्रोही, भूमि-भवन, प्रॉपर्टी, पशु आदि का व्यवसायी, वास्तुकला व स्थापत्य कला का ज्ञाता, औषधि व शल्यचिकित्सा में रुचिवान्, प्रचुर यौनसुखी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल का फल (Result of Mars situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक सौम्य, मातृभक्त, सुखी, मित्रवत्, धनवान्, बहादुर, कृषि, उत्खनन, रसायन से लाभान्वित, जोखिम वाले निवेश से भी लाभ प्राप्त करने वाला, भाग्यशाली, मैनेजमेंट के अच्छे गुण वाला, विरासत का लाभी, वात्सल्यपूर्ण प्रेम करने वाला, नायक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Mars located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक आत्मबली, क्रूर, सफल, सम्मानित, परिजनों का मुखिया, मातृ-पितृ भक्त, पब्लिक फिगर, नामचीन हस्तियों में शुमार, रक्त विकार से ग्रस्त होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक लक्ष्मीवान, सुखी, बलवान, दूसरों का धन हड़पने के गुण वाला, परस्त्रीगामी, क्रूर, निष्ठुर, आँख, कान, दाँत की पीड़ा, रक्तविकारों वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि बुध से दृष्ट हो तो जातक वाचाल, क्रूर संभाषण करने वाला, व्यवसाय-वाणिज्य में सफल, दिखावा करने वाला, प्रचुर यौन-संबंधों वाला, कुटिल, वैश्यागामी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक धनी, मानी, विद्वान, समाज में प्रभावशाली, परिजनों का मुखिया, सरकारी क्षेत्र में अधिकार प्राप्त, भारी व बड़े व्यवसाय में सफल, प्रसिद्ध होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि शुक्र से दृष्ट हो तो, जातक सुन्दर, धन के लिए संघर्षशील, स्त्री लोलुप, अति कामुकता वाला, क्रूरतापूर्ण रति करने वाला होता हैं। अवैध संबंधों में बदनाम भी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक रुखे स्वभाव वाला, कृशकाय, जटिल रोगी, दुर्घटनाओं से ग्रस्त, माता-पिता के सुख से वंचित, प्रेम संबंधों में धोखा खाने वाला, परदेसवासी होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि राहु दृष्ट हो तो जातक षड्यंत्रकारी, भयानक विस्फोटकारी स्वभाव वाला, क्रूर, निर्दय, दोहरी मानसिकता वाला, दूसरों को क्षति पहुंचा कर लाभान्वित होने वाला, अपराधिक वृत्तियों वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित मंगल यदि केतु दृष्ट हो तो जातक प्रबल पराक्रमी, स्वामिभक्त, उद्यमी, बलिष्ठ, डील-डौल युक्त शरीर वाला, स्व अनुभवों से सीखने वाला, क्रोध की अधिकता व ईर्ष्यालुपन से निकट संबंधों में कड़वाहट का सामना करना पड़ता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में बुध फल || Result of Mercury in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध का फल (Result of Mercury situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक जातक कृशकाय, उद्वेलित, वाचाल, कुटिल, कृतघ्न, विद्वेषपूर्ण, सेवा कार्य करने वाला अर्थात नौकरी पेशा वाला, बुद्धिमान, धूर्त, रक्त व चर्मरोगों से पीड़ित, हकला वा तुतला कर बोलने वाला अथवा जल्दी-जल्दी अस्पष्ट बोलने वाला, मांस-मदिरा व विपरीत लिंगीयों से अवैध संबंधों का शौकीन होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध का फल (Result of Mercury situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक सौम्य, गौरवर्णी, सुन्दर, चिकनाई युक्त चमड़ी वाला, भाग्यशाली, धन-संपदा युक्त, परिजनों, हितैषियों व मित्रों के लिए उपकारी, उदारवादी, प्रकृतिप्रेमी, आस्तिक, भ्रमणशील, लेखन, संगीत-नृत्य, कलात्मक कार्यों से प्रसिद्धि व धनार्जन करने वाला, रतिक्रिया में निपुण, विलासी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध का फल (Result of Mercury situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक चंचल, मधुर, बहुमूल्य वस्त्राभूषणों का शौकीन, अधिक मित्रों वाला, सौम्य, कोमलांग, उभरे गालों वाला, पंक्तिबद्ध दाँतो वाला, सुरम्य संभाषण करने वाला, चमकदार चमड़ी व सुनहरे रोम वाला, परोपकारी, धनवान, कम उम्र से ही धनार्जन करने वाला, आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में रुचिवान्, अन्वेषक, व्यवहारकुशल, व्यवसाय में सफल, विनोदी होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध का फल (Result of Mercury situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक भावुक, आवेगपूर्ण निर्णयों से दुःखी, बैंकिंग , मैनेजमेंट, अकाउंट्स का जानकार, प्रेम संबंधों में असफल, चरित्रहीन, झूठा, परिजनों के लिए कष्टकारी, अनैतिक कार्यों में लीन होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Mercury located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि चंद्रमा से दृष्ट हो तो जातक वाचाल, सुखी, संगीत-नृत्य आदि कला प्रेमी, भ्रमणशील, बुद्धिमान, भूमि-भवन का सुखी, अति कामुक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक बलवान, सशक्त, समाज का नायक, अधिकारी व प्रतिष्ठित व्यक्तियों का मित्र, संचालक, परस्त्रीगमन करता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक, सुशिक्षित, विनयशील, विद्वान, उच्च पदासीन, धनवान, बड़े कुटुम्बों वाला, संततिवान् होता हैं। किसी-किसी जातक को उदर संबंधी रोग होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक बली, परिपक्व, अनुभवी, समाज का कर्ता-धर्ता होता हैं। इन्जिनियरिंग, तकनीकी शिक्षा व संचार के क्षेत्र में सफल होता हैं। पारिवारिक मतभेद होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि राहु से दृष्ट हो तो जातक सफल कुटनीतिज्ञ, मीठा बोलने वाला, चतुर, धुर्त, मित्रों से लाभान्वित, स्वार्थपरता व्यवहार करने वाला, सलाहकार, नेतृत्व, मैनेजमेंट के क्षेत्र में सफल होता हैं। कभी-कभी आक्रामकता वश स्वयं व दूसरों का भारी नुक़सान करता रहता हैं। विदेशी संबंधों से लाभान्वित बहुभाषाविद् होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित बुध यदि केतु से दृष्ट हो तो जातक अंतर्मुखी, परंपरागत गुढ विषयों में रुचिवान, गणित, खगोल, ज्योतिष में रुचि रखने वाला, गुढ़ दर्शन आदि का लेखन करने वाला, माइक्रोबायोलॉजी, डेटा साइंस, आयुर्वेद आदि क्षेत्रों में रुचि रखता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में गुरु फल || Result of Jupiter in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु का फल (Result of Jupiter situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक गंभीर, चिंतन-मनन करने वाला, अन्वेषक, धन-धान्य से परिपूर्ण, अपने क्षेत्र में आदर-सम्मान पाने वाला, शासन-प्रशासन में अधिकारी वा उच्चाधिकारियों से सप्रेम संबंधों वाला, विद्वान, धर्मानुकूल आचरण वाला, अज्ञात भय से पीड़ित होने से सदैव सचेत रहने वाला, व्यसनी, पैर में चोट, दुर्घटना वा रोग से पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु का फल (Result of Jupiter situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक लम्बा-चौड़ा कद-काठी का, तेजस्वी, पुण्य कर्मों वाला, सम्मानित, आस्थावान, गुणवान्, समृद्ध कुल वाला, सरकार व असमाजिक तत्व (गुंडे-मवालियों) दोनों से मधुर संबंधों वाला, विलासपूर्ण जीवन जीने वाला, रत्नाभूषणों का शौकीन, दक्षिणपंथ व वामपंथ में सामंजस्य बिठाते हुए मध्यम मार्ग का अनुसरण करने वाला, बहुत से भाषाओं, पंथों, दर्शनों का विश्लेषक होता हैं। कोई-कोई जातक नीच वृत्तियों में लिप्त, परस्त्री वा वैश्याओं पर धन लुटाने वाला, कभी-कभी कर्ज से पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु का फल (Result of Jupiter situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक सुन्दर, कुलीन, विनोदी, मनोहर, सजने-संवरने का शौकिन, यात्राप्रेमी, वाद-विवाद में प्रवीण, शास्त्रों का जानकार, अर्थशास्त्र, अंकशास्त्र, ज्योतिष, खगोल, भौतिकविज्ञान, भाषा और साहित्य का विशेष ज्ञाता होता हैं। इसके साथ-साथ 18 वर्ष की आयु तक क्लेश, दुःख व अरिष्ट होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु का फल (Result of Jupiter situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक लम्बा, भारी शरीर वाला, बड़े अंगों वाला, सुन्दर, स्पष्ट वक्ता, धर्मात्मा, प्रसन्नचित्त, भाग्यशाली, स्वर्ण आदि अचल संपत्तियों से युक्त, विद्वान, सौम्य, ध्यानपूर्वक अपने कार्यों को करने वाला, सबका प्रिय, जनप्रतिनिधि, कमज़ोरों का सहायक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Jupiter located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक जातक प्रभावशाली, धार्मिक, सज्जनों का साथी, जनप्रतिनिधि, धनवान, ऊंचे भूमि-भवन से सुखी, स्वर्ण आदि बहुमूल्य धातुओं का संग्रहकर्ता, परिवार का प्रधान, लोक में प्रसिद्ध होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक लम्बे चौड़े कद-काठी का, गौरवर्णी, थुलथुले शरीर वाला, धनी, मानी, शास्त्रों का रचयिता, भाष्यकार, अध्ययनरत, मिष्ठान प्रेमी, विपरीत लिंगीयों का प्रिय होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक जातक न्यायप्रिय, उग्र, क्रूर, गर्वित, सरकारी क्षेत्र व शासन-प्रशासन से मैत्री वाला, अहंकारियों का अहंकार चूर करने वाला, भारी ओहदे वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि बुध से दृष्ट हो तो जातक सुन्दर, फुर्तीला, निरोगी, बलिष्ठ, चंचल, उद्दंड, झगड़ालू, घमण्डी, बड़ों का अनादर करने वाला, वाचाल, बिगड़ैल, विवादास्पद बयान देने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि शुक्र से दृष्ट हो तो जातक हृष्ट-पुष्ट, उन्नत ललाट, धार्मिक, विद्वान, विदुषक, लेखन, सौन्दर्य, नाट्यकला, संगीत-नृत्य का शौकीन, कुलीन स्त्रियों संग प्रीति करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक परिपक्व, स्वेच्छाचारी, जिद्दी, कट्टु, न्यायप्रिय, दार्शनिक-मति, शिक्षक, शैक्षणिक संस्थानों, न्यायिक विभागों में रुचिवान् होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि राहु से दृष्ट हो तो जातक वातरोगी, उदर से संबंधित कष्ट, अपनी बुद्धिमत्ता का दुरूपयोग करने वाला, अधर्म युक्त आचरण वाला, अपने विश्वासपात्रों के साथ छल करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित गुरु यदि केतु से दृष्ट हो तो जातक ध्यानशील, विरक्त, एकांतप्रिय, सुखी, जनसेवक, दान-पुण्य यज्ञादि कर्म करने वाला, मांत्रिक, बलवान, सम्मानित व समृद्धशाली होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र में शुक्र फल || Result of Venus in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र का फल (Result of Venus situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक सुन्दर, मोहक, चुम्बकीय आकर्षण वाला, घने केश वाला, ठोस भारी शरीर वाला, ईर्ष्या व द्वेषपूर्ण व्यवहार करने वाला, कामी, कुटिल माधुर्य मुस्कान वाला, धातु व अग्नि से संबंधित कार्यों वाला, अभियांत्रिकी, विमान, प्रौद्योगिकी, परमाणु, कच्चा तेल, गैस, ईंधन, व्यापारिक पोत (Ship 🚢) से संबंधित कार्यों में रुचि रखता हैं व प्रयत्न से इन क्षेत्रों में सफल होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र का फल(Result of Venus situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत आकर्षक सुन्दर, सुकोमल, कीमती मूल्यवान वस्तुओं का शौकीन, पारंपरिक चिकित्सा शास्त्र में रुचि रखने वाला, आध्यात्मिक उन्नति वाला, मंत्रज्ञ, कोमल हृदयी, विनयशील, क्रोध आने पर विध्वंसक, प्रतिस्पर्धा में विजयी, कर्मयोगी, परिजनों का प्रिय, विरासत का लाभी, दूसरों की संपत्ति व स्त्री को भोगने वाला, फैशन, कॉस्मेटिक, चलचित्र, नाटक, कलाकारी से धन लाभ करता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र का फल (Result of Venus situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): : अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक उच्च कोटि का विद्वान, आस्तिक, निरोगी काया वाला, सुकोमल चमड़ी वाला, यात्रा प्रेमी, परोपकारी, धर्मशाला आदि का निर्माण करवाने वाला, उच्च कोटि का चिकित्सक, सर्जन, उच्च कोटि का प्रवक्ता, किसी दल या संगठन का शीर्ष नेता, गहने, रत्न आदि कीमती धातुओं व मूल्यवान रत्नों का विक्रेता, वस्त्र उद्योग, ब्याज या कमीशनखोरी से धनार्जन करने वाला, अपने ज्ञान और विद्वता के बल पर मशहूर होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र का फल (Result of Venus situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): : अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र स्थित हों तो जातक सौम्य, सुन्दर, गौरवर्णी, धनी, मानी, सौन्दर्य बोध से युक्त कल्पनाओं वाला, विनम्र, उच्च कोटि का कलाकार, नृत्य-संगीत में निपुण, प्रमुख वाद्ययंत्रों का सिद्धहस्त, मित्रवान्, कुशल संगी-साथी वाला, सहृदय, नेक, ईमानदार सुन्दर जीवनसाथी का साहचर्य प्राप्त होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Venus located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक अतिसुंदर, चेहरे पर मासूमियत, धनवान, सुखी, कलाओं में पारंगत, दार्शनिक, सहज सौन्दर्य बोध वाला, श्रृंगार प्रिय, अनेकों प्रेम-प्रसंग वाला होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक रक्तिम गौरवर्णी, चंचल, कामक्रीड़ा में निपुण, धन के लिए संघर्षशील, उत्तम वस्त्राभूषणों में रुचिवान्, श्रृंगारप्रिय, कठोरता पूर्वक रति करने वाला, परिजनों से क्लेश करने वाला होता हैं। प्रायः वैवाहिक जीवन में संघर्षों का सामना करनी पड़ती हैं। मंगल की अष्टम दृष्टि यदि कन्या राशि से हों तो गुप्तांगों में रोग होने की संभावना रहती हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक विद्वान, शास्त्रों का अध्ययन करने वाला, राजसिक, समृद्धशाली, कुटुम्बों में मानी, उत्तम संतति वाला, लोक में पूजनीय होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक गोपनीयता से नीच कर्म करने वाला, ईर्ष्यालु, धन संग्रह करने वाला, भीरु (कायर), पीठ पर वार करने वाला, क्रूर, अप्राकृतिक मैथुन करने वाला होता हैं। शुक्र पर शनि की तृतीय व दशम दृष्टि अपेक्षाकृत ज्यादा अशुभता देने वाली हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि राहु की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर किन्तु रहस्यमयी खतरनाक मुखाकृति वाला, धुम्रलोचन अर्थात (धुएं की तरह मदहोश आँखों वाला, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, महात्वाकांक्षी, वैवाहिक संबंधों में बेईमान होता हैं। घने केश, लम्बे कान, दाँतों में समस्या वाला होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित शुक्र यदि केतु से दृष्ट हो तो जातक श्यामवर्णी, तैलीय चर्म वाला, सजावट, उपहार, रत्न, धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित सामग्री व श्रृंगार सामग्रियों का क्रय-विक्रय करने वाला, औषधि व जड़ी-बूटियों का जानकार, हड्डियों के जोड़-तोड़ का ज्ञानी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में शनि फल || Result of Saturn in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि का फल (Result of Saturn situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि स्थित हो तो जातक कृशकाय, कठोर वृत्ति, आचरणहीन, झगड़ालू, गाली-गलौच करने वाला, उद्विग्न मन, निर्ल्लजता पूर्वक अश्लीलता करने वाला, चुगलखोर, गुप्तरोगी, हीन मानसिकता वाला, त्वचा, तंत्रिका तंत्र व स्नायु तंत्र में रोगों वाला, बाल्यकाल में दरिद्रता में जीवन जीने को मजबूर, अखाद्य को खाने वाला, ऐतिहासिक विषय, पुरातत्व, वास्तुकला, स्थापत्य कला, अभियांत्रिकी आदि विषयों में रुचिवान् होता हैं। उम्र के 8 वर्ष तक माता-पिता के लिए और 12 वर्ष तक स्वयं के लिए अरिष्ट कारक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि का फल (Result of Saturn situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि स्थित हो तो जातक सांवले रंग का, सीधे केश वाला, दुबला-पतला, धीरे बोलने वाला, उपकार को मानने वाला, अंतर्मुखी, चतुर, चोर, डाकुओं की संगति वाला, तस्कर, मादक व नशीले पदार्थों का व्यवसाय करने वाला, वन्य व खनिज संपदा में रुचावान्, कानूनी उलझनों का शिकार, वीर्य / रज दोषयुक्त होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि का फल (Result of Saturn situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि स्थित हो तो जातक गौरवर्णी किन्तु कृशकाय, छोटे संकुचित नेत्र वाला, व्यवसाय में परिपक्व, नवाचारी, तकनीकी क्षेत्र में रुचिवान्, उन्नतिशील, स्व-परिश्रम से वैभवयुक्त, मंत्र-अनुष्ठान आदि करने वाला, महात्वाकांक्षी, पराक्रमी, शत्रुंजय होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि का फल (Result of Saturn situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के चतुर्थ चरण में शनि स्थित हो तो जातक उदासीन, मध्यम गति से कार्यशील, धर्म युक्त आचरण करने वाला, मलीन वस्त्र धारण करने वाला, शारीरिक रुप से पुष्ट, रुखा चमड़ी वाला, अपने उम्र से अधिक वय का दिखने वाला, कृषक, जमींदार वा मजदूर होता हैं।  बदसूरत व चरित्रहीन होने से वैवाहिक जीवन प्रायः कष्टमय व दूषित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Saturn located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक कृषि, पशुपालन, बागवानी, कम्बल, कालीन, दरी आदि के कारोबार वाला, अनुशासनप्रिय, लिहाज करने वाला, समय का पाबंद होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक उदास, मलीन, नीच की संगति वाला, मंदबुद्धि, क्रूर हृदय, जालसाज, दमा, खांँसी, व विभिन्न संक्रमणों का शिकार होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक हिंसक, ईर्ष्यालु, बदनाम, प्रॉपर्टी आदि से लाभान्वित, उद्वेलित, चिड़चिड़ा, परिवार में कलह करने वाला होता हैं। यदि मकर राशि स्थित मगल की चतुर्थ दृष्टि शनि पर हो तो जातक न्यायिक वा प्रशासनिक विभाग में अधिकारी, प्रभावशाली, जनसेवक होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि पर यदि बुध की दृष्टि हो तो जातक दुबला-पतला, कर्मठ, निवेश से जीवन के उत्तरार्ध में धनवान, संघर्षशील, अनैतिक, असहिष्णु, जीवनसाथी से द्वेष करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि पर यदि गुरु की दृष्टि हो तो जातक हृष्ट-पुष्ट, निरोगी, बलवान, संततिवान, आध्यात्मिक उन्नति वाला, समाज का नायक, सरकारी क्षेत्र में अधिकार रखने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि यदि शुक्र से दृष्ट हो तो दुबला-पतला किन्तु बलिष्ठ चीमर शरीरी, प्रेम के लिए तरसने वाला, मैथुन प्रिय किन्तु कम क्षमतावान, परदेसवासी, अस्त-व्यस्त, विवाह व प्रेम संबंधों में देरी होती हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि यदि राहु से दृष्ट हो तो जातक दरिद्र, भाग्यहीन, कर्कश, उग्र, अश्लीलता करने वाला, नशेड़ी होता हैं। राहु की दृष्टि यदि स्वाति नक्षत्र से शनि पर पड़े तो जातक शल्यचिकित्सक, मूल्यवान रत्नों का व्यवसायी, सोने-चांदी आदि बहुमूल्य धातुओं का तस्कर, वन्यजीवों व प्राकृतिक संसाधनों से धनवान होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित शनि पर केतु की दृष्टि हो तो जातक ध्यानी, बलवान, कठोर तप, व्रत करने वाला, अनुष्ठानिक गतिविधियों में संलग्न, समय को पहले भाँपने की क्षमता वाला होता हैं। ऐसा जातक दीर्घायु किन्तु दुर्घटनाओं से क्षतिग्रस्त होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में राहु फल || Result of Rahu in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु का फल (Result of Rahu situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु स्थित हो तो जातक प्रचण्ड आवेगी, कर्कश आवाज़ वाला, जटिल, षड्यंत्रकारी, बलवान, बुद्धिमान, धुर्त, अनैतिक, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला, परिजनों का हितैषी, दुर्घटनाओं से ग्रस्त होता हैं। उम्र के शुरुआती 8 वर्षों तक अग्नि, शस्त्र व असामाजिक तत्वों से भय होता हैं। परिवार में दुर्घटनाएं, पिता अथवा घर के मुखिया का निधन होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु का फल (Result of Rahu situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु स्थित हो तो जातक जातक अकर्मण्य, लोभी, अकस्मात घटनाओं से परेशान, रिश्तों में धोखा देने वाला, झूठा, परदेसवासी, अप्राकृतिक मैथुन प्रिय, मानसिक दिवालियापन का शिकार होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु का फल (Result of Rahu situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु स्थित हो तो जातक व्यावासायिक बुद्धि, जुआरी, बलिष्ठ, जुझारू, लॉटरी, सट्टेबाजी की लत वाला, मेहनत से कतराने वाला, मनमौजी, बड़बोला, विदेशी मुद्रा से लाभान्वित, परदेसवासी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु का फल (Result of Rahu situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु स्थित हो तो जातक व्यसनी, मानसिक रुप से खिन्न, जिद्दी, उतावला, निडर, नीच वृत्तियों वाला, भ्रम, उन्माद, उदर, नस, व मनोरोग से पीड़ित होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Rahu located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक आत्मबलहीन, अविवेकी, बड़बोला, छद्म स्वभाव वाला, स्वयं के घर में चोरी करने वाला, निर्लज्ज होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक मलीन आत्मा, दुःखी, भयभीत, भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित, मनोरोगी, अनेक व्याधियों से पीड़ित होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक निर्दयी, कठोर, नियमों को न मानने वाला, विद्रोही, चर्म व रक्त विकारी होता हैं। मंगल के साथ-साथ शनि की भी दृष्टि हो तो जातक आतंकवादी प्रवृत्ति का, अति हिंसक, भावना विहीन, भयंकर नरसंहार करने में सक्षम होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि बुध से दृष्ट हो तो जातक महा चालबाज, सफल कुटनीतिज्ञ, व्यापार व्यवसाय में कठिनाई से सफलता हासिल करने वाला, चर्म वा कुष्ठ रोगी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक शिक्षित, अपने कार्यक्षेत्र में गहरा अनुभवी, अपनी विद्या का दुरूपयोग करने वाला, रिश्वतखोर व सेवा के बदले शोषण करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि शुक्र से दृष्ट हो तो जातक इत्र बनाने वाला, जहर वा नशीले पदार्थों का कारोबारी, नीच कर्म में रत, देह व्यापार के ओर उन्मुख होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित राहु यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक वात विकारी, मिर्गी, अपस्मार, हिस्टीरिया आदि रोगों से पीड़ित, कलहप्रिय, मांस-मदिरा का सेवन करने वाला, नीच वृत्तियों वाला, निकट संबंधों में व्याभिचार करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र में केतु फल || Result of Ketu in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in First Charan /Padas of Ashwini Nakshatra): अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु स्थित हों तो जातक ध्यानी, मेहनती, कर्मठ, शिक्षा व ज्ञान के प्रति सहज रुचिवान, धर्मशास्त्रों का अध्ययन करने वाला, मंत्रज्ञ, कर्मकांड, तंत्र-मंत्र, योग-जप करने वाला, बलिष्ठ, निरोगी, प्रसिद्ध, जिद्दी, शठ, प्रयोगात्मक भौतिकी में रुचिवान्, उद्यमी, अभियांत्रिकी में दिलचस्पी रखने वाला होता हैं। अश्विनी के प्रथम चरण में केतु, जातक के पिता के लिए घातक हैं।

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Second Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के द्वितीय चरण में केतु स्थित हो तो जातक साज श्रृंगार प्रिय, दीर्घलिंगी, स्त्रियों से लगाव रखने के बाद हिंसात्मक रिश्ते बढ़ाने वाला, अतरंगी पहनावे वाला, बिना सोचे-विचारे कार्य करने वाला, खेलकूद, रचनात्मक क्षेत्र, Neo अथवा Pseudo आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रसिद्धि पाता हैं।

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Third Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु स्थित हो तो, जातक बलवान, पराक्रमी, मेहनती, दूसरों के आधीन, नीच असमाजिक तत्वों का दास, अनाप-शनाप प्रलाप करने वाला, कर्जदार, हकलाकर, बोलने वाला, क्रूर नेत्रों वाला होता हैं। सूक्ष्म परंपरावादी क्षेत्रों में रुचि रखता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Fourth Charan /Padas of Ashwini Nakshatra) : अश्विनी के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक बाल्यकाल से संघर्षशील, एकांतप्रिय, कम संबंधियों वाला, परिजनों से त्यक्त, मातृ वियोगी अथवा मातृसुख से वंचित, अपनी धुन का पक्का, उदासीन होता हैं। जातक निर्मोही अथवा विरक्त, कोई-कोई अल्पायु भी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Ketu located in Ashwini Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि सूर्य से दृष्ट हो तो जातक उदासीन, अंतर्मुखी, दरिद्रता में जीवन जीने को बाध्य, अकेला, पारिवारिक सहयोग से वंचित, पिता से द्रोह करने वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि चन्द्रमा से दृष्ट हो तो जातक चिंतन-मनन करने वाला, मंत्रज्ञ, क्षुद्र साधनाओं में लिप्त, निष्ठुर, अंधविश्वासी होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि मंगल से दृष्ट हो तो जातक श्यामवर्णी, बलिष्ठ, हिंसक, युद्ध में विजयी, अल्प धनवान, प्राकृतिक चिकित्सा का ज्ञान रखने वाला, कुतर्क करने वाला, जिद्दी, बकवादी होता हैं। बार-बार की दुर्घटनाओं और अधिक शत्रुओं की वजह से अकाल मृत्यु की संभावना बनती हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि बुध से दृष्ट हो तो जातक गंभीर विचारक, सिद्धांतों की व्याख्या करने वाला, प्राचीन धारणाओं व कुरीतियों का व्याख्याता, अग्नि से भय वाला होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि गुरु से दृष्ट हो तो जातक विद्वान, शास्त्रज्ञ, साधुओं की सेवा करने वाला, मठ-मंदिरों का उद्धारक, बड़े व प्रभावशाली लोगों का मार्गदर्शक होता हैं। 

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि शुक्र से दृष्ट हो तो जातक महात्वाकांक्षी, कुआचरणी, अधिक भोजन करने वाला, अविश्वसनीय होता हैं।

अश्विनी नक्षत्र स्थित केतु यदि शनि से दृष्ट हों तो जातक अपने धुन का पक्का, आलस्य युक्त, अकर्मण्य, घूमंतू, निर्धन होता हैं। गृह त्याग व संन्यास धारण करने की संभावना बनती हैं।

उपसंहार || Important Considerations

किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।

यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।

सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता। 

राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।

सचिन तेंदुलकर (भारतीय महान क्रिकेटर / भारत रत्न) : का सूर्य अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

सानिया मिर्ज़ा (भारतीय टेनिस स्टार, पूर्व विश्व नंबर 1 डबल्स में, पद्म श्री विजेता) : का चन्द्र अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

युक्ता मुक़े (1999 की मिस वर्ल्ड, अभिनेत्री और मॉडल) : का चन्द्र अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में था।

एडोल्फ हिटलर (जर्मन तानाशाह) : का सूर्य अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में था।

[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का अश्विनी में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण हैं ]

~ Krishna Pandit Ojha || WhatsApp : 9135754051

नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या 

1• अश्विनी

2• भरणी

3• कृतिका 

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