आश्लेषा नक्षत्र परिचय || Introduction of Ashlesha Nakshatra in Hindi
Ashlesha Nakshatra in Hindi || वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘आश्लेषा नक्षत्र’ क्रम से 9वांँ नक्षत्र हैं। भचक्र में 106° अंश 40′ कला से लेकर 120° अंश तक के विस्तार क्षेत्र ‘आश्लेषा नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में ‘हाइड्रा’ (Hydra) तारामंडल के 6 तारें Epsilon (ε) Hydrae, Delta (δ) Hydrae, Sigma (σ) Hydrae, Rho (ρ) Hydrae, Eta (η) Hydrae और Zeta (ζ) Hydrae – आश्लेषा नक्षत्र हैं; इनमें Epsilon (ε) Hydrae मुख्य हैं; जो कि हाइड्रा तारामंडल के शीर्ष पर आता हैं।
अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-तर्फ़ (Al-Tarf) अर्थात ‘शेर की नज़र’, चाइनीज सियु में इसे ‘लियू’ (Liu Xiù) या ‘लियेऊ’ (Lieou Xiù) कहा जाता हैं; जो चाइनीज चन्द्र भवन के प्रमुख 4 वर्गीकरण में से, ‘दक्षिण लाल पक्षी’ (Vermilion Bird of the South) के अंतर्गत आता हैं। इसका अर्थ ‘विलो ब्रांच’ (Willow Branch -एक घुमावदार लचीली लकड़ी) हैं।
आश्लेषा शब्द संस्कृत भाषा के मूल धातु ‘श्लिष्’ से बना हैं। ‘श्लिष्’ का अर्थ हैं — जोड़ना, सम्मिलित करना, चिपकना, आलिंगन करना, जलना आदि। “श्लिष्” धातु में “आ” उपसर्ग के लगने से शब्द हुआ — “आश्लिष्”, इसमें टाप् (आ) स्त्री प्रत्यय के जुड़ने से “आश्लेषा” शब्द निष्पन्न हुआ है; जिसका अर्थ हैं — संयुक्त होना, जुड़ना, आलिंगन करना, सम्मिलित करना, चिपके रहना आदि।
नक्षत्र मण्डल में आश्लेषा के 6 तारे मिलकर कुंडली मारे सर्पाकार आकृति बनाते हैं। यह सर्प वा नाग, रुपांतरण, आध्यात्मिक जागरण, छिपी हुई शक्ति, परिवर्तन और नवीनीकरण, छिपी हुई बुद्धि, रहस्य, अंतर्ज्ञान, कुंडलिनी शक्ति, विषाक्तता, ईर्ष्यालु स्वभाव, विष और शक्ति की द्वंद्वात्मकता का प्रतीक हैं।
अतः कर्क राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से लेकर 30° अंश तक का क्षेत्र ‘आश्लेषा नक्षत्र’ का विस्तार हैं। इस नक्षत्र का स्वामी – बुध, नक्षत्र देवता – नाग वा सर्प 🐍, जाति – चाण्डाल, योनि – मार्जार, योनिवैर – मूषक (चूहा), राक्षस गण, अंत्य नाड़ी, रजोगुणी, शोक कारक, तामसिक, स्त्री नक्षत्र हैं। यह दक्षिण दिशा का स्वामी हैं। यह तीक्ष्ण / दारुण, अधोमुखी, मंदलोचन वा मंदाक्ष नक्षत्र हैं।
चूंकि इस नक्षत्र के समाप्ति पर हीं कर्क राशि भी समाप्त होती हैं, अतः आश्लेषा नक्षत्र की संज्ञा — मूल, गण्ड वा गण्डांत नक्षत्र भी हैं। राशि व नक्षत्र के एक साथ समापन होने से यह एक संधि स्थल हैं, जिसे “ऋक्ष संधि” कहा गया हैं। संधि स्थल होने से यह संवेदनशील स्थान हैं। अतः आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न जातक में कुछ संवेदनशीलता, कटुता, अधीरता के साथ-साथ ये माता-पिता व कुटुम्बियों के लिए महा भय-कारक, शोक-कारक, धन नाशक सिद्ध होते हैं। शास्त्रों के अनुसार आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न जातकों के लिए उनके जन्म के 27 दिन पश्चात, पुनः जब आश्लेषा नक्षत्र आए, तब नक्षत्र शांति करवा लेना चाहिए। जब तक इनका नक्षत्र शांति नहीं हो जाता, तबतक पिता द्वारा इनका मुख देखना अत्यंत हानिकारक व कष्टकारी सिद्ध होता हैं। 27 नक्षत्रों में यह सबसे अधिक भयानक व प्रचण्ड दुःखदायी हैं।
चूंकि “आश्लेषा” तीक्ष्ण स्वभाव वाला नक्षत्र हैं, अतः सामान्यतया अधिकांश शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए इसे अनुकूल नहीं माना गया है। कुंडलिनी जागरण, तंत्र-मंत्र (सात्विक), योग, ध्यान, आत्म-चिंतन, नाग देवता की पूजा, सर्प दोष शांति, गुप्त योजनाएँ, खुफिया काम, रणनीतिक योजना, मनोवैज्ञानिक कार्य, मुकदमा दायर करना, शत्रु पर रणनीति, षड्यंत्र, विष प्रयोग, कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल), दवा उद्योग, रसायन, विष से संबंधित उपचार अर्थात जहरीले पदार्थों का नियंत्रित उपयोग, बेकार वस्तुओं का निपटान, detox, पुरानी आदतों वा जहरीले संबंधों से मुक्ति, जोखिम भरे निवेश (सावधानी से), यौन क्रिया, शोध कार्य, गुप्त व मनोवैज्ञानिक विषयों पर लेखन, सम्मोहन आदि अभिचार कर्म, मनोविज्ञान संबंधी कार्य व प्रयोग, खुदाई, भूगर्भ संबंधी कार्य, रंगाई-पुताई, उर्वरक संबंधी कार्य, युद्ध, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कुटनीतिक निर्णय, प्रेस व मीडिया आदि कार्यों के लिए आश्लेषा नक्षत्र अनुकूल परिणामों को देने वाला हैं।
यह नवीकरण, परिवर्तन, क्रोधजन्य कर्म, शत्रु दलन, प्रतिशोध, अनन्य भक्ति वाला प्रेम, प्रेमपूर्ण आलिंगन, सन्निकटता, गुप्त कर्म, स्वजनों की रक्षा, कठोर इच्छाशक्ति, दृढ़प्रतिज्ञता आदि का द्योतक है।

Table of Contents
ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Astrological Symbolic Description of Ashlesha Nakshatra in Hindi
आश्लेषा नक्षत्र के देवता – नाग वा सर्प हैं। भारतीय पौराणिकता अनुसार — यह एकल देवता नहीं, बल्कि समस्त नाग कुल या सर्प देवताओं की जाति का प्रतीक है। पौराणिक आख्यानों में नागों को कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी कद्रू के पुत्र माना जाता है। वे पाताल लोक के निवासी, गुप्त ज्ञान, कुंडलिनी शक्ति, विष-अमृत की द्वंद्वात्मकता और परिवर्तन के प्रतीक हैं।
एक आख्यान मिलता है कि— समुद्र मंथन के समय समुद्र मंथन से निकले उच्छैश्रवा घोड़े के रंग को लेकर, ऋषि कश्यप की दो पत्नियाँ — कद्रू (नागों की माता) और विनता (गरुड़ की माता) में शर्त लगी। विनता ने कहा — घोड़ा पूरी तरह सफेद है। कद्रू ने कहा — पूंँछ काली है।
कद्रू ने अपने नाग पुत्रों को घोड़े की पूंँछ पर लिपटने को कहा ताकि वह काली दिखे और विनता हार जाए और दासी बने।
कुछ नागों ने माँ की इस धोखाधड़ी में भाग लेने से इनकार कर दिया। क्रोधित कद्रू ने उन्हें शाप दे दिया कि वे जनमेजय के सर्प सत्र (नाग यज्ञ) में जलकर मरेंगे।
डर के कारण अन्य नाग माँ की आज्ञा मान गए। इस कथा से आश्लेषा की धोखा, चालाकी, लगाव, मातृ-संघर्ष और परिवर्तन वाली ऊर्जा का संकेत मिलता है।
समुद्र मंथन भी शिव के सर्प वासुकी और मंदिरांचल पर्वत की सहायता से देवताओं और दानवों द्वारा किया गया। इस मंथन से अमृत समेत 14 मत-मतांतर से 18 रत्न निकले, किन्तु पहले हलाहल विष निकला। अतः विष और अमृत दोनों नाग ऊर्जा का प्रतीक हैं। नागों के डँसने से मृत्यु संभव हैं, अतः यह भयंकर डरावना हैं। हृदय को सन्न कर दे, ऐसा इनके नाम का प्रभाव हैं। किन्तु प्रकृति के लिए ये रक्षात्मक और अमृतमय भी हैं। नाग कुंडलिनी शक्ति के भी प्रतीक है। नाग बंधन से प्राचीन काल में खजानों की सुरक्षा के प्रमाण अथवा किंवदंतियांँ प्राप्त होती हैं। पौराणिकता अनुसार श्रीहरि विष्णु के सय्या शेषनाग व भगवान रुद्र महाकाल के सर्प वासुकी दोनों का जन्म नक्षत्र अश्लेषा हैं। अतः आश्लेषा में शेषनाग से पालन, संतुलन, अधर्म के प्रति उग्रता के गुण हैं, वहीं नागराज वासुकी से भयंकर विष, प्रलयंकारी विनाश, उच्च स्तर के ध्यान की शक्ति भी हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध सुन्दर बुद्धिमत्ता, चंचलता, सौन्दर्य, कौमार्य, तीव्रता, आकर्षण, क्षणभंगुर व्यवहार आदि का कारक हैं, वही आश्लेषा में नागों के प्रभाव में यह बुद्धिमत्ता तीव्र आक्रोश, भयंकरता, जबरदस्त भावनात्मक आवेग, परिवर्तन के लिए उद्यमशीलता, रहस्यवादी स्वभाव की ओर प्रेरित होती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Ashlesha Nakshatra in Hindi
वराह मिहिर का कथन हैं कि — कृत्रिम द्रव्य, कन्द, मूल, फल, कीट, सर्प, विष, दूसरे के धन का हरण करने वाले, भूसी वाले धान्य, सभी प्रकार की औषधियों का प्रयोग करने वाले- ये सब आश्लेषा नक्षत्रगत पदार्थ हैं। आश्लेषा नक्षत्र में — शठ, धूर्त, चालाक, धोखेबाज, सर्वभक्षी अर्थात खाद्य-अखाद्य सबकुछ खाने-पीने वाला, पापी वा पाप कर्म करने वाला, उपकार को न मानने वाला कृतघ्न, ठग मति का जन्म होता हैं।
आचार्य रामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि — आश्लेषा नक्षत्र 6 तारों के योग से दृष्टिगोचर होता हैं। साँप इसके अधिष्ठाता देवता हैं; व यह आग्रायणी गोत्र का हैं। इसमें गाड़ी, तालाब आदि, उग्रता, शत्रुनाश, जहर वृद्धि संबंधी कार्य करना चाहिये । इसमें धनी, नेधावी, अधिक पुत्र वाला पैदा होता है। इस नक्षत्र में गऊ समुदाय की वृद्धि, कल्याण, घन, धान्य और पितृ सम्बन्धी कार्य करना चाहिए।
वशिष्ठ संहिता का कथन हैं कि —
“उद्धृतरिपुमदमञ्जनसाहसवाणिज्यकपटकर्म । अनलायससंग्रहणक्ष्वेडस्तेयादि सर्पभे कार्यम्॥”
अर्थात शत्रु के अभिमान वा गर्व को चूर करना, साहसिक कार्य, व्यापार (वाणिज्य), छल-कपट पूर्ण कर्म, अग्नि से संबंधित कार्य (अनल), लोहा आदि धातुओं का संग्रहण, विष प्रयोग (क्ष्वेड), चोरी करना (स्तेय) आदि कार्य आश्लेषा नक्षत्र में अनुकूल परिणाम देने वाले हैं।
अतः घनिष्ठ संपर्क, आलिंगन, मोह, ईर्ष्या, संदेह, अधिकार भाव, जबरदस्त भावनात्मक लगाव, आहत होने पर विषैली प्रतिक्रिया, कुण्डलिनी शक्ति, जीवन के गहरे परिवर्तन, रहस्यमयी भाव-भंगिमा, चतुर, गोपनीय, प्रबल अंतर्ज्ञान, दूसरों के मन पढ़ने में निपुण, बुद्धिमान, सतर्क, विश्लेषणात्मक, छल-कपट में निपुण, वाचाल, उग्र आकर्षक वाणी, तीव्र बुद्धि, शोध क्षमता, अंतर्दृष्टि, मनोवैज्ञानिक समझ, परिवर्तन और नवीनीकरण की शक्ति, धोखा देने की प्रवृत्ति, अहंकार, अविश्वास, भावनात्मक toxicity, नैतिकता की कमी, रहस्यमयी ज्ञान, कुंडलिनी जागरण, रणनीतिक सोच, चिकित्सकीय वा उपचार क्षमता, लेखन, संचार, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, तंत्र, शोध, चिकित्सा, फार्मेसी, गुप्त ज्ञान-विज्ञान, डॉक्टर, मनोचिकित्सक, फार्मास्यूटिकल्स, रसायनशास्त्री, इंजीनियर, जासूस वा इन्वेस्टिगेटर, रोमांटिक अभिनेता, योग वा कुंडलिनी ट्रेनर, वकील, राजनीतिज्ञ, रिसर्चर, लेखक, व्यापारी, दलाल वा Broker, रणनीतिकार, पेट्रोलियम, विष/रसायन संबंधित, occult sciences, हीलिंग, अस्पताल, रिसर्च लैब, फार्मेसी, गुप्त/खुफिया कार्यालय, अदालत, रासायनिक कारखाने, स्वास्थ्य विभाग, औषधि नियंत्रण, खुफिया एजेंसियाँ (Intelligence), अनुसंधान एवं विकास (R&D), पर्यावरण व रसायन विभाग, कानून व्यवस्था, चिकित्सिय अनुसंधान, फ़ॉरेंसिक विभाग, ड्रग कंट्रोल, मनोवैज्ञानिक परामर्श, गुप्तचर, शत्रु नाश, गुप्त योजनाएँ, ठुड्डी (chin), फेफड़े, खाद्य नली (esophagus), आमाशय, जिगर, पेट का मध्य भाग, अग्न्याशय (pancreas), जोड़ (joints), नाखून, कान, घुटने, पैर, पाचन संबंधी रोग यथा — अपच, गैस, ब्लोटिंग, पीलिया, किडनी से संबंधित रोग, जोड़ों का दर्द, घुटनों व पैरों में पीड़ा, हिस्टिरिया, मानसिक अशांति, dropsi (जलोदर), विषाक्तता, एलर्जी, केमिकल सेंसिटिविटी, भयंकर नशा करने वाले नशेड़ी, नशे की लत, त्वचा, श्वसन, तंत्रिका व स्नायु तंत्र संबंधी समस्याएँ, सर्पगंधा, नागकेसर, चंदन, नाग चंपा, , विष नाशक और कुंडलिनी संबंधित जड़ी-बूटियाँ, आयुर्वेदिक detox herbs आदि आश्लेषा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
लग्न में आश्लेषा नक्षत्र के फल || Result of Ashlesha Nakshatra in Ascendant / Lagna
यदि लग्न में आश्लेषा नक्षत्र हो तो जातक लम्बी गर्दन, चंचल सजल आँखें, अपनी चंचलता व फुर्ती से सबका ध्यान आकृष्ट करने वाला, आकर्षक, तत्क्षण क्रोध करने वाला, सुन्दर, मेधावी, कठिन परिस्थितियों में भी धैर्यवान, अनियंत्रित गुस्सा वाला, अन्याय के विरुद्ध अपने से अधिक शक्तिशालियों से भिड़ने में भी संकोच ना करने वाला, छल-प्रपंच में निपुण, शत्रुओं को क्षमा नहीं करने वाला, पाप कर्म में रत, अभक्ष्य का भक्षण करने वाला अर्थात प्रायः मांस-मदिरा का सेवन करने वाला, मतलबी, किसी का उपकार न मानने वाला, कृतघ्न, झूठा, धोखेबाज़, निकट संबंधों में कठोर नियंत्रण का इच्छुक, रहस्यवादी, दानशील, खर्चीला, व्यसनी, उत्पीड़क, भयानक घात करने वाला, स्पष्ट वक्ता अर्थात घुमाफिरा कर बात नहीं करने वाला, अनेक शत्रुओं से युक्त किन्तु शत्रुओं पर विजयी, लालची, अभिनय करने में माहिर, मनोरंजन करने वाला, नृत्य-संगीत एवं नाट्यकला में निपुण, अंतर्ज्ञान से युक्त, सुवक्ता, लेखनकला में सिद्धहस्त, शोध करने वाला, तीव्र लक्ष्य भेदन करने वाला, भीड़ के सम्मोहन में दक्ष, एकांत में साजिश करने वाला, प्रबल कामवासना से युक्त, आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाने वाला, कुशल राजनीतिज्ञ, दिल दहला देने वाला बदला लेने को इच्छुक, गुप्त व गोपनीय कार्यों में दक्ष, अपराधिक मानसिकता वाला, व्यापार-व्यवसाय में निपुण, कानूनी जानकार, अपना काम निकलवाने में माहिर, अति कामुक, क्रूर, भयानक होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष || Personality and Traits of Male Chart/ Horoscope born in Ashlesha Nakshatra in Hindi
आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक गौरवर्णी, चंचल चित्त व आँखों वाला, बेलन जैसा शरीर, मासूम मुखड़ा, प्रभावशाली वक्ता, अत्यंत ओजस्वी, परम प्रतापी, बाहुबल पर भरोसा करने वाला, दूसरों पर नियंत्रण करने को आतुर, उत्पीड़क, शत्रुओं को दलन करने में आनंदित होने वाला, दुर्वचन बोलने की आदत वाला, किसी का भी एहसान नहीं मानने वाला, कृतघ्न, मौकापरस्त, अपनी छवि के प्रति सतर्क, अधिक बोलने वाला, आवेशपूर्ण अभिव्यक्ति करने वाला, भेद-भाव रहित, कुशल नेतृत्वकर्ता, राजनैतिक सफलता वाला, व्यवसाय कुशल, कानूनवेत्ता, युद्ध व द्वंद्व करने में सक्षम, रहस्यमय, अपने मन का भेद छुपाने में माहिर, दूसरों का भेद निकालने वाला, प्रायः प्रबल चरित्रवान्, असमाजिक तत्वों का नेता या मुखिया, सभी प्रकार के भोज्यपदार्थों का सेवन करने वाला, स्वतंत्र विचारक, छल-कपट करने वाला, दूसरों की संपत्ति पर बलात् कब्जा करने को उद्यत, असंतोषी, अत्यंत महात्वाकांक्षी, कला व वाणिज्य के प्रति सहज रुचि वाला, दिखावटी प्रेम करने वाला, अति कामुक, व्यवसाय व निवेश से लाभार्जन करने वाला, अपनी पत्नी से मतभेद वाला होता हैं।
आदत अथवा स्वास्थ्य कारणों से नशा अथवा दवाईयों का सेवन करते रहता हैं। चिकित्सा, रसायन, विष व्यवसाय, राजनीति में उच्च स्तर का नेता, योद्धा, रक्षात्मक क्षेत्रों, गुप्तचर विभागों, पुरातत्त्व, अभिनय, रहस्यवाद आदि क्षेत्रों में सफल होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Personality and Traits of Female Chart/ Horoscope born in Ashlesha Nakshatra in Hindi
आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका सुन्दर शारीरिक गठन वाली, फिटनेस पसंद, नाज़-नखरे वाली अर्थात सदैव इठलाने वाली, अपने शरीर के अतिरिक्त किसी अन्य चीजों पर कम ध्यान देने वाली, शौकीन, शर्माने का अभिनय करने वाली, उन्मुक्त विचारों वाली, अपने कार्य क्षेत्र में विशेष सम्मानित, वाद-विवाद में निपुण, गर्दन मटका-२ कर अपनी बात कलात्मक ढंग से रखने वाली, हँसमुख, छोटे-बड़े हर प्रकार के कार्यों को करने में संकोच नहीं करने वाली, गृहकार्य में दक्ष, दूसरों के पतियों को अपने जाल में फांसने वाली, योजनाबद्ध तरीके से धीरे-धीरे प्रगतिशील, प्रेम की अभिव्यक्ति में बार-बार गले मिलने वा आलिंगन करने वाली, कामक्रीड़ा में निपुण, ईर्ष्यालु, क्रोध में भयंकर हिंसक, असत्यवादी होती हैं।
ये गृहस्थ जीवन में अपने पति के अतिरिक्त अन्य ससुराल वालों से दुःखी, अधिक खर्चीली, आर्थिक उतार-चढ़ाव देखने वाली, जिद्दी, गुस्सैल, लड़ाकू होती हैं। चिकित्सा, नर्सिंग, एयरहोस्टेस, अभिनय, नृत्य-संगीत आदि कलात्मक क्षेत्रों, शोध व अनुसंधान, उपदेशक, शिक्षक आदि क्षेत्रों में सफल होती हैं। इन्हें विवाह में ज्यादा रुचि नहीं होती, किन्तु प्रेम व वासना के प्रति विशेष आसक्ति होती हैं। आश्लेषा चतुर्थ चरण में लग्न वा चंद्र आए तो मायके में पिता व भाई के लिए व ससुराल में पति के लिए विशेष घातक सिद्ध होती हैं।
प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Ashlesha Nakshatra Subtel Result Variations in all 4 Charan (Padas)
आश्लेषा नक्षत्र प्रथम चरण (Ashlesha Nakshatra First Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से लेकर 20° अंश तक का विस्तार क्षेत्र आश्लेषा नक्षत्र प्रथम चरण हैं। नवमांश धनु ♐ होने से इसका स्वामी गुरु हैं। अतः आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण पर चन्द्र-बुध-गुरू का संयुक्त प्रभाव हैं। भावुकता, देखभाल, संवेदनशीलता, बुद्धिमत्ता, चतुराई, संचार कौशल, छलपूर्ण प्रवृत्ति, अकारण भय, विश्लेषणात्मक सोच, अनुकूलनशीलता, धर्म, नैतिकता, दार्शनिक दृष्टि, ज्ञान की खोज, दानशीलता, परोपकार, सामाजिक कल्याण, माता-पिता की सेवा, कुंडलिनी, आध्यात्मिक ऊर्जा, रोग, भयंकर शत्रु, वाद-विवाद की आदत आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण का मुख्य गुण है।
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक गौरवर्णी, चंचल, विकसित शरीर, आकर्षक शारीरिक सौष्ठव वाला, लम्बी मछली जैसी चमकदार आँखें, लम्बे नुकीले नाक, पंक्तिबद्ध सुन्दर दाँत, चौड़ा सीना, लम्बे हाथ व पैर वाला, मेहनती, लक्ष्य-उन्मुख, चतुर, दूसरों की मदद करने वाले, धनवान, प्रतिस्पर्धी स्वभाव का, नैतिक मूल्यों का धनी, विस्तृत विश्लेषणात्मक संवाद शैली वाला, उच्च ज्ञान, गुढ़ रहस्यों, दर्शन, तंत्र-मंत्र, आध्यात्मिक खोज, हिप्नोटिज्म आदि विषयों में रुचिवान्, यात्रा-प्रिय, कथा-कहानी कहने वाला, साहित्यिक अभिरुचि वाला, शोध कार्य में सफल, लेखन, मीडिया, न्यायिक विभाग, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य विभाग, रासायन शास्त्र, NGO, स्टॉक ट्रेडिंग व राजनीति से लाभान्वित होता हैं। कफ प्रकृति की व्याधियांँ, अपच, उदर से संबंधित रोगों की संभावना होती हैं। पुरुष जातक के शरीर पर ज्यादा बाल होते हैं, स्त्री जातक नरम, कोमल, चिकनाई युक्त होती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र द्वितीय चरण (Ashlesha Nakshatra Second Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 20° अंश से लेकर 23° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र आश्लेषा नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश मकर ♑ होने से इस चरण का स्वामी शनि हैं। अतः आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण पर चन्द्र-बुध-शनि का संयुक्त प्रभाव हैं। महत्वाकांक्षा, रणनीतिक वार्ता, व्यावसायिक कौशल, मोल-भाव में माहिर, धन संचय की क्षमता, स्वार्थपूर्ति, बेईमानी, भौतिकवाद, अविश्वसनीयता, सतर्कता, परिपक्व आचरण आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण के मुख्य गुण हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक स्थूल, मजबूत, भारी काया, मध्यम कद-काठी वाला, गौर या गेहुँआ रंग का, गोलाकार मुखाकृति, कम रोम वाला, चपटी अथवा गोल नाक, संदेहपूर्ण दृष्टि, दूसरों को प्रभावित करने को इच्छुक, गंभीर, कठोर भाव-भंगिमा वाला, सामान्य सुन्दर, परिश्रमी, फुर्तीला, धोखेबाज़, कुशल रणनीतिकार, दूरदर्शी, सहकर्मियों के काम में बाधक होता हैं ।
निर्माण सूक्ष्म इंजीनियरिंग व मशीनों में रुचिवान्, फार्मास्युटिकल और दवा निर्माण, सौन्दर्य प्रसाधन उद्योग, होटल, रिसॉर्ट, रेस्तरां, फर्टिलाइजर और कीटनाशक व्यवसाय, शराब व मदिरा उद्योग, हॉस्पिटालिटी और लग्जरी स्पा, यात्रा व पर्यटन व्यवसाय आदि क्षेत्रों में रुचिवान होता हैं। ये ज्यादा दिनों तक किसी के आधीन कार्य नहीं करते, चंचल, जिद्दी, उच्च बुद्धिमत्ता के कारण स्व व्यवसाय अथवा लोक कल्याणकारी कार्यों में जुड़कर स्वयं की स्वार्थपूर्ति करते रहते हैं। दूसरों के कार्यों का श्रेय लेना इन्हें अतिप्रिय हैं। यही कारण हैं कि, निकट संबंधों में इनकी ज्यादा बनती नहीं और ये दांव-पेंच करते रहते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र तृतीय चरण (Ashlesha Nakshatra Third Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 23° अंश 20′ कला से लेकर 26° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र आश्लेषा नक्षत्र का तृतीय चरण हैं। नवमांश कुंभ ♒ होने से इस चरण का स्वामी भी शनि हैं। अतः आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण पर भी चन्द्र-बुध-शनि का संयुक्त प्रभाव हैं। कुशल संचार कौशल, गुप्त स्वभाव, आवेगी विचारधारा, साहसिक त्वरित निर्णय, योजनाबद्ध कार्यशीलता, तरल आय, मैत्रीपूर्ण संबंध, प्रबल कामुकता, अनैतिक संबंध, अनियंत्रित भावुकता आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण के मुख्य गुण हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक सांवले रंग का, लम्बा सिर, सामान्य सुन्दर, अच्छी कद-काठी वाला, भारी-भरकम शरीर वाला, चपटी वा छोटी नाक वाला, चतुर, सतर्क, स्वतंत्र विचारक, सामाजिक मुद्दों में रुचिवान्, अस्थिर कार्य व्यवसाय वाला, थोड़ी-थोड़ी विभिन्न विषयों में जानकार होता है। गुप्तचर सेवाएंँ, साइबर सुरक्षा, फोरेंसिक विज्ञान, डेटा माइनिंग, फार्मास्युटिकल क्षेत्र (जहर से दवा बनाना), एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, पेट्रोलियम, रसायन, कीटनाशक, मदिरा (Liquor) का व्यवसाय, पुनर्चक्रण (Recycling), कचरा प्रबंधन, वित्तीय धोखाधड़ी (Scams), विषैले पदार्थों की तस्करी व संगठित अपराधों से धनार्जन करने को इच्छुक होता हैं।
खाद्य विषाक्तता, जोड़ों के दर्द, सायटिका, स्नायु विकार, वायु प्रकोप आदि व्याधियों की संभावना होती हैं। ये इतने अधिक शंकालु होते हैं कि, अपने जीवनसाथी पर भी पूर्णतया विश्वास नहीं करते। इन्हें सफलता कठोर श्रम से मिलती हैं, किन्तु स्थाई धनवान् होते हैं। माता के लिए कष्टकारी होता है।
आश्लेषा नक्षत्र चतुर्थ चरण (Ashlesha Nakshatra Fourth Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 26° अंश 40′ कला से लेकर 30° अंश तक का विस्तार क्षेत्र आश्लेषा नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। नवमांश मीन ♓ से इस चरण का स्वामी गुरु हैं। अतः आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्र-बुध-गुरु का संयुक्त प्रभाव हैं। यह एक विष नवमांश (शूकर नवमांश) भी हैं।
इसके साथ-साथ नक्षत्र व (कर्क) राशि के एक साथ समापन के यह अत्यंत सन्निकट वा अंतिम बिन्दु हैं; अतः आश्लेषा के गण्डान्त होने का सर्वाधिक दोष इसी चरण में लगता हैं। इस चरण में उत्पन्न जातक स्वयं के लिए, माता-पिता के लिए व कुटुंबियों के लिए भी भयंकर जान-माल का नुक़सान करने वाले हैं। धोखा, रहस्य, अनभिज्ञता, तंत्र-मंत्र, अभिचार कर्म, भावनात्मक उफान, वैचारिक विचलन, दर्शन, करुणा, प्रज्ञा विस्तार, नैतिक वा दार्शनिक द्वंद्व, आत्म-परिवर्तन, जिम्मेदारियों का निर्वहन, भावनात्मक अतिभार का शिकार होना, मानसिक भ्रम, धोखे का शिकार होना आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का मुख्य गुण हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक गहरी, भावपूर्ण, सहज, सम्मोहक दृष्टि वाला, गौरवर्णी, आकर्षक, पतले होंठ, लंबी ठोड़ी, कोमल, नरम समग्र रुप वाला, चर्बीयुक्त मध्यम शरीर, भारी चौड़ी छाती, बड़ा पेट, भारी जांघें, पतले घुटने और टखने, कोमल पैर, अत्यधिक करुणामय, ग़लती होने पर स्वयं की ग़लती मानने वाला, एकांतप्रिय, कला, संगीत, लेखन, रचनात्मक गतिविधियों में संलिप्त, आध्यात्म, सेवा कार्य, परोपकार में रुचिवान्, उच्च शिक्षित, समावेशी होता हैं।
चर्बी जनित व चमड़ी में रोग की संभावना होती हैं। माता से विशेष स्नेह रखते हैं। पिता के लिए कष्टकारी होते हैं। धन-धान्य से पूर्ण, पराक्रमी, आवश्यक खर्च करने वाले होते हैं। प्रेम संबंधों को ठीक से चलाना मुश्किल होता हैं। साधारणतया ये अच्छे व्यवहार करने वाले, ध्यान रखने वाले, वात्सल्यपूर्ण प्रेम करने वाले होते हैं; किन्तु इनके ठंडे व्यवहार के कारण इनकी प्रेमिका वा पत्नी इनसे असंतुष्ट रहती हैं। स्वयं को विशेष सतर्क सभझने के बावजूद ये दूसरों की बातों में आसानी से आ जाते हैं, फलतः इनकी क्षमता व संसाधनों का अन्य लोग नाजायज़ फायदा उठाते हैं। स्त्री जातकों पर चारित्रिक लांछन लगाए जाने की संभावना होती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Result of various Planets situated in different Charan/ Padas of Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Ashlesha Nakshatra in Hindi
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक अहंकारी, स्वार्थी, चतुराई से हठ करने वाला, लोभी, व्यापार-व्यवसाय में स्वप्रयत्नों से सफल, पर्यटन प्रेमी, धार्मिक यात्राओं में रुचिवान्, बार-बार दुर्घटना ग्रस्त, हृदय, मस्तक, पैर की पिंडलियों व कुल्हों में चोट-चपेट की संभावना वाला, चापलूसी से काम निकालने वाला, ईर्ष्यालु, तर्क-वितर्क में निपुण, पीठ पर वार करने वाला, दीर्घायु होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक दीर्घकालिक रोग व व्याधियों से पीड़ित, पिता व विरासत के सुख से वंचित, चिड़चिड़ा, हिंसक वृत्ति का, छल-प्रपंच करने वाला, कोई भी बात गुप्त रखने में असमर्थ, विश्वासघाती, स्वयं निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करने वाला, जीवनसाथी से धोखा खाने वाला, बार-बार मानहानि का शिकार होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक जातक आवेगी, मानसिक रूप से अस्थिर, अधिक भौतिकतावादी, सहोदरों से मतभेद वाला, आर्थिक उतार-चढ़ाव से विचलित, परदेस में सफल, साधारण नौकरी या छोटे व्यापार में लगनशील, बार-बार कार्यक्षेत्र बदलने को विवश, शारीरिक रुप से कमजोर व संक्रमण वाले रोगों से पीड़ित होता है। जीवनसाथी के नीच जनों की संगति में जातक को धोखा देने की संभावना होती है।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक चंचल, स्फूर्तिवान, अनेक जनों का मित्र, धर्मपरायण, बलिष्ठ, कार्यकुशल, लेखन, संचार, साहित्य आदि में कुशल, आलस्यपूर्ण आचरण वाला, कायर, डरपोक, दूसरों पर आश्रित, पिता के लिए कष्टकारी, भोग-विलास के प्रति आसक्त, मधुमेह, चर्बी व चमड़े से संबंधित बिमारियांँ होती है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Sun located in Ashlesha Nakshatra in Hindi
आश्लेषा नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक व्यवहारिक, मिलनसार, पद-प्रतिष्ठा से युक्त, कार्यकुशल, संबंधों में जिम्मेदार, परोपकारी, दूसरों को सहारा देने वाला, अनेक जनों के आजीविका के लिए जिम्मेदार होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक चिड़चिड़ा, समस्याओं से उकताया हुआ, जल्दीबाज़, अपने कुटुम्बियों का द्रोही, अपशब्दों का बहुलता से प्रयोग करने वाला, प्रबल उत्पीड़क, लड़ाई-झगड़े, कोर्ट-कचहरी, मुकदमेबाजी से पीड़ित, Toxic Nature का होता हैं। जहरीले पशुओं से आघात की संभावना होती हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक कष्ट वा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्यवान, सीमित संसाधनों का उपभोगी, शिक्षा के बल पर आजीविका वाला, सरकार द्वारा सहायता प्राप्त, प्रबल जीवटता वाला, जीवन के उत्तरार्ध में धनवान् होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक निर्धन, पाप कर्मों से युक्त, विभिन्न दुर्घटनाओं व ऑटोइम्यून बिमारियों से पीड़ित, अपने कार्य के प्रति समर्पित, कम मित्रों वाला, संबंधों में टकराव से दुःखी होता है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत विद्रोही, प्रभुत्ववादी, अविश्वसनीय, स्वार्थी, कलुषित विचारों वाला, ईर्ष्यालु, गाली-गलौच करने वाला, कूटनीति (Diplomacy), फिल्म निर्माण, केमिकल इंडस्ट्री, और जासूसी कार्यों में निपुण होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक अंतर्मुखी, संशयी, मलिन वेषधारी, दिखावटी आध्यात्मिक, ध्यान, दर्शनशास्त्र, प्राचीन इतिहास, और एकांत यात्राओं में रुचिवान्, शोधकर्ता, सर्जन, आध्यात्मिक गुरु, डेटा माइनिंग, या गुप्त सेवाओं में प्रतिष्ठित होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra): आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सुन्दर, गौरवर्णी, बड़ी व उन्नत ललाट, बड़ी सजल आँखों वाला, उन्नतिशील, शास्त्रज्ञ, गुढ़ व गोपनीय ज्ञान के प्रति उन्मुख, शोध व अनुसंधान में रुचिवान, परोपकारी, सत्यवादी, शिक्षक वा मार्गदर्शक, जन कल्याणकारी, जन प्रतिनिधि, अधिनायक होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक चतुर, महत्वाकांक्षी, सौदेबाज, चालाक, कंजूस, व्यवहार कुशल, अच्छी पद-प्रतिष्ठा वाला, सामाजिक रूप से सक्रिय, राजनीति में लोकप्रिय, अआलस्यपूर्ण, अपराधिक मानसिकता वाला, कुशल रणनीतिकार, धन संग्रह करने वाला, व्यवसाय, कला, निर्माण, बैंकिंग व फाइनेंस आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मध्यम धुम्रवर्णी आँखों वाला, गंभीर दृष्टि, आवेगी, लीक से हटकर सोचने वाला, मानवतावादी, प्रबल षड्यंत्रकारी, ध्यान, त्राटक, मनोवैज्ञानिक प्रयोगों में सफल, आलोचना के विरुद्ध अत्यंत संवेदनशील, कुटुम्बियों से मतभेद वाला, अस्थिर मैत्री संबंधों वाला, अति कामुक, अवैध संबंधों में संलिप्त रहता है। शोध (Research), ज्योतिष, विज्ञान, तकनीक और गुप्तचर (Detective) कार्यों में सफल होते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक सुकोमल, शालिन चेहरे वाला, पुष्ट अंग-प्रत्यंग, भावुक, संवेदनशील, दयालु, अनैतिक, कलात्मक, भ्रमित, आदतन धोखेबाज़, व्यसनों का शिकार होता है। चिकित्सा, फार्मेसी, आयात-निर्यात, कला, संगीत और आध्यात्मिक संस्थाओं में इनकी रुचि होती है। इन्हें शोर-शराबे और कठोर शारीरिक श्रम वाले कामों से अरुचि होती है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Moon located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक तेजस्वी, ऊपर से कठोर व्यक्तित्व वाला, सरकारी वा निर्माण कार्य में, संबंधों में जागरुक व जिम्मेदार, न्यायप्रिय, परिवार में सबसे जटिल संबंधों वखला, माता से अत्यधिक लगाव वाला, सन्मार्ग पर चलने वाला, त्यागी होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक कलहप्रिय, मानसिक चिंताओं से पीड़ित, मन के वशीभूत नीच कर्म करने वाला, अपने सगे-संबंधियों की परेशानी बढ़ाने वाला, निकट सम्मानजनक रिश्तों में अवैध संबंधों वाला होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक तीक्ष्णभाषी, कटु आलोचक, धन-धान्य से युक्त, अपनी संपत्तियों का प्रदर्शन करने वाला, साहित्य-संगीत आदि विभिन्न कलाओं में रुचि रखने वाला, दवाओं वा रसायनों का व्यवसाई होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक धार्मिक, विद्वान, धन और वित्तीय संग्रह में निपुण, सुखी वैवाहिक जीवन वाला, अचानक धन लाभ वाला अथवा दूसरों की विरासत से लाभान्वित होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर, कलात्मक, दूसरों को जाल में फांसने वाला, मतलबी, अपना काम निकालने के लिए किसी भी हद तक जानें वाला, अत्यधिक कामुकता वश रिश्तों में विश्वासघाती, कफ जनित रोग वा यौन रोग से पीड़ित होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक चिंतित, गंभीर, गंभीर रोगों से पीड़ित, दीर्घायु, धीरे-धीरे कार्य करने वाला, कुशल कारीगर वा शिल्पी होता हैं। विवाह में देरी या जीवनसाथी के साथ उम्र का फासला हो सकता है। संबंधों में शीतलता होती है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक दूसरों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाला, मतलबी, परिजनों से मतभेद वाला, धन का दुरूपयोगी, गुप्त कार्यों में संलग्न, अत्यधिक आर्थिक उतार-चढ़ाव वाला, अज्ञात भय से पीड़ित, मनोरोगी, संतानोत्पत्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जीवनसाथी के निकट संबंधियों से संसर्ग करने वाला होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक भावनात्मक उथल-पुथल वाला, परिजनों से दुःखी, लोभ से ग्रसित, अपने किए कार्य पर पछताने वाला, रिसर्च स्कॉलर, आध्यात्मिक हीलर, डेटा एनालिटिक्स, योग प्रशिक्षक आदि कार्यों में संलग्न होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक सुगठित शरीर वाला, गौर वा रक्तिम वर्णी, साहसी, निडर, परदेस में ख्यातिप्राप्त, गुस्सैल, वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़े करने को उद्यत, अस्त्र-शस्त्र व अग्नि से दुर्घटनाग्रस्त किन्तु दीर्घायु, सीना, कमर, पीठ पर चोट खाने वाला, पत्नी से मतभेद वाला, अनैतिक संबंधों में लिप्त होता है। कानून, पुलिस, सेना में उच्च पद, या शारीरिक शिक्षा (Physical Education) में इनकी रुचि होती है। इन्हें आलस्य और झूठ से सख्त अरुचि होती है।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक लघु अथवा मध्यम आकार का, अत्यंत ऊर्जावान, शक्तिशाली, भौतिक कार्य व संपत्ति के लिए नीच कर्म करने से भी ना कतराने वाला, हठी, दूसरों के अधिकार छीनने वाला, उत्पीड़क होता है। प्रशासनिक सेवाएंँ, बड़े कॉर्पोरेट घराने, जमीन से जुड़े व्यवसाय या निर्माण में ये बहुत सफल होते हैं। इन्हें बेकार की बातों और समय बर्बाद करने वालों से अरुचि होती है। नीच राशि में होकर भी उच्च नवमांश में स्थित होने से ये कठिन से कठिन परिस्थिति में भी रास्ता निकाल लेते हैं। इनमें नेतृत्व करने की जबरदस्त क्षमता होती है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक दुबला-पतला छरहरे बदन का, क्रूर, निर्दयी, चुस्त-दुरुस्त, कटाक्ष वा व्यंग्यात्मक शैली में बोलने वाला, सामाजिक बदलाव को उत्सुक, परंपराओं का विरोधी, तुनकमिजाज, हत्यारे प्रवृत्ति के होते हैं। इंजीनियरिंग, मैकेनिकल कार्य, हथियार या औजारों से जुड़े काम, और तकनीकी क्षेत्र में इनकी रुचि होती है। इन्हें गुलामी या किसी के दबाव में काम करने से अरुचि होती है।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक ऊपर-ऊपर से शांत दिखने वाले, अधिक शारीरिक श्रम करने में असक्षम, असुरक्षा की भावना से ग्रसित, अपनी पूर्ण क्षमताओं का उपयोग करने में संकोची, धर्म शास्त्रों को अपने स्वार्थ के अनुकूल तोड़-मरोड़ कर बतलाने वाला, अपने अधीनस्थ कर्मचारियों वा सेवकों के साथ संसर्ग करने वाला, जल से जुड़े कार्य, समुद्री सेना (Navy), फार्मेसी, योग या आध्यात्मिक गुरु के रूप में कार्य करने में रुचिवान् होता है। इन्हें हिंसा और अत्यधिक भागदौड़ वाले कामों से अरुचि होती है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mars located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक साहसी, सत्ता लोलुप, प्रभावशाली लोगों का नौकर, समाज में नशामुक्ति के लिए संघर्षशील, कर विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सुरक्षा विभाग जैसे कार्यों क्षेत्रों में अपनी सेवा देने वाला होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक क्रोधी किन्तु सूझबूझ का धनी, निवेश से लाभ अर्जित करने वाला, माता के सहयोग से शिक्षित व सफल, जल, दुग्ध, डेयरी प्रोडक्ट्स वा औषधि आदि क्षेत्रों में सफल होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक जातक तेज़ किन्तु जल्दबाज़, कटु व्यंग्यात्मक शैली में बात करने वाला, अनेक शत्रुओं से युक्त, लालची, परदेसवासी, निम्नस्तर के नौकरी-व्यवसाय से आजीविका चलाने वाला होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक कांट-छांट करने में माहिर, अपनी इच्छानुसार जीवन जीने वाला, अन्य पर नियंत्रणकारी, शासन-प्रशासन अथवा राजनैतिक क्षेत्रों से धनार्जन करने वाला होता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक विलासी, सजने-संवरने का शौकीन, अनेक प्रेम संबंधों में लीन, गृहक्लेश से पीड़ित, अति कामुक, नीच स्त्रियों की संगति वाला, चर्म वा यौनरोगी होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक अधिक श्रम व जोखिम भरे काम करने वाला, बदले की भावना से ग्रस्त, नीरस संबंधों वाला, चोट-चपेट व दुर्घटनाओं से युक्त, प्रेमी वा जीवनसाथी से धोखा खाने की संभावना होती हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक निडर, प्रभाव जमाने में निपुण, दूसरों का अधिकार छीनने वाला, जोखिम भरे निर्णय लेने वाला, उच्च तकनीकी शिक्षा वाला, अस्त्र-शस्त्र विशेषज्ञ होता हैं। रक्त, त्वचा, नाखून व जननांगों से संबंधित रोग होते हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक अनैतिक आचरण वाला, उग्र देवी-देवताओं का पूजक, शल्यचिकित्सक, मशीनों व औजारों के कल-पुर्जों का जानकार, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, शरीर पर चोट के निशान, गुप्तरोगी होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक सौम्य, आकर्षक, सुगठित शरीर वाला, बड़े नेत्र, गरिमामय व्यक्तित्व, विद्वान, सुवक्ता, चतुर, आय के अनेक स्रोतों वाला, धनी, दूरदर्शी, नई चीजें सीखने की अद्भुत क्षमता वाला, अपने कार्यों में दक्ष, सहचरों को धोखा देने वाला, षड्यंत्रकारी होता हैं। इन्हें धर्म-शास्त्र और इतिहास में गहरी रुचि होती है। शिक्षण कार्य, लेखन, ज्योतिष, उपदेशक, विष व दवा व्यवसाय आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक महत्वाकांक्षी, सौदेबाज, चतुर, व्यावहारिक लेकिन कठोर, नपी-तुली शब्दों में संवाद करने वाला, आकर्षक व्यक्तित्व, सामाजिक कुशलता, रचनात्मक बुद्धि, लेखन, डिजाइन, कला, भारी धातु, कोयला, रसायन वा पेट्रोलियम से संबंधित व्यापार में अभिरुचि वाला, धन संचय में निपुण, शांतिपूर्ण सौदेबाजी में माहिर, शत्रुओं पर घात लगाकर वार करने वाला, अति कामुक, कंजूस होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक पर्यटन प्रेमी, घुमक्कड़, भावनात्मक रूप से बलवान, संचार कुशल, अनेक मित्रों वाला, वस्त्र, सौन्दर्य प्रसाधन, स्टेशनरी, सजावटी वस्तुओं, रासायनिक हथियारों, दवा व कीटनाशक आदि का व्यवसायी, गुप्तचर, वित्त, वायुयान वा वाणिज्यिक विभागों में रुचिवान् व सम्मानित होता हैं। कोई-कोई जातक अभिनेता होता हैं। श्वसन व स्नायु तंत्र से संबंधित पीड़ा होने की संभावना होती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक सुशिक्षित, विज्ञान व प्रौद्योगिकी में रुचिवान्, कला व संस्कृति का पोषक, रासायनिक अनुप्रयोगों, अभिचार कर्म, जलीय व्यवसाय, समुद्री व्यवसाय, घड़ीसाज़ी, स्वर्ण आदि बहुमूल्य धातुओं के शोधन, आयुर्वेद वा चिकित्सा के क्षेत्र में रुचिवान् व सम्मानित होता है। ये अनेकों स्त्रियों से संसर्ग में लिप्त रहते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mercury located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कल्पनाशील, भावुक, मृदुभाषी, कविता, साहित्य, पत्रकारिता में रुचिवान्, जनसंपर्क, रुई वा वस्त्र-उद्योग, फल-फूल का व्यवसाय करने वाला होता हैं। जीवनसाथी से मित्रवत्त व्यवहार करता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक उच्च बौद्धिक क्षमता वाला, तर्क-वितर्क में निपुण, हाज़िरजवाब, तीखा बोलने वाला, अनेक अनुयायियों वाला, लोभी, इंजीनियरिंग, रक्षा व सैन्य विभाग, अग्नि विभाग में सफल होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक अति बुद्धिमान, शिक्षा वा शैक्षणिक संस्थानों का प्रमुख, प्रयोगात्मक लेख लिखने वाला, जनजागृति करने वाला, गणितज्ञ, विज्ञान व प्रौद्योगिकी में रुचिवान्, कुशल शोधकर्ता, सम्मानित कलाकार होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक एकांतप्रिय, अफवाह फ़ैलाने वाला, दंगा भड़काने का इच्छुक, क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी, तकनीकी कार्य, मुद्रण (Printing), संपादन, या शोध (Research) के कार्यों में सफल होता हैं। नसों की समस्या या त्वचा संबंधी रोग होने की संभावना रहती है। जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता मिलती है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक चतुर, अत्यंत आधुनिक, तेज-तर्रार व कूटनीतिक विचारधारा वाला, अवसरवादी, झूठा, अजीब मार्केटिंग स्कील वाला, स्टॉक मार्केट, जुआ सट्टा, नई तकनीक, और सोशल मीडिया में गहरी रुचि वाला, सॉफ्टवेयर डेवलपर, शेयर ब्रोकर, डिप्लोमैट, एडवर्टाइजिंग आदि क्षेत्रों में सफल होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक तर्कशील, अंतर्मुखी, हठयोग में सफल, गूढ़ व अमूर्त विषयों की ओर झुकाव वाला, प्राचीन लिपियाँ, ज्योतिष, ध्यान, और गणित के गूढ़ सिद्धांतों का व्याख्याता होता है। संवाद में कमी से मतिभ्रम, नसों में कमजोरी व संबंधों में उदासीन होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक विद्वानों में आदरणीय, अनेक विषयों का ज्ञाता, अनेक भाषाओं में रुचि वाला, दान-पुण्य करने वाला, राजकार्य, कुटनीति, शिक्षण वा प्रशिक्षण संस्थान से लाभी, उच्च आदर्श स्थापित करने वाला प्रेमी, भूमि-भवन से सुखी, कामवासना में लिप्त, अहंकारी, अपने धन व मान का दिखावा करने वाला होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक गंभीर चिंतन वाला, समाजसेवा की ओर उन्मुख, गणित व तर्क में निपुण, परिपक्व ज्ञानी, दलाली, नकली दस्तावेज, व्यापारिक नियमों के उल्लंघन, राजनैतिक सांठ-गांठ से धनार्जन करने वाला, प्रारंभिक शिक्षा में व्यवधान वाला, अपने से बड़ी उम्र की स्त्रियों से संसर्ग करने वाला, लम्पट होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक चंचल, अत्यधिक आकर्षक, मिलनसार, शांत, मददगार, अस्थिर व्यवसाय अथवा नौकरी करने चवाला, विरासत से लाभी, अपनी क्षमताओं का दुरुपयोग करने वाला, स्वार्थी, हेरफेर करने वाला, नियंत्रणकारी, कार्पोरेट, राजनीति, मार्केटिंग, कानूनी क्षेत्र, वेबसाइट्स व डेटा आदि जैसे कार्य क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक दार्शनिक, वर्चस्ववादी, तार्किक वासना, परिमार्जित विषाक्तता वाला, मौन क्रोधी, वैचारिक श्रेष्ठता वाला, संन्यासी स्वभाव का, छद्म तानाशाही प्रवृत्ति का, अपने कटु व्यवहार को उच्च दर्शन के जामा पहनाने वाला, अनुशासन के नाम पर नियंत्रणकारी, अनेक अनुयायियों वाला, नैतिकता का पुनर्लेखन करने वाला, धर्मशास्त्रों पर टीका लिखने वाला, धनवान्, समावेशी लेखन करने वाला होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Jupiter located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत प्रभावशाली, सरकारी तंत्र में पकड़ वाला, सफल राजनीतिज्ञ, उच्च शैक्षणिक संस्थानों का प्रमुख, समाज के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करने की क्षमता वाला, अत्यंत समृद्धशाली होता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत दयालु, शांत, विद्वान, उच्च कल्पनाशील, सुन्दर जीवनसाथी व होनहार संततिवान्, शिक्षा, औषधि, संपादन या जल से संबंधित व्यापार में सफल, उच्च कोटि का सलाहकार होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक निडर, धर्मात्मा, अन्याय के विरुद्ध मजबूत आवाज़ उठाने वाला, जीवनसाथी के प्रति अत्यंत सुरक्षात्मक, चिकित्सा, सेना, पुलिस अथवा न्यायिक विभागों में उच्च पदासीन होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक कुशल गणक वा ज्योतिषी, तर्कशास्त्र, व्यापार-व्यवसाय में अच्छी पकड़ वाला, बैंकिंग, सीए (CA), प्रोफेसर, डेटा साइंस, संचार क्षेत्रों में सफल, विरासतों का लाभी, उच्च पदासीन लोगों का सलाहकार, बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अनेक भाषाओं का जानकार, तंत्र-मंत्र में विश्वासी, कला व सौन्दर्य के प्रति आकर्षित, विलासितापूर्ण जीवन जीने वाला, , मनोरंजन, डिजाइनिंग, आयात-निर्यात से संबंधित कार्य व्यवसाय में लाभी, विदेश यात्रा व विलासी वाहनों से सुखी होता है। प्रेम विवाह की प्रबल संभावना होती हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक परिपक्व ज्ञानी, एकांतप्रिय, अपने नियमों का पक्का दूरदर्शी होता हैं। कानून (जज), शोध (Research), पुरानी वस्तुओं का व्यापार, रक्षा विशेषज्ञ आदि क्षेत्रों में सम्मानित होता है। जीवन के उत्तरार्ध में बहुत बड़ी सफलता और प्रसिद्धि मिलने की संभावना होती हैं। वैराग्य की भावना भी जाग्रत हो सकती है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक कोमल हृदयी, धर्मात्मा, जन कल्याणकारी कार्यों में संलग्न, माता-पिता का सेवक, लोभी, नाम कमाने को महात्वाकांक्षी, पैतृक विरासत पर लोन लेकर व्यवसाय करने वाला, सांस्कृतिक उपक्रमों का आयोजक, तंत्र-मंत्र जैसे गूढ़ विद्याओं में रुचिवान्, अहंकारी जीवनसाथी से पीड़ित होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक चतुर, अतिवादी, अल्प शिक्षित किन्तु अनेक विद्याओं का ज्ञाता, अनेक जनों का स्वामी वा मुखिया, क्रूर वा हिंसक देवी-देवताओं का पूजक, खर्चीला, प्रेम संबंधों में असफल, जीवनसाथी से वियोग वा तलाक होने की संभावना होती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक प्रबल आकर्षक, सौंदर्यपरक शिकारी, चतुर, सुवक्ता, गोल-मटोल बातें करने वाला, सुंदर वस्तुओं, विलासिता और शरीर के सौंदर्य के प्रति विशेष संवेदनशील, फिल्म वा विज्ञापन निर्देशक, लक्जरी ब्रांड निर्माता/फैशन डिजाइनर, कला संग्राहक या गैलरी मालिक, आर्किटेक्ट वा इंटिरियर डिजाइनर, अंदरुनी क्रोधी, कामवासना से युक्त, पत्नी से सदैव मतभेद वाला होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक शठ, जिद्दी, भौतिकतावादी, काम के प्रति जुनूनी, हीन मानसिकता वाला, विषाक्त संबंधों वाला, व्यवसाय करने में चतुर, जीवनसाथी पर घोर नियंत्रण करने को इच्छुक, हिंसक रति करने वाला, उत्पीड़न करके प्रसन्न होता है। निर्देशक, फिल्म निर्माता, लक्जरी रियल एस्टेट या उच्च-स्तरीय आर्ट डीलर, राजनीतिक रणनीतिकार, कॉर्पोरेट टाइकून, विष व्यापारी होता हैं। इनके लिए सामाजिक संबंध भी एक निवेश की तरह है, संबंधों में जब-तक भौतिक लाभ हो, तभी तक टिकते हैं। व्यक्तिगत जीवन में इनकी समझदारी व लक्ष्यभेदी व्यवहार सराही जाती है किन्तु इनके जीवन में निजी रुप से संबंध स्थापित करना ख़तरनाक होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra): आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक सुन्दर व रचनात्मक, अल्प शिक्षित किन्तु गहन अनुभवी, अनेकों जान-पहचान वाला, कम उम्र में ही शील भंग करने वाला, अति कामुक, दिखावटी परोपकारी, अनेक भाषाओं व विद्याओं का जानकार, आय के अनेक स्रोतों वाला, दान-पुण्य व कलात्मक प्रयोजनों का आयोजक, मीडिया, मनोरंजन, पीआर, इमेज कंसल्टेंसी, ज्योतिष, न्यायिक विभाग, ग्राम प्रधान वा नगर का विकास अधिकारी होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक उच्च शिक्षित, आकर्षक, धर्मावलंबी, गृहकार्य में दक्ष, पद-प्रतिष्ठा वाला, आस्तिक, लोभी, व्याभिचारी, राजनीति वा शासन-प्रशासन में उच्चस्तरीय अधिकारी, साग-सब्जी, मछली वा कच्चे सामानों का व्यापारी होता हैं। समाज में प्रभावशाली, आदरणीय, सम्मानित होता हैं किन्तु पत्नी व संतानों की दृष्टि में सदैव दोषी रहता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Venus located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत सुंदर, कोमल हृदय, भावुक व्यक्तित्व वाला, छद्म प्रेम करने की कलाओं में माहिर, लुभावना होता हैं। अभिनय, काव्य, या तरल पदार्थों (जैसे इत्र, पेय पदार्थ) के व्यवसाय में बड़ी सफलता मिलती है। अपनी सफलताओं के लिए स्त्रियों का सीढ़ियों की तरह इस्तेमाल करने वाला होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक कला व संस्कृति के प्रति उग्रता पूर्वक रक्षक, अपने कार्यों में निपुण, फैशन डिजाइनिंग, आभूषण निर्माण, होटल मैनेजमेंट, सौंदर्य प्रसाधन आदि क्षेत्रों में सफल, अति कामुकता के कारण नीच कर्मों में रत, समाज में बदनाम होता है। स्त्री जातकों में भ्रूण विकास बाधित होती हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक मर्यादित, चरित्रवान, गुणी, धर्म-कर्म में अनुरक्त, शिक्षण, परामर्श, उच्च कोटि के कलाकार, या मूल्यवान रत्नों के व्यापारी होता हैं। जीवनसाथी कुलीन व संतान ज्ञानवान् होती हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक अंतर्मुखी, व्यावहारिक, गंभीर स्वभावी, नीरस, प्रेम और सुखों के प्रति ठंडे दृष्टिकोण वाला होता है। प्रेम संबंधों में निराशा या विवाह में विलंब की संभावना रहती है। जीवनसाथी उम्र में बड़ा या बहुत अधिक जिम्मेदार स्वभाव का हो सकता है। वास्तुकला, स्थापत्य कला, पेट्रोकेमिकल्स, Antiques से जुड़े कार्य-व्यवसाय में लाभी, धन संचय में कठिनाई वाला होता है। प्रेम में एक बार बड़ा धोखा मिलने की संभावना रहती है।
राहु की दृष्टि हो तो जातक मोहक सुन्दर, बड़े केशों वाला, सीधे दन्त व लम्बे मुखड़े वाला, विचित्र वस्त्रों व वेषभूषा वाला, परिवार से अलग, अनेक क्षणभंगुर रिश्तों में लिप्त, विश्वासघात से दुःखी, अनेक महात्वाकांक्षाओं के कारण वैवाहिक जीवन असंतोषपूर्ण होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक विलासी, आवेगपूर्ण निर्णय लेने वाला, यात्राप्रिय, पारिवारिक विरासतों का नाशक, अनेक स्त्रियों से लगाव रखने वाला, कामक्रीड़ा में निपुण, एक से अधिक विवाह की संभावना वाला, अनेक कष्टों में जीवन व्यतीत करने को विवश होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक अस्थिर मति, ऊपर-ऊपर से शांत व कोमल दिखने वाला, अंदर से विध्वंसक क्रोधी, दूसरों के मन में ज़हर घोलने वाला, विद्वान, कुटिल बुद्धिमत्ता वाला, दूसरों के भावनाओं से खेलने वाला, कृतघ्न होता हैं। मनोवैज्ञानिक खेल, विवाद और राजनीति, मठ व आश्रम में कार्यकर्ता, कानून व न्याय विभाग, प्रशासनिक विभाग, गुप्त विद्याएँ या जासूसी, वर्चस्व, विवादित क्षेत्रों के मध्यस्थ दलाली से लाभी, मुनाफ़ाख़ोर, प्रोपोगेंडा मशीनरी, केमिकल या फार्मास्युटिकल टाइकून, क्रिएटिव कंसल्टेंसी आदि के क्षेत्र में सफल होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक धैर्यवान, गहरी समझ रखने वाला, समाज का सम्मोहक, अटल जिद्दी, रहस्यमय, अंतर्मुखी, निर्दयी, धनवान्, कृतघ्न, मनोविज्ञान, रणनीतिक नियोजन, संपत्ति का संचय, इतिहासविद्, रियल एस्टेट माफिया वा बिल्डर, अंडरग्राउंड नेटवर्क, माइनिंग, टैक्स और ऑडिट विशेषज्ञ, आर्काइविस्ट, डेटा साइंस आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक सतही कोमलता, बौद्धिक क्रूरता वाला, आवेगी, सिद्धांत विहीन, अनैतिक कार्यों में संलग्न, अफवाह फ़ैलाने में रुचिवान्, दलाल, नीति-नियमों में मिलावट करने वाले, डिजिटल वर्ल्ड, नेटवर्किंग, साइकोलॉजिकल वॉरफेयर स्पेशलिस्ट, शेयर बाजार, सट्टा, विवादास्पद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, भ्रम फैलाने वाले लेखक वा पत्रकारिता के क्षेत्र में रुचिवान् होता हैं। गलत आचरण के कारण वैवाहिक जीवन असंतोषपूर्ण होता हैं। तलाक की संभावना बनती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक ऊपर से कोमल अंदर से कठोर, निर्मम, एकांतप्रिय, अतीन्द्रिय, प्रबल अंतर्ज्ञानी, विरासतों का नाश करने वाला, गूढ़ विधाओं में रुचिवान्, मानव व्यवहार का विश्लेषण, भावनात्मक लेखन, रणनीतिक सलाहकार, मनोचिकित्सक या हिप्नोटिस्ट, समुद्री या तरल पदार्थों का व्यापार, धार्मिक या आध्यात्मिक संस्था का प्रमुख, खुफिया विभाग आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Saturn located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक स्वाभिमानी किन्तु उपेक्षित महसूस करने वाला, रोजी-रोटी से संबंधित कर्मों में व्यवधान से दुःखी, विवाह से वंचित अथवा संबंध विच्छेद से वियोगी, पिता के स्वास्थ्य व पैतृक संपत्ति में विवाद से पीड़ित, जीवन के मध्य भाग में मान-हानि का भय रहता है।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मानसिक रूप से अशांत, निकट संबंधों में शंकालु, मातृस्नेह से वंचित, विवाह में विलम्ब व पत्नी के वियोग से दुःखी, बार-बार नौकरी बदलने से आर्थिक तंगी का सामना करता है। जुकाम, कफ या छाती से संबंधित रोग से पीड़ित, जीवन में कई बार आत्महत्या की ओर प्रेरित होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक साहसी, उतावला, कृशकाय, हिंसक, समाज द्वारा प्रताड़ित होता हैं। विद्रोह व बदले की भावना से ग्रस्त, निकट संबंधों में तनाव वाला, दुर्घटना, ऑपरेशन या रक्त संबंधी विकार के योग से पीड़ित, गुप्त शत्रुओं से लगातार भय बना रहता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक अहंकारी, चतुर, कूटनीतिक, घुमावदार बातें करने वाला, घुमक्कड़, गणनात्मक (Calculative) बुद्धि का स्वामी होता हैं। संबंधों को भी एक सौदा की तरह देखने की प्रवृत्ति होती हैं; फलतः वैवाहिक जीवन सामान्य रहता है, लेकिन भावनाओं की कमी होती है। लेखन, पत्रकारिता, कानून, ज्योतिष, व्यापार, कुशल कूटनीतिज्ञ वा वकील जैसे पेशा में सम्मानित होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, न्यायप्रिय, दार्शनिक विचारों वाला, कृषि, ख़ानदानी व्यवसाय, न्यायिक विभाग, शैक्षणिक विभाग, सलाहकार, धार्मिक संस्थानों आदि क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन, धन संग्रह में सफल होता हैं। विवाह में देरी हो सकती है, लेकिन संबंध स्थायी और सम्मानजनक होता है। जीवनसाथी समझदार मिलता है। उम्र बढ़ने के साथ भाग्योदय और आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते खुलते जाता हैं। पैतृक संपत्ति का लाभ मिलता है।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कृशकाय, शांत, गंभीर, अवैध संबंधों में लिप्त, कला, सौंदर्य प्रसाधन, आयात-निर्यात, स्त्रियों के माध्यम से व्यापार में लाभ मिलने के योग बनते हैं। प्रेम में संघर्ष और कई बार एकतरफा प्रेम की स्थिति बनती है। वैवाहिक जीवन में शांति के लिए अनेक समझौते करने पड़ते हैं। वाहन सुख मिलता है लेकिन गुप्त रोगों व मूत्र संबंधी समस्याओं के प्रति सावधान रहना चाहिए।
राहु की दृष्टि हो तो जातक शांत व्यवहारी, कार्यकुशल, कारीगरी वा सूक्ष्म नक्काशी करने वाला, भक्ष्याभक्ष्य का सेवन करने वाला, रिश्तों में कठोर नियंत्रण चाहने वाला, हिंसक, तत्वज्ञानी होता है।
केतु की दृष्टि हो तो जातक छिन्द्रान्वेषी, दूसरों का परिहास करने वाला, लोक व्यवहार में निपुण, सूक्ष्म कुटनीतिक दृष्टिकोण वाला, संकट प्रबंधन में माहिर, वायु प्रकोप से तंत्रिका, स्नायु व त्वचा प्रभावित होने की संभावना होती है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक क्रूर, महात्वाकांक्षी, पराक्रमी, अजेय तर्कशक्ति वाला, अत्यधिक साहसी, दोहरे चरित्र वाला, वैश्विक राजनीति, दार्शनिक विवाद, हथियार व विस्फोटक, अपरंपरागत जीवनशैली वाला, क़ानून का जानकार, इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म, विवादास्पद धर्मगुरु, अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में सफल होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक कोमल, लक्ष्य केंद्रित, धैर्यवान, कठोर नियंत्रणकारी, दण्ड देने में तनिक भी दया नहीं करने वाला, गुप्त स्वभाव वाला, जटिल कार्य प्रणालियों में रुचिवान्, कॉर्पोरेट लीडर, सीईओ, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर, कानूनी और प्रशासनिक सेवाओं, खनिज और तेल उद्योग, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग आदि क्षेत्रों में दक्षता वाला होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक अत्यधिक चालाक, अपने एजेंडे पर कायम, दिखावटी हँसमुख व परोपकारी, क्रांतिकारी विचारों वाला, ज्योतिष, एस्ट्रो-फिजिक्स व अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कोडिंग, गुप्त सामाजिक संगठन कार्यकर्ता, राजनीतिक नैरेटिव मेकर, डेटा साइंटिस्ट या साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, विमानन (Aviation) या अंतरिक्ष अनुसंधान, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया आदि क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक असिमित कल्पनाशील, दीर्घायु, झूठ को इतना विश्वास से बोलने वाला कि वह सच लगने लगे, चुंबकीय आकर्षण से युक्त, रिश्तों में बेईमान, कुटिल, आभासी दुनिया (virtual world) यथा गेमिंग, मेटावर्स, कोडिंग, जादूगरी व अभिचार कर्मकांड करने वाला, विदेशी संस्कृतियों में रुचिवान्, कुशल रसायनशास्त्री, विष व दवाओं का अनुप्रयोगी, सिनेमा व विजुअल इफेक्ट्स, साइबर इंटेलिजेंस, हैकिंग, क्रिप्टो व मुद्रा बाजार, आध्यात्मिक गतिविधियों का व्यवसायी होता है।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Rahu located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत कुशाग्र बुद्धिमत्ता वाला, भौतिकतावादी, अपने अधिकारों के लिए संघर्षशील, महात्वाकांक्षी, अपने कार्यक्षेत्र व विवाह के संबंध में भ्रमित, पित्त संबंधी दोष / रोगों से ग्रसित, परिवार के प्रति लापरवाह होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यधिक संवेदनशील, दुःखी, छोटी-छोटी बातों का बुरा मानने वाला, निर्णय लेने में असमर्थ, भयावह कल्पनाओं से डरा हुआ, मनोरोगी, तांत्रिक कर्मों में लिप्त, प्रेम संबंधों में असफल, मातृस्नेह से वंचित, परदेसवासी होता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक जल्दीबाज़, किसी भी कार्य के प्रति जुनूनी, दुस्साहसी, नीच कर्मों में संलग्न, प्रभाव जमाने वाला, अनावश्यक बल-प्रयोग करने की आदतों से लाचार, रिश्वतखोर, विवादित भूमि-भवन वाला, अतिक्रमणकारी, अवैध संबंधों में संलिप्त रहता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक हाजिरजवाब, अपनी उम्र से कम उम्र का दिखने वाला, क्रय-विक्रय में निपुण, रिश्तों में नफा-नुकसान देखने वाला, कुशल व्यवसायी, रहस्य-कथाओं, साहित्यों, पत्रकारिता, संचार क्षेत्रों, विविध भाषाविद्, नेटवर्किंग, जुआ सट्टा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी क्षेत्रों में रुचिवान् व सफल होता हैं। त्वचा रोग की संभावना होती है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक विवेकवान्, संकोची, समस्याओं को सुलझाने में माहिर, दार्शनिक विचारों को आधुनिकता का जामा पहनाकर परोसने वाला, रहस्यवाद वा गुप्त विद्याओं का प्रशिक्षक, आध्यात्मिक क्षेत्रों में अनुसंधानकर्ता, भ्रमणशील होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, अनैतिक आचरण से युक्त, विलासिता प्रिय, आधुनिक रुझानों के अनुसार जीवनशैली में बदलाव करने वाला, प्रेम संबंधों में अत्यधिक नियंत्रणकारी, संबंध विच्छेद पर घातक बदला लेने वाला, कुशल रसायनशास्त्री होता है।
शनि की दृष्टि हो तो जातक कर्कश आवाज़ वाला, ठंडा धैर्यवान, शंकालु, अंदर विचारों के समंदर में डूबा बाहर से शांत, परंपराओं को अपने अनुसार तोड़-मरोड़कर इस्तेमाल करने वाला, एकांतप्रिय, प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुओं, तंत्र-मंत्र, कानून, पुरातत्व, जासूसी, कचरा प्रबंधन व गहरे शोध में रुचिवान् व सफल होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in First Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक आंतरिक संघर्ष, अभेद्य, रहस्यमयी, परम विरक्त, अपने विचारों का कट्टर, आध्यात्मिक, ध्यानी, पराविज्ञान में रुचिवान्, क्रांतिकारी धार्मिक वा रुढ़िवाद सुधारक, खुफिया ऑपरेशन्स, खोजी पत्रकारिता, शल्यक्रिया व अनुसंधान विशेषज्ञ होता है। प्रेम संबंधों व वैवाहिक जीवन में तनावपूर्ण स्थिति रहती हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Second Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक भावनात्मक शून्यता वाला, शत्रुंजय, युद्ध में विजयी, धैर्यवान, महात्वाकांक्षी, प्राचीन विरासतों का उद्धारक, फॉरेंसिक और जांच, अकेलेपन की यात्रा, शल्यचिकित्सक, भू-गर्भ विज्ञानी, पुरातत्ववेत्ता, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, मुक्तिदाता, समाज सुधारक होता है।
आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Third Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक अति मानसिक सक्रियता वाला, एक हीं समय में अनेक संभावनाओं को देखने वाला, मानवतावादी, व्यक्तिगत रिश्तों में उदासीन, स्वतंत्र विचारक, तीव्र अंतर्दृष्टि वाला, विज्ञान, खगोल, आधुनिक तकनीक, विशुद्ध आध्यात्म में रुचिवान्, मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता, एस्ट्रो-न्यूमरोलॉजिस्ट या भविष्यवक्ता, स्वतंत्र सलाहकार (Freelance Consultant), आईटी और नेटवर्क आर्किटेक्ट, आविष्कारक होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Fourth Charan/ Padas in Ashlesha Nakshatra) : आश्लेषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक अंतर्मुखी, अत्यंत संवेदनशील, अपनी संवेदनाओं को गुप्त रखने वाला, जटिल रोगों का उपचार करने वाला, भीड़ में भी स्वयं में खोया हुआ, जलीय यात्राओं व समुद्री अनुसंधान में रुचिवान्, काव्य व संगीत प्रेमी, आध्यात्मिक चिकित्सक, विष विज्ञानी, औषधि व्यवसाय, मरीन इंजीनियरिंग, दर्शनशास्त्री, कवि, फ़ोटोग्राफ़र, जीवन-मरण के रहस्यों को सुलझाने को उत्सुक होता हैं।
आश्लेषा नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Ketu located in Ashlesha Nakshatra
आश्लेषा नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक शंकालु, रहस्यवादी, आत्मसाक्षात्कार के लिए प्रयत्नशील, प्राचीन विद्या व दर्शन में रुचिवान्, सर्जन या ऑन्कोलॉजिस्ट, न्यायिक अधिकारी, राजनीति में मंत्री, निजी क्षेत्र में भी उच्च पदासीन होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक गहरी अंतर्दृष्टि वाला, मलिन, दुःखी, संबंधों से दूरी रखने वाला, अकेला, अकर्मण्यता का शिकार होता हैं। नौकरी वा व्यवसाय में आजीवन संघर्षरत रहता है।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक उग्र, उद्विग्न, साहसी, अत्यधिक शंकालु, विशेष सुरक्षात्मक, जिद्दी व जुनूनी होता हैं। मार्शल आर्ट्स, हथियार, जिम, एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाला होता है।
बुध की दृष्टि हो तो जातक चतुर, वाक्-चातुर्य से युक्त, प्रेम करने में निपुण, व्यापारिक संबंधों को विशेष महत्व देने वाला, मज़ाक-मज़ाक में सूक्ष्म विश्लेषण करने वाला, वित्त व कर विभाग, संचार व नेटवर्किंग में दक्ष होता है।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक सौम्य, सकारात्मक सलाहकार, आध्यात्मिक, क्षमाशील, चिकित्सा, न्याय, समाजसेवा, पशु कल्याण पर काम करने वाला, शुद्ध चित्त तपस्वी होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सम्मोहक, बार-बार कार्यक्षेत्र बदलने वाला, कभी-कभी उदासीन, गहरी अनुभूतियों से सृष्टि को समझने वाला, निकट संबंधों में धोखेबाज, सौन्दर्य, लग्जरी, डिजाइनर आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, अति कामुक, जीर्ण रोगी होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक निर्धन, परिश्रमी, नाना प्रकार के रोगों से पीड़ित, संबंधों में वियोगी, रहन-सहन के मामले में उदासीन, कपटी, चिंता से पीड़ित, मानहानि का शिकार, अनिद्रा, तनाव आदि समस्याओं का शिकार होता हैं।
उपसंहार || Important Considerations
किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।
यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।
सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता।
राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।
जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।
आश्लेषा नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personalities born in Ashlesha Nakshatra
वाल्मीकि रामायण के अनुसार लक्ष्मण और शत्रुघ्न दोनो जुड़वांँ भाईयों का जन्म – आश्लेषा नक्षत्र में हुआ था।
पं• जवाहर लाल नेहरू (स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री) – का चन्द्र व लग्न दोनो क्रमशः आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम और चतुर्थ चरण में थे।
डा• मनमोहन सिंह (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री) – का चन्द्र आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
मर्लिन मुनरो (प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेत्री) – का लग्न आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय चरण में था।
जॉनी डेप (प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेता, निर्माता व संगीतकार) – का लग्न आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
तृषा कृष्णन (सुप्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री) – का लग्न आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में था।
[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का आश्लेषा में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरणसे की गई हैं। ]
~ Krishna Pandit Ojha..
WhatsApp:9135754051
संबंधित पोस्ट पर जाने के लिए दिए गये Link पर Click करें!
नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या
1• अश्विनी
2• भरणी
3• कृतिका
4• रोहिणी
5• मृगशिरा
6• आर्द्रा
7• पुनर्वसु
8• पुष्य
9• आश्लेषा
10• मघा
11• पूर्वा फाल्गुनी
12• उत्तरा फाल्गुनी
13• हस्त
14• चित्रा
15• स्वाति
16• विशाखा
17• अनुराधा
18• ज्येष्ठा
19• मूल
20• पूर्वाषाढ़ा
21• उत्तराषाढ़ा
22• श्रवण
23• धनिष्ठा
24• शतभिषा
25• पूर्वा भाद्रपद
26• उत्तरा भाद्रपद
27• रेवती