मघा नक्षत्र परिचय || Magha Nakshatra Introduction
Magha Nakshatra in Hindi || वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘मघा नक्षत्र’ क्रम से 10वां नक्षत्र हैं। भचक्र में 120° अंश से लेकर 133° अंश 20′ कला तक के विस्तार क्षेत्र ‘मघा नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘रेगुलस (Regulus)’ कहा जाता हैं। अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-जभाह (Al-Jabhah) कहते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ हैं — “शेर का माथा”। चाइनीज सियु में इसे ‘शिंग’ (Xing Xiù) कहा जाता हैं; जो चाइनीज चन्द्र भवन के प्रमुख 4 वर्गीकरण में से, ‘दक्षिण लाल पक्षी’ (Vermilion Bird of the South) के अंतर्गत आता हैं। इसका अर्थ ‘तारा मंदिर’ (Star Mansion) हैं।
“मघा” शब्द संस्कृत भाषा के “मह्” धातु से निष्पन्न हुआ हैं; जिसका अर्थ हैं — महान, बड़ा, शक्तिशाली आदि। मह् + घः = मघ में टाप् (आ) प्रत्यय से “मघा” (स्त्रीलिंग) शब्द हैं। जिसका तात्पर्य हैं — महान, शक्तिशालिनी, बलवती, बड़ी, प्रचण्ड, भव्य, उदार, समृद्ध, प्रचुर आदि।
नक्षत्र मण्डल में मघा नक्षत्र के कुल 6 तारे है, इनमें से एक तारा धुंधला दिखाई पड़ता हैं, अतः इस एक को छोड़कर, ज्योतिषीय महत्व के लिए, केवल 5 को हीं पूर्वाचार्यों ने ग्रहण किया हैं। मघा नक्षत्र के ये 5 तारे सिंहासन / हल जैसी आकृति बनाते हैं। कुछ विद्वान इन 5 तारों में, ध्वज 🚩 अथवा लठ्ठ / लाठी की आकृति देखते हैं। यदि उस एक धुंधले तारे को मिलाकर मघा के 6 तारों के समावेश से देखें, तो स्वच्छ आकाश में वह – पालकी अथवा त्रिभुजाकार छत वाला घर 🏠 (निवास स्थान) जैसी आकृति में दिखाई पड़ती हैं। अतः यह शक्ति, प्रभुत्व, शासन, न्याय, नेतृत्व, अधिकार, सम्मान, विरासत, पितृ-परंपरा, महानता, विलासिता, राजसी वैभव, समृद्धि आदि का प्रतीक है।
अतः सिंह ♌ राशि अंतर्गत 00° अंश से लेकर 13° अंश 20′ कला तक का क्षेत्र विस्तार ‘मघा नक्षत्र’ का हैं। इस नक्षत्र का स्वामी – केतु, नक्षत्र देवता – पितर, जाति – शुद्र, योनि – मूषक / चूहा, योनिवैर – मार्जार / बिडाल, राक्षस गण, कफ प्रकृति, अंत्य नाड़ी, तमोगुणी, अशुभ, नाशक, तामसिक, स्त्री नक्षत्र हैं। यह पश्चिम दिशा का स्वामी हैं। यह रहस्यमय, उग्र / क्रूर, अधोमुखी, मध्यलोचन वा मध्याक्ष नक्षत्र हैं।
चूंकि मघा नक्षत्र और सिंह राशि एक हीं बिन्दु से प्रारंभ होते हैं। अत: संधि स्थान होने से यह एक गण्डांत नक्षत्र हैं। गण्डांत नक्षत्र होने से यह शिशु जन्म के लिए एक संवेदनशील नक्षत्र हैं। मघा नक्षत्र के आरंभिक 2 चरणों को पूर्वाचार्यों ने ज्यादा संवेदनशील माना हैं। इन चरणों में शिशु के जन्म होने से ये क्रमशः माता और पिता के लिए कष्टकारी होते हैं। तथापि इसकी संज्ञा “छोटे मूल वा गण्ड-मूल” की हैं। शिशु के जन्म के 10वे या 19वे नक्षत्र (अनुजन्म वा त्रिजन्म नक्षत्र) के आने पर, शुभ मुहूर्त में इसकी शांति करवा लेनी चाहिए।
पितृ पूजा, श्राद्ध, पूर्वजों के निमित्त कर्म, वंश परंपरा से जुड़े अनुष्ठान, कुलदेवता या कुलदेवी से संबंधित अनुष्ठान, राज्याभिषेक (coronation), पुरस्कार समारोह, पदोन्नति, भव्य समारोह, परेड, पब्लिक परफॉर्मेंस आदि राजसी व औपचारिक समारोह, उच्च पद ग्रहण, प्रबंधन, प्रशासनिक कार्य, शपथ ग्रहण, सरकारी वा उच्च अधिकारी स्तर के काम, विवादों का निपटारा, अधिकारियों से अनुग्रह प्राप्त करना आदि नेतृत्व और अधिकार से जुड़े कार्य |
वंशावली या वंश परंपरा का अध्ययन, पुरातन ज्ञान, इतिहास, पुरातत्व, पारंपरिक प्रथाओं का पालन, विरासत संपत्ति से जुड़े कार्य, तालाब, कुआंँ, बावड़ी आदि खुदवाना या इनके मरम्मत कार्य, मंदिर, धर्मशाला, मठ आदि निर्माण, चिकित्सा संबंधी कार्य, विद्या ग्रहण, गुरुदीक्षा लेना, तंत्र-मंत्र वा ज्योतिष आदि गूढ़ ज्ञान सीखने का आरम्भ, अध्ययन, लेखन, शिल्प कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, उच्च पदोन्नति, पुरानी प्रथाओं को अपनाना या उन्नत करना, वृक्ष काटना या विनाशात्मक कार्य, वाग्दान अर्थात सगाई, वधू प्रवेश आदि कार्य मघा नक्षत्र में अनुकूल फल देने वाले हैं।
यह अधिकार, प्रतिष्ठा, शक्ति, गरिमा, विरासत, पूर्वजों का सम्मान, पैतृक गौरव, परंपरा और उनके आशीर्वाद, आध्यात्मिकता, कर्मफल, मोक्ष वा मुक्ति, सूक्ष्मता, संसाधन, उत्तरजीविता, विभिन्न पारलौकिक महान कार्यों, महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और विरासत को आगे बढ़ाने का द्योतक है।

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ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Magha Nakshatra Astrological Symbolic Description
मघा नक्षत्र के देवता (Magha Nakshatra Deity) – पितर वा पितृगण हैं। भारतीय हिन्दू पौराणिकता अनुसार पितर (पितृ) — दिवंगत पूर्वजों की आत्माओं को कहा जाता है। ये पितृलोक में निवास करते हैं, जो यमराज द्वारा शासित माना जाता है। पितर शब्द का अर्थ “पिता” या “पूर्वज” है। वे देवताओं के समान पूजनीय हैं, लेकिन मुख्य रूप से श्राद्धकर्म (श्रद्धा) और कर्तव्य के रूप में उनका तर्पण किया जाता है।
पितरों की उत्पत्ति वैदिक और पौराणिक साहित्य में विस्तृत रूप से वर्णित है। ऋग्वेद में पितरों को दिवंगत पूर्वजों की आत्माओं के रूप में सम्मानित किया गया है। वे यज्ञ में भाग लेते हैं और अग्नि द्वारा देवताओं और पितरों के बीच भोग का विभाजन होता है। वैदिक काल में पितृलोक और देवलोक को प्रारंभ में एक ही माना गया, लेकिन बाद के ग्रंथों जैसे अथर्ववेद और ब्राह्मण ग्रंथों में दोनों अलग-अलग बताए गए हैं।
पितरों को यम के साथ संबंधित माना जाता है।
मनुस्मृति के अनुसार ऋषियों से पितरों की उत्पत्ति हुई, पितरों से देवों और मानवों की उत्पत्ति हुई, तथा देवों से स्थावर-जंगम समस्त लोकों की उत्पत्ति हुई। ब्रह्मा के पुत्र प्रजापतियों को प्रारंभिक पितर माना जाता है। पुराणों में वर्णन है कि ब्रह्मा ने देवों को उनके पुत्रों (पितरों) से भक्ति और पूजन की विधि सीखने का आदेश दिया, जिससे देवों ने अपने पुत्रों को पितर कहा।
वायु पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, हरिवंश और मत्स्य पुराण में पितरों के सात वर्गों का सबसे विस्तृत वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार पितर दो मुख्य श्रेणियों में विभक्त हैं:
- दिव्य पितर (देव पितर) और
- मानुष पितर (मानव पूर्वज)।
1• दिव्य पितरों के सात वर्ग हैं —
इनमें तीन अमूर्त (निर्विकार, बिना शरीर वाले) और चार मूर्त (सशरीर) हैं।
अमूर्त वर्ग :
वैरज — ये उच्चतम श्रेणी के दिव्य पितर हैं।
अग्निष्वात्त — इनकी उत्पत्ति मनु के पुत्र महर्षि मरीचि से मानी जाती है। ये देवताओं के पितर हैं।
बार्हिषद — ये चंद्रमा से संबंधित पितर माने जाते हैं।
मूर्त वर्ग:
सोमप — सोमरस पीने वाले।
हविष्मान (या हविर्भुज) — हवि (यज्ञ सामग्री) भक्षण करने वाले।
आज्यप — घी पीने वाले।
सुकालिन (या मानस) — समय के अनुसार कार्य करने वाले।
ये सात वर्ग स्वर्ग में निवास करते हैं। प्रत्येक वर्ग की एक मानसी कन्या (मन से उत्पन्न पुत्री) बताई गई है, जिनसे आगे वंश विस्तार हुआ।
सात दिव्य पितरों की सात मानसी कन्याओं के नाम और संक्षिप्त परिचय —
- मेना — वैरज पितरों की मानसी कन्या। इनका विवाह हिमालय (हिमवत्) पर्वत से हुआ। इनकी पुत्री मेनका उमा या पार्वती हुईं।
- अच्छोदा — अग्निष्वात्त पितरों की मानसी कन्या। ये नदी रूप में प्रसिद्ध हुईं।
- पिवरी — बार्हिषद पितरों की मानसी कन्या। इनका विवाह महर्षि शुक (शुकदेव) से हुआ।
- नर्मदा — सोमप पितरों की मानसी कन्या। ये प्रसिद्ध नर्मदा नदी के रूप में जानी जाती हैं।
- यशोदा — हविष्मान पितरों की मानसी कन्या। इनका विवाह विश्वमहत् से हुआ और पुत्र दिलीप हुए।
- विरजा — आज्यप पितरों की मानसी कन्या। इनका विवाह राजा नहुष से हुआ।
- गो या एकशृंगा — सुकालिन या मानस पितरों की मानसी कन्या। इनका विवाह महर्षि शुक्राचार्य से हुआ।
ये सातों कन्याएंँ दिव्य पितरों (देव पितर) की मानसी सृष्टि हैं। इनके वंश से कई महत्वपूर्ण राजवंश, ऋषि और नदियांँ उत्पन्न हुईं।
पद्म पुराण, विष्णुधर्मोत्तर और शातातप स्मृति में भी इन सात प्रकारों का उल्लेख है। चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) के लिए पितरों की अलग-अलग कोटियांँ हैं, जैसे सोमपा, हविर्भुज, आज्यपा और सुकालिन।
2• मानुष पितर — ये सामान्य दिवंगत पूर्वज हैं जो सही अंत्येष्टि, श्राद्ध और पिंडदान के बाद पितृलोक प्राप्त करते हैं। यदि विधि-विधान से कर्म नहीं किया जाए तो वे प्रेत योनि में भटकते हैं। मार्कंडेय पुराण में वर्णन है कि पितर विभिन्न योनियों (देव, मनुष्य, पशु, वृक्ष, प्रेत) में हो सकते हैं और पिंडदान-जलदान से तृप्त होते हैं।
स्कंद पुराण में भी ऋषियों से पितरों, पितरों से देव-मानवों और देवों से समस्त सृष्टि की उत्पत्ति का क्रम बताया गया है।
महाभारत में कुछ प्रसंग हैं कि — जरत्कारु एक महान ऋषि थे। वे ब्रह्मचर्य का कठोर पालन करते थे, विवाह नहीं किया था, अत्यंत तपस्वी थे। वे कम खाते, कम सोते और वायु का आहार लेकर जीवन व्यतीत करते थे।
एक बार जंगल में यात्रा करते हुए उन्होंने एक विचित्र दृश्य देखा। उनके पूर्वज (पितर) एक घास (दर्भ या बेणा घास) की जड़ से लटके हुए थे, सिर नीचे की ओर, और वे एक गड्ढे (नरक की ओर) की ओर झुके हुए थे। उस घास की जड़ को एक चूहा कुतर रहा था, जिससे वे किसी भी समय गिरने वाले थे।
जरत्कारु ने पूछा कि वे कौन हैं और क्यों इस दशा में हैं। पितरों ने बताया कि वे जरत्कारु के ही पूर्वज (ययावर ब्राह्मण वंश के) हैं। क्योंकि जरत्कारु संतान उत्पन्न नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनका वंश समाप्त हो जाएगा। इससे उन्हें यह दुर्दशा भोगनी पड़ रही है। वे जरत्कारु से विनती करते हैं कि वे विवाह करें और संतान उत्पन्न करें, ताकि उनके श्राद्ध-पिंडदान से उन्हें तृप्ति मिले और वे स्वर्ग प्राप्त कर सकें।
जरत्कारु प्रभावित हुए। उन्होंने नागराज वासुकि की बहन (जिनका नाम भी जरत्कारु था) से विवाह किया। उनके पुत्र आस्तीक हुए, जिन्होंने बाद में जनमेजय के सर्प यज्ञ को रोककर नागवंश की रक्षा की। इससे जरत्कारु के पितरों को मुक्ति मिली।
महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म-युधिष्ठिर संवाद में पितरों की पूजा के फल (सुंदर पत्नी, संतान, धन, स्वास्थ्य) और उनके प्रति कर्तव्य का विस्तार से वर्णन है। पितर देवताओं के समान पूज्य हैं लेकिन मुख्यतः कर्तव्य और श्रद्धा से संतुष्ट होते हैं।
इन कथाओं से पितरों के गुण-दोष का पता चलता है; जैसे कि — पितर कृपालु और मार्गदर्शक हैं। वे वंशजों से सीधे संवाद करते हैं और अपना कष्ट बताकर सही मार्ग दिखाते हैं। वे वंश की निरंतरता चाहते हैं, जो कृतज्ञता और धर्म का प्रतीक है। सही कर्म (संतान और श्राद्ध) से वे प्रसन्न होकर मुक्ति पाते हैं और वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
पितर भी कर्म-निर्भर हैं। यदि पुत्र वा वंशज श्राद्ध न करे या वंश न चलाए, तो वे नरक या दुर्दशा में पड़ सकते हैं। वे स्वयं अपनी मुक्ति के लिए वंशजों पर आश्रित रहते हैं, जो पितृ ऋण के महत्व को दर्शाता है।
ये कथाएं पितरों को कृपालु रक्षक लेकिन कर्म-आश्रित बताती हैं। वे वंश की निरंतरता और कृतज्ञता के प्रतीक हैं।
मघा नक्षत्र में भी इन गुणों का समावेश हैं। मघा जातक रुढ़िवादी, परंपरावादी होते हैं। माता-पिता, घर के बुजुर्गों व परंपराओं को आदर देने वाले, आने वाली पीढ़ियों के प्रति कठोर मार्गदर्शक, सदैव अपने मतों का कट्टर, अहंकारी, तीक्ष्ण क्रोधी होता हैं।
मघा का नक्षत्र स्वामी (Magha Nakshatra Lord) – केतु के होने से उनमें (मघा नक्षत्र के जातकों में) विरक्ति, आध्यात्मिकता, शास्त्रों का अनुसरण, पूर्वजों के प्रति जिम्मेदारी, समझदारों का अनुशीलन आदि गुण भी होते हैं।
मघा नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Magha Nakshatra in Hindi
वराह मिहिर का कथन हैं कि — धनी, धान्यागार, पर्वत निवासी, माता-पिता का सेवक, व्यापारी, शूरवीर, मांसाहारी, स्त्रीद्वेषी — ये सब मघा नक्षत्रगत पदार्थ है। मघा नक्षत्रोत्पन्न जातक धन-धान्य से परिपूर्ण, अनेक कुटुम्बियों वाला, नौकर-चाकर से युक्त, भोगी, देवता-पितरों का भक्त, उद्यमशील होता हैं।
आचार्य रामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि — मघा नक्षत्र 4 तारों के योग से, कुट्टाकृति वाला, लकड़ी की तरह, पितर देवता वाला हैं। इसमें गाड़ी, तालाब आदि से संबंधित कार्य, उग्र कार्य, शत्रुनाश, विष से संबंधित कार्य आदि करणीय हैं। धन-धान्य से संपन्न, कोष्ठ अर्थात कोष व कोष से संबंधित पदार्थ, घर, पहाड़ों का आश्रय करने वाले अर्थात पहाड़ों पर आश्रित जनजीवन, माता-पिता का सेवक, व्यापारी, वीर, मांस का भक्षण करने वाला, स्त्रियों से वैर करने वाला — ये सब मघा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
वशिष्ठ संहिता में कहा है कि —
युवतीकर सङ्ग्रहणंवापीकूप तडागोत्सवाद्यं च । क्षितिपत्याऽहवसवं पितृधिष्ण्ये च पैतृकं कार्यम्’
अर्थात युवती कर ग्रहण अर्थात विवाह आदि, जलाशयों अर्थात बावड़ी, कूप, तालाब आदि का निर्माण कार्य, बाजा बजवाना आदि उत्सव कार्य, राजा क्षत्रिय द्वारा युद्ध आदि राजकीय कार्य व पितरों के लिए श्राद्ध आदि पैतृक कर्म मघा नक्षत्र में अनुकूल परिणाम देने वाले हैं।
अर्थात सिंहासन, पालकी, मुकुट, राजचिह्न, पुरानी ऐतिहासिक वस्तुएँ, वंशागत संपत्ति, धान्य (अन्न) भंडार, गोदाम, आग वा ज्वाला संबंधी वस्तुएँ, पुरातन वस्तुएँ, स्मारक, गर्व, सम्मान, नेतृत्व की भावना, वंशगत गौरव, उदारता, करुणा, आध्यात्मिक झुकाव, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, अहंकार, हठ, नियंत्रण की इच्छा, श्रेष्ठता की भावना, शक्ति संघर्ष, उत्सव, समारोह, पुरस्कार वितरण, वंशावली अनुसंधान, पूर्वजों की पूजा, परंपराओं का पालन, वरिष्ठों/पूर्वजों का सम्मान, नेतृत्व लेना, बड़े समूह प्रबंधन, सक्रिय, उत्साही, लेकिन कभी-कभी जिद्दी या नियंत्रक स्वभाव, पदोन्नति, उपहार वितरण, ऐतिहासिक अध्ययन, विवाद निपटाना, इतिहास, पुरातत्व, वंशावली, आध्यात्मिकता, प्रशासन, न्याय, अनुष्ठान, श्राद्ध, राजकीय वा औपचारिक प्रक्रियाएँ, अनुसंधान, ज्ञान की खोज, परंपरागत शिक्षा, नेतृत्व प्रशिक्षण, प्रशासन, नौकरशाही, राजकीय वा सरकारी पद, न्यायाधीश, राजनीति, अरिस्टोक्रेट, ब्यूरोक्रेट, प्रबंधन, कॉर्पोरेट लीडरशिप, ज्योतिष, शोध, इंजीनियरिंग, जादू, तंत्र, कला वा मंच प्रदर्शन, वंश व इतिहास संबंधित कार्य, शिक्षण, पुरोहिताई, राजधानी, सरकारी कार्यालय, स्मारक, स्टेज प्रदर्शन हॉल, मंदिर वा धार्मिक स्थल, राष्ट्रीय स्मारक, कोल्ड स्टोरेज, प्रशासन, न्यायपालिका, राजनीति, उच्च सरकारी पद, कॉर्पोरेट लीडरशिप, पारिवारिक व्यवसाय (विरासत), बड़े उद्योग, ऐतिहासिक वा सांस्कृतिक संगठन, औद्योगिक ठेकेदार, रसायनशास्त्री, दवा व उर्वरक व्यवसायी, क्रिमिनल स्पेशलिस्ट, रक्षा विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, उपचार कार्य, नकली वस्तुओं का व्यवसाय व व्यवसायी, इलेक्ट्रिकल पॉलिशिंग, अस्त्र-शस्त्र निर्माण, हृदय, पीठ, स्पाइनल कॉर्ड, प्लिहा (Spleen), महाधमनी (Aorta), हृदयाघात, पीठ दर्द, हैजा, दिल की बिमारी, बेहोशी, रक्तचाप, किडनी से संबंधित रोग, मनोरोग व अन्य संबंधित अंगों से जुड़ी बीमारियांँ व दुर्घटना, लहसुनियांँ, वटवृक्ष आदि मघा नक्षत्र से संबंधित पदार्थ हैं।
लग्न में मघा नक्षत्र के फल || Magha Nakshatra Results in Ascendant/ Lagna
यदि लग्न में मघा नक्षत्र हो तो जातक परंपरावादी, अपने कुल मे प्रमुख, प्रभावशाली व्यक्तित्व, उत्साही, जिम्मेदार, अधिकारपूर्ण, शक्तिशाली, खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शनकारी, परोपकारी, विश्वसनीय, निर्भीक, महत्वाकांक्षी, धनी, मनोरंजन करनेवाला, उदार, भौतिकतावादी, बड़े भाई-बहनों का सहयोगी, यात्राप्रिय, जल्दबाज, झगड़ालू, मुँहफट, आत्मरक्षक, क्रोधी, घमण्डी, निर्लज्ज, कामुक होता हैं।
लग्नगत मघा नक्षत्र जातक अपने पुर्वजों से प्रभावित, देवताओं व पितरों का पूजक, धर्म, अर्थ और काम तीन पुरुषार्थों पर विशेष ध्यान देने वाला, यज्ञादि धर्म-कर्म में रुचिवान्, अभिमानी, सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाला, व्यवहारिक, तंत्र-मंत्र व पुरातन विद्याओं में रुचिवान्, टोटका आदि में विश्वासी, कठोर हृदयी, दूसरों के बहकावे में आने वाला, स्त्रियों पर अविश्वास करने वाला किन्तु यौनाचार का लोभी, राज्य वा सरकार से सहायता प्राप्त, नौकर-चाकरों से सुखी होता हैं।
मघा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष || Qualities of a Male Chart/Horoscope born in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक (Magha Nakshatra Male) मांसल रोम युक्त शरीर, क्रूर दृष्टि, उन्नत नाक, मध्यम कद-काठी वाला, भारी व बलिष्ठ भुजाओं वाला, आसानी से सबका विश्वास करने वाला, घूमने-फिरने का शौकीन, जंगलों व पहाड़ों की यात्राओं का इच्छुक, रहस्यमय, दयालु किन्तु क्रोधी, तुनकमिज़ाज, कुशल व्यवसायी, धनवान्, अनेक सहयोगी वाला, महात्वाकांक्षी, सरकारी वा निजी तंत्र में भी उच्च पदासीन, बड़े-बुजुर्गों का आदर करने वाला, धर्माचारी, मधुर वचन बोलने वाला, लड़ाई-झगड़े से दूर, अंतर्मुखी, विद्वान, कला व संस्कृति का पोषक, संगीत व वाद्ययंत्रों में रुचि रखने वाला, तेजस्वी, समाज का मुखिया, साहसी, आध्यात्मिक उन्नति वाला, कुलीन, अपने खानदान में विशिष्ट, अपने कार्य क्षेत्र में गहरी पकड़ रखने वाला, मित्रों के साथ-साथ शत्रुओं की अधिकता वाला होता हैं।
मघा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक अधिक सोच-विचार करने वाला, सबका सहायक, जनकल्याणकारी, कर्मफल में विश्वासी, योजनाबद्ध तरीके से जीवन जीने वाला, क्रोधी, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाला, जन व समाज के लिए कल्याणकारी, षड्यंत्रकारी व्यवहार करने वालों से दूरी रखने वाला, साफ़-साफ़ बोलने व व्यवहार करने वालों का मित्र होता हैं। जीवन में अनेक कार्यक्षेत्रों में परिवर्तन करते हुए आगे बढ़ता हैं। अतः कुशल अनुभवी होता हैं। शत्रुओं व विश्वासघातों से पीड़ित होता हैं, अतः जीवन के उत्तरार्ध आते-आते किसी पर भरोसा करना कठिन हो जाता हैं। आँख, कान, गला के रोग, घाव व अस्त्र-शस्त्र से जलने-कटने की संभावनाएँ बनती रहती हैं।
उच्च सरकारी पद, प्रशासक, मंत्री, राजनेता, नौकरशाह, डिप्लोमैट, जज, वकील, मैजिस्ट्रेट, कानूनी सलाहकार, कॉर्पोरेट हेड, बड़े संगठनों के प्रमुख, उद्यमी, शेयर बाज़ार, कथावाचन, धार्मिक अनुष्ठानों के कर्ताधर्ता, पुरोहित कर्म वंशावली शोध, एंटीक डीलर, दार्शनिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल होते हैं।
मघा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Qualities of a Male Chart/Horoscope born in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका (Magha Nakshatra Female) गहरी आँखें, चौड़े ललाट, गोल नथुना, लम्बी मांसल गर्दन वाली, चंचल, जिद्दी, सत्य किन्तु कठोर वचन बोलने वाली, निडर, साहसी, महात्वाकांक्षी, लड़ाई-झगड़ा करने वाली, आस्तिक, कार्यकुशल, परिश्रमी, निःस्वार्थ प्रेम करने वाली, सुन्दर, प्रायः ईमानदार होती हैं।
सांसारिक सुखों की प्राप्ति को लालायित येन-केन प्रकारेण अपने लक्ष्यों को भेदने को सदैव कर्मशील, अति धनवान्, विरासत और ख़ानदानी घरों की ब्याहता, लोगों में भेद डाल कर मनमुटाव करवाने वाली, फूट डालने में माहिर, इज्ज़तदार, कुशल नेतृत्व क्षमता वाली होती हैं। इन्हें गर्भाशय, माहवारी आदि से संबंधित परेशानी की संभावना होती हैं।
प्रबंधन, शिक्षा, कानून, सांस्कृतिक व सामाजिक कार्य, इतिहासकार, पुरातत्वविद्, संग्रहालय, लाइब्रेरियन, रिसर्चर, लेक्चरर, प्रोफेसर, अभिनय, डाक्यूमेंट्री मेकर, ज्योतिष, ओकल्ट साइंस, सांस्कृतिक गतिविधियों व विरासत से जुड़े क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होती हैं। कोई-कोई कुशल गृहिणी व पारंपरिक ख़ानदानी व्यवसाय में संलग्न होती हैं।
प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Magha Nakshatra Subtel Results Variations in all 4 Charan (Padas)
मघा नक्षत्र प्रथम चरण (Magha Nakshatra in Hindi First Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 00° अंश से लेकर 03° अंश 20 कला तक का विस्तार क्षेत्र मघा नक्षत्र का प्रथम चरण हैं। नवमांश मेष ♈ होने से इसका स्वामी मंगल हैं। अतः मघा नक्षत्र के प्रथम चरण पर सूर्य-केतु-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। यह एक विष नवमांश भी हैं। नेतृत्व, साहस, शक्ति, तीव्र इच्छाशक्ति, महात्वाकांक्षा, वीरता, उच्च पद, सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा, अहंकार, आवेग, प्रतिस्पर्धी स्वभाव मघा नक्षत्र के प्रथम चरण का मूल गुण हैं।
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण गण्डांत खण्ड हैं। मघा के सर्वाधिक अशुभ व क्रूर प्रभाव इसी चरण के हैं। यह आश्लेषा के सर्प को मारकर सिंहासन जितने का प्रतीक हैं। मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक अतीव साहसी, रक्तवर्णी, क्रोधी, बड़े सर वाला, क्रूर पैनी दृष्टि वाला, घने रोम युक्त चौड़ा सीना वाला, बलिष्ठ, हिंसक, समस्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाला, अहंकारी, आत्मविश्वास से भरा, सम्मान और प्रतिष्ठा का भूखा, आदर्शवादी, अधिकार जताने के गुणों वाला, सत्ता, ऊँचे पद, राजनीति, प्रशासन, कानून वक्तृत्व, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्य, स्वतंत्र व्यापार और नेतृत्व वाली चीजों में रुचिवान्, ऐतिहासिक विरासत, आत्मगौरव में निमग्न होता हैं। स्व निर्मित आर्थिक स्थिरता उम्र के एक चौथाई खर्च करने के बाद आती हैं। सिर, दिल, पेट या आँखों की गर्मी संबंधी समस्या, वैवाहिक संबंधों में तानाशाही से मतभेद, जीवनसाथी पर हाथ उठाने वाला होता/होती हैं। भौतिक स्थिरता के बाद आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने की संभावना होती हैं।
मघा नक्षत्र द्वितीय चरण (Magha Nakshatra in Hindi Second Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 03° अंश 20′ कला से लेकर 06° अंश 40′ कला तक का क्षेत्र विस्तार मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण का हैं। नवमांश वृषभ ♉ होने से इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। अतः मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण पर सूर्य-केतु-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। सुरक्षा, सौन्दर्यीकरण, भौतिक समृद्धि, विशुद्ध चेतना, सामाजिक प्रतिष्ठा, स्थायित्व, परिवार और विरासत का संरक्षण, स्थिर महत्वाकांक्षा मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण का मुख्य गुण हैं।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक मध्यम आकार का, सुगठित शरीर वाला, चौकोर ललाट वाला, छोटा किन्तु आकर्षक आँखों वाला, लम्बी गोल नासिका वाला, ठोस बाहें, चौड़ा सीना, अल्प क्रोधी, शालिन व्यवहार, कुशल कुटनीतिज्ञ, मृदुभाषी, कोमल किन्तु पुष्ट अंगों वाला होता है। सुंदर वस्तुएँ, वाहन, घर की सजावट, गहने आदि में स्वाभाविक रुचिवान्, रियल एस्टेट, बैंकिंग, फाइनेंस, लग्जरी सामान का व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट, फैशन, ब्यूटी, आर्ट गैलरी, सामाजिक छवि को बरकरार रखते हुए प्रशासन व राजनीति में सक्रिय, कला, संगीत व सांस्कृतिक विकास के लिए उन्मुख, पैतृक संपत्ति से लाभी, वैवाहिक संबंधों से धनागमन वाला, धन बनाने के स्थिर रास्तों में रुचिवान् होता हैं। मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण पर अशुभ प्रभाव – गले, यौनांग, व प्रजनन संबंधी समस्याओं को जन्म देती है।
मघा नक्षत्र तृतीय चरण (Magha Nakshatra In Hindi Third Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 06° अंश 40′ कला से लेकर 10° अंश तक का विस्तार क्षेत्र मघा नक्षत्र के तृतीय चरण का हैं। नवमांश मिथुन ♊ होने से इस चरण का स्वामी बुध है। अतः मघा नक्षत्र के तृतीय चरण पर सूर्य-केतु-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। राज्य का संचालन, प्रजा से संवाद, नीति-निर्माण, विरासत की वृद्धि, खोज व अन्वेषण, रणनीतिक कुशलता, संचार कौशल, रचनात्मक व्यवहार, बहुमुखी प्रतिभा आदि मघा नक्षत्र के तृतीय चरण का प्रमुख गुण हैं।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक आकर्षक चेहरा, चौकोर मुखड़ा, रोम युक्त शरीर, लम्बी ठोस नाक, लम्बी बाहें, बोलते समय प्रबल हाव-भाव, हाथों की हलचल ज्यादा, प्रभावशाली वक्ता, लोगों को मनाने या निर्देशित करने में निपुण, हास्य, चतुराई और तर्क-वितर्क में माहिर, अत्यंत प्रतिभाशाली, उच्च शिक्षित, अनेक जन संपर्क वाला होता हैं। राजनीति, प्रशासन, कूटनीति, लेखन, वक्ता, मीडिया, पठन-पाठन, बहस, नई योजनाएँ बनाना, ज्ञान, शास्त्र, ज्योतिष, इतिहास, वकील, जज, स्पोक्सपर्सन, सलाहकार, नीति-निर्माण, व्यापार, संचार, यात्रा, नेटवर्किंग नेटवर्किंग आधारित कर्म व बहु-क्षेत्रीय गतिविधियों में रुचिवान् व सफल होता हैं। मघा नक्षत्र के तृतीय में स्थायित्व की कमी होती है; इस चरण सदैव नयापन बना रहता हैं। यहाँ एक जगह टिककर रहने का गुण नहीं वरन् विचारों, योजनाओं और लोगों के बीच घूमने का गुण होता है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण पर अशुभ प्रभाव – स्वास्थ्य में तंत्रिका तंत्र, हाथ, कंधे, श्वसन प्रणाली, वा वाणी संबंधी दोषों को जन्म देते हैं।
मघा नक्षत्र चतुर्थ चरण (Magha Nakshatra in Hindi Fourth Charan / Padas) : सिंह राशि अंतर्गत 10° अंश से लेकर 13° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र मघा नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। नवमांश कर्क ♋ होने से इस चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। अतः मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर सूर्य-केतु-चंद्र का संयुक्त प्रभाव हैं। भावना, ममता, पालन, दान-पुण्य, स्थायी उत्तराधिकार, भावी पीढ़ी के लिए योजना, संस्कार, खुशहाली, जन-सेवा और लोक-कल्याण आदि मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण के मुख्य गुण हैं।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक गौरवर्णी, सुन्दर, लुभावना, गहरी भावपूर्ण बड़ी आँखों वाला, नाक सामान्य या थोड़ी चौड़ी, सुन्दर केश, ऑयली स्किन, फैले हुए पेट वाला, भावुक, कल्पनाशील होता हैं। परिवार, घर, परंपरा, लोक-कल्याण, भावनात्मक जुड़ाव वाली गतिविधियों, इतिहास, संस्कृति, ज्योतिष, मनोविज्ञान, पुरातत्व, राजनीति में जन-संपर्क, सामाजिक कार्य, शिक्षा व कल्याणकारी योजनाओं, घरेलू सुख, सुंदर निवास, जल से जुड़ी वस्तुओं आदि में रुचिवान्, राजनीति, शासन-प्रशासन प्रशासन में कल्याणकारी विभागों, शिक्षा, सामाजिक कार्य, NGO, अस्पताल या परिवार कल्याण से जुड़े पद, होटल, खाद्य उद्योग, dairy या जल संबंधी व्यवसाय, ज्योतिष, मनोवैज्ञानिक परामर्श, साहित्य, विरासती व्यवसाय को विकसित करने वाला होता है। ऐसा जातक पारिवारिक सौहार्द को बढ़ाने वाला, जन समर्थन से उच्च पदासीन होता हैं। पेट, छाती, मन (depression या mood swings) और जल संबंधी समस्याएँ होने की संभावना होती हैं। यहाँ स्व-सुख के परित्याग के बाद, विश्व कल्याण हेतु जन कल्याणकारी कार्यों में स्वयं को खपाने का कार्य स्वीकारने का लक्षण परिलक्षित होता हैं
मघा नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Results of various planets situated in different Charan /Padas of Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक रोम युक्त दोहरे शारीरिक गठन वाला, मजबूत गर्दन, हाथों व कंधे के नीचे तिल या मस्से का निशान, मध्यम कद, मासूम चेहरा लेकिन क्रोधी, सतर्क दृष्टि, ठोस नासिका वाला, साहसी, नेतृत्वकारी, आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी, अधीर, राजसी इच्छाशक्ति, अधिकार स्थापित करने वाला, भोगी, मान-सम्मान पर अनेको बार आघात वाला, चिंतित, धन के मामले में संघर्षशील होता हैं। बाल्यकाल में अरिष्ट और दुर्घटनाओं की संभावना होती हैं। नेत्र व हृदय रोग पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक आकर्षक, सुंदर, रूपवान, स्थिर व मजबूत शारीरिक गठन वाला, ऊंँचा विशाल मस्तक, पूर्ण आकर्षक होंठ, आरामदायक वस्तुओं की ओर झुकाव वाला, व्यावहारिक, स्थिर, महत्वाकांक्षी, भौतिकवादी, संपत्तिवान्, उदार, दयालु किन्तु स्वामित्वपूर्ण व्यवहार वाला, हठी, छवि और कर्तव्य पर जोर देने वाला, ललित कला प्रेमी, शासकीय अधिकारी, धार्मिक, मनोरंजन प्रेमी, यात्रा प्रिय होता हैं। मोटापा, पाचन तंत्र, त्वचा, हृदय, मधुमेह आदि दोषों से पीड़ित, स्थिरता के प्रयास में अप्रत्याशित गिरावट अथवा संपत्ति संबंधी हानि झेलना पड़ता है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक विशाल सीना, छाती पर बाल, लालिमायुक्त आँखें, सशक्त गर्दन, बुद्धिमान, संचारकुशल, जिज्ञासु, ज्ञान, इतिहास, परंपरा आदि के लेखन में रुचि वाला, कलाओं के प्रति उन्मुख, नियम कानून में रुचिवान्, साहसिक निर्णय लेने वाला, अर्थव्यवस्था, जनकल्याण, कृषि, वाणिज्य आदि का जानकार, नृत्य-संगीत में रुचिवान् होता है। आयु के मध्य भाग में समृद्ध होता हैं।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक कोमल शरीर, चमकदार त्वचा, भावुक चेहरा, सुन्दर होंठ, संवेदनशील, पोषक, परिवार में अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने वाला, भावुक, ज्ञान देने वाला, अपने समाज या क्षेत्र में सम्मानित, नेता, सरकारी क्षेत्र से लाभान्वित होता हैं। पेट, हृदय व ठंड से होने वाले संक्रमणों से परेशान होता है।
मघा नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Sun located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत लोकप्रिय, परोपकारी, आकर्षक व्यक्तित्व वाला, धन-संपत्ति, वाहन और राजसी सुखों का उपभोगी, खर्चीला, सुशील व गुणवान जीवनसाथी वाला, राजकीय क्षेत्रों वा कार्य क्षेत्रों में उच्चाधिकारियों का प्रिय, मौसम के प्रति संवेदनशील होता है। जनसंपर्क से जुड़े कार्यों में सफल होता है और समाज के एक बड़े वर्ग विशेषकर विपरीत लिंगीयों के बीच विशेष सम्मान प्राप्त करता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत साहसी, निडर, उग्र, आक्रामक, क्रोधी, जिद्दी और जन्मजात नेतृत्व क्षमता वाला, शत्रुंजय, संदिग्ध चारित्रिक दुर्गुणों वाला, होता है। ये किसी के अधीनस्थ काम करना नहीं चाहते; अतः नौकरी पेशा में अधिक समय तक इनका रुकना दुष्कर होता हैं; तथापि निर्णय व बल प्रयोग के लिए अपेक्षाकृत थोड़ी आज़ादी वाले क्षेत्र यथा – सेना, पुलिस, खेल, शल्य-चिकित्सा, या उच्च प्रशासनिक क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक उच्च कोटि का विद्वान, बुद्धिमान, सात्विक, न्यायप्रिय, सत्यवादी, सरकार, प्रशासन या सत्ता पक्ष से भारी लाभ वाला, धनवान्, सम्मानित, उच्च पदों पर आसीन, मंदिर, धर्मशाला, सार्वजनिक उद्यान आदि का निर्माण करने वाला, होता है। समाज में एक मार्गदर्शक, मंत्री, चिकित्सक, शैक्षणिक संस्थानों के कुलपति, न्यायाधीश या वरिष्ठ सलाहकार के रूप में ख्याति प्राप्त करता है
शनि की दृष्टि हो तो जातक दूसरों का काम बिगाड़ने वाला, कटु-भाषी, ईर्ष्यालु, अनुशासनप्रिय, चिड़चिड़ा, अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार किन्तु सुस्त, अत्यधिक परिश्रम से अल्प लाभी, सामान्य धनी, जीर्ण रोगों से ग्रस्त होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक सत्तालोलुप, अपने परंपराओं पर अभिमानी, शास्त्रों व नियमों को अपने अनुसार विकृत करने वाला, राजनैतिक सूझबूझ वाला, आत्मप्रवंचना करने वाला, अहंकारी, दिखावा पसंद, धनवान्, भयभीत होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक जीवदया करने वाला, रुढ़िवादी, स्वयं को श्रेष्ठ समझने वाला, गंभीर मुखाकृति वाला, सेवाधर्म का आदर्श स्थापित करने वाला, अपने कार्यक्षेत्र में सम्मानित, लोक में आदरणीय होता है।
मघा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra): मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मांसल सशक्त शरीर, मजबूत गर्दन व कंधे, गोल लम्बी नाक, आकर्षक आँखें, वीरोचित कर्म वाला, स्वाभिमानी, जिद्दी, मानसिक रूप से दुःखी, समाजसेवी, अनेक स्रोतों से लाभान्वित, धर्म-कर्म में अनुरक्त, मान-प्रतिष्ठा वाला, नेक, वफ़ादार, उत्तम चरित्रवान होता हैं। बाल्यकाल में अरिष्ट होता है। २५ वर्ष तक दुर्घटनाओं से ग्रस्त, परिवार में उत्पात-कारक होता हैं। तदन्तर स्व पराक्रम से सर्वसुख प्राप्त करने वाला होता है।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मध्यम कद, नरम लेकिन दृढ़ शरीर, गोलाकार चेहरा, नाक सुन्दर किन्तु थोड़ी चौड़ी, होंठ मोटे किन्तु आकर्षक, चमकदार चिकनी त्वचा, भारी गरदन, आदरणीय, गर्वित, धन-धान्य से युक्त, भोगप्रिय और आरामतलब, कला-सौंदर्य और भौतिक सम्मान में रुचिवान्, मातृपक्ष से लाभी होता हैं। मिर्गी, अपस्मार आदि रोगों से पीड़ित होता हैं।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मध्यम-छोटा कद, पतला और चुस्त शरीर, लंबी नाक, तेज़ अभिव्यक्तिपूर्ण आँखें, लम्बा चेहरा, सुन्दर, दयालु, गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति वाला, बोलते समय चेहरे पर तेज़ी व हाथ-पैर हिलाते हुए संवाद करने वाला, बौद्धिक क्षेत्र, लेखन, शिक्षण या सलाहकारी भूमिका में सफल, उद्यमी, धनी, मध्य आयु में ज्ञान के कारण सम्मानित होता है। माता के बौद्धिक सहयोग से शिखर पर पहुंचने वाला होता है।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सहज बोध वाला, सुन्दर, सौम्य, कोमल थुलथुले शरीर वाला, गौरवर्णी, भरी हुई ठोढ़ी वाला, आस्तिक, पूर्वजों की अराधना करने वाला, माता-पिता का दुलारा, रहस्यमय, परंपराओं का पोषक, भावनात्मक जालों में फँसने वाला, आध्यात्मिक गतिविधियों में संलिप्त रहता है। जीवन में संबंधों व समृद्धि के मामले में भी जबरदस्त उतार-चढ़ाव का सामना करने वाला होता है।
मघा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Moon located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अपने पराक्रम और पूर्वजों के कीर्ति के कारण सम्मानित, उत्कृष्ट गुणों वाला, सरकार व उच्च पदासीन अधिकारियों द्वारा सम्मानित, स्वाभिमानी, प्रतिष्ठित होता हैं। माता-पिता के बीच उनके अपने-अपने कुलों को लेकर मतभेद होते रहते हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक झगड़ालू, अपने अधिकारों के लिए संघर्षशील, स्थिर संपत्तियों में निवेश करने वाला, सैन्य, रक्षा आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, ग्राम वा नगर प्रधान, रक्षात्मक वर्चस्ववादी होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक चंचल, धनी, परस्त्री रत, दूसरों की स्त्रियों पर धन लुटाने वाला, सुखी, व्यापार, वकालत, लेखन, ज्योतिष आदि कार्यों में रुचिवान्, समस्त सांसारिक आनंद को प्राप्त करने वाला होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत भाग्यशाली, विद्वान, गुणी, समाज में सम्मानित, धनवान्, उच्च शिक्षित, शांत, सात्विक, धर्म-कर्म में अनुरक्त, लोकदेवताओं की सिद्धि करने वाला, लोक परंपराओं का संरक्षक होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक प्राचीन हवेलियों, खानदानी आभूषणों और शास्त्रीय कलाओं में रुचिवान्, शाही जीवनशैली वाला, अनेक स्त्रियों से संसर्ग करने वाला, देर से विवाह करने वाला होता हैं। प्रकृति प्रेमी, संगीत लेखन, इत्र व नशीले पदार्थों का व्यवसायी, दवा उद्योग से लाभान्वित होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक परदेसवासी, दुःखी, पारंपरिक व्यवसाय पर आश्रित, अधिक कन्या संतति वाला, बार-बार कर्ज से पीड़ित, क्लेशपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला, क्रूर जनों का सेवक, अपने संतान द्वारा तिरस्कृत होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक रहस्यमय अनुभव वाला, बड़ी उपलब्धि का इच्छुक, अनन्त कल्पनाशीलता वाला, भयातुर, मान-सम्मान का भूखा, लोभी, व्यवसायिक संबंधों को वरीयता देने वाला, शिक्षा में व्यवधान वाला, प्रजनन अंगों में रोगों वाला, आर्थिक लाभ के आधार पर वैवाहिक संबंध होने से असंतोषपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो अल्प आयु से कठिन अनुष्ठान वा पूजा पद्धति का पालन करने वाला, माता से असंतुष्ट, मैत्री संबंधों में धोखा खाने वाला, असाध्य रोग से पीड़ित, अकर्मण्य होता हैं। पुरुष जातक के अनेक अवैध संबंध वहीं स्त्री जातक उदासीन होती हैं।
मघा नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra): मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक ऊंँचा कद, चौड़े मजबूत कंधे, मज़बूत हड्डियाँ, सीधी नुकीली नाक, आँखों में आग जैसी चमक, एथलेटिक शारीरिक सौष्ठव वाला, आक्रामक, अत्यधिक साहसी, महत्वाकांक्षी, नेतृत्वकारी, त्वरित निर्णय लेने वाला, सरकारी तंत्र से लाभान्वित, प्रारंभिक संघर्ष के बाद सैन्य, प्रशासन, इंजीनियरिंग या नेतृत्वपूर्ण पदों की शोभा बढाता हैं। 28 से 35 वर्ष में अचानक उन्नति और सम्मान प्राप्त करता हैं। पूर्वजों या मृतात्माओं के प्रभाव से प्रभावित हो सकता हैं।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra): मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक मध्यम कद-काठी वाला, भारी और दृढ़ शरीर, चौड़ा मस्तक, नाक थोड़ी मोटी, मजबूत गर्दन, गोल और दृढ़ चेहरा, अस्थिर मति, भौतिक अधिकार का इच्छुक, उद्यमी, संपत्ति संचय में निपुण, भोग-विलास में लिप्त, अति कामुक, भूमि-भवन का लाभी, निर्माण कार्य से आजीविका वाला, इंजीनियरिंग, तकनीकी शिक्षा आदि में रुचिवान् होता है। मघा के द्वितीय चरण में स्थित मंगल यदि मंगल दोष निर्मित भी करे, तो उसका प्रभाव बहुधा क्षीण हो जाता हैं।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra): मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक तानाशाही प्रवृत्ति का, उग्र संभाषण करने वाला, विद्वान, दान-धर्म करने वाला, धार्मिक व सांस्कृतिक उत्सवों में रुचिवान्, देव-गुरु-ब्राह्मणों वा विद्वानों से मधुर संबंध रखने वाला, प्रशंसा से प्रसन्न होने वाला, आलोचकों का शत्रु, छद्म व्यवहार करने वाला, आपदा को अवसर में बदलने में माहिर, लेखन, सलाहकारी, मीडिया, सरकारी नौकर, व्यापार, तकनीकी क्षेत्र में नेतृत्वकर्ता की भूमिका में सम्मान प्राप्त करता हैं। तंत्रिका, चर्म, व मानसिक विकारों से पीड़ित हो सकता है।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक दयालु, प्रतापी, ऊपर से देखने में कठोर व्यवहारी किन्तु भीतर से करुणामय, व्यवहारिक, पारिवारिक संघर्षों से उद्विग्न, स्वजनों पर अनुकम्पा रखने वाला, सुखी, संततिवान्, पड़ोसियों से अच्छे संबंध वाला, अनेक मैत्री संबंध वाला, समृद्धशाली होता हैं। पत्नी वा जीवनसाथी से अत्यधिक लगाव रखने व असुरक्षा की भावना से ग्रसित होने से, पत्नी वा जीवनसाथी को जातक द्वारा अधिकार थोपने जैसा प्रतीत हो सकता हैं। फलतः वैवाहिक जीवन में तनावपूर्ण स्थिति बनती रहती है।
मघा नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Mars located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक प्रचंड आत्मबल वाला, साहसी प्रकृति, आक्रामक, शत्रुओं का समूल नाश करने वाला, सामाजिक कार्यकर्ता और वन-पर्वत पर्यटक, प्रशासनिक अधिकारी, रक्षा क्षेत्र, वन्य जीवन अथवा सामाजिक नेतृत्व में रुचिवान् होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक बाहरी रूप से कठोर आवरण, किंतु आंतरिक रूप से अत्यंत भावुक, बलिष्ठ शारीरिक सौष्ठव वाला, अनुशासित, पैतृक उद्योग, जल से संबंधित व्यापार अथवा पारिवारिक व्यवसाय का संरक्षण वाला, अनेक मित्रों वाला, अनेक प्रेम संबंधों वाला, जीवनसाथी से मतभेद वाला होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक कुशाग्र बुद्धि, तार्किक वाणी, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता वाला, बात-बात पर भड़कीला, शास्त्रों का ज्ञाता, कलात्मक अभिरुचि वाला, कुटिल, अनेक शत्रुओं से युक्त, दुर्घटना ग्रस्त होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक नैतिक मूल्यों के प्रति अडिग, परम निष्ठावान, संतुलित दृष्टिकोण वाला, शक्तिशाली जनों से मैत्री वाला, महात्वाकांक्षी, न्यायपालिका, उच्च प्रशासनिक पद, नीति-निर्धारक, आध्यात्मिक गुरु, शैक्षणिक पदों पर जन-कल्याण व समाज निर्माण करने वाला होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अपने शारीरिक बल या सौंदर्य पर अत्यधिक अभिमान करने वाला, अत्यंत चंचल, मैथुन प्रिय, अनेक स्त्रियों से संबंध रखने वाला, कला, मनोरंजन जगत, विलासिता की वस्तुओं का व्यापार अथवा जनसंपर्क अधिकारी होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक एकाकीपन की इच्छा वालि, गहरी कुंठा से ग्रस्त, मानसिक थकावट और असंतोष से पीड़ित, घोर निर्धनता का सामना करने वाला, संकुचित जीवन जीने वाला, परिवार से विमुख, श्रम-साध्य कार्य, पैतृक स्थान से दूर रहकर संघर्षमय आजीविका उपार्जन करने वाला होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक उग्र, असंतोषी, छल-कपट करने वाला, वर्चुअल दुनिया का क्रांतिकारी, अकारण द्वंद्व करने वाला, उच्च पदासीन, कमज़ोरों का उत्पीड़क, कुतार्किक, रक्त विकार, फोबिया, दुर्घटनाओं से पीड़ित होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक तथ्यों व विरासतों के लिए लड़ने वाला, सिद्धांतवादी, संगठनात्मक शक्तियों का दुरुपयोगी, अस्त्र-शस्त्रों का पूजक, आसानी से बरगलाया जाने वाला, इंजीनियरिंग (विशेषकर मैकेनिकल), आयुर्वेद, मार्शल आर्ट्स, योग गुरु, या गुप्तचर विभाग में रुचिवान्, मांसपेशियों की पीड़ा, पुराने घाव, अस्थि मज्जा (Bone Marrow), से संबंधित पीड़ा की संभावना होती हैं।
मघा नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक मज़बूत हड्डी वाला शरीर, चौड़े उभरे हुए कंधे, सीधी और नुकीली नाक, पैनी आँखें, तनी हुई भौंहे, सतर्क चेहरा और थोड़ा कठोर, तेज़ किन्तु अस्थिर मति वाला, निर्णय लेने में द्वन्द्व वाला, उल्टी-सीधी बकवाद करने वाला, शंकालु, दूसरों से अकारण द्वेष करने वाला, स्वजनों का विनाशक, शत्रुओं से पीड़ित होता हैं। नेतृत्व, तकनीकी, सैनिक रणनीतिकार, इंजीनियर आदि क्षेत्रों में सफल होता हैं। योजनाबद्ध तरीकों से किये गये कार्यों को टालने की आदत वाला, प्रबल शत्रुओं से पीड़ित, विद्रोही स्वभाव का होता है।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक सुन्दर नयन-नक्श वाला, मनमोहक, उत्तम सौन्दर्य बोध वाला, अधिक मित्रों वाला, विद्वान आचार्यों की सेवा का इच्छुक, तर्क-वितर्क में निपुण, समग्र रूप में स्थिर और प्रभावशाली, भोग के प्रति उन्मुख, वित्तीय क्षेत्रों, कलात्मक व रचनात्मक क्षेत्रों में रुचिवान्, क्षेत्रीय विकास कार्यों में संलग्न, सम्मानित, सबका प्रिय होता हैं।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक मध्यम कद-काठी का, पतला किन्तु चुस्त बेलन जैसा शरीर वाला, बड़ी आँखें, तीखी नाक, मासूम मुखड़ा, धन-धान्य से परिपूर्ण, परिजनों में सबका प्रिय, परंपरावादी किन्तु तर्कपूर्ण आधुनिकता का स्वागत करने वाला, मिलनसार, लेखन, शिक्षण, मीडिया, कानून या उच्च बौद्धिक क्षेत्र में उच्च सम्मान प्राप्त करता है।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक कोमल विचारों वाला, दयालु, अधिक खर्चीला, निवेश आदि से मिश्रित फल वाला, फल-फूल आदि कच्चे सामानों व उपहार सामग्रियों का व्यापारी, समुद्री वा जलीय क्षेत्रों से आजीविका वाला, सलाहकारी, सेवा, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। दमा, हैजा आदि रोगों और विभिन्न संक्रमण जनित व्याधियों से पीड़ित होता हैं।
मघा नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Mercury located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक आकर्षक संवाद करने वाला, भावुक किन्तु बुद्धिमान, परंपराओं का विरोधी, तर्क-वितर्क करने वाला, अपने लक्ष्य के प्रति उन्मुख, पढ़ने-लिखने में तेज़, चिकित्सा, लेखन, गणनात्मक कार्य, डिजिटल नवीकरणीय संसाधनों से जुड़े कार्यों से लाभान्वित होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक छिन्द्रान्वेषी, अपने विचारों का कट्टर, लड़ाई-झगड़ा करने वाला, कलहप्रिय, अन्दर से डरपोक, गणित, खगोल, विज्ञान में रुचिवान्, बाल्यकाल में शील भंग करने वाला, निकट संबंधियों से धोखे का शिकार, अफवाह, प्रोपगंडा फैलाने में आनंदित, बदनामी से प्रसिद्ध होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक विवेकशील, संतुलित वक्ता, प्राचीन ग्रंथों, दर्शन, कानून व प्रबंधन के विषयों में गहरी रुचि वाला, शिक्षा, परामर्श, मार्गदर्शन, प्रशासनिक व प्रबंधन की गहरी योग्यता वाला, कुशल गृहस्थ, धन संग्रह में निपुण, आदर्श जीवनसाथी सिद्ध होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, अंतर्मुखी, क्रूर, संकोची, मशीन, लेखांकन, डेटा एनालिटिक्स, शोध, इंजीनियरिंग, या न्याय विभाग में सफल होता हैं। पारिवारिक संबंधों में औपचारिक किन्तु कर्तव्यों का निर्वहन ठीक ढंग से करता हैं। कर्ण रोग, हड्डियों, नसों व सौन्दर्य संबंधि व्याधियांँ होने की संभावना होती हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत चालाक, कूटनीतिज्ञ (Diplomatic), हाजिरजवाब, डेटा साइंस, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, सट्टा बाजार, मार्केटिंग के बड़े खेल आदि में रुचिवान्, अनिद्रा, चर्म विकार, मनोरोग आदि का शिकार होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक जड़ प्रकृति, भावना विहीन, सीमित संसाधनों वाला, माताहतों से द्वेष करने वाला, अल्प परिश्रमी, प्राचीन लिपियों व शास्त्रों पर शोध में रुचिवान्, वाणी दोष (Stammering), कान से जुड़ी समस्या, त्वचा (Skin) के ऐसे रोग जिनका कारण पता न चले से पीड़ित होता हैं।
मघा नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक लम्बा और मजबूत शरीर, चौड़े कंधे, सीधी लम्बी नाक, बड़ी प्रेरणादायक आँखें, ऊंचा माथा, तेजस्वी चेहरा किन्तु थोड़ा कठोर, राजसी और आत्मविश्वासपूर्ण चाल, भौतिकतावादी, साहसी, क्रोधपूर्ण उपदेशक, हठधर्मी, शंकालु, भयातुर, सैन्य वा प्रशासनिक नेतृत्व, कानून, शिक्षा, खेल प्रशिक्षण, धार्मिक संगठन, राज-सलाहकार, योग्य संततियों वाला होता है। लीवर, रक्तचाप, सिरदर्द या जोड़ों का दर्द से संबंधित समस्याएंँ होती हैं।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक भरा हुआ मांसल शरीर, गोल चेहरा, मोटी गर्दन, मोटी नाक, गरिमापूर्ण आकर्षण वाला, विद्वान, विरासत का लाभी, कलात्मक अभिरुचि वाला, व्याहारिक ज्ञानी, भौतिकता के प्रति अति आसक्त, दिखावटी धार्मिक होता हैं। बैंकिंग, भूमि-सम्पत्ति, कला व संगीत शिक्षा, विलासिता व्यापार या राजकीय पदों पर आसीन, राज-कोषाध्यक्ष या किसी समृद्ध मंदिर वा संस्था का संचालक होता हैं। मोटापा, पाचन तंत्र व धातु संबंधी रोगों से पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक पतला किन्तु तेजस्वी शरीर, लंबी नुकीली नाक, बड़ी गहराई युक्त आँखें, बुद्धिमान, प्रखर चेहरा, गर्वित मुस्कान वाला, ज्ञानपूर्ण बातें करते समय सक्रिय भुजाओं वाला, वाक्-चातुर्य से युक्त, इतिहास व दर्शन में रुचिवान्, शास्त्रार्थकुशल, बहुमुखी ज्ञानी, पर्याप्त धनी, परंपरावादी, शत्रुंजय, सैद्धांतिक कट्टरवादी होता हैं। उच्च शिक्षा, लेखन, कानून, दर्शन, मीडिया या सलाहकारी, विभिन्न सभ्यताओं में महान विद्वान, नीति-निर्माता, लेखक-गुरु या विश्वविद्यालयाध्यक्ष आदि पदों की गरिमा बढ़ाता हैं। अपने अहंकार और कुटिलता के कारण स्वजनों से मतभेद, व मानहानि का सामना करना पड़ता है।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक नरम दयालु विचारों वाला, कोमल चेहरा, सबका हितैषी, समतावादी, भावनाओं के वशीभूत, धार्मिक शिक्षा, पूर्वज पूजा, मनोविज्ञान, सामाजिक कल्याण, अनुष्ठान या भावुक परामर्श, पितृ-भक्त, गुरु-शिक्षक आदि का आदर करने वाला, भावुक कथावाचक, परिवार-केंद्रित होता हैं। माता के अतिरिक्त अन्य स्त्रियों से द्वेष करने का अवगुण होता है। संतान के प्रति विशेष जिम्मेदार होता है।
मघा नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Jupiter located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक प्रसिद्ध, प्रभावशाली, नेक, राजसिक, आत्म-सम्मान से युक्त, नेतृत्वकारी, न्यायप्रिय, सम्मानित वैवाहिक जीवन वाला, उत्तम संतति वाला, पुरोहित कर्म, राजनीति, सरकारी प्रशासनिक सेवा, नेतृत्वकारी भूमिका में रुचिवान्, अहंकारी वक्तव्यों से चर्चा में बने रहने वाला, प्रसिद्ध होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कल्पनाशील, दयालु, संवेदनशील, कला, साहित्य और जनसेवा में रुचि वाला, मानसिक शांति से युक्त, अध्यापन, परामर्श (Counseling), रचनात्मक कार्य, पर्यटन से लाभी, धन और मान से परिपूर्ण, पत्नी पर विशेष अंकुश रखने वाला होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक पराक्रमी, उन्नतिशील, स्पष्टवादी, इंजीनियरिंग, सैन्य सेवा, याज्ञिक कर्म, रक्षात्मक प्रशिक्षण, भूमि से संबंधित कार्य या प्रबंधन में रुचिवान्, समाज में दबदबा बनाए रखने वाला होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक कुटनीतिक, वाक्-चातुर्य से युक्त, शास्त्रों व विभिन्न दर्शनों को गणितीय रूप देने में सक्षम, डेटा, विश्लेषण, व्यापार, बैंकिंग, सीए, पत्रकारिता के क्षेत्र में सम्मानित होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक आध्यात्मिक, विलासितापूर्ण जीवन जीने वाला, उच्च आदर्शवादी, कर्मकांड, मंत्र साधना आदि में आस्थावान्, उच्च आध्यात्मिक दर्शनों में रुचिवान्, प्रायोगिक शिक्षा में विश्वासी, कलात्मक शिक्षण, सौन्दर्य प्रसाधन, शिक्षण सामग्री, अनुष्ठानिक सामग्रियों के व्यवसाय में संलग्न होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक गहरी अंतर्दृष्टि वाला, परिपक्व, चतुर, अनेक जिम्मेदारियों के बोझ से दबा, सामाजिक एकता का प्रचारक, नक्काशी, कारीगरी आदि श्रम और उच्च कलात्मक योग्यता वाले व्यवसाय वा कार्य क्षेत्रों में संलग्न, नीरस पारिवारिक जीवन वाला होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक स्थापित धार्मिक मान्यताओं को चुनौती देने वाला, मिश्रित दार्शनिक विचारों से स्वयं के नये सिद्धांत स्थापित करने का इच्छुक, अपने पांडित्य का प्रदर्शनकारी, व्यवस्था में सुधार लाने को इच्छुक, उच्च शिक्षा, कानून, विदेशी संस्थानों में सलाहकार, या बड़े धार्मिक वा सामाजिक संगठनों के कर्ता-धर्ता, कोलेस्ट्रॉल, लिवर, चर्बी आदि से संबंधित व्याधियाँ होने की संभावना होती हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक भूतकाल के स्वप्नों में लीन, एकांतप्रिय, गुप्त योजनाओं में रुचिवान्, विभिन्न कठिन योग मुद्राओं पर शोध करने वाला, दर्शनशास्त्र, शरीरविज्ञान आदि में रुचिवान्, गठिया, सायटिका, कर्ण रोग से पीड़ित होता हैं।
मघा नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक आकर्षक मांसल शरीर वाला, सामान्यतया सुन्दर, क्रोधी, महत्वाकांक्षी, आवेगी प्रेम संबंधों वाला, उग्र रतिक्रिया करने वाला, अनैतिक आचरण से युक्त, सौंदर्य और भोग में लिप्त, जीवनसाथी के साथ अप्राकृतिक मैथुन के कारण मतभेद व क्लेश करने वाला, विवाहेत्तर संबंधों वाला होता है। वैवाहिक जीवन असहज, तलाक वा संबंध विच्छेद होने की संभावना होती हैं। इंजीनियरिंग, डिज़ाइनिंग, खेल, मनोरंजन संबंधी कार्यक्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक सुन्दर सुगठित शरीर वाला, सजने-संवरने का शौकीन, मितव्ययी, ललित कला प्रेमी, मृदुभाषी होता हैं। यौन अभिविन्यास निश्चित नहीं होता, अतः सभी लिंगीयो पर आकर्षित होता हैं। धन व समृद्धि से युक्त, समस्त संसाधनों से परिपूर्ण, मोटापा, पाचन, गला, थायरॉइड आदि विकारों से पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक चंचल, बच्चे जैसी हरकतें करने वाला, वाक्पटु, जिद्दी, विभिन्न विषयों का ज्ञाता, घूमने-फिरने का शौक़ीन, गणित, खगोल, ज्योतिष आदि विद्याओं में रुचि वाला, सुव्यवस्था का इच्छुक, आराम पसंद वस्तुओं व स्थलों का निर्माण करने वाला, धन के प्रति संवेदनशील, छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने वाला, आलोचना, लेखन, मीडिया, अभिनय, डिजाइन, डिप्लोमेसी या प्रकाशन के क्षेत्र पर रुचिवान् होता हैं।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक गौरवर्णी, सुन्दर, विलासी, अल्प ईर्ष्यालु, दान-पुण्य करने वाला, फल-फूल बाग-बगीचे लगवाने वाला, स्थाई कीर्तिमान स्थापित करने का इच्छुक, जुझारू, आस्तिक, जनकल्याणकारी, समाज में आदरणीय, आय के अनेक स्रोतों वाला होता हैं। पैतृक विरासत वा पैतृक व्यवसाय, परामर्श, अस्पताल, समाज सेवा, धार्मिक वा आध्यात्मिक सौन्दर्यीकरण के कारोबार में रुचिवान् होता है। अनेक अनैतिक संबंधों में लिप्त होने से जननांग संबंधी रोग, मनोरोग व वैवाहिक जीवन में असंतोष पनपता है।
मघा नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Venus located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत संवेदनशील, सौंदर्य प्रेमी, कल्पनाशील, ईर्ष्यालु, असुरक्षा की भावना से ग्रस्त, धनवान्, बड़ा सामाजिक दायरा वाला, अनेक स्त्रियों का प्रिय व उनसे गहरे संबंधों वाला, कुत्सित संगति वाला, वैवाहिक संबंधों में भावनात्मक लगाव रखने के बावजूद चंचल व्यवहार कभी-कभी द्वंद्व पैदा करते रहते हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक चंचल, साहसिक कर्म करने वाला, घूमने-फिरने का शौकीन, अल्प आयु में रति सुख प्राप्त करने वाला, प्रबल मैथुन प्रिय, पैतृक विरासत का लाभी, ससुराल पक्ष से भी धन प्राप्त करने वाला, दूसरों की संपत्ति व स्त्री पर अधिकार करने वाला, भौतिक अधिकारों के मामले में अत्यंत भाग्यशाली, उत्पीड़क, नैतिक दृष्टि से नीच प्रवृत्ति का होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक धार्मिक, कठिन अनुष्ठानिक गतिविधियों में संलिप्त, लोकदेवताओं का उपासक, उच्च स्तरीय कला, दर्शन और विलासिता में रुचिवान्, सरकार द्वारा सम्मानित, वैभवयुक्त, अनेक नौकर-चाकर द्वारा सेवित, बहुत बड़े साख (Reputation) अर्जित करने वाला होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक सादा जीवन जीने वाला, अनुशासित, कड़ी परिश्रम के बाद धनी, नीरस वैवाहिक जीवन वाला, अपने से बड़ी आयु की स्त्री से संसर्ग करने वाला, फ़ैशन, डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, त्वचा व हार्मोनल असंतुलन की संभावना बनी रहती है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अंतर्जातीय संबंधों में सहज, प्रभावशाली व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित, विभिन्न सभ्यताओं को अपने जीवनशैली में स्थान देने वाला, अनैतिक कार्यों में संलग्न, फैशन इंडस्ट्री, लक्जरी इवेंट मैनेजमेंट, हाई-एंड ब्यूटी प्रोडक्ट्स, फिल्म वा डिजिटल मीडिया आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, जननांगों (Private parts) से संबंधित गुप्त रोग, हार्मोनल असंतुलन या त्वचा की एलर्जी से पीड़ित होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक अनेक अस्थाई संबंधों में लिप्त, निर्णय लेने में कठिनाई का अनुभव करने वाला, सांस्कृतिक उपक्रमों में रुचिवान्, गाँव या प्राकृतिक जीवनशैली में सहज व प्रसन्नता अनुभव करने वाला, धोखाधड़ी के बार-बार शिकार, पारंपरिक कलाओं व वास्तु का जानकार, किडनी, नेत्र व अनेक कॉस्मेटिक बिमारियों का शिकार हो सकता है।
मघा नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक कर्मठ, मजबूत किन्तु पतले शरीर वाला, चौड़ा किन्तु झुके हुए कंधे, गहरी थकान भरी आँखों वाला, धीमी किन्तु दृढ़ता से चलने वाला, अपनी उग्रता को छुपाने में सक्षम, बाहरी संयमित आवरण वाला, दूसरों की निंदा करके प्रसन्न, मित्रों का अपकारी, आलस्य युक्त, रिश्तों के प्रति लापरवाह, अपने परंपराओं के प्रति अंधविश्वासी, साधारण धनी, कठोर शारीरिक श्रम वाले कार्यों में रुचि रखने वाला, गाली-गलौच करने वाला होता हैं।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक भारी शरीर वाला, सुन्दर, मोटी खुरदरी त्वचा वाला, चेहरे पर तील या मस्से से युक्त, परंपराओं में मिश्रण करने वाला, मेहनती, भारी व मजबूत निर्माण कार्य करने वाला, कुशल शिल्पी, भूमि, निर्माण, कृषि, खनन, कठोर विलासिता वस्तुओं का व्यापारी, कानून, नीति-निर्माण से संबंधित सरकारी पदों में रुचिवान्, अनेक सेवकों वाला होता है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक गहन शोधपरक बुद्धि वाला, परिपक्व, धर्म-कर्म में अनुरागी, शास्त्रोंक्त वर्णित कठिन अनुष्ठानिक कर्म करने वाला, मंत्रज्ञ, सिद्धि प्राप्त करने वाला, मृतात्माओं से संपर्क साधने में सक्षम, खिन्न मन वाला, क्लेशपूर्ण वैवाहिक जीवन वाला, अपने से बहुत बड़ी आयु वाली स्त्री से संसर्ग करने वाला होता हैं। लेखन कानून, ठेकेदारी, शिक्षण आदि कार्यों में रुचिवान् होता हैं। तंत्रिका, स्नायु व चर्म से संबंधित रोगों की संभावना होती हैं।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra): मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक घरेलू संबंधों में उदासीन, बाहर त्यागी स्वभाव प्रदर्शित करने वाला, प्रत्येक चीज़ों को गहरी अंतर्दृष्टि से देखने वाला, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला, शोध आदि कार्यों में रुचिवान्, समाज सुधार, आश्रम संचालन, सामाजिक कल्याण, कृषि व धार्मिक प्रचार-प्रसार में रुचि रखता हैं। पेट, छाती, भावुक अवसाद, हृदय व कफ जनित रोग पीड़ित करते हैं।
मघा नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Saturn located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक शासक वर्गों में सम्मानित, उच्चस्तरीय जान-पहचान वाला, विरासतों का लाभी, धनी, प्रभाव जमाने में निपुण, आध्यात्मिक, जनप्रिय होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक स्वाभिमानी, महात्वाकांक्षी, परिश्रम से भागने वाला, कठिन दबाव में कार्य करने वाला, गैरजिम्मेदार, कलहप्रिय, व्यसनी होता हैं। योग्यता के अनुरूप कार्यक्षेत्र ना होने से चिड़चिड़ा व असंतुष्ट रहता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक साहसी, निडर, कानून तोड़ने में आनंदित होने वाला, इंजीनियरिंग, सेना, विमानन, शोध, उच्च तकनीकी कार्य में रुचिवान् होता हैं। वाहन दुर्घटना, चोट, ऑपरेशन या आग से जलने का खतरा रहता है। प्रेमिका / पत्नी पर बल प्रयोग व शाब्दिक हिंसा करने का गुण होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक चतुर, विद्वतापूर्ण, कुटनीतिक, दूरदर्शी, व्यापार, कानून, डेटा विश्लेषण या प्रबंधन में निपुण, समाज में विश्वसनीय होता हैं। ये अधिक श्रम युक्त कार्य नहीं कर पाते। जीवन में शनै-शनै प्रगतिशील होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक परोपकारी, धर्मनिष्ठ, परंपरावादी, रुढ़िवादी, गूढ़ विद्याओं में रुचिवान्, न्यायपालिका, सलाहकारी, चिकित्सा, निर्माण, शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थानों में सफल, वैवाहिक जीवन में स्थिरता और परिपक्वता आती है। संतान योग्य व कुलभूषण होते हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कंजूस, लोभी, दूसरों का सामान चुराने वाला, झूठा, सरकारी क्षेत्र वा कला, इंटीरियर डिजाइनिंग या फैशन के क्षेत्र में ‘व्यावसायिक’ सफलता वाला, अनुशासित कलाप्रेमी, प्रेम संबंधों में गंभीर, स्त्रियों से आर्थिक लाभ लेने वाला होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक विद्रोही उत्तराधिकारी, क्रूर रणनीतिकार, जिद्दी, स्वयं का नुक़सान स्वीकार करके भी दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाले, परिजनों से क्लेश करने वाला, पुरानी विरासतों का आधुनिकरण करने वाला, खनन (Mines), तेल, वा राजनीतिक सलाहकार की भूमिका वाला, पत्नी पर क्रूरता करने वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक बार-बार कार्यक्षेत्र बदलने वाला, मित्रों का अपकारी, आलस्य युक्त, श्मसान वा तीर्थस्थल में व्यवसाय करने वाला, ज्ञान के लिए भटकने वाला, घाव, दर्द, चोट से पीड़ित, सत्ता द्वारा प्रताड़ित, जीवन के उत्तरार्ध में विरक्त होने की संभावना होती हैं।
मघा नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक तीखा चेहरा, घने केश, तेज़ चाल, महात्वाकांक्षी, आवेगी, छल-कपट करने में माहिर, प्रचुर धनी, धोखे से अधिकार का हरण करने वाला, सैन्य, खेल, तकनीकी क्षेत्र में अचानक उछाल, विदेशी हथियार, मशीनरी व्यापार, राजनीति, नवाचारी स्टार्टअप, रणनीतिकार, विदेशी प्रभाव से प्रभावित नेता होता हैं। अनैतिक संबंधों में लिप्त, सिरदर्द, चोट, उच्च रक्तचाप, नसों की समस्या से पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक गोल चेहरा, छाया युक्त चर्म या दाग़दार मुखड़े वाला, विकृत दंत, भोगप्रिय, आकर्षक, व्यवहारिक, महात्वाकांक्षी, फैशन, भूमि, संपत्ति, मनोरंजन, विदेशी मुद्रा, सौन्दर्य प्रसाधन, विष, इत्र, कीमती रासायनों का व्यवसायी होता है। संतान प्राप्ति में कठिनाई, व उच्च शिक्षा से वंचित होता हैं। मोटापा, त्वचा, एलर्जी, गला व जननांग संबंधी समस्याएंँ होती है।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक चतुर, दूसरों पर प्रभाव जमाने वाला, प्रचार, लेखन, मीडिया में माहिर, लेकिन सत्य और झूठ की सीमा धुंधली रखने वाला, सलाहकारी, आईटी, डिप्लोमेसी में निपुण, परिजनों से विवाद करने वाला, किसी घोटाले या ठगी में फँसने की संभावना होती है। घातक जानलेवा बिमारियों से बार-बार पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक चतुर, अज्ञात भय से पीड़ित, मनोरोगी, भूत-प्रेत आदि की पीड़ा से दुःखी, कमजोर याददाश्त वाला, प्रारंभिक जीवन में निर्धन, धीरे-धीरे सामुहिक प्रयासों से धनी, विलंब से विवाह वाला, मतलबी, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, पैतृक व्यवसाय, धार्मिक क्षेत्र, अभिनय, शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े कार्यों में सफल होता हैं। आजीवन विवादों से घिरा रहता है; अंत में जीवन के उत्तरार्ध में विरक्त होता हैं।
मघा नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Rahu located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक परिजनों द्वारा तिरस्कृत, घर-परिवार से दूर, कमज़ोरों पर तानाशाही प्रवृत्ति का बलवानों के समक्ष चापलूसी से काम निकालने वाला, धोखे वा छल से दूसरों का अधिकार हड़पने वाला होता हैं । स्त्री जातक के गर्भपात होते हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक शंकालु, यात्राप्रिय, परंपराओं का नाशक, अनैतिक आचरण वाला, मातृ-पितृ द्रोही, ढोंग से स्वार्थ सिद्ध करने वाला, अज्ञात भय से भयभीत, इत्तर योनियों में रुचिवान्, रहस्यमयी विद्याओं वाला, डरावनी कृत्यों वाला होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक ज़िद्दी, अतिक्रमणकारी, अपने लक्ष्यों के लिए अंतिम सांँस तक प्रयत्नशील, अपने कुल के लिए सुरक्षात्मक, अनैतिक आचरण वाला, असमाजिक तत्वों से मैत्री संबंध रखने वाला, शारीरिक चोट, रक्त विकार या प्लीहा से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक वाक्पटु, अनर्गल तर्क करने वाला, सत्तालोलुप, कागज़ी दस्तावेज़ों में हेरफेर करने वाला, मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने में निपुण, शास्त्र विरुद्ध प्रोपगंडा फैलाने वाला वा अफवाह फ़ैलाने में माहिर, महान कलाकार, जादूगर, बौद्धिक अपराधी होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक सम्मान सहित सत्ता सुख का इच्छुक, समाज सुधारक, सलाहकार वा किसी बड़े संस्थान का प्रमुख, पैतृक विरासत का उद्धारक, आयुर्वेद, शस्त्र विद्या, आध्यात्मिक ज्ञान का खोजी, क्रांतिकारी विचारधारा वाला, दवा, रसायन, उर्वरक आदि के क्षेत्र में कार्यशील होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कलात्मक अभिरुचि वाला, अपने कार्य को सुन्दरता पूर्वक करने वाला, इन्द्रिय सुखों के वशीभूत, अनैतिक कर्म करने वाला, इत्र, उपहार सामग्री, सौन्दर्य प्रसाधन का व्यवसखयी, वैवाहिक जीवन में तनावपूर्ण जीवन व्यतीत करना पड़ता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक निर्धन, यथार्थवादी व परंपरावादी, रोजगार के लिए दर-दर भटकने वाला, असाध्य रोगों से ग्रस्त, ख़ानदानी दुश्मनी का शिकार, वायु, स्नायु, तंत्रिका तंत्र व चर्म विकार जैसी व्याधियों व प्रेतबाधा से से पीड़ित होता है।
मघा नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in First Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक मजबूत, कर्मठ, लक्ष्य उन्मुख, साहसी, नेतृत्व करने वाला, कष्ट व दुविधाओं से पीड़ित, अनैतिक गैर-कानूनी कामों में रुचि रखने वाला, भाग-दौड़ करने वाला, अनिश्चित जीवनशैली वाला होता हैं। शरीर में चोट व सूजन आम होता हैं। व्यसनों का शिकार होता हैं।
मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Second Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक भौतिकता के प्रति उदासीन, एकांतप्रिय, परिवर्तन का विरोधी, अल्पकालिक संबंधों वाला, पारिवारिक जीवन के प्रति लापरवाह, वैवाहिक संबंधों में विच्छेद वाला अथवा पहले संबंध में साथी के मरण से अकेला, विरक्त होता हैं।
मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Third Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक शोधपरक दृष्टिकोण वाला, बुद्धिमान, बहुत अधिक सोच-विचार करने वाला तथापि निष्कर्ष हीन, बार-बार कार्यक्षेत्र में बदलाव करने वाला, गहन अध्ययन, ज्योतिष, दर्शन या गूढ़ विषयों में क्षमतावान, अच्छी विश्लेषण शक्ति वाला होता है। गुप्त शत्रुओं से बार-बार अरिष्ट की संभावना होती हैं।
मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu situated in Fourth Charan /Padas of Magha Nakshatra) : मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक बाहरी दुनिया के लिए करुणामय, दयालु, परिवार में कर्त्तव्यों का निर्वहन करने वाला, वास्तविक आध्यात्मिक गहराई वाला, तीर्थाटन आदि पर्यटन-प्रेमी, धार्मिक कार्य, मनोविज्ञान, सामाजिक कल्याण, अस्पताल, आश्रम संबंधी काम, सेवा आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है। यात्रा व जल संबंधी दुर्घटना के योग बनते हैं।
मघा नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Results of Various Planets on the Ketu located in Magha Nakshatra
मघा नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत महत्वाकांक्षी और स्वाभिमानी होता हैं, किन्तु पिता के साथ संबंधों में भारी तनाव या विच्छेद की स्थिति बनती है। सरकारी कार्यों व सत्ता से संघर्ष की संभावना रहती है। पद-प्रतिष्ठा के लिए अनैतिक मार्ग चुन सकता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मानसिक रोगी, वहमी या डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। माता को कष्ट, जल से भय या फेफड़ों में इन्फेक्शन, पैतृक संपत्ति के सुख में कमी, गृहक्लेश, असाध्य बिमारियों से पीड़ित, भूत-प्रेत जनित बाधाओं से पीड़ित होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत क्रोधी, अपराधी प्रवृत्ति का, समाज पर बलपूर्वक अधिकार करने वाला, रक्तपाती, अग्नि से दुर्घटना, सर्जरी वा रक्त विकार, भाइयों से शत्रुता वाला होता हैं। अपनी अंधी महात्वाकांक्षाओं में कुल के विनाश की ओर कदम बढ़ा सकता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक खोजी प्रकृति, रहस्यमय, झूठ बोलने में माहिर और त्वचा रोगों से ग्रसित होगा। वाणी दोष के कारण अपनों से दूरी, नसों की कमजोरी, व्यवसाय में अप्रत्याशित नुकसानों से पैतृक संपत्ति का विनाशक होता हैं। जीवन के उत्तरार्ध में स्व अर्जित धन से धनवान् होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक अपरंपरागत आध्यात्मिक, गुरु व शास्त्रों में दोष ढूंढने में सक्षम, दार्शनिक विचारों वाला, परंपराओं का व्याख्याता, विलंब से सुसंस्कृत संतानोत्पत्ति करने वाला, अपने पुर्वजों का उद्धारक होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक परंपराओं का विरोधी, अवैध संबंधों के कारण कुल के मर्यादाओं का हनन करने वाला, प्राचीन विलासितापूर्ण वस्तुओं का संग्रहकर्ता, पैतृक संपत्ति का लाभी, वैवाहिक जीवन में उदासीन, ससुराल पक्ष से द्वेष करने वाला होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक लोहे, तेल, माइनिंग, पुरानी मशीनों या कबाड़ का कारोबारी, पुरानी चीजों, खंडहरों, प्राचीन इतिहास और तंत्र-मंत्र में गहरी रुचि रखने वाला होता हैं। उसे श्मशान या वीरान जगहों पर जाने से डर नहीं लगेगा, बल्कि वहांँ सुकून महसूस होगा। वह तामसिक और एकांतप्रिय होगा।
उपसंहार || Important Considerations
किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।
यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।
सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता।
राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।
जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।
मघा नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personality born in Magha Nakshatra
राजीव गांधी (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री) – का सूर्य मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में था।
बिल क्लिंटन (राष्ट्रपति – USA) – का सूर्य मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
सुब्रमण्यम स्वामी (भारतीय राजनीतिज्ञ) – का लग्न मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।
माईकल जैक्सन (मशहूर अमेरिकी पॉप सिंगर व डांसर) – का सूर्य मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।
निकोल किडमैन (प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई-अमेरिकी अभिनेत्री, निर्माता) – का लग्न मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण में था।
आनन्द महिन्द्रा (मशहूर भारतीय उद्योगपति) – का चन्द्र मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।
[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का मघा में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]
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नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या
1• अश्विनी
2• भरणी
3• कृतिका
4• रोहिणी
5• मृगशिरा
6• आर्द्रा
7• पुनर्वसु
8• पुष्य
9• आश्लेषा
10• मघा
11• पूर्वा फाल्गुनी
12• उत्तरा फाल्गुनी
13• हस्त
14• चित्रा
15• स्वाति
16• विशाखा
17• अनुराधा
18• ज्येष्ठा
19• मूल
20• पूर्वाषाढ़ा
21• उत्तराषाढ़ा
22• श्रवण
23• धनिष्ठा
24• शतभिषा
25• पूर्वा भाद्रपद
26• उत्तरा भाद्रपद
27• रेवती