Krishna Pandit Ojha

पूर्वा फाल्गुनी : संपूर्ण गुण-दोष व इसमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Purva Phalguni Nakshatra in Hindi & Results of Various Planets Situated in it

Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र परिचय || Introduction of Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र’ क्रम से 11वां नक्षत्र हैं। भचक्र में 133° अंश 20′ कला से लेकर 146° अंश 40′ कला तक के विस्तार क्षेत्र ‘पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘डेल्टा और थीटा लियोनिस (δ & θ Leonis)’ कहा जाता हैं। अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-ज़ुबराह (Al-Zubrah) कहते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ हैं — शेर का अयाल (Mane of the Lion) वा शेर के गर्दन के घने बाल / केशरी वा केसरी आदि। चाइनीज सियु में इसे ‘ज़्हांग’ (Zhang Xiù) कहा जाता हैं; जो चाइनीज चन्द्र भवन के प्रमुख 4 वर्गीकरण में से, ‘दक्षिण लाल पक्षी’ (Vermilion Bird of the South) के अंतर्गत आता हैं। इसका अर्थ ‘तानना’, ‘खीचना’, वा ‘विस्तार करना’ हैं। चाइनीज ज्योतिष में यह शक्ति, ताकत और द्रुत गति का प्रतीक है।

फाल्गुनी का शाब्दिक अर्थ हैं — सुन्दर, कोमल, लालिमा युक्त, आरामदायक। कुछ विद्वान इसे “फल्गुन” शब्द से भी जोड़ते हैं; जो वसंत, प्रेम, उत्सव व प्रजनन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुनी का एक तात्पर्य — अर्जुन भी हैं। महाभारत में कई स्थानों पर “अर्जुन” को “फाल्गुन” भी कहा गया हैं। कारण की उनका जन्म “उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र” में हुआ था। “आयुर्वेद में “अर्जुन के वृक्ष” को भी फाल्गुनी नक्षत्र से जोड़ा जाता हैं। यह एक “बृहस्पति ग्रह” का विशेषण भी हैं। भारतीय ज्योतिष में “फाल्गुनी” दो जुड़वांँ नक्षत्र हैं — पूर्वाफाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी।

इस प्रकार पूर्वाफाल्गुनी का शाब्दिक अर्थ हुआ — आनन्द व सौन्दर्य की प्रारंभिक अवस्था वा सुख, प्रेम व रचनात्मकता का पहला चरण।

नक्षत्र मण्डल में पूर्वाफाल्गुनी के 2 तारें खट्वाकार वा पलंग के अग्रभाग जैसी आकृति या झूलें के अग्रभाग जैसी आकृति बनाते हैं। अतः यह विश्राम, आनन्द, प्रेम, दाम्पत्य,  सौन्दर्य, विलास, उत्सव आदि के प्रतीक हैं। एक अन्य मान्यता अनुसार इसके 2 तारें मिलकर “शिवलिंग” जैसी आकृति बनाते हैं। अतः इससे सृजनात्मक शक्ति, दिव्य प्रेम, प्रबल यौनाचार, उग्र व्यवहार, क्रुद्ध होने पर प्रबल विनाशकारी स्वभाव का बोध भी होता है।

अतः सिंह ♌ राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से लेकर 26° अंश 40′ कला तक का विस्तार “पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र” का हैं। इस नक्षत्र का स्वामी – शुक्र, नक्षत्र देवता – भग, जाति – विप्र वा ब्राह्मण,  योनि – मूषक / चूहा, योनिवैर – मार्जार / बिडाल, मनुष्य गण, पित्त प्रकृति, मध्य नाड़ी, रजोगुणी, अशुभ, नाशक, राजसिक, स्त्री नक्षत्र हैं। यह उत्तर दिशा का स्वामी हैं। यह उग्र / क्रूर, अधोमुखी, सुलोचन नक्षत्र हैं।

विवाह, रोमांस, प्रेम संबंध, वाग्दान अर्थात सगाई, विवाह के लिए वर रोकना (छेंका), शयनकक्ष से संबंधित कार्य, वैवाहिक सुख से जुड़े कार्य, संगीत, गायन, अभिनय, नृत्य, चित्रकला, फैशन, डिजाइन, मनोरंजन, विश्राम, छुट्टी, आनंद, सुख-भोग, कामक्रीड़ा, संवेदनशील कार्य, उत्सव, पार्टी, फोटोग्राफी, मॉडलिंग, सौंदर्य प्रसाधन, लग्जरी आइटम्स से जुड़े कार्य, विवाद सुलझाना, अधिकारी वा शक्तिशाली लोगों से संपर्क, दोलारोहण अर्थात झूला झुलाना, संपत्ति विक्रय, बाग़-बगीचा, पुष्प, सुगंध, इत्र आदि से जुड़े कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मित्र-मिलन, सामाजिक गठबंधन, जनसंपर्क कार्य, क्लब या संगठन की शुरुआत, मनोरंजन आयोजन, सोशल मीडिया से संबंधित कार्य, पार्क, उद्यान, क्रीड़ा स्थल, स्विमिंग पूल आदि निर्माण, वाहन संबंधी कार्य, शल्यक्रिया वा ऑपरेशन, कुटनीतिक कार्य, आभूषण निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, फसलों की कटाई, कूप खनन, जलागार निर्माण, खनिज तत्वों की खोज व खुदाई आदि कार्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में अनुकूल परिणाम देने वाले हैं।

विशेषतया यह प्रेम, विवाह, वैवाहिक संबंध, कामक्रीड़ा, आनन्द, विश्राम, तनाव मुक्ति, भौतिक अधिकार, विलासितापूर्ण जीवनशैली आदि का द्योतक है।

Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

Table of Contents

ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Astrological Symbolic Description of Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता – भग हैं। इसी कारण से पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का एक नाम – “भगदेवत” भी हैं; अर्थात “भग” देवता वाला। संस्कृत धातु “भज्” (भ्वादिगण) में “घञ् (अ)” प्रत्यय के मिलने से “चजोः कु घिण्ण्यतोः” आदि सूत्रों से “भग” शब्द निष्पन्न हुआ हैं।

[भज् + घञ् (अ) → भग]

“भज्” का शाब्दिक अर्थ हैं — विभाजित करना, बांँटना, प्रदान करना या सेवन करना आदि। इस प्रकार “भग” का अर्थ हुआ — वितरक अर्थात वह जो भाग्य या धन को बांँटता हैं। “भग” शब्द का अर्थ ऐश्वर्य, महिमा, सौभाग्य, ईश्वरत्व या प्रकाश भी है।

इसके अतिरिक्त वाचस्पत्यम् व मेदिनीकोष के अनुसार — अग्नि, वीर्य (शक्ति/वीरता), यश, प्रिया (पत्नी/प्रियतमा), समृद्धि, मर्यादा, कीर्ति, लावण्य, उत्कर्ष, ज्ञान, वैराग्य, सामर्थ्य, स्त्री की योनि, इच्छा, महात्म्य, यत्न, धर्म, मोक्ष, सौभाग्य, कान्ति, चन्द्र, पूर्वफल्गुनी नक्षत्र, शिवलिंग का एक भाग, सर्वशक्तिमत्ता आदि “भग” के पर्याय हैं।

पौराणिक आख्यानों के अनुसार — ऋषि कश्यप और देवी अदिति के पुत्रों में 12 आदित्य भी शामिल है। ऋग्वेद के अनुसार, इन 12 आदित्यों में से 10वे आदित्य का नाम “भग” हैं। जो मनुष्य के भाग्य और समृद्धि का निर्धारण करते हैं।

ऋग्वेद 7.41 भग वा भाग्य सूक्त का कथन हैं कि — “भगं भगस्य दातारं वयं भगं हुवेम” — हम भग को पुकारते हैं, जो भग (समृद्धि) देने वाले हैं।

भग से गाय-बैल, घोड़े, पुत्र, वीर पुरुष और सौभाग्य की प्रार्थना की जाती है।

उषा (भोर) को भग की बहन कहा गया है। इससे भग का सूर्य/प्रभात से संबंध स्पष्ट होता है। (ऋग्वेद 1.123.5)

शतपथ ब्राह्मण के एक प्रसिद्ध कथा में “भग” की अंधता का वर्णन है। यज्ञ में ब्राह्मण के लिए रखे गए हिस्से (ब्रह्मभाग) को भग ने ग्रहण कर लिया; जिससे उनकी आँखें जल गईं। इसलिए कहा जाता है — “अंधो हि भगः” (भग अंधे हैं)।

यह कथा वितरण के देवता के रूप में भग की भूमिका को दर्शाती है, लेकिन साथ ही यज्ञ-नियमों का महत्व भी बताती है।

श्रीमद् भागवत पुराण (12.11) के अनुसार पौष मास (सहस्य) में “भग” ही सूर्य रूप में प्रकाशित होते हैं।

इस प्रकार “भग” यज्ञ में हिस्सा (भाग) बाँटने वाले और भक्तों को समृद्धि देने वाले, ऋत (सत्य-व्यवस्था) के रक्षक, सभी प्राणियों के हितैषी, प्रकाश, प्रभात और दैनिक जीवन की समृद्धि के द्योतक हैं। पितरों के प्रमुख देवता वा पितरों में श्रेष्ठ “अर्यमा” के साथ मिलकर “भग” विवाह, अतिथि सत्कार, मैत्री, समाजिक नियम और संविदाओं (contracts) के प्रतिनिधि हैं।

अतः उपरोक्त सभी गुण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में कमोबेश मिलते हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी – शुक्र हैं। भारतीय ज्योतिष वाङ्मय में शुक्र भी प्रेम, लावण्य, भोग, सांसारिक सुख, विश्राम, उच्च कोटि की विलासिता, वाहन सुख, समृद्धि, वीर्य, उत्तेजना, कामुकता, वैवाहिक सुख का नैसर्गिक कारक हैं। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में इन गुणों की अधिकता वा प्रचुरता देखी जा सकती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

वराह मिहिर का कथन हैं कि — नृत्यक, स्त्रियांँ, सबके प्रिय, सौभाग्यशाली, गांधर्व अर्थात गान वा गायन विद्या को जानने वाले, शिल्पी, विक्रय या क्रय द्रव्य, कपास, रुई, नमक, शहद, तेल, बालक — ये सब पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रगत पदार्थ हैं। पूर्वाफाल्गुनी में जन्मा जातक – प्यारी वाणी वाला, उदार, कान्तिवान, घूमने-फिरने वाला, राजसेवा में तत्पर होता हैं।

पं• रामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि — पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दो तारों वाला, पलंग के समान दिखाई देने वाला, उग्र संज्ञक, भग देवता, पराशर गोत्र वाला हैं। इसमें उग्र कार्य करना चाहिए और इसमें उग्र (क्रूर) का ही जन्म होता है। भाग्यवान, नाचने वाली स्त्री, गायक, चित्रकारी का ज्ञाता, व्यापार, रुई, नमक, शहद, तेल और बालक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रगत पदार्थ है।

वशिष्ठ संहिता का कथन हैं कि —

शिल्पप्रहरणबन्धनदारुणचित्रकापटं नटनद्रुमासवाद्यं भाग्ये कुड्यप्रहरणं च।।

अर्थात शिल्प, शस्त्र, बन्धन, दारुण, चित्रलेखन, कपटकृत्य, नटकृत्य, वृक्षारोपण, आसव (सुरा आदि निर्माण), पलस्तर / प्लास्टर करना, लीपना-पोतना, दीवार निर्माण (भित्तिनिर्माण), शस्त्र सम्बन्धी कार्य पूर्वा फाल्गुनी में विहित हैं।

अतः समृद्धि, सौभाग्य, वैवाहिक सुख, भाग्य, अंश वितरण, आराम, विश्राम, भोग, सृजन, आनंद, आकर्षण, करिश्माई चीज़ें, राजसिक पदार्थ, भोग-विलास की वस्तुएंँ, कलाप्रेमी, उदार, सामाजिक, उत्सवी, रोमांटिक, भोगप्रिय, सौंदर्य, विलासिता, रचनात्मक, कलात्मक, नेतृत्वकारी लेकिन स्वतंत्रता प्रेमी, मधुर वाणी, दानशील, यात्राप्रिय, अभिनय, मॉडलिंग, कलाकार, संगीतकार, नर्तक, फैशन, सौंदर्य प्रसाधन, ज्वेलरी, चश्मा, मेकअप आर्टिस्ट, शादी-विवाह प्लानर, होटल, रिसॉर्ट, पर्यटन, वाहन व्यवसाय, संग्रहालय, महिला कॉलेज वा कन्या विद्यालय, एन्टिक वस्तुओं से संबंधित कार्य, रेडियो, टीवी, फोटोग्राफी, मीडिया, चित्रकारी, रंगाई-पुताई करने वाले, प्रबंधन, रिटेल, विलासिता संबंधी वस्तुओं का व्यापार, शल्य चिकित्सक, थेरेपिस्ट, यौनरोग व स्त्रीरोग विशेषज्ञ, रंग उद्योग, काँच उद्योग, चमड़ा उद्योग, मसाज, सरकारी नौकरी, राजस्व विभाग, शिक्षक, शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े उच्च पदासीन अधिकारी, यातायात, सिनेमा, रंगमंच, थियेटर, नाटक, पशुपालन, पशुओं के अंग (चर्म / अस्थि आदि) का व्यवसाय, प्राणी प्रशिक्षक, कला वा शिल्प संबंधी कार्य, पलंग, झूला, संगीत, नृत्य, सुगंध, प्रकृति की लय, महल, विश्राम स्थल, शयनकक्ष, उद्यान, विलासिता भवन, विवाह मंडप, कला स्थल, थिएटर, सजावटी वस्तुएँ, संगीत वाद्य, सौंदर्य सामग्री, रेशम, सूती वस्त्र, विवाह, सृजन (Creation) और प्रजनन (Procreation) की शक्ति, सर्वोत्तम भाग (हिस्सा) प्राप्त करने की कामना, खिलौना, खेलकूद, व्यवसायिक प्रशिक्षण व व्यवसायिक गतिविधियांँ, मिष्ठान, कामोत्तेजक पदार्थ, हृदय, मेरुरज्जू, सन्तान हानि, गर्भपात, प्यार में धोखा खाना, केवल शारीरिक आकर्षण वा आर्थिक लाभ के लिए दूसरों के द्वारा शारीरिक संसर्ग का शिकार होना, हृदय रोग, हृदय में सूजन, वाल्व में दोष, मेरुदण्ड में समस्या, अनीमिया वा ख़ून की कमी, ब्लडप्रेशर, नस व तंत्रिकाओं की समस्या, टांगों में दर्द, टखने में सूजन मोर, अर्जुन व अंजीर का वृक्ष, सुगंधित द्रव्य, फूल आदि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से संबद्ध पदार्थ हैं।

लग्न में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के फल || Purva Phalguni Nakshatra Results in Ascendant/ Lagna

यदि लग्न में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र हो तो जातक आकर्षक व्यक्तित्व, सत्यभाषी, ईमानदार, बेफिक्र, मस्तमौला, लचक युक्त शारीरिक सौष्ठव वाला, सचेत, मधुरभाषी, दयालु, प्रभावशाली, आराम पसंद, कुशल प्रेमी, कामक्रीड़ा का पहल करने वाला, संगीत, नृत्य, नाट्यकला, चित्रकारी, काव्यकला, ललित कला में रुचि वाला, सामाजिक गतिविधि व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाला, एकांत से घबराने वाला, बहादुर, स्वतंत्रता प्रिय, ऐशो-आराम व उत्तम वस्त्रादि – रत्नादि का शौकीन, मुंँहफट, अभद्र, सबका काम आने वाला, अल्प संतत्तिवान, अनुशासनप्रिय, भ्रमणशील, पर्यटन प्रेमी होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न नैतिक मूल्यों के विशेष धनी होते हैं; ये ना तो स्वयं कोई गैर-कानूनी कार्य करते हैं, और जितना इनका वश चलता हैं, ये ना ही दूसरों को कोई गैर-कानूनी कार्य करने देते हैं। अक्सर इनका विपरीत लिंगीयों के द्वारा नाजायज फायदा उठाया जाता है। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष|| Qualities of a Male Chart/Horoscope born in Purva Phalguni Nakshatra in Hindi : 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक गेहूंआ रंग का, मध्यम कद-काठी वाला, चंचल तीक्ष्ण दृष्टि वाला, छोटी फैली हुई नासिका वाला, शरीर पर नसों का उभार वाला, स्वाद लोलुप, तेज-तर्रार, चुस्त, सचेत, स्वाभिमानी, आज़ाद ख्याल का, सुन्दर व्यक्तित्व वाला, मृदुभाषी, निर्णय लेने में कठिनाई वाला, दूसरों का मददगार, घूमने-फिरने का शौकीन, अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार होता हैं। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मा जातक मान-सम्मान का भूखा, जिद्दी, जल्दी बुरा मानने वाला, परिजनों से मतभेद वाला, भौतिक समृद्धि से युक्त, स्वार्थपरक रिश्तों में रुचिवान्, मौकापरस्त, दूसरों को क्षति पहुंँचाने को तत्पर, उग्र कार्यों में रुचिवान, अनुशासनप्रिय, गलतियों को क्षमा नहीं करने वाला, कठोर दण्ड देने में विश्वासी, संचार कुशल, इधर की बात उधर करने वाला, कुशल नेतृत्वकर्ता, स्व रोजगार को वरीयता देने वाला, नौकरी करने में असहज होता हैं। यदि नौकरी करे भी तो राजकीय उच्च पदों पर कार्य करने को इच्छुक होता हैं।

अभिनय, गायन, संगीत, फोटोग्राफी, पेंटिंग, इवेंट मैनेजमेंट, थिएटर, ज्वेलरी व रत्न व्यापार, टॉयलेट्रीज, इंटीरियर डिजाइनर, सरकारी अधिकारी, एग्जीक्यूटिव, कुटनीतिज्ञ, प्रबंधन, राजनीति, उच्च प्रशासनिक पद, शिक्षक, यात्रा एवं पर्यटन, होटल मैनेजमेंट, ऊन, रुई, सिल्क उद्योग, डॉक्टरी, थेरेपी विशेषतया नेचुरोपैथी, सेक्स-थेरेपी आदि, पशु प्रशिक्षक, फिजिकल फिटनेस ट्रेनर आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होते हैं।

इनके लिए आदेशों का पालन करना और किसी और के बताए अनुसार बिना रचनात्मक दिमाग लगाए कार्य करना कठिन होता हैं। अतः ये लोग नौकरी में वरिष्ठों के साथ तालमेल बिठाने में समस्या महसूस करते हैं। इसलिए इनके लिए स्वतंत्र व्यवसाय या उच्च पदस्थ नेतृत्व वाली भूमिकाएँ बेहतर होती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Qualities of a Female Chart/Horoscope born in Purva Phalguni Nakshatra in Hindi

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका छोटे या मध्यम कद की, गोल वा चौकोर चेहरा, ऊपर पतली आगे से चौड़ी नासिका, उभरीं हुई आँखें, लम्बी गर्दन, मजबूत बाहु, चौड़ी कलाई, लम्बी ठोढ़ी, मधुरभाषिणी, आकर्षक, विनम्र, रचनात्मक व कलात्मक अभिरुचि वाली, उच्च शिक्षित, तार्किक, पर्यटन-प्रिय, धनवान्, भौतिकतावादी, समृद्ध, दयालु, दानशील, सीधी-सादी, गंभीर, लाभ-हानि के हिसाब-किताब में माहिर, संचार कुशल, जिसके साथ हो उसका प्रभाव बढ़ाने वाली, स्वरोजगार के प्रति विशेष उन्मुख, प्रेम में सर्वस्व समर्पण करने वाली, उपहार आदि देने की शौकीन, मित्रों का पोषक, नृत्य-संगीत आदि ललित कलाओं में दक्ष, कामुक, आराम पसंद, राजसी आदतों वाली होती है।

ये जान-बूझकर या विवशता-वश अपनी वास्तविक छवि के साथ नहीं जीतीं, ये अपनी नकली छवि के साथ पहचानी जातीं है। पति के अहंकार वश इनके व्यक्तिगत संबंधों व पड़ोसियों के साथ संबंधों में कड़वाहट आती हैं। परिजनों के लिए फिक्रमंद, किन्तु ससुराल पक्ष के लोगों से इनकी नहीं बनती तथापि पूर्ण अधिकार व सम्मान पातीं हैं।

शिक्षक, प्रोफेसर, लेक्चरर, राजनीतिज्ञ, संगीत, नृत्य, मॉडलिंग, अभिनय, फ़ैशन, सौन्दर्य से जुड़े सभी क्षेत्र, इवेंट मैनेजमेंट, फ़ैशन डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट, ब्यूटीशियन, कॉस्मेटिक्स, इंटीरियर डेकोरेशन, लग्जरी प्रोडक्ट्स, वेडिंग प्लानर, विवाह प्रबंधन संबंधित कार्य, होटल इंडस्ट्री, क्रिएटिव आर्ट्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, पशु चिकित्सा विज्ञान, रिसर्च आदि विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र, मीडिया आदि सौन्दर्य व रचनात्मक गतिविधियों से संबंधित क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होतीं हैं।

इनकी वित्तीय स्थिति अच्छी होती हैं। विशेष अधिकारपूर्ण स्वभाव के कारण वैवाहिक जीवन में असंतोष का सामना करती हैं। 

प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Purva Phalguni Nakshatra Subtel Results Variations in all 4 Charan (Padas)

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र प्रथम चरण (Purva Phalguni Nakshatra First Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से लेकर 16° अंश 40′ कला तक का क्षेत्र विस्तार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण हैं। नवमांश सिंह ♌ होने से इस चरण का स्वामी सूर्य हैं। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण पर सूर्य-शुक्र-सूर्य का संयुक्त प्रभाव हैं। आत्म-केंद्रित आत्मविश्वास, राजसी वैभव, आत्म-सम्मान (self-respect), प्रतिष्ठा, अधिकार, गरिमा, पारितोषिक, उत्तम महात्वाकांक्षा – पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का मूल गुण हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक लम्बा सिर, श्वेत चमकीली आँखें, कम बालों वाला, अधिक रोम युक्त, लम्बोदर, चौड़े-चौड़े दाँतों वाला, साहसी, आकर्षक, महात्वाकांक्षी, आदेश के स्वर में बोलने वाला, मजबूत रचनात्मक कौशल का धनी, कला, संगीत, अभिनय आदि स्व-प्रकाशन में निपुण, तेज (brilliance), विलासिता और आराम की इच्छा रखने वाला, मान्यता पाने को इच्छुक, रसायन, चिकित्सा, राजनैतिक वा प्रशासनिक नेतृत्व, प्राकृतिक वस्तुओं के व्यवसाय, यात्रा व पर्यटन से आजीविका वाला, प्रबल नेतृत्व क्षमता वाला होता हैं।

अहंकार व आदेशात्मक शैली के कारण इनकी विपरीत लिंगीयों से नहीं बनती, किन्तु माता-पिता से विशेष लगाव होता हैं। जीवन के उत्तरार्ध आते-आते सभी सुखों को भोगने वाला, तीर्थाटन प्रेमी होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र द्वितीय चरण (Purva Phalguni Nakshatra Second Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से लेकर 20° अंश तक का क्षेत्र विस्तार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश कन्या ♍ होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण पर सूर्य-शुक्र-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। बुद्धिमत्ता, विश्लेषणात्मक क्षमता, धीरज, संयमित व्यवहार, परिश्रमी, व्यवहारिक समझ, राजनीतिक सहयोग, व्यापारिक कौशल, उद्यमिता, संचार कुशलता पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का मुख्य गुण हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक ठिगने या मध्यम कद-काठी का, गेहूंआ रंग, उभरी हुई थोड़ी तिरछी मटमैले आँखों वाला, कम रोम वाला, सीधी-सीधी स्पष्ट बातें करने वाला, अपनी तारीफ़ सुनने का इच्छुक, तरल पेय पदार्थों का शौकीन, अपना काम निकलवाने में माहिर, समय की नज़ाकत को समझने वाला, क्रोध की अधिकता वाला, विनम्र, नृत्य-संगीत आदि ललित कलाओं में रुचिवान्, परिजनों से मतभेद वाला, संतुलित दृष्टिकोण का, चतुर, प्रचुर बुद्धिमत्ता वाला, वेद व धर्म शास्त्रों में रुचिवान्, प्रकृति प्रेमी, शुद्ध व शांत प्रवृत्ति वाला होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक लेखन, संचार, व्यापार, शेयर मार्केट, ब्रोकरेज, मैनेजमेंट, प्रकाशन, कम्युनिकेशन, स्पीकिंग, जेमोलॉजी आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, बौद्धिक कार्यों में सफलता वाला, अत्यंत कामुकता वाला, शराब पीने का शौकीन होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तृतीय चरण (Purva Phalguni Nakshatra Third Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 20° अंश से लेकर 23° अंश 20′ कला तक का क्षेत्र विस्तार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का तृतीय चरण हैं। नवमांश तुला ♎ होने से इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण पर सूर्य-शुक्र-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। यह एक पुष्कर नवमांशभी हैं। समृद्धि, कलात्मक व रचनात्मक कौशल, आकर्षण, सामाजिकता, मस्तमौला अंदाज़, चिंतामुक्ति, सृजनात्मक क्षमता, साफ़-सफ़ाई, स्वच्छता, पर्यटन, सलाहकारी, आनन्द, सौंदर्यीकरण आदि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का मुख्य गुण हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक अण्डाकार लम्बा मुखाकृति, हृष्ट-पुष्ट, लम्बा कद-काठी वाला, सुन्दर, आकर्षक, रोमांटिक, सौन्दर्य बोध के धनी, सफल कुटनीतिज्ञ, झूठ बोलने में माहिर, आक्रामक, परिजनों का प्रिय, बेईमान, प्रेम संबंधों में धोखा देने वाला, साधारण मददगार, मतलबी, व्यवसायिक सफलता वाला, पारंपरिक मूल्यों में रुचिवान्, लड़ाकू होता हैं।

इस चरण में जातक समस्त भोगों के प्रति आसक्त, अतिक्रमणकारी, सजने-संवरने का शौकीन, व्यसनी, दूसरों पर प्रहार करने वाला, युद्ध में विजयी, यात्रा प्रिय, सामाजिक समारोह व रात्रि में होने वाली गतिविधियों (पार्टी आदि) में रुचावान्, मनोरंजन, फ़ैशन, शिक्षक, सरकारी क्षेत्र, न्यायिक विभाग, होटल व रिसॉर्ट, टूरिज्म, आर्ट गैलरी, गृहसज्जा, उपहार सामग्री, गिफ्ट्स, डिजिटल नवीकरणीय क्षेत्रों में रुचिवान्, लोकप्रिय, प्रसिद्ध होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र चतुर्थ चरण (Purva Phalguni Nakshatra Fourth Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 23° अंश 20′ कला से लेकर 26° अंश 40′ कला तक का क्षेत्र विस्तार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। नवमांश वृश्चिक ♏ होने से इस चरण का स्वामी मंगल हैं। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर सूर्य-शुक्र-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। जुनून, परिवर्तन, आंतरिक शक्ति, त्याग, वीरता, तीव्र भावनात्मक बंधन, साहस, आत्म-निरीक्षण, मशहूर होने की उत्कंठा पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण के मूल गुण हैं ‌

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक सांवले रंग का या रक्तिम वर्णी, मध्यम कद-काठी का, फुर्तीला, स्थूल शरीर, तन कर चलने-बैठने वाला, गोल मुखाकृति, चुम्बकीय आकर्षण शक्ति वाला, सुंदर, आकर्षक, दयालु, उदार, प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला, शिष्टाचार युक्त, युद्ध कला में निपुण, साहसी, चिंतनशील, उच्च अंतर्ज्ञान वाला, रहस्यमय, आध्यात्मिक वा ध्यान-योग क्रिया में निपुण, प्रतिस्पर्धी स्वभाव का, अधिकार जताने वाला, रिश्तों में सत्ता संघर्ष वाला, घर-परिवार के प्रति अति निष्ठावान, अनावश्यक कलह व जटिलताओं वाला होता है।

पारिवारिक व्यवसाय को लोकप्रिय बनाना, दर्शन, योग व आध्यात्मिक व्यवसाय, टूरिज्म, स्पोर्ट्स, एथलेटिक्स, फिटनेस ट्रेनर, पशु प्रशिक्षक, अभिनय, इन्फ्रास्ट्रक्चर, निर्माण, फोटोग्राफी, क्रिएटिव आर्ट्स, मनोविज्ञान, चिकित्सा, थेरेपी, काउंसलिंग, सर्जरी, यौनरोग विशेषज्ञ, उग्र उपदेशक, अनुसंधानकर्ता, उच्च सरकारी पद, इन्वेस्टिगेटिव पोजीशन, गुप्तचर विभाग आदि क्षेत्रों में सफल होते हैं। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Results of various planets situated in different Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक तेजस्वी, राजसी, आकर्षक चेहरा, चमकदार आँखें, गरिमापूर्ण व्यवहारी, हँसमुख, अहंकारी, आत्म-केंद्रित, महत्वाकांक्षी, नेतृत्वकारी, सृजनात्मक क्षमता वाला, कलाकारी, अभिनय, नेतृत्व, प्रशासन, राजनीति, उच्च सरकारी पद, मनोरंजन, चिकित्सा, अधिकार वाले क्षेत्रों में रुचिवान् होता हैं। प्रेम वा वैवाहिक जीवन में निष्ठावान होता हैं किन्तु अहम् का टकराव बना रहता हैं। साथी पर विशेष अंकुश लगाने का गुण होता है। चिंता व तनाव से पीड़ित होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक मध्यमवर्णी, कम रोम वाला, चिकना, चेहरे पर तिल या मस्से का निशान वाला, बहादुर, नृत्य-संगीत में रुचिवान्, छिन्द्रान्वेषी, कुटिल, विश्लेषणात्मक बुद्धि वाला, दूसरों को हराकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाला, सभी सुखों व संसाधनों से युक्त, पाचनतंत्र संबधी समस्याएंँ हो सकती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक अत्यंत रुपवान्, जिद्दी, बार-बार अपमान सहने वाला, परिवार से दूर, प्रेम संबंधों में धोखा खाने वाला, सामाजिक गतिविधियों में तल्लीन, देर से सफल, पत्नी व ससुराल पक्ष से अपमानित होता है। रचनात्मक व्यवसाय वा सरकारी तंत्र में निचले स्तर का कर्मचारी होता हैं। जननांग संबंधी समस्याएंँ व मनोरोग की संभावना होती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक गंभीर मुखाकृति, छोटे नेत्र, महात्वाकांक्षी, मारपीट करने वाला, विश्राम से दूर, सदैव लक्ष्य पर ध्यान देने वाला, चंचल, ओजस्वी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शासकीय सेवाओं में प्रतिष्ठित होता है। कोई-कोई जातक अपराधी होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Sun located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मिलनसार, भारी-भरकम शरीर वाला, विलासी, सद्व्यवहारी, करुणामय, दानशील, कामुक, जनसंपर्क, समाज, जनता या महिलाओं से जुड़े कार्यों में रुचिवान्, कुटुंबियों में निन्दा का पात्र, अनेक यात्राओं वाला, अनेक शत्रुओं से पीड़ित, अस्थिर कार्य-व्यवसाय वाला, पत्नी पर आश्रित होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक महात्वाकांक्षी, अल्प वय से धन कमाने वाला, सुख से वंचित, समाज में प्रभावशाली, मित्रों से लाभान्वित, अधीर, सरकार वा निजी क्षेत्र में उच्च पदासीन, लोक में प्रतिष्ठित, प्रभुत्वशाली होता हैं। रक्त व पित्त दोष से पीड़ित, अंग-प्रत्यंगों में दर्द वाला होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक नैतिक मूल्यों का धनी, विवेकवान, मर्यादित, शिक्षा, अध्यापन, कानून, धर्म, परामर्श, प्रशासन या मार्गदर्शन वाले कार्यों में रुचिवान्, घर-परिवार व सगे-संबंधियों से अनबन वाला होता हैं। ऐसे में जातक के स्वाभिमान की भावना को लोक में अहंकारी होना समझा जाता है।

शनि की दृष्टि हो तो जातक उच्च आदर्शों वाला, सामान्य शिक्षित किन्तु विविध विषयों का ज्ञाता, परिपक्व, गहरी अंतर्दृष्टि वाला, योग्यता के अनुरूप कार्य ना मिलने के कारण व्यथित, चिड़चिड़ा, अस्थिर कर्मी, निर्धन होता है।

राहु की दृष्टि हो तो जातक सत्ता व वर्चस्व का भूखा, स्वयं को सिद्ध करने के लिए अनैतिक मार्गों का चयन करने वाला, दिखावा पसंद, पिता या वरिष्ठ व्यक्तियों के साथ जटिल संबंधों वाला, अनिश्चित आय वाला, अस्थिर कार्य-व्यवसाय वाला, प्रबल भौतिकतावादी, दुष्ट प्रकृति, दूसरों को पीड़ित करके स्वार्थपूर्ति करने वाला होता हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक जोशिला स्वभाव का, जिद्दी, भावनात्मक निर्णयों के आधीन दुःखी, विकृत धर्म वा पंथों के प्रति आस्थावान्, धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों का निर्माण करने वाला, अस्थिर विचारों वाला, सुगन्धित द्रव्यों का व्यवसाय करने वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मेधावी, उच्चस्तरीय प्रतिष्ठित जनों से जान-पहचान वाला, अपनी माता के प्रति विशेष समर्पित, अन्य स्त्रियों से ईर्ष्या रखने वाला, जोखिम लेने वाला, अल्प परिश्रमी, आलस्य युक्त, स्वतंत्रता पसंद, अत्यंत कामुक, मस्तमौला, यात्रा प्रिय, किसी संगठन, सभा आदि का अध्यक्ष, राजकर्मचारी वा चिकित्सा व्यवसाय में प्रतिष्ठित होता है। ये काम के वशीभूत होकर लैंगिक अपराध करने वाले होते हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक परिवार के लिए कर्तव्यनिष्ठ, विरासतों का धनी, गहरी अंतर्दृष्टि वाला, प्रफुल्लित, व्यवहारिक, सुरक्षित निवेश की मानसिकता वाला, शनै-शनै प्रगतिशील, दूसरों की सफलता पर राज करने वाला, बौद्धिक गतिविधि वाले क्षेत्रों, राजनीति, पत्रकारिता, लेखन, नवाचारी तकनीकी क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक विशेष आकर्षण, सजने-संवरने वाला, विशेष चुम्बकीय चाल से चलने वाला, अनेक जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने में सक्षम, व्यवसायिक जीवन में घनघोर उतार-चढ़ाव देखने वाला, यात्रा प्रिय, घूमने-फिरने वाला, अनेक कामुक संबंधों में लिप्त, शिक्षण, वित्तीय प्रबंधन, निजी व्यवसाय से प्रगतिशील होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra): पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक चंचल, निर्भीक, खेलकूद प्रतियोगिताओं में रुचिवान्, व्यावहारिक, मतलब के संबंधों को वरीयता देने वाला, मनोविज्ञान, चिकित्सा, जोखिम भरे रचनात्मक कार्यों में रुचिवान् होता है। राजनीति, भूमि-भवन का व्यवसाय, दूसरों के अधिकार पर कब्जा जैसे कार्यों में संलिप्त रहते हैं। संबंधों में विशेष निष्ठावान होने से वफ़ादारी की उच्चतम गुणवत्ता की मांग करते हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Moon located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक प्रेम और संबंधों में सम्मानित, प्रतिष्ठा व सामाजिक स्तर पर विशेष ध्यान देने वाला, नेतृत्व, प्रशासन, राजनीति, प्रबंधन आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, उच्च पदस्थ, सरकारी या प्रभावशाली लोगों से मैत्रीपूर्ण संबंध वाला, अल्प अहंकारी, पितृसत्तात्मक व्यवस्था का कट्टर समर्थक, परोपकारी, अच्छी अचल संपत्ति वाला होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक प्रेम में पहल करने वाला, साहसी, आक्रामक, विपरीत लिंगियों के प्रति तीव्र आकर्षण वाला, शीघ्र प्रसन्न व शीघ्र क्रोधित होने की आदतों वाला, प्रेम संबंधों में अधिकार व ईर्ष्या की भावना से ग्रस्त, खेल, सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, तकनीकी वा स्वतंत्र व्यवसाय में रुचिवान् व सफल होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक बुद्धिमान, विनोदी, वाक्-चातुर्य से युक्त, अनेक मित्र व सामाजिक संपर्क वाला, प्रेम संबंधों में अत्यधिक सोच-विचार या विश्लेषणात्मक अध्ययन वाला, भावनाओं से अधिक संवाद को महत्व देता हैं। लेखन, मीडिया, शिक्षण, मार्केटिंग, काउंसलिंग, कंटेंट राइटिंग आदि क्षेत्रों में बहुआयामी प्रतिभा वाला होता है। माता व मातृ पक्षीय संबंधों से मतभेद वाला होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक सौम्य, सुभग, कोमल अंगों वाला, उदार, सद्चरित्र, मिष्ठान प्रिय, लोककल्याण में संलग्न, धर्मशास्त्र व न्यायशास्त्र का जानकार व इन्हीं विद्याओं से आजीविका वाला, लोक में प्रसिद्ध, सम्मानित होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत सुंदर, चुम्बकीय आकर्षण से युक्त, सामाजिक, व्यवहारिक, समस्त विलासिता व संसाधनों से युक्त, कला, संगीत, अभिनय, फैशन, सौंदर्य, डिजाइन में रुचिवान्, भोग-विलास में संलिप्तता से भविष्य बिगाड़ने वाला, विपरीत लिंगियों में लोकप्रिय, गुप्तरोगी होता है।

शनि की दृष्टि हो तो अकेलापन, भावनात्मक संकोच, निराशावाद से ग्रस्त, उद्योग, तकनीकी क्षेत्र, न्यायिक क्षेत्र या संगठित कार्यों में रुचिवान्, प्रेम वा वैवाहिक संबंधों में विलंब, दूरी, आयु-अंतर (Age gap) या संबंध विच्छेद वा तलाक की संभावना होती हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर, पुष्ट शरीर वाला, गौरवर्णी, बड़ा मुख व जबड़ा वाला, उन्नत आँख व मलीन विचारों वाला होता है। कल्पनाओं में जीने वाला, अग्नि आदि प्रकोपों से पीड़ित, माता व माताहतों से कटु संबंधों वाला होता है। यात्रा, पर्यटन, विदेशी व्यवसाय से प्रगतिशील होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक अपनी परंपराओं को बोझ समझने वाला, अपरिग्रह आदि गुणों से युक्त, प्रकृति प्रेमी, हिंसक जन्तुओं को पालने का शौकीन, संपत्ति से हीन, निर्दयी, निष्ठुर, कठोर होता हैं। आयु के मध्यावस्था तक किंकर्तव्यविमूढ़ बना रहता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक उग्र, पराक्रमी, मजबूत शारीरिक सौष्ठव वाला, बाहुबल का प्रदर्शन करने वाला, अहंकारी, चिकित्सा वा इंजीनियरिंग क्षेत्र में रुचिवान्, काम पीड़ित, अनैतिक आचरण वाला, राजनीति, सेना, पुलिस, उच्च प्रशासन, खेल, नेतृत्व वाले क्षेत्र, फिल्म उद्योग, अभिनय, निर्माण या भूमि संबंधी कार्य में रुचिवान् व सफल होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक बाल्यकाल से तीव्र बुद्धिमत्ता वाला, वाद-विवाद में विजयी, जटिल, चिड़चिड़ा, परिजनों में क्लेशपूर्ण स्थिति वाला, मौकापरस्त, कुशाग्र रणनीतिकार, होता हैं। तकनीकी कार्य, इंजीनियरिंग, व्यापार, व्यंग्यात्मक लेखन, जेमोलॉजी, सैन्य वा प्रशासनिक सेवा आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है। अल्प संतति वा संतान होने में विलंब हो सकता है। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक संतुलित शरीर, आकर्षक, चंचल, फुर्तीला, कार्यकुशल, धनी, रोमांटिक, जुनूनी, प्रबल कामुक, राजसी अंदाज़ में नृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनन्द लेने वाला, व्यसनी, परस्त्रीगमन करने वाला, उच्चस्तरीय राजनयिक, मंत्री, न्यायिक वा प्रशासनिक विभाग का प्रमुख, किसी उद्योग का उच्चतम अधिकारी वा स्वयं उद्योगपति होता है। अत्यंत भोग-विलास में लिप्त होने से जीवन के उत्तरार्ध में रोगी होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक जिद्दी, सबका मखौल उड़ाने वाला, तीक्ष्ण दृष्टि वाला, रहस्यमय, कुशाग्र बुद्धिमत्ता वाला, नियम-कानून में विश्वासी, कुशल प्रशासक, दण्डनायक, बॉक्सिंग आदि शारीरिक बल प्रदर्शन जैसे खेलों में रुचिवान्, जीवनसाथी से मतभेदों वाला, बीमा, संकट प्रबंधन, पुनर्वास यथा नशा मुक्ति, पुनर्प्राप्ति आदि, मृत्यु एवं मृत्युकालीन परामर्श, सम्मोहन आदि गूढ़ विद्या, लाइफ़ कोच, मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, परामर्शदाता, आघात (Trauma) चिकित्सक, गुप्तचर एजेंसियों आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Mars located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी, नेतृत्वप्रिय, राजनीति, प्रशासन, नेतृत्व, सरकारी कार्य, खेलकूद, सैन्य गतिविधियाँ, प्रतियोगिता आदि में रुचिवान्, प्रतिष्ठित परिवार में वैवाहिक संबंधों वाला होता है। रक्तचाप, सिरदर्द, बुखार प्रकृति, अग्नि वा शस्त्र से दुर्घटना के योग बनते हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक तीव्र भावनात्मक, आदर्श प्रेमी, जोखिम लेने वाला, विरासत से भूमि-भवन का लाभी, निवेश से संपत्तिवान, होटल उद्योग, रेस्टोरेंट, शेफ, पर्यटन, मनोरंजन जगत, खेल जगत में प्रतिष्ठित, अगाध जनसमर्थन वाला होता हैं। प्रेम विवाह की संभावना बनती हैं तथापि विवाहेत्तर सम्बन्ध होते हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक तर्क-वितर्क में कुशल, छिन्द्रान्वेषी, कुटिल चतुर किन्तु अनियंत्रित भावनात्मक, कुटनीतिज्ञ, मिथ्याभाषी, ऑनलाइन प्रेम संबंध या छुपे संवाद में संलिप्त, शस्त्र वा धातु व्यवसायी, तकनीक, संचार, मार्केटिंग, ज्योतिष, शेयर बाजार, वकालत आदि क्षेत्रों में प्रतिष्ठित होता है। तनाव, चोट, नस वा त्वचा रोग से पीड़ित होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक न्यायप्रिय, नैतिक मूल्यों का धनी, संरक्षक शक्ति से पुष्ट, भूमि, शिक्षा वा अन्य सम्मानजनक क्षेत्रों से आजीविका वाला, धर्मानुरागी, वेद व वेदाङ्गों में रुचिवान्, स्पष्ट भाषण करने वाला, परदेस में सम्मानित, योग्य व शिक्षित जीवनसाथी वाला होता हैं। मोटापा व यकृत संबंधी दोष होते हैं तथापि दीर्घायु होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक आकर्षक, भोगप्रिय, धन-धान्य से युक्त, प्रचुर वाहन सुख वाला, अभिनय, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, डिजाइनिंग, कॉस्मेटिक व्यवसाय, विवाह उद्योग, आदि जोखिम भरा कला और सौंदर्य उद्योग से धनी, तीव्र प्रेमासक्त, अनेक आकर्षणों वाला होता हैं। जीवन के उत्तरार्ध में प्रजनन तंत्र वा यौन रोगों से पीड़ित होता है।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कठोर परिश्रमी, धैर्यवान, भीतर दबे क्रोध वाला, प्रेम व वैवाहिक संबंधों में बाधा उत्पन्न होने से देरी से विवाह वाला, व कलहपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला होता है। जोड़ों के दर्द, असाध्य पीड़ादायक व्याधियों से पीड़ित, भारी मशीनों दुर्घटनाग्रस्त होता हैं। 

राहु की दृष्टि हो तो जातक अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक स्वभाव वाला, प्रेम में अधिकार भावना से ग्रस्त, अंकुश लगाने या अन्य को वश में करने को इच्छुक, जोखिम लेने वाला, समाज में प्रभावशाली, बलपूर्वक उत्पीड़क, हिंसक यौनाचारी होता है। गंजेपन, हृदय व उदर संबंधी रोगों से पीड़ित होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक बलवान, प्रभावशाली, परंपरावादी, सरकारी सेवा, समाज-सुधार, पशु-चिकित्सा आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। आध्यात्मिक चिंतन व सहज आध्यात्म में विश्वासी होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातकउग्र, आक्रामक, घमण्डी, तेजस्वी, आत्मविश्वासी, नख़रेबाज, हँसते-हँसते अनैतिक-अवैध कर्म करने वाला होता है। राजनीति, मीडिया, अभिनय, नाटक वा संवाद लेखन, उच्च प्रशासन, जनसंपर्क, रचनात्मक शिक्षण, स्पीकर या इन्फ्लूएंसर आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं। जातक आलोचना सुनने में असमर्थ, जीवनसाथी से मतभेद, वा संबंध विच्छेद वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल(Result of Mercury situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक सुन्दर, सुभग, चतुर, वाक्-चातुर्य में निपुण, कागज़ी कार्यों में दक्ष, परिजनों में अपने से छोटों को सफल बनाने वाला, विपरीत परिस्थितियों में भी विजयश्री को अपने पक्ष में करने वाला, न्यायिक व प्रबंधन विभाग में सफल, व्यापार, संगठन, स्वास्थ्य वा सौंदर्य उत्पाद से धनी, स्त्री लोलुपता वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक सुन्दर, धन व वाहन सुख से परिपूर्ण, अपनी धुन का पक्का, स्त्रियों के प्रति आसक्त, घूमने-फिरने का शौकीन, आकर्षक संचारक, उत्कृष्ट डिजाइनर, यात्रा, पर्यटन व विज्ञापनों से कमाने वाला, रिलेशनशिप काउंसलर आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। जातक अपने भाई-बहनों में विशेष सम्मानित होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक वाचाल, झगड़ालू, अस्थिर मैत्री वाला, कुशाग्र बुद्धिमत्ता वाला, खोजी प्रवृत्ति, उतावला, दूसरों से ईर्ष्या करने वाला, मनोविज्ञान व फोरेंसिक कौशल वाला, येन-केन प्रकारेण धन कमाने को उत्सुक, कुटिल विचारों वाला, अनैतिक कार्यों व अवैध संबंधों में संलिप्त होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Mercury located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक भावनात्मक, बेवजह तर्क-वितर्क में उलझने वाला, लोगों के मनोभावों को समझने में माहिर, तरल पदार्थों, सुगंधित द्रव्य, यात्रा व पर्यटन का व्यवसायी, विवाह वा व्यवसायिक संबंधों में मध्यस्थता से कमाने वाला, व्यवस्थाप्रिय, चतुर, गणक होता है। जनता, ग्राहक व स्त्रियों से धन लाभ करता हैं। तथापि अक्सर दुःखी, धोखे का शिकार, विवादास्पद छवि वाला होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक चंचल, आकर्षक, दाँतों में दोष वाला, चुभती हुई भाषा का प्रयोग करने वाला, तुरंत प्रतिक्रिया देने वाला, प्रबंधन, ज्योतिष, गणित, विज्ञान, तकनीकी, ट्रेडिंग आदि क्षेत्रों में कामयाब, मित्रों का अपकारी, मतलबी, झूठ को भी सच की तरह पूरे आत्मविश्वास के साथ बोलने वाला, सरकारी मुलाजिम होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक चतुर, विवेकवान, नैतिकता युक्त सामाजिकता वाला, निर्णयों में दूरदृष्टा, शिक्षा, ज्योतिष, कानून, दर्शन वा अभिभाषण कला, ज्ञान, परामर्श, शिक्षण वा प्रकाशन से लाभान्वित, सुसंस्कृत व सभ्य जीवनसाथी वाला, विवाह के पश्चात विशेष आर्थिक उन्नतिवाला होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, विश्लेषक, योजनाबद्ध, धैर्यवान, लेखा, डेटा, अनुसंधान, प्रोग्रामिंग, दस्तावेज़, प्रशासन, खनन, प्राक्रतिक संपदाओं से धनी, धीरे-धीरे सुरक्षित निवेश व अनुशासित बचत से समृद्धशाली, कम किन्तु उत्कृष्ट मैत्री संबंध वाला होता है। सामाजिक आलोचना और आसाध्य रोगों से पीड़ित होता है।

राहु की दृष्टि हो तो जातक प्रभावशाली वक्ता, व्यावसायिक, चतुर और अवसरवादी होता है। प्रचार-क्षमता, मार्केटिंग प्रतिभा और नेटवर्किंग में निपुण है। विदेशी भाषाओं, इंटरनेट, मीडिया, डिजिटल व्यवसाय, नवाचारी क्षेत्रों से लाभान्वित होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक कम बोलने वाला, निरीक्षक व गूढ़ विद्याओं में रुचिवान्, शोध, ज्योतिष, प्रोग्रामिंग, विश्लेषणात्मक कार्यों में रुचिवान्, अल्प धनी होता हैं। पत्नी से विश्वासघात की संभावना होती है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक मजबूत, लम्बा-चौड़ा कद-काठी वाला, विद्वान, राजनैतिक संरक्षण प्राप्त, राजसिक बुद्धि वाला, गंभीर, अपने विचारों का कट्टर, उच्चस्तरीय पदों पर आसीन, शोषणकारी, क़ानूनी दांव-पेंच से कमज़ोरों का उत्पीड़न करने वाला, धन-धान्य से युक्त, व्यक्तिगत जीवन में सफल, पत्नी का दमनकारी, रुढ़िवादी विचारधारा वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक सुन्दर, चंचल, हाज़िरजवाब, दिखावा करने वाला, पाखण्ड युक्त आचरण वाला, समय की नज़ाकत का आंकलन करने में समर्थ, व्यावहारिक ज्ञानी, ज्योतिष, परामर्श, शिक्षण, न्यायिक वा प्रशासनिक विभागीय कर्मचारी, राजनीति अथवा नैतिक व्यवसाय में प्रतिष्ठित होता है। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक सुन्दर, मृदुभाषी, कठोर उपदेशक, वित्तीय मामलों का जानकार, कलात्मक व रचनात्मक ज्ञान वाला, शानदार सलाहकार, विवाह के पश्चात भाग्योदय वाला, कुशल धर्मयुक्त गृहिणी का पति, तीर्थाटन व मधुशाला की एक-साथ यात्रा करने वाला, लोकप्रिय, प्रसिद्ध होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक गहन परिवर्तनकारी ज्ञान का धनी, रहस्यवादी, आध्यात्मिक शिक्षक, अनेक जनों का पारिवारिक गुरु, धार्मिक व तांत्रिक कर्मकांड का विशेषज्ञ, शासन के उच्चतम शिखर पर पहुंँचने वाला, क्रांतिकारी विचारधारा वाला, सजग, सचेत, सद्व्यवहारी होता हैं। जीवन में अनेक मृत्यु तुल्य कष्टों व दुर्घटनाओं का जोखिम होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Jupiter located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक आत्मविश्वासी, उदार, सम्मानप्रिय, नैतिक नेतृत्व की भावना वाला, प्रखर मार्गदर्शक, धार्मिक, न्यायप्रिय, संतोषी, समृद्धशाली, समाज का नेता, पथ-प्रदर्शक होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक करुणामय, सहृदय, लोकहितकारी, लोगों के दुःख-सुख समझने वाला, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, मनोविज्ञान, परिवार व समाज सेवा में रुचिवान्, प्रत्यक्ष जनता, शिक्षा, धार्मिक वा आध्यात्मिक कार्य, स्त्री विषयक कार्यों से लाभान्वित होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक साहसी, सिद्धांतवादी, अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने वाला, भूमि-भवन से लाभान्वित, अपना विचार लोगों पर थोपने वाला, समाज में प्रतिष्ठित, कानून, सरकार व‌ विपुल जनसमर्थन वाला, सैन्य वा पुलिस अधिकारी, खेल प्रशिक्षक, धार्मिक वा आध्यात्मिक संगठनों का संचालक, लोकप्रिय होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक ज्ञान और चतुराई का उत्तम मिश्रण, आकर्षक, व्यवहारिक बुद्धिमत्ता वाला, शास्त्र को व्यावहारिक दृष्टिकोण से परोसने की क्षमता वाला, वाक्पटु, लेखन, अभिभाषण, प्रकाशन, प्रशिक्षण, ज्योतिष, शिक्षा, परामर्श आदि व्यवसाय में उन्नतिशील, विलासी, भ्रमणशील होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सभ्य, आकर्षक, उदार, जीवन के सुखों का रस लेने वाला, अति खर्चीला, सांस्कृतिक संस्थान, विवाह उद्योग, कला व शिक्षा, होटल व अतिथि-सत्कार, कंस्ट्रक्शन, लग्ज़री आदि से संबंधित व्यवसायों से धनी, अति प्रतिष्ठित विद्वान होता है।

शनि की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, जिम्मेदार, दूरद्रष्टा, संस्थान वा सार्वजनिक स्थलों का निर्माता, न्यायाधीश, प्रशासक, प्रोफेसर, नीति-निर्माता, ट्रस्ट या संस्थान संचालक, गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति वाला, धनवान्, स्थिर कीर्तिमान स्थापित करने वाला होता हैं। 

राहु की दृष्टि हो तो जातक उच्च पद प्राप्त, प्रतिष्ठित लोगों की संगति वाला, बड़े व्यवसाय, संस्थागत कार्य, राजनीति, शिक्षा या परामर्श क्षेत्र में रुचिवान् होता है। विवाह और संबंधों से लाभ मिलने की संभावना बनती है; किन्तु स्वार्थ, दिखावा और लाभ-हानि पर आधारित संबंध मानसिक संताप का कारण बनते हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक शास्त्र, दर्शन, अध्यापन, शोध और आध्यात्मिक विषयों में रुचिवान्, शिक्षक वा मार्गदर्शक, पारंपरिक विषयों से आजीविका चलाने वाला, पुरोहित कर्म करने वाला, उच्च पदासीन वा औद्योगिक संगठनों का मुखिया होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra): पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक शाही आनंद के प्रति उन्मुख, कलात्मक निर्माण व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचिवान्, अनेक प्रेम संबंधों में लिप्त, अहंकारी, बाहुबल से सभी सुन्दर वस्तुओं को हड़पने की वृत्ति वाला, विलासितापूर्ण, धन-सम्पति युक्त, लोक में निन्दित, स्वजनों का सहायक, अति कामुक, परस्त्री से सम्बन्ध रखने वाला वा यौन-अपराधी होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक मृदुभाषी, सदाचारी, सौन्दर्य बोध वाला, बीमा कंपनी, लोन, वकालत, वाक्-चातुर्य से युक्त प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्रों में होता है। कठिन परिश्रम व हेरफेर कर के अच्छा धन-संचय कर लेता हैं। निकट संबंधियों में अवैध संबंधों के कारण वैवाहिक जीवन क्लेशपूर्ण होता हैं। प्रेम संबंधों में बदनाम और लड़ाई-झगड़े से मानहानि होता हैं। स्त्री जातक प्रेम में धोखा खाकर अनेक पुरुषों के साथ संसर्ग करती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत मोहक सुन्दर, व्यावाहरिक, समाज में प्रतिष्ठित, निजी व्यवसाय में उन्नतिशील, भूमि-भवन व विलासितापूर्ण वाहनों से सम्पन्न, अनुशासित कलात्मक व्यापार वाला, परिपक्व संबंध वाला, धन वैभव से युक्त, परिजनों में सबका प्रिय, राजनैतिक पहुंच वाला होता है। पूर्वा फाल्गुनी के तृतीय चरण में शुक्र प्रेम विवाह में सहायक, पर्यटन से लाभी, सुन्दर व प्रभावशाली संतानोत्पत्ति के योग बनाता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक जल्दीबाज़, खर्चीला, झगड़ालू, तीव्र जुनूनी कामुकता वाला, हिंसक रति करने वाला, तीव्र भावनात्मक लगाव वाला, परिवर्तनकारी रिश्तों से दुःखी, संबंधों पर अंकुश व अधिकार की भावना से ग्रस्त, शंकालु स्वभाव का होता हैं। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Venus located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मिलनसार, सुस्वादु भोजन करने वाला, परिवार, पारंपरिक उत्सव, स्मृतियाँ और भावनात्मक जुड़ाव से प्रीति करने वाला, खानपान, डे-केयर, महिला-उन्मुख उत्पाद, गृह सज्जा, वस्त्र और घरेलू व्यवसाय से लाभान्वित, प्रेम वा वैवाहिक संबंधों में देखभाल व सेवा-सुश्रूषा करने वाला, प्रियतमा की गलतियांँ नज़र-अंदाज़ करने से भयंकर धोखे का शिकार होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक पीछा करने की बजाय पहल करने की आदत वाला, चाही हुई वस्तु, व्यक्ति या अवसर को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला, व्यसनी, जोखिम भरे उपक्रमों में रुचिवान्, परस्त्रीगामी वा वैश्यागामी होता है। फिटनेस, खेल उद्योग, इवेंट मैनेजमेंट, कला प्रदर्शन, ग्लैमर जगत, सौंदर्य प्रतियोगिताओं में सम्मानित होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक निडर, बलिष्ठ, अनेख जनों का प्रिय, सम्मान व विरासत के प्रति भावुक लगाव वाला, सुसंस्कृत वातावरण, शास्त्रीय कला, वंश, परंपरा, कुल-प्रतिष्ठा, बड़े आयोजन और सामाजिक मान्यता से संबंधित कार्यों में रुचिवान्, आदर्श वस्तुओं व संबंधों का खोजी, तंत्र-मंत्र का जानकार, प्रखर विद्वान होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ, रुढ़िवादी विचारधारा से युक्त, अपने वचन और दायित्व को महत्व देने वाला, संकोची होता है। वस्त्र उद्योग, आभूषण निर्माण, वास्तु और इंटीरियर का तकनीकी पक्ष, लेखा-प्रबंधन, दीर्घकालिक निवेश, पारंपरिक व्यवसाय से अल्प धनी, समृद्धि के लिए संघर्षशील होता है। पारिवारिक सुख से वंचित, कुटुंबियों के षड्यंत्र से पीड़ित होता है।

राहु की दृष्टि हो तो जातक अल्प शिक्षित किन्तु कलाकार, जादूगरी आदि आश्चर्यजनक खेलों में निपुण, विपरीत लिंगियों के प्रति अत्यधिक आसक्त, असंतुष्ट व असुरक्षा के भावनाओं से ग्रस्त, अनैतिक कार्यों में संलिप्त रहता है। संतानोत्पत्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक उदासीन, अकर्मण्य, सुस्वादु भोजन करने वाला, छोटे-मोटे सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री वा अंतर्वस्त्र का व्यवसायी होता हैं। जातक की सौन्दर्य कौशल उसके लिए विपत्ति कारक बन जाती हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक मंथर गति से अपने काम में मशगूल, नीरस, चिड़चिड़ा, सुख से वंचित, देरी से अल्प सफलता वाला, परिजनों से द्रोही, अनुशासित नेतृत्वकर्ता, भीरु, भारी मन से नौकरी करने वाला होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक परिपक्व, परिमार्जित बुद्धि वाला, तथ्यात्मक अभिभाषण करने वाला, कड़वा सत्य बोलने वाला, अपने विचारों से दूसरों को प्रभावित करने वाला, उच्च कोटि का सलाहकार, तकनीकी, दर्शन आदि विषयों पर प्रेरणादायक लेखन से प्रसिद्ध, व्यवसाय करने में निपुण, धन-धान्य से पुष्ट, अधिक शत्रुओं वाला होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक कृशकाय, चंचल, विशेष चालाक, पराक्रमी, अपने कार्यों में निपुण, न्याय शास्त्र व कानून का विद्वान, तत्वज्ञ, सत्यनिष्ठ, परिपक्व संबंध, अनुशासित कलात्मक, भावनात्मक शुष्कता वाला, ससुराल में पूजित, यात्रा व पर्यटन से लाभी, अनेक मित्रों वाला, अतीन्द्रिय होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक बाल्यकाल से शोषित, पितृ सुख से वंचित, दूसरों पर अविश्वासी, कटु भाषा का प्रयोग करने के कारण, बार-बार अपमानित, दूसरों का दोष देखने वाला, छिन्द्रान्वेषी, मेहनती, क्रूर, परिजनों से दूर, वियोगी, दीर्घकालिक परिवर्तन, अनुशासित व्यवसाय का पूजक, भावनात्मक चुनौतियांँ वाला, लगातार देरी वा अलगाव से चिंतित, साधारण नौकरीपेशा वाला,  घर से दूर, गृहक्लेश से पीड़ित होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Saturn located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक भीतर कर्तव्यबोध, बाहर मान्यता की चाहत वाला, अपने मूल्य सिद्ध करने की निरंतर कोशिशों में रत, वरिष्ठों से अपनी तुलना करने की प्रवृत्ति से ग्रस्त, प्रशासनिक ढाँचे, सत्ता-तंत्र, संस्थागत कार्य, सामाजिक प्रभाव से परिपूर्ण होता हैं। सम्मान और कर्तव्य के बीच खींच-तान का सामना करने वाला, कठोर आत्म-मूल्यांकन वाला होता है।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक धन कमाने के स्थिर साधनों वाला, नौकरी पेशा में स्वयं को समायोजित करने में सक्षम, अपने से बड़ी आयु की स्त्री के साथ कामुक संबंधों में लिप्त, अच्छी स्मरण शक्ति वाला, शैक्षणिक वा प्रशैक्षणिक प्रबंधन, सामाजिक संस्थाएँ, परिवार-आधारित व्यवसाय वा मानव संसाधन (HR) में रुचिवान्, राजनैतिक संरक्षण से लाभान्वित होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक शनै शनै अपने कार्यों को करने वाला, शत्रुओं से पीड़ित, मशीनें, निर्माण कार्य, संरचना, प्रतियोगिता, जोखिम वाले प्रोजेक्ट में रुचिवान्, संबंधों में प्रबल अधिकार की भावना से ग्रस्त, क्लेशपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला होता है।

बुध की दृष्टि हो तो जातक सोच-समझकर बोलने वाला, तथ्यों व प्रमाणों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील, योजनाबद्ध तरीके से जीने वाला, शंकालु, लेखा, आँकड़े, कागज़ी दस्तावेज़, शोध, व सूचना-संग्रह जैसे क्षेत्रों में रुचिवान्, लेखाकार, ऑडिटर, कर सलाहकार, डेटा विश्लेषक, अभिलेखागार, शासनिक योजना आदि क्षेत्रों में सफल व सम्मानित होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक परिपक्व निर्णय क्षमता वाला, दीर्घकालिक सोच, जिम्मेदार मार्गदर्शन देने वाला, न्यायपालिका, विश्वविद्यालय प्रशासन, ट्रस्ट प्रबंधन, नीति-निर्माण, सलाहकारी संस्थानों से विशेष लाभान्वित होता हैं। वैवाहिक वा प्रेम संबंधों में सुखद अनुभव वाला होता हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सुसंस्कृत, संतुलित, संसाधनों का मूल्य समझने वाला, संबंधों को निभाने वाला, सौंदर्य का व्यावहारिक पक्षधर, धर्मानुरक्त, वास्तुकला, डिज़ाइन, शिल्प, वस्त्राभूषण, रियल एस्टेट, इंटीरियर, फैशन प्रबंधन, लक्ज़री ब्रांड संचालन, विवाह उद्योग, कला-संबंधी व्यवसाय में रुचिवान् व सफल होता है। साझेदारी, अचल संपत्ति, दीर्घकालिक निवेश और सामाजिक नेटवर्क से शनै शनै धनवान् होता है। 

राहु की दृष्टि हो तो जातक मतलबी, समय का पाबंद, कानूनवेत्ता, समृद्ध, क्रूर, शक्तिशाली होता हैं। बड़े व्यवसाय, प्रशासन, राजनीति, कॉर्पोरेट क्षेत्र, उद्योग या सत्ता-संबंधी कार्यों में रुचिवान्, अनेक लोगों का आदर्श होता हैं। व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग व्यवसायिक लाभ के लिए करने से भी नहीं चुकता, प्रबल व्यसनी होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक जटिल कार्यों में रुचिवान्, उलझी हुई मानसिकता वाला, विभिन्न दुःखों से पीड़ित, देरी से आंशिक सफलता वाला, चिड़चिड़ा, क्रोधी, परदेसवासी होता हैं। स्त्री जातकों के बार-बार गर्भपात होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक असामान्य प्रसिद्धि वाला, नाटकीय सफलता प्राप्त, अतिरंजित अहंकार वाला, घोटाला, झूठा अभिमान से लैस, आय के अनेकों स्रोत वाला, राज्य व सरकार से लाभान्वित, दूसरों की विरासत व अधिकार बिना प्रयास किये पाने वाला, धन-धान्य, संपत्ति व संततियों से परिपूर्ण, सुन्दर प्रभावशाली स्त्री वाला, पृथ्वी को भोगने वाला होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक चतुर, व्यापार-व्यवसाय में स्वप्रयत्नों से उन्नतिशील, अपरंपरागत तकनीकें अपनाने वाला, नवाचारी, पूर्णता के प्रति जुनूनी, अनैतिक कार्यों में शॉर्टकट तरीके से धन कमाने को लोभी, आर्थिक उतार-चढ़ाव वाला होता हैं। परिवार और पत्नी के प्रति समस्त कर्तव्यों का समुचित निर्वहन करने के पश्चात अन्य स्त्रियों में भी लिप्त होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक सौंदर्य व विलासिता के प्रति उन्मुख, अनूठी कलात्मक शैली वाला, अप्राकृतिक यौन इच्छाओं वाला, प्रेम संबंधों व वैवाहिक जीवन में बेईमान, विदेशी संबंधों से धनार्जन करने वाला, अतरंगी वेशभूषा वाला, उत्तम वाहन सुख वाला, समृद्ध होता हैं। दो या दो से अधिक वैवाहिक संबंध‌ के योग बनते हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक वाद-विवाद में निपुण, कटुभाषी, भूमि-भवन से सम्पन्न, भौतिकता के प्रति अनियंत्रित लगाव रखने वाला, अपनी इच्छाओं का वशीभूत, क़ानून तोड़ने वाला, विनाशकारी, व्यसनी, अनैतिक आचरण वाला, रहस्यमय, स्त्रियों द्वारा भयादोहन (blackmailing) का शिकार होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Rahu located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि और सामाजिक सम्मान के लिए अत्यधिक महत्वाकांक्षी, सत्ता या उच्च पदस्थ व्यक्तियों से फायदा उठाने वाला, पूर्वाग्रह से प्रेरित, वाद-विवाद में उलझने वाला, सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाला होता है।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, विविध विषयों का ज्ञाता, अनेक भाषाओं व साहित्यों में रुचिवान्, दूसरों से अपनी वैधता सिद्ध करवाने की लालसा वाला, कला, अभिनय, संगीत, मीडिया, ज्योतिष, तंत्र आदि रचनात्मक व गूढ़ विषयों में रुचिवान्, असंतोष की भावना से पीड़ित होता है। माता व माताहतों से संबंध मधुर नहीं होते।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक आकर्षक, महात्वाकांक्षी, संसाधनों के लिए हड़प नीति वाला, प्रेम, संबंध व निकट संबंधों में अतिशय रणनीतिक, प्रबल यौन-उत्कंठा वाला, मनोरंजन, राजनीति, व्यवसाय या सार्वजनिक जीवन में लोगों की मनोवृत्ति को समझकर लाभ उठाने की क्षमता वाला होता है। 

बुध की दृष्टि हो तो जातक व्यवसाय व संवाद कौशल का धनी, वर्तमान में जीने वाला, सांस्कृतिक उपक्रमों व पार्टी आदि का शौकीन, रात्रि में किये जाने वाले कार्यों में निपुण, व्यापार, मीडिया, विज्ञापन, राजनीति, सोशल मीडिया आदि क्षेत्रों में प्रतिभाशाली, कमर से नीचे के अंगो, हड्डियों व चमड़ी में व्याधियों वाला होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक व्यवहारिक, विवेकवान, समन्वयवादी, विविध विषयों में शिक्षित, नैतिक जिम्मेदारी वाला, बड़े सामाजिक उद्देश्यों में संलिप्त, सार्थक लोकप्रियता वाला, विदेशी संस्कृतियों, दर्शन और ज्ञान में रुचिवान्, प्रभावशाली मार्गदर्शक, सेक्युलर होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक प्रेम, कला, सौंदर्य और विलास के प्रति लालायित, कलात्मक व रचनात्मक क्षेत्रों में रुचिवान्, शरीरविज्ञान वा प्राणी-शास्त्र में दक्ष, छल-कपट करने में माहिर, अवैध संबंधों में लिप्त, विपरीत लिंगीयों से बदनाम होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक शिक्षा में मेधावी, प्रखर बुद्धिमत्ता वाला, पीलिया, अपस्मार आदि रोगों से पीड़ित, शरीर में विकलांगता या दोष होता हैं। जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन कठोर अनुभवों के माध्यम से आते हैं। जीवन में बार-बार परीक्षा और विलंब के बाद उपलब्धि मिलती है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in First Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक शारीरिक रूप से बलिष्ठ, निरोग, जिद्दी, दूसरों का क्रेडिट खाने वाला, जुझारू, अहंकार से मुक्त, सबका आदर करने वाला, पारंपरिक, परिजनों से मनमुटाव वाला, अपनी पहचान को लेकर संवेदनशील, सम्मानित व्यक्तियों से जबरन संबंध जोड़ने का अभिलाषी, आध्यात्मिक रचनात्मकता वाला होता हैं। स्थिर कार्य-व्यवसाय वाला होता हैं। अपनी पत्नी के प्रति दृढ़ता से समर्पित होता हैं; तथापि धोखा मिलता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Second Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक चिड़चिड़ा, अपने विचारों को दूसरों पर थोपने वाला, कट्टरपंथी, उदासीन, वामपंथी तंत्रों में रुचिवान्, मुद्दों से बार-बार भटक जाने वाला, दूसरों के सफलता का जिम्मेदार किन्तु स्वयं साधारण जीवन जीने वाला होता हैं। 

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Third Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक आध्यात्मिक वृत्तियों वाला, कठोर कलात्मकता वाला, सुख से विरक्त, शिल्पकारी, चित्रकारी, शल्यक्रिया, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, सभ्य, सद्व्यवहारी, वैवाहिक संबंधों में भांति-भांति के कष्टों वाला, तीर्थ आदि धार्मिक यात्राओं में रुचिवान्, कॉस्मेटिक बिमारियों से पीड़ित होता है।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Fourth Charan /Padas of Purva Phalguni Nakshatra) : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक कठोर, उग्र, एकांतप्रिय, लोहा आदि भारी धातुओं का कार्य करने वाला, जोखिम भरे कार्यक्षेत्रों में प्रतिष्ठित, रहस्यवादी, आध्यात्मिक रूपांतरण‌ वाला, मोक्ष-उन्मुख वैरागी, अचानक होने वाली हानियों से पीड़ित, दुर्घटनाग्रस्त, अंतर्ज्ञान से युक्त, दूसरों पर आश्रित होता है। बड़े अधिकारीयों व वरिष्ठों द्वारा जातक के पारिवारिक सम्मानों को खतरा होता हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect results of various planets on the Ketu located in Purva Phalguni Nakshatra

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक तेजस्वी, योग्य किन्तु योग्यता के प्रदर्शन से बचने वाला, स्वाभिमानी, पारिवारिक असंतोष से क्षुब्ध, आध्यात्मिक वक्ता, रचनात्मक कला व‌ धर्मानुकूल कार्यों में तल्लीन, राजकीय सम्मान प्राप्त, प्रसिद्ध, राजनैतिक पहुंँच वाला, आत्मज्ञानी होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर, कार्यकुशल, आलस्य युक्त, फूहड़, धन के लिए चिंतित, सिद्धांत विहीन, अनेक कार्यक्षेत्रों को बदलने वाला, घूमन्तु, परोपकारी, जीवदया करने वाला होता है। इनके मित्र अत्यंत लोभी व भुक्कड़ होते हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक उतावला, अत्यंत ऊर्जावान, मेहनती, खेलकूद प्रतियोगिता व प्रतिस्पर्धा में विजयी, शासन-प्रशासन वा सरकारी नौकरी में प्रतिष्ठित, विवादास्पद व्यक्तित्व वाला, स्वजनों का सहायक, उग्र यौनाचारी होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक विश्लेषणात्मक क्षमता वाला, राज-काज, विलासितापूर्ण जीवन, आधुनिक विधि-व्यवस्था पर आलोचनात्मक लेखन वाला, मनोविज्ञान व रहस्यवाद पर अनुसंधानकर्ता, सूक्ष्मजीव जगत, पशुपालन, पारंपरिक वस्तुओं का व्यवसायी होता है। 

गुरु की दृष्टि हो तो जातक विरासतों का धनी, बाल्यकाल से धार्मिक वा आध्यात्मिक कृत्यों वा प्रयोगों वाला, धर्मशास्त्रों व प्राचीन लिपियों में रुचिवान्, इतिहास आदि कला संकायों में विद्वान, न्यायिक वा शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिष्ठित, जीवन के उत्तरार्ध में विरक्त होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक बाल्य काल से छोटी से छोटी इच्छापूर्ति के लिए तरसने वाला, पूर्वजों के कर्ज के कारण समाज में मानहानि से दुःखी, तंत्रिका व चर्म रोगों से ग्रस्त, पड़ोसियों से विसंगति वाला होता है।

शनि की दृष्टि हो तो जातक अन्वेषक, व्यवहारकुशल, कम बोलने वाला, अंतर्मुखी, अपने आप में मस्त, कम मित्रों वाला, सरकारी तंत्र वा औद्योगिक सफलता वाला, परिजनों व कुटुंबियों से घृणा करने वाला, तकनीकी शिक्षा से युक्त, कला व संस्कृति का पोषक होता है।

उपसंहार || Important Considerations

किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।

यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।

सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता। 

राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।

जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personality born in Purva Phalguni Nakshatra

राजीव गांधी (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री) – का चन्द्र पूर्वा फाल्गुनी के द्वितीय चरण में था।

मैडोना (मशहूर अमरीकी गायिका) – का लग्न व चन्द्र दोनो क्रमशः पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम व द्वितीय चरण में थे।

दिलीप कुमार / यूसुफ खान (प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता) – का सूर्य पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में था।

गुलज़ार (मशहूर गीतकार व लेखक) – का चन्द्र पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण में था।

पी•टी उषा (मशहूर भारतीय ट्रैक & फील्ड एथलीट) – का चन्द्र पूर्वा फाल्गुनी के तृतीय चरण में था।

[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का पूर्वा फाल्गुनी में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]

~ Krishna Pandit Ojha..

   WhatsApp:9135754051

संबंधित पोस्ट पर जाने के लिए दिए गये Link पर Click करें!

नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या 

1• अश्विनी

2• भरणी

3• कृतिका 

4• रोहिणी 

5• मृगशिरा 

6• आर्द्रा 

7• पुनर्वसु 

8• पुष्य 

9• आश्लेषा 

10• मघा 

11• पूर्वा फाल्गुनी 

12• उत्तरा फाल्गुनी 

13• हस्त 

14• चित्रा 

15• स्वाति 

16• विशाखा 

17• अनुराधा 

18• ज्येष्ठा 

19• मूल 

20• पूर्वाषाढ़ा 

21• उत्तराषाढ़ा 

22• श्रवण 

23• धनिष्ठा 

24• शतभिषा 

25• पूर्वा भाद्रपद 

26• उत्तरा भाद्रपद 

27• रेवती

Share on

Facebook
LinkedIn
WhatsApp
Telegram
X

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page