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पुष्य नक्षत्र : संपूर्ण गुण-दोष व इसमें उपस्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Pushya Nakshatra in Hindi & Results of Various Planets Situated in Ashwini Nakshatra

Pushya Nakshatra in Hindi

पुष्य नक्षत्र परिचय || Pushya Nakshatra Introduction

Pushya Nakshatra in Hindi|| वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘पुष्य नक्षत्र’ क्रम से 8वां नक्षत्र हैं। भचक्र में 93° अंश 20′ कला से लेकर 106° अंश 40′ कला तक के विस्तार क्षेत्र ‘पुष्य नक्षत्र’ हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे “Gamma (γ), Delta (δ), & Theta (θ) Cancri” कहा जाता हैं। इनमें Delta (δ) Cancri प्रमुख तारा हैं। अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-नत्राह (Al-Nathrah) कहा जाता हैं,जिसका अर्थ हैं— ‘शेर का नथुना’। चाइनीज सियु में इसे ‘गुई ’ (Gui Xiù) कहा जाता हैं; जो चाइनीज चन्द्र भवन के प्रमुख 4 वर्गीकरण में से, ‘दक्षिण लाल पक्षी’ (Vermilion Bird of the South) के अंतर्गत आता हैं। इसका अर्थ ‘प्रेत / आत्मा का निवास स्थान’ (Ghost / Spirit Mansion) हैं। ‘पुष्य’ शब्द संस्कृत धातु “पुष्” से निष्पन्न हुआ है; जिसका अर्थ है — पोषण करना / बढ़ावा देना / उन्नति करना / भरण पोषण करना आदि। ‘पुष्य’ नक्षत्र को “तिष्य (शुभ / सुन्दर), सिध्य (सिद्धि दायक), देव, वा पुष्प” नक्षत्र भी कहते हैं। ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र के लिए “तिष्यो न दिवो अक्षरत्” कहा गया है। अर्थात तिष्य (पुष्य) को अक्षय, शाश्वत और शुभ का प्रतीक माना गया है। 

पुष्य नक्षत्र के 3 तारें आकाश में तीर जैसी आकृति बनातें हैं। भारतीय परंपरा में इसे ‘गाय के थन’ के प्रतीक रूप में माना हैं; जो पोषण, दुध, समृद्धि का प्रतीक हैं। सूर्य जब पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब भारी मेघ बरसते हैं। धान की रोपाई के लिए अनुकूल मौसम होता हैं। कृषि कार्य सुदृढ़ होने व प्रकृति में हरियाली आने से भी यह शुभ व समृद्धि का प्रतीक हैं।

अतः पुनर्वसु नक्षत्र के पूर्व की ओर कर्क राशि अंतर्गत 03° अंश 20′ कला से लेकर 16° अंश 40′ कला तक ‘पुष्य नक्षत्र’ का विस्तार हैं। इस नक्षत्र का स्वामी – शनि, नक्षत्र देवता – देवगुरु बृहस्पति, जाति – क्षत्रिय,  योनि – छाग, योनिवैर – वानर, देव गण, मध्य नाड़ी, तमोगुणी, शुभ, सात्विक, पुरुष नक्षत्र हैं। यह पूर्व दिशा का स्वामी हैं। यह लघु / क्षिप्र, उर्ध्वमुखी, अंधलोचन वा अंधाक्ष नक्षत्र हैं।

नए कार्यों की शुरुआत, निवेश और खरीदारी, नया व्यवसाय, दुकान, ऑफिस या प्रोजेक्ट शुरू करना, सोना-चांदी, आभूषण, संपत्ति (घर, जमीन), वाहन खरीदना, शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड आदि में दीर्घकालिक निवेश, नया बही-खाता (अकाउंट बुक) खोलना, व्यापार विस्तार, नई दुकान खोलना, गृह प्रवेश, पूजा-पाठ, मंत्र-जप, यंत्र स्थापना, शिक्षा शुरू करना (बच्चों की पहली पढ़ाई), कुआंँ/नलकूप खुदवाना, यात्रा, बगीचा लगाना, पौधे लगाना, दान-पुण्य, चिकित्सा/आयुर्वेदिक दवाएं शुरू करना, पालतू जानवर खरीदना या उनकी देखभाल करना, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, रेस्टोरेंट, होटल, कैटरिंग, स्वीट्स का व्यवसाय आदि जैसे खाद्य एवं डेयरी उत्पाद, अध्ययन-अध्यापन, कोचिंग, काउंसलिंग, साइकोलॉजी, शिक्षा, परामर्श, मंदिर प्रबंधन, आध्यात्मिक शिक्षक, योग, पूजा सामग्री, धर्म स्थल, आध्यात्मिक क्रियाकलापों से संबंधित स्थल, हेल्थकेयर, आयुर्वेद, नर्सिंग, हिलिंग, कृषि, बागवानी, रियल एस्टेट, बैंकिंग, चैरिटी/NGO, परिवारिक व्यवसाय, अनाथालय, वृद्धाश्रम, अपंगों/विकलांगों की सेवा-सुश्रुषा, पर्यावरण, फुलवारी आदि की देखरेख, गर्भाधान आदि कार्य पुष्य नक्षत्र में अनुकूल परिणाम देने वाले हैं।

यदि रविवार व गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र हों, तो उसकी शुभता कई गुना बढ़ जाती है। पूर्वाचार्यों ने इसे “रविपुष्य व गुरु-पुष्य” नाम अत्यंत महत्वपूर्ण व शुभ योग कहे हैं। विवाह के अतिरिक्त पुष्य नक्षत्र में प्रायः सभी शुभ कार्य यथा सुवर्णप्राशन, नामकरण संस्कार, उपनयन संस्कार, पुंसवन, अन्नप्राशन, विद्यारंभ / अक्षराभ्यास, चूड़ाकरण, कर्णवेध आदि कार्य शुभप्रद परिणाम देने वाले हैं।

यह पोषण, पुष्टि, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति, सेवा, करुणा, परिपक्व विचार, न्यायप्रियता, दृढ़ता का प्रतीक हैं।

Pushya Nakshatra in Hindi

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ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Astrological Symbolic Description of Pushya Nakshatra in Hindi

पुष्य नक्षत्र के नक्षत्र देवता – देवगुरु बृहस्पति और स्वामी – शनैश्चर हैं। अतः इस नक्षत्र पर इन दोनों ग्रहों का व्यापक प्रभाव हैं। तात्पर्य यह हैं कि — पुष्य नक्षत्र के गुण-दोष, प्रकृति को समझने के लिए, देवगुरु बृहस्पति व शनि के गुणों को समझना आवश्यक हैं। पौराणिक आख्यानों में सांकेतिक रुप से इनके प्रकृति व गुण-दोषों का विशद वर्णन मिलता है।

सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि अंगिरा और उनकी पत्नी माता श्रद्धा, सुरूपा अथवा वसुदा ने संतान की कामना से घोर तपस्या की, तब अग्नि देव की कृपा से बृहस्पति का जन्म हुआ, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि और वाक् शक्ति का वरदान मिला। बाल्यकाल से हीं अत्यंत मेधावी होने से इन्हें ‘बृहस्पति’ के रुप में जाना गया। देवाधिदेव महादेव ने इन्हें, ग्रहों में श्रेष्ठ व देवताओं के गुरु (आचार्य) पर नियुक्त कर दिया। 

बृहस्पति शांत, जितेन्द्रिय, बुद्धिमान, धर्मनिष्ठ और परोपकारी स्वभाव के हैं। वे देवताओं के पुरोहित और सलाहकार हैं, जो युद्ध, संकट और नैतिक दुविधाओं में देवताओं (विशेषकर इंद्र) को मार्गदर्शन देते हैं। वे वेदों, यज्ञ, नीति और धर्म के ज्ञाता हैं। उनका स्वभाव सत्तोगुणी हैं, और वे विस्तार, आशावाद, ज्ञान, वाक् शक्ति, धर्म, नीति, समृद्धि, पराक्रम आदि के प्रतीक हैं। 

अतः पुष्य नक्षत्र का देवता होने के कारण इसमें जन्मे व्यक्ति में भी उपरोक्त गुण देखें जा सकते हैं। 

पौराणिकता अनुसार इनकी तीन पत्नियांँ “तारा, ममता और शुभ” हैं। उनकी पत्नी तारा (सौंदर्य और आनंद की देवी) चन्द्रमा (सोम) द्वारा अपहृत हुईं या उनके साथ चली गईं। इससे तारकामय युद्ध हुआ। युद्ध के बाद तारा गर्भवती होकर बृहस्पति के पास लौटीं। उन्होंने बुध को जन्म दिया। (पौराणिकता अनुसार बुध को सोम का पुत्र माना जाता है)। अंततः बृहस्पति ने पत्नी तारा को क्षमा किया और बच्चे को स्वीकार कर लिया। इसके अतिरिक्त बृहस्पति के उनके भाई संवर्त  से भी मतभेद हुए। 

अतः पुष्य नक्षत्र वाले जातकों को, परिजनों से मतभेद और कलहपूर्ण वैवाहिक जीवन का सामना करना पड़ता हैं। 

पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनैश्चर हैं, जो भारतीय ज्योतिष में परिपक्वता, परिश्रम, न्यायप्रियता, उद्यमशीलता, आध्यात्मिकता, कर्मठता, सहनशीलता, विलंब, सेवा भाव का नैसर्गिक कारक हैं। अतः पुष्य में भी इन सभी गुणों का समावेश है।

अतः पुष्य नक्षत्र में गुरु और शनि के सम्मिश्रण से परिपक्व वाक् शक्ति, गहरी आध्यात्मिकता, उच्च आदर्श, प्रबल न्यायिक चरित्र, ममत्व व पोषण के साथ-साथ सम्यक अनुशासनप्रियता का पुट मिलता हैं। साथ-साथ देरी से सफलता, कठिन संघर्ष, पारिवारिक क्लेश, असंतोषपूर्ण वैवाहिक जीवन इस नक्षत्र के कुछ विशिष्ट चुनौतियाँ है।

पुष्य नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Pushya Nakshatra

वराह मिहिर का कथन हैं कि — यव (जौ), गेहूंँ, धान्य, ईख (गन्ना), वन, मंत्री, राजा, जल से आजीविका चलाने वाले, सज्जन पुरुष, याज्ञिक (पुत्रकाम्य आदि यज्ञ कराने वाले) ये सब पुष्य नक्षत्रगत पदार्थ है। इस नक्षत्र में, शमदमादि, शान्त इन्द्रिय वाला, सर्वप्रिय, शास्त्रार्थ में निपुण, धनवान्, धर्म कार्य में तत्परता से जुड़ हुए जातक का जन्म होता है।

आचार्य रामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि — पुष्य नक्षत्र की तीन तारा या यूं समझिये कि, तीन तारा योग से जो धनुष की आकृति खगोल में है वही, अर्थात् धनुषाकारी, इष्ट, शीघ्रता देने वाला, शुभ पुरोहित, उपाध्याय, दैवज्ञ (ज्योतिषी) पर्वत सम्बन्धिकार्य, निमित्तक यात्रा, जहर, उग्र कार्य, घेरा, मण्डप, पुष्टता, चौल, उपनयन व  विवाह को छोड़कर समस्त शुभता सम्बन्धित काम करना चाहिये। इसमें दिग्गज को भेजना चाहिये। इसका बृहस्पति देवता है। इसमें राजाभिषेक, मठ, मन्दिरों का निर्माण करना चाहिये। इसमें दीर्घायु, धनी, पुण्यवान् का जन्म होता हैं ॥

वशिष्ठ संहिता का कथन है कि —

“स्थिरचरशान्तिक पौष्टिक भूषणशिल्पव्रतोत्सववाद्यखिलम् ।

वनिताकरसंग्रहणं त्यक्त्वान्यत्कर्म सिद्ध्यते पुष्ये ॥”

अर्थात पुष्य नक्षत्र में विवाह को छोड़कर सभी प्रकार के शुभ, स्थिर, चर, शांतिपूर्ण कार्य, पोषण संबंधी, आभूषण, कलाकारी, सजावट, व्रत और उत्सव, वाद्य आदि, कलात्मक उत्सव सफल होते हैं।

अर्थात धर्म, आध्यात्मिकता, पूजा, प्रार्थना, साधना, पोषण, अन्न, दुध, कृषि कार्य, पर्यावरणीय संरक्षण, स्वर्ण आदि बहुमूल्य धातुएंँ, पुष्टता, समृद्धि, वृहत् परिवार व संबंधी जन, दिव्य सौन्दर्य, उदारता, न्यायप्रियता, परिश्रम, कर्मठता, कार्य कुशलता, गुणवान, विद्वान, धैर्यवान, जनप्रिय, धनवान्, व्यवस्थाप्रिय, वाक्-चातुर्य, मनोविज्ञान, काउंसलिंग, दर्शन, धर्म-शास्त्र, पोषण विज्ञान (Nutrition), कृषि, चिकित्सा वा नर्सिंग,  दर्शनशास्त्र, धार्मिक अध्ययन, कानून, शिल्पकारी, शास्त्र ज्ञान, कानून, पौराणिक अध्ययन, उच्च दर्शन, आत्मनिर्भरता, बौद्धिक गतिविधि, परोपकार, जन कल्याण, सामाजिक चेतना, सदाचार, सत्यता, विनम्रता, गहरी संवेदनशीलता, विद्यालय, विश्वविद्यालय, होस्टल, अनाथालय, वृद्धाश्रम, प्रयोगशाला, धर्मगुरु, मंदिर, देवालय, पूजा-पाठ वा धार्मिक अनुष्ठान से संबंधित वस्तुएंँ, न्यायालय, सभागृह, संसद-भवन, अस्पताल, राज-घराना, मठ, कल-कारखाने, भारी तरल पदार्थ, उत्खनन, पेट्रोलियम, तेल, कोयला, वन विभाग, कृषि/खेती संबंधी क्षेत्र, डेयरी फार्म, फूड इंडस्ट्री, कृषि विभाग, जल विभाग, कल्याण विभाग, NGO, सामाजिक कार्य, कुआँ, खाई, नहर, जल-कूप, तालाब, सुरंग, भूमिगत कार्य व जलीय कार्य व्यवसाय, सरकारी कल्याण विभाग, बैंक/बीमा संस्थान, रियल एस्टेट, दण्डपाल, जेलर, प्रशासन, HR विभाग, न्यायिक अधिकारी, रात्रि में काम करने वाले कर्मचारी, शिक्षक, जज, ब्यूरोक्रेट, कल्याण अधिकारी, श्मशान, कब्रिस्तान आदि में काम करने वाले लोग, चौकीदार, छाती, फेफड़े, स्तन (breasts), अंतड़ी, आमाशय, हड्डी-पसली, ऊपरी पाचन तंत्र, हृदय चक्र वा अनाहत् चक्र, फेफड़ों की बीमारियांँ यथा TB/तपेदिक, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, सांस की बीमारियांँ, अम्लता, गैस्ट्रिक अल्सर, पाचन समस्या, मतली, पीलिया, पेट या स्तन का कैंसर, यकृत/पित्ताशय की पथरी, वजन बढ़ना, जल प्रतिधारण, हृदय संबंधी रोग, मोटापा, हड्डी/जोड़ों की समस्या, पीपल का वृक्ष, कमल, आदि पुष्य नक्षत्रगत पदार्थ है।

लग्न में पुष्य नक्षत्र के फल || Result of Pushya Nakshatra in Ascendant / Lagna

यदि लग्न में पुष्य नक्षत्र हो तो जातक आकर्षक, शील युक्त सौन्दर्य से युक्त, बाल्यकाल से परिपक्व ज्ञानी, मेधावी, मृदुभाषी, आध्यात्मिक गुणों से युक्त, कार्य कुशल, परोपकारी, सक्षम, विनम्र, परिजनों का पोषक, आत्मनिर्भर, कमज़ोरों का सहायक, लोक कल्याणकारी, समाजसेवी, धन-धान्य, पुत्र-पौत्र आदि संततियों से युक्त, शान्तचित्त, सुखी, देवता-ब्राह्मण आदि का आदर करने वाला, आस्तिक, दानशील, जीवदया करने वाला, पर्यावरण का संरक्षक, फूल-पत्तियाँ लगाने का शौकीन, धर्म-कर्म में अनुरक्त, शास्त्रों का अध्ययन करने वाला, प्रायः चरित्रवान्, सद्गुणी, वाक्-चातुर्य से युक्त, नरम, दीर्घशरीरी, महत्वपूर्ण व्यवहार करने वाला, वात्सल्यपूर्ण प्रेम करने वाला होता हैं। 

पुष्य का मौलिक गुण वात्सल्यपूर्ण प्रेम हैं। इस प्रेम में माता का ममत्व हैं, तो गुरु का अनुशासन भी हैं, शनि की कठोरता दृढ़ता से संयमित भी करता हैं। यह भौतिकतावादी हैं। अपने पर आश्रितों को प्रेम से, अनुशासन से व दृढ़ता से आगे बढ़ाने, समृद्ध करने, सफल करने के लिए, पुष्य लग्नोत्पन्न जातक प्रतिबद्धता से दृढ़ संकल्पित होते हैं। परिजनों विशेष कर के जीवनसाथी को इनका प्रेम तो प्रिय लगता हैं, किन्तु इनकी अनुशासनप्रियता से परिजनों में मतभेद, व वैवाहिक जीवन में क्लेश होता रहता है।

पुष्य नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष || Qualities of Male Chart/ Horoscope born in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक अत्यंत कोमल, भरा हुआ शरीर वाला, ज्ञानयुक्त मुख मुद्रा वाला, भरे हुए अधर, लम्बे कान, गोल नाक, बड़ी आंँखों वाला, आकर्षक व्यक्तित्व का, समाज में सम्मानित, सभ्य, धर्मशील, पुरुषार्थी, बलवान, आत्मकेंद्रित, सदाचारी, वात्सल्यपूर्ण प्रेम करने से कठोर निर्णय लेने में असक्षम, भावुक, प्रबल नैतिक मूल्यों वाला, बुद्धिमान, तेजस्वी, धन-धान्य से परिपूर्ण, उत्तम संततियों से युक्त, चरित्रवान्, परंपरावादी, हास्य विनोद करने वाला, खर्चीला, दुनियादारी समझने में असमर्थ होता हैं। चेहरे पर तील, मस्सा, कोई धाव या दाग इनकी विशेष पहचान हैं। संपूर्ण पराक्रमी होने के बावजूद, जीवन में किसी योग्य गुरु अथवा किसी योग्य प्रतिनिधि के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती रहती हैं, अन्यथा भावनात्मक निर्णयों से जीवन में भटक जाता हैं। बाल्यावस्था से हीं परिवार में कलहपूर्ण स्थिति व समाज के कठोर व्यवहार से पीड़ित व संघर्षमय जीवन जीता हैं। किशोरावस्था से स्व पराक्रम से जीवन में सबकुछ प्राप्त करता हैं; व समाज कल्याण के कार्य में योगदान देता हैं। जरुरतमंदों को सलाह देने की आदत होती हैं। शंकालु स्वभाव होता हैं। जल्दी किसी पर विश्वास नहीं करते। लोककल्याण में अत्यधिक व्यस्तता और शंकालु स्वभाव के कारण वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होता हैं। पत्नी को भी नौकरी वा व्यापार-व्यवसाय करने को उकसाते रहता हैं। पुष्य पुरुष जातकों के लिए आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण गुण हैं, कारण की सम्यक पोषण तभी संभव हैं जब व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर हो।

पुष्य नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Qualities of Female Chart/ Horoscope born in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातक छोटी कद-काठी की, गौरवर्णी वा गेहूंआ रंग की, विकसित शारीरिक उभार वाली, छोटी हथेली, छोटी और मोटी उंगलियों वाली, उन्नत ललाट, तैलीय त्वचा, पुष्ट अंगों वाली, सुन्दर, सुभग, धर्म-कर्म में अनुरक्त, फुर्तीली, उत्तम व्यवहारी, उदार, दयालु, सच्चा हितैषी, नीति नियमों में विश्वासी, कम मित्रों वाली, शांत, धीर-गंभीर, धनवान्, दयालु, धार्मिक, स्वार्थी, कलात्मक अभिरुचि वाली, संगीत व वाद्ययंत्रों में रुचिवान्, विशेष ममत्व वाली, परिवार में सबका ख्याल रखने वाली, प्रकृति प्रेमी, सुस्वादु व्यंजन प्रिय, नौकर-चाकरों द्वारा सेवित, दूसरों की बातों में आसानी से आ जाने वाली होती हैं। पढ़ने-लिखने में होशियार होने व व्यवहारिक होने से ये राजनीति, शासन-प्रशासन, न्यायिक विभागों व सरकारी क्षेत्रों में उच्च पदासीन होने की क्षमता रखतीं हैं। प्रारम्भिक कार्यालय कालीन जीवन में, महत्वपूर्ण शक्तिशाली लोगों द्वारा इनकी शक्तियों का दुरूपयोग व कार्यक्षेत्र में इनका शोषण होता हैं। फलतः जीवन के उत्तरार्ध में क्रोधी व चिड़चिड़ी हो जाती हैं। वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण होने की संभावना इनकी भी बनती हैं। अतः पुष्य नक्षत्रगत जन्म होने वाले जातकों को विशेष रूप से, विवाह से पूर्व विस्तृत जन्मपत्रिका मिलान करवा कर वैवाहिक जीवन में कदम रखना चाहिए।

प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Pushya Nakshatra Subtel Result Variations in all 4 Charan (Padas)

पुष्य नक्षत्र प्रथम चरण (Pushya Nakshatra First Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 03° अंश 20′ कला से लेकर 06° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र पुष्य नक्षत्र का प्रथम चरण हैं। नवमांश सिंह ♌ होने से इस चरण का स्वामी सूर्य है। अतः पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण पर चन्द्र-शनि-सूर्य का संयुक्त प्रभाव हैं। उपलब्धि, सफलता, सकारात्मकता, ख्याति, धन-वैभव, वंश-परिवार, कुशल नेतृत्व क्षमता, राजसी गुण, आत्म-सम्मानपूर्ण, महत्वाकांक्षा, जिम्मेदार, परंपरागत मूल्यों से भरपूर, पैतृक गौरव, प्राकृतिक नेता, अधिकारपूर्ण, प्रभावशाली और आकर्षक व्यक्तित्व पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का मूल गुण हैं।

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक रक्तिम वर्णी, लम्बे पांव व लम्बी भुजाओं वाला, तीक्ष्ण दृष्टि वाला, आकर्षक, तेजस्वी, नेतृत्वकारी, दयालु लेकिन गरिमापूर्ण, अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह, विश्वसनीय, परिवार और समुदाय के प्रति गहरा लगाव रखने वाला, शिक्षक, गुरु, सलाहकार या पोषक भूमिका में उत्कृष्ट, राजनीति, प्रशासन, सामाजिक कार्य रियल एस्टेट, परिवारिक व्यवसाय, कल्याण कार्य, या पारंपरिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने वाला, कला, मनोरंजन, प्रबंधन या सेवा-उन्मुख संगठन (जहांँ दृश्यमान सम्मान मिले) में रुचिवान् होता हैं। वैवाहिक जीवन में कठिनाइयांँ आती हैं। शनि यदि ज्यादा बलवान हो तो जीवन अत्यंत संघर्षशील हो जाती हैं। आजीवन भटकाव, पिता से मतभेद व शारीरिक श्रम से आजीविका चलानी पड़ती हैं।

पुष्य नक्षत्र द्वितीय चरण (Pushya Nakshatra Second Charan/ Padas): कर्क राशि अंतर्गत 06° अंश 40′ कला से लेकर 10° अंश तक का विस्तार क्षेत्र पुष्य नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश कन्या ♍ होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। अतः पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण पर चन्द्र-शनि-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। यह एक पुष्कर नवमांश भी हैं। शुक्र के अतिरिक्त यहाँ सभी ग्रह प्रायः भौतिक स्तर पर अच्छे फल देते हैं। सेवा, विस्तार, स्वास्थ्य, पोषण, चिकित्सा, संगठन, विश्लेषणात्मक बुद्धि, व्यावहारिक उपयोगिता, उद्योग, नौकरी, उद्यमशीलता, धनार्जन के बहु-स्रोत पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का मुख्य गुण है।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक गोरा रंग, पतला शरीर, स्त्रियों सा कोमल अंग, सुन्दर चंचल आँखें, विश्लेषणात्मक बुद्धिमत्ता वाला, मृदुभाषी, वाक्पटु, व्यावहारिक, आलस्यपूर्ण, विनम्र, सेवा-भावना वाला, दान-पुण्य करने वाला, आकर्षक हास्य ज्ञान, आलोचनात्मक स्वभाव, पूर्णतावादी, संगठित, स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक, सदैव कर्मशील होता हैं। स्वास्थ्य अस्थिर रहता हैं, अक्सर छोटी-मोटी बिमारी लगी रहती है। डॉक्टर, नर्स, न्यूट्रिशनिस्ट, डाइटिशियन, हेल्थकेयर, सचिव, प्रशासनिक कर्मचारी, पब्लिक सर्वेंट, वित्तीय अधिकारी, शासकीय कर्मचारी, व्यावहारिक कौशल सिखाने वाले शिक्षक, ट्रेनर, रसोईया, फूड इंडस्ट्री, पोषण प्रबंधन, लेखन, लेखा, विश्लेषण, काउंसलिंग, कृषि/पोषण संबंधी कार्य, NGO वा जन-कल्याण, व्यवसाय में भी सेवा-उन्मुख भूमिका में कड़ी मेहनत से अच्छी सामग्री सफलता, विविध विषयों में ज्ञान, स्थिरता प्राप्त कर लेते हैं।

पुष्य नक्षत्र तृतीय चरण (Pushya Nakshatra Third Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 10° अंश से लेकर 13° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र पुष्य नक्षत्र का तृतीय चरण हैं। नवमांश तुला ♎ होने से इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। अतः पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण पर चन्द्र-शनि-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। विलासिता, घरेलू सुख, संतुलन, साझेदारी, सामाजिक सद्भाव, भौतिक सुख, कामुकता, प्रेम-प्रसंग, शारीरिक आकर्षण पर निर्भर संबंध पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का मुख्य गुण हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक चटक  गेहूंआ रंग अथवा श्यामवर्णी, ठोस संगठित शरीर वाला, लम्बी नाक, मछली जैसी आँखें, तिरछी भौंहें, आकर्षक, संतुलित, समाजिक, व्यवहारिक, विनम्र, संचार कुशल, व्यापार-व्यवसाय में व्यस्तता का इच्छुक, अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला, सुंदर निवास, लग्जरी जीवनशैली, सामाजिक दबाव के प्रभाव में सतही स्तर पर आने वाला, प्रचुर यौनाचारी होता हैं। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग, फूड इंडस्ट्री, हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, घरेलू सजावट, लग्जरी सामान, काउंसलिंग, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, कला व सौंदर्य संबंधी क्षेत्र, शिक्षक, सलाहकार, पुजारी/ व धार्मिक सलाहकार, व्यापार में साझेदारी, डेयरी/ व फूड बिजनेस, चाइल्ड केयर, हॉस्ट वा होस्टेस, शिल्पकार, चैरिटी कार्य आदि क्षेत्रों में रुचि रखने वाला होता हैं।

पुष्य नक्षत्र चतुर्थ चरण (Pushya Nakshatra Fourth Charan/ Padas) : कर्क राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से लेकर 16° अंश 40′ कला तक का विस्तार क्षेत्र पुष्य नक्षत्र का चतुर्थ चरण हैं। नवमांश वृश्चिक ♏ होने से इस चरण का स्वामी मंगल हैं। अतः पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर चन्द्र-शनि-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। रहस्यवाद, पारलौकिक ज्ञान, भूत-प्रेत, अप्सरा आदि इत्तर योनियों से संबंध, तीव्रता, अत्याचार, नियंत्रण, परिवर्तन और पुनर्जन्म, स्वास्थ्य / शिक्षा में प्रारंभिक चुनौतियांँ, मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण के मुख्य गुण हैं।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक बड़े सिर वाला, तिरछी उर्ध्व भौंहें, चपटी / बड़ी नाक, भारी मुखाकृति वाला, लम्बी बलिष्ठ बांहों वाला, फुर्तीला, ज्यादा सोच-विचार नहीं करने वाला, जिद्दी, अड़ियल, नीच कर्म करने वाला, दूसरों पर आश्रित, मंत्र, तंत्र, आध्यात्मिक साधना, आध्यात्मिक  शक्तियों से जुड़ाव, गुप्त ज्ञान, रिसर्च में रुचिवान्, स्वजनों के लिए सुरक्षात्मक किन्तु विशेष नियंत्रण करने की सोच वाला, मजबूत इरादों वाला होता हैं। मनोविज्ञान, थेरेपी, काउंसलिंग, क्राइसिस मैनेजमेंट, रहस्यवाद, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, रिसर्च, जांँच एजेंसी, गुप्त/रक्षा संबंधी कार्य, गहन चिकित्सा (सर्जरी, मनोरोग), ट्रांसफॉर्मेटिव कोचिंग, सामाजिक कार्य, NGO (संकटग्रस्त लोगों के लिए), धार्मिक अनुष्ठान विशेषज्ञ जैसे क्षेत्रों में विशेष क्षमता वाला होता है। युवावस्था में स्वास्थ्य या अनुशासन की कमी से शिक्षा व पेशेवर जीवन में व्यवधानों का सामना करना पड़ता हैं।

पुष्य नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Result of various Planets situated in different Charan/ Padas of Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक बलवान, समाज में प्रतिष्ठित, सत्यवक्ता, उच्च पदासीन, भोग के प्रति मुखर, आकर्षक, साहसी,, दयालु, उदार, कला (संगीत, नृत्य, कविता) के प्रति रुचिवान्, महंगें नशीले पदार्थों का शौकीन होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक व्यावहारिक बुद्धि, मेहनत, सेवा और विश्लेषणात्मक क्षमता वाला, अनुशासित, व्यवस्थित, वाक्पटु, कूटनीतिक, समस्याओं का समाधान ढूंढने में माहिर, आलोचनात्मक, अधीर स्वभाव वाला, अच्छे संचार कौशल, बहु-क्षेत्रीय ज्ञान वाला, भूमि-भवन का सुखी होता है।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक लंबे कद-काठी का, बुद्धिमान, आकर्षक, सामाजिक, न्यायप्रिय, संतुलित, कभी-कभी आत्म-संदेह वाला, शत्रुहंता, कानून, सामाजिक कार्य, शिक्षण, सार्वजनिक सेवा, परामर्श, कला/सौंदर्य क्षेत्र में रुचिवान्, आँख,कान, गले का रोगी होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक मध्यम शरीरी, विरासत का लाभी, क्रूर, जनप्रतिनिधि वा समाज का मुखिया, तंत्र-मंत्र में विश्वासी, मनोवैज्ञानिक गतिविधि, आध्यात्मिक कार्य, अनुसंधान आदि विषयों में रुचिवान्, रहस्यमयी विद्याओं का ज्ञाता, कुशल रणनीतिकार होता हैं। पत्नी से मतभेद होता हैं, व पत्नी सामाजिक व आर्थिक प्रगति में विशेष बाधक सिद्ध होती हैं। अतः पुष्य चतुर्थ चरण वाले जातकों को विवाह से पूर्व कुंडली का विस्तृत मिलान करने के बाद हीं परिणय-सूत्र में बंँधने का निर्णय लेना चाहिए।

पुष्य नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Sun located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कुशल व्यवसायी, विदेशी व्यापार व विदेशी मुद्राओं का संग्रहकर्ता, अपने कार्य-व्यवहार के प्रति समर्पित, राजा वा सरकार से लाभान्वित, खाने-पीने का शौकीन, फिटनेस प्रेमी होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक बलवान, धन-धान्य से पुष्ट, रक्षा विशेषज्ञ, अन्याय के विरुद्ध प्रचण्ड क्रोधी, समाजसेवी, सशस्त्र बदलाव की नीति वाला, स्वजनों से संतुलित व्यवहार करने वाला, जनप्रिय होता हैं। अस्त्र-शस्त्र से घाव, धोखा, कैंसर, अल्जाइमर या डिमेंशिया, सीओपीडी, हृदय रोग, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आदि व्याधियों की संभावना होती हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक गर्वित, ज्ञान-विज्ञान का ज्ञाता, विशेष सम्मानित, शिक्षा, वित्त वा रक्षा विभाग में उच्चस्तरीय अधिकारी, प्रभावशाली राजनीतिज्ञ, उच्च कोटि का सलाहकार होता है।

शनि की दृष्टि हो तो परदेस में सफल, परिपक्व चतुर, परिजनों से अनबन वाला, बार-बार निवास स्थान बदलने को विवश, कफ वा वायु प्रकोप वाला, निर्धन अथवा अल्प धनवान्, जीवन में धीरे-धीरे प्रगति करने वाला होता है।

राहु की दृष्टि हो तो जातक महात्वाकांक्षी, तीव्र आवेगी, गुस्सैल, बड़ा ठग, आत्मप्रवंचना करने वाला, मित्रों से लड़ाई-झगड़ा करने वाला, शासन-प्रशासन व राजनैतिक क्षेत्रों से लाभान्वित, रहस्यवादी हेने से संबंधों में कटुता आती हैं।

केतु की दृष्टि तो जातक आध्यात्मिक, कठिन हठयोग करने वाला, आवेगपूर्ण निर्णयों वाला, मुक्ति वा मोक्षमार्गी का अनुसरण करने वाला, नीरस, विभिन्न रोगों से पीड़ित, मोहरहित, निकट संबंधों में वियोगी, दुःखी, ज्यादा सोच-विचार करने वाला होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक आकर्षक, सुन्दर, सौम्य, प्रभावशाली, उदार, दयालु, भावुक लेकिन गरिमापूर्ण व्यवहार करने वाला, दूसरों का मार्गदर्शक, कार्यकुशल, राजसी भावनाओं वाला, स्वाभिमानी, धर्मानुरागी, अनेक स्त्रियों का प्रिय होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक मेहनती, लौकिक, विनम्र, हास्यप्रिय, सेवा-भावना वाला, स्वास्थ्य सेवा, नर्सिंग, न्यूट्रिशन, प्रशासन, शिक्षण, खाद्य उद्योग, सामाजिक कार्य आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता है।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक अत्यंत रोचक, सबका प्रिय, सुआचरणी, प्रेम करने में निपुण, कामक्रीड़ा प्रिय, संपत्तिवान, दार्शनिक अभिरुचि वाला, म्लेच्छों से संबंध रखने वाला, धार्मिक, आस्तिक, अनेक जनों से संसर्ग करने वाला, पत्नी के प्रेम-प्रसंगों से आहत होता रहता है।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक तीव्र भावनाओं वाला, सहज ज्ञान (psychic), गहन अंतर्दृष्टि, लचीला, परिजनों से द्वेष करने वाला, मातृ द्रोही, दूसरों की संपत्ति हड़पने वाला, परस्त्रियों पर कुदृष्टि रखने वाला, हिंसक वृत्ति वाला होता हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Moon located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक न्यायप्रिय, साहसी, भावुक निर्णय लेने वाला, सतही सोच रखने वाला, कर्तव्यनिष्ठ, प्रजा सेवक, लोक कल्याणकारी, विलासी, घर-परिवार का पोषक, शासन-प्रशासन अथवा न्यायिक विभागों में सम्मानित अधिकारी होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक धन कमाने में साहसिक निर्णय लेने वाला, अल्प मित्रवान्, निवेश व अचल संपत्ति का पोषक, यात्रा प्रिय, प्रेमिका व पत्नी से हिंसक व्यवहार करने वाला, रिश्तों में विशेष नियंत्रणकारी होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक सौम्य, सहृदयी, चिड़चिड़ा, खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने वाला, शहरी व ग्रामीण विकास योजनाकार, सामाजिक उद्यमिता, प्रारंभिक शिक्षक, बाल कल्याण कार्यकर्ता, पशु चिकित्सा, सामुदायिक स्वास्थ्य परामर्शदाता आदि क्षेत्रों में रुचिवान्, प्रतिष्ठित होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक विद्वान, वेदशास्त्रों का ज्ञाता, उदारवादी, धर्म-कर्म में अनुरक्त, शैक्षणिक संस्थानों में अधिकारी, पारिस्थितिक बहाली और जैव-विविधता, उपशामक देखभाल और जेरियाट्रिक्स, मानवीय कानून और मानवाधिकार, पुनर्योजी कृषि और मृदा विज्ञान, बाल मनोविज्ञान और विकासात्मक चिकित्सा, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण आदि क्षेत्रों में विशेष योग्य व रुचिवान् होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कामुकतापूर्ण सुन्दर, आकर्षक, विशेष सौन्दर्य बोध वाला, उच्च गुणवत्ता वाले वस्तुओं व सेवाओं का उपभोगी, होलिस्टिक वेलनेस व तांत्रिक हीलिंग, सौन्दर्यशास्त्र और कामकला, इत्र विज्ञान और संवेदी अनुभव डिजाइन, उच्च श्रेणी की ‘होस्टिंग’ और शिष्टाचार विशेषज्ञ, काव्यात्मक उद्यान विशेषज्ञ आदि क्षेत्रों में विशेष योग्य होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कोमल हृदयी, कठोर संकल्प शक्ति वाला, धैर्यवान, निःस्वार्थ सेवा भाव वाला, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन आदि करने वाला, दयालु, कुशल न्यायिक चरित्र वाला, साधारण धनवान्, तंत्रिका, श्वसन, स्नायु तंत्र से संबंधित पीड़ा होती हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक को मानसिक चंचलता, भावनात्मक अस्थिरता, भ्रम, अनिद्रा, मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। तथापि जातक जन-कल्याण के कार्यों में योगदान देता है।

केतु की दृष्टि हो तो अति संवेदनशील, शंकालु, एकांतप्रिय, तंत्र-मंत्र व पारलौकिक विद्याओं से जनकल्याणकारी, जड़ी-बूटियों का जानकार, भावनात्मक निर्णयों के कारण दुःखी, उदर, टिश्यू (ऊतक) से संबंधित बिमारियांँ, व शल्यक्रिया के योग बनते हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल || Result of Mars in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक साहसी, आत्म-सम्मानी, उदार लेकिन थोड़ा अहंकारी या अधीर, मजबूत इच्छाशक्ति वाला, यात्रा वा परिवहन से धनार्जन करने वाला, वाहन चालक, परिवहन व्यवसाय, राजनीति, प्रशासन, सेना/रक्षा क्षेत्र, उद्यमिता से लाभी, ट्यूमर, शल्यक्रिया, कर्क रोग की संभावना होती हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक कड़ी मेहनत करने वाला, व्यवस्थित, चिंतित, कठोर संभाषण से दूसरों को आघात पहुंचाने वाला, जल्दी धनवान् बनने के लालच में अर्जित धन का नाश करने वाला, अपराधिक गतिविधियों में रुचि रखने वाला, अति कामुक, अपने से ज्यादा उम्र के या बलवान, प्रभावशाली लोगों के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करने वाला होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) :पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक ज्ञान-विज्ञान में रुचि वाला, पुरातत्व, सर्वेक्षण, ऐतिहासिक वस्तुओं में रुचिवान्, सरकारी क्षेत्र से लाभान्वित, पर्यटन का शौकीन, रत्नादि आभूषणों में रुचिवान्, जीवनसाथी से अनबन वाला तथापि नये-नये तरीके से कामक्रीड़ा करने में रुचिवान् होता है।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) :पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक प्रबल नियंत्रणकारी, महात्वाकांक्षी, कमज़ोरों का उत्पीड़क, राजकार्य में राजा या शासक का प्रिय, शक्ति प्रदर्शन करने वाला, धनवान्, प्रेम संबंधों में अस्थिरता वाला, निकट संबंधों में धोखा खाने की संभावना होती हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mars located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक पोषक नेता, न्यायप्रिय, न्यायिक विभागों में रुचिवान्, ग्रामीण स्तर का नेता, पशुधन वाला, प्रचुर जीवटता वाला, कार्य कुशल किन्तु अपनी क्षमताओं का उपयोग नहीं करने वाला, बार-बार कार्यक्षेत्र बदलने वाला होता है। 

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मातृसुख से वंचित अथवा माता से मतभेद वाला, यात्रा प्रिय, अतिभावुक मुर्ख, स्वयं को रहस्यात्मक समझने वाला, अपनी भावनाएँ व्यक्त करने में असमर्थ, उग्र व्यवहारी होता हैं। ऐसे जातकों का दूसरों के द्वारा नाजायज फायदा उठाया जाता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक शारीरिक सौष्ठव वाला, अति वाचाल, झूठ बोलने वाला, नीच कर्म में रत, अपराध विज्ञान और खोजी पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में रुचिवान्, बाल्यकाल में यौनशोषण का शिकार होने वाला, रक्त व तंत्रिका तंत्र विकारी, चर्म रोगी होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक भूमि-भवन का व्यवसायी, समाज सुधारक, सहिष्णु, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्रों पर काम करने वाला, दिशा-निर्देश देने वाला, कुशल मार्गदर्शक होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक शास्त्रीय संगीत व लोकनृत्य का पोषक, लग्जरियस रिसॉर्ट, होटल, स्टेडियम, हवाईअड्डा आदि क्षेत्रों में कार्य करने वाला, अधिक महिला (विपरीत लिंगी) मित्रों वाला, खर्चीला, कलात्मक व रचनात्मक कार्यों में सफल होता है।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कुशल अभियंता, न्यायिक अधिकारी, वन, पर्वत, पर्यावरण का संरक्षक, सरकारी अथवा वैश्विक संगठनों के माध्यम से अति महत्वपूर्ण जोखिम भरे सूक्ष्म इंजीनियरिंग व आर्किटेक्चर से समाज को विकसित करने वाला, अनुसंधानकर्ता, व्यक्तिगत जीवन में उदासीन होता हैं। ऐसे जातक के शत्रु प्रबल होते हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक पारिवारिक कलह, पड़ोसियों से विवाद, अशांति व उपद्रव का शिकार होता हैं। अत्यधिक आवेगी व हिंसक होने से असमाजिक तत्वों से मैत्री संबंध वाला, भीषण रक्तपात करने वाला, हत्यारा होने की संभावना होती हैं।

केतु की दृष्टि हो तो जातक उग्र, आक्रामक, अपशब्द युक्त भाषा का प्रयोग करने वाला, साहसिक कार्यों में संलग्न, सूजन, घाव या सर्जरी होने की संभावना होती हैं। 

पुष्य नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक चतुर, विद्वतापूर्ण संभाषण करने वाला, कलहप्रिय, पत्नी सुख से हीन, धनवान, समृद्धशाली उत्तम वाहनों व भूमि-भवनों, का उपभोगी, आयु के मध्यावस्था में भयंकर अरिष्ट वाला होता है। स्त्री जातक को ऋतुचक्र व प्रसव संबंधी कष्ट होते हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक प्रभावशाली, इज्ज़तदार, वाक्-चातुर्य से युक्त, प्रचुर पैतृक संपत्ति वाला, दान-धर्म करने वाला, सरकार का विश्वासपात्र, उच्चस्तरीय अधिकारी, गुप्तचर एजेंसियों का रत्न, प्रकृति का संरक्षण करने वाला, धन-धान्य से परिपूर्ण, अनेक विषयों का जानकार होता है।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक कलात्मक अभिरुचि वाला, साहित्य-संगीत, नृत्य, अभिनय आदि क्षेत्रों में सम्मानित, संचार कुशल, समाज का पोषक, काव्यात्मक शैली में अभिव्यक्ति करने वाला, प्रचुर यौनाचारी, अनेक स्त्रियों के जीवन में परोक्ष रूप से शामिल होता हैं। 

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक धुर्त, अनेक तिकड़मबाज, लोन, बीमा, लेन-देन वाले कार्यों में अस्थिरता से व्यस्त, कटुभाषी, नफ़रत फैलाने वाला, चुगलखोर होता हैं। ये ज्यादा शिक्षित नहीं होते, किन्तु प्रबल रणनीतिक वार्ता के बल पर फर्श से अर्श तक का सफ़र तय करने की क्षमता होती हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mercury located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक कोमल, विलासी, खर्चीला, पढ़ने-लिखने में होशियार, अनेक मित्रों वाला, कविता, साहित्य आदि में रुचिवान्, स्वयं भी काल्पनिक व भावनात्मक लेखन करने वाला, प्रियदर्शी होता हैं। कफ जनित रोग पीड़ित करते हैं। 

मंगल की दृष्टि हो तो जातक विकसित शारीरिक गठन वाला, बलिष्ठ कंधे व बाजुओं वाला, कानून तोड़ने को इच्छुक, क्रांतिकारी मति वाला, साहसिक वचन बोलने वाला, अनेक लोगों को अपने विरोचित संभाषणों से रिझाने वाला, कुशल नेता, गणितज्ञ, ज्योतिषी, बाजार-भाव का भविष्यवक्ता होता है। इनके अनेक अनुयाई होते हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक चंचल, आँकड़ो का खिलाड़ी, नीति-निर्माता, धनवान्, सम्मानित, कुलीन परिवार से संबंध रखने वाला, सरकारी वा सहकारी क्षेत्रों से लाभी, कुशल व्यवसायी व व्यवसायिक संगठनों का नेता, निवेश, विश्व-व्यापार, मुद्रा, संग्रह आदि का विशेषज्ञ होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक दार्शनिक अभिरुचि वाला, बाल्यकाल में अधिक मित्रों वाला, युवावस्था आते-आते एकांतप्रिय, देर से विवाह और आजीविका प्राप्त करने वाला, ऑटोइम्यून बीमारी व असाध्य रोग से पीड़ित होता हैं। पारिवारिक वैमनस्य और जीवनसाथी से द्वेष होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक तीव्र बौद्धिक क्षमता, नवीन विचारों, तकनीकी, सामाजिक सुधार से संबंधित कार्यों में रुचिवान्, प्रभावशाली संचार कौशल वाला, कुशल वक्ता, लेखक, सलाहकार, अधिवक्ता, मीडिया, कानून, व्यापार व राजनीतिक समझ वाला, अति महात्वाकांक्षी होने से अनैतिक कार्यों में भी संलिप्त होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक गहन विश्लेषणात्मक व सहज बोध वाला, गुप्त व प्राचीन ज्ञान, ज्योतिष, शोध, आध्यात्मिक लेखन में निपुण, रक्षा, न्याय, शोध, अनुसंधान, गुप्तचर विभाग व अन्य सूक्ष्म तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्यनक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक शासन पक्ष का सहयोगी, विद्वान, विभिन्न शास्त्रों का ज्ञाता, पथभ्रष्ट, व्यसनी, उत्पाती, मलिन चरित्र वाला, धनवान्, समाज में अच्छी पकड़ रखने वाला, अहंकारी, तंत्रिका विकारी, हृदय रोगी व चर्मरोग से पीड़ित होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्यनक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो आकर्षक, गौरवर्णी, थुलथुले शरीर वाला, सुन्दर, मनमोहक, परोपकारी, जीवदया करने वाला, धर्म-कर्म में अनुरक्त, परिजनों का सहायक, राजनयिक, उच्चस्तरीय अधिकारी, वाक्-चातुर्य से युक्त, खनिज संपदा व विदेशी वस्तुओं व सेवाओं का व्यवसायी होता हैं। कोई-कोई जातक संन्यासी होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्यनक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक ‌सौम्य प्रकृति, सुन्दर, सद्व्यवहारी, उत्तम आचरण वाला, समाज में आदरणीय, आदर्श कीर्तिमान स्थापित करने वाला, धन-धान्य से युक्त, समाज में ज्ञान और आध्यात्मिक बोध का प्रचार-प्रसार करने वाला, सृजनात्मक क्षमता वाला होता हैं। अतिशय समझौता के कारण वैवाहिक संबंधों में सम्मान नहीं मिलता।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्यनक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक साहसिक कृत्यों में रुचिवान्, ज्ञान-विज्ञान में निपुण, वीर-रस व आक्रामक संगीत प्रेमी, कुशल शिल्पी, तंत्र-मंत्र में विश्वासी, मंत्रज्ञ, गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग, धातक अस्त्र-शस्त्रों का निर्माता होता हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Jupiter located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक लम्बे कद-काठी वाला, शासन-प्रशासन में उच्चस्तरीय अधिकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाओं का अध्यक्ष वा उच्च पदासीन, अनेक जनों का पोषक, प्रतापी, रक्त संबंधियों के अतिरिक्त अन्य रिश्ते-नातों का भी पोषक, विद्वान, धनी, अनेकों आय स्रोत वाला, पैतृक विरासत वाला होता है।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक जातक सौम्य, सद्व्यवहारी, कोमल व्यवहारी, दार्शनिक विचारों वाला, सुन्दर पत्नी व आज्ञाकारी संतानों वाला, औषधि, रासायन, समुद्री उत्पादों का व्यवसायी, प्रारंभिक शिक्षण संस्थानों का स्वामी होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक अति प्रभावशाली, अनेक विद्वजनों व विद्वत्समाज का प्रधान, नेता, अभिनेता व प्रभावशाली व्यापारी जनों द्वारा सम्मानित, अनेक जनों का भाग्यविधाता, अति प्रतिष्ठित विद्वान, स्थाई यशस्वी होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक पढ़ने-लिखने का शौकीन, साहित्यिक अभिरुचि वाला, संचार कुशल, गणित, खगोल, आधुनिक तकनीक में रुचिवान्, विलासी, अपनी पत्नी के अतिरिक्त अन्य स्त्रियों के साथ भी घनिष्ठ मैत्री संबंध वाला होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कलात्मक अभिरुचि वाला, नृत्य-संगीत, नाट्यशास्त्र का ज्ञाता, शिक्षक वा कुशल प्रशिक्षक, धार्मिक, मंत्रज्ञ, याज्ञिक कर्म करने वाला, अनेक स्त्रियों (विपरीत लिंगीयों) से संसर्ग करने वाला, वसा जनित रोग यथा मोटापा, हृदय रोग, मेटाबॉलिक रोग आदि बिमारियांँ होती हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक परंपरावादी, सांस्कृतिक विरासतों का उद्धारक, आत्ममुग्ध, रुढ़िवादी विचारधारा वाला, उत्खनन, लकड़ी, मशीनरी, घड़ीसाज़ी, शास्त्रीय वाद्ययंत्र निर्माता, उच्च-परिशुद्धता रत्न तराश, शैल्य चिकित्सा रोबोटिक्स विशेषज्ञ, विंटेज कार रेस्टोरेशन जैसे क्षेत्रों में रुचिवान्, अपने कबीले का मुखिया होता है।

राहु की दृष्टि हो तो जातक झूठा, आडम्बर करने वाला, अनैतिक कार्यों वाला, शासन-प्रशासन में उच्चस्तरीय अधिकारी, शिक्षण कर्मचारी, धार्मिक धर्मगुरु, विदेशी आय वाला होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक आयुर्वेद, चिकित्सा शास्त्र, भूतविद्या में प्रवीण, शिक्षण, परामर्श, सामाजिक कार्य, आध्यात्मिक क्षेत्र में रुचिवान्, कोई-कोई जातक गृहत्यागी संन्यासी होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक कार्यकुशल, विलासी, सदाचारी, आलस्यपूर्ण आचरण करने वाला, दिखावा पसंद, छल-कपट करने में निपुण, झूठा, कलात्मक सेवादार, स्वास्थ्य विभाग, दूतावास, गुप्तचर विभाग, कला व संस्कृति विभाग जैसे विभागों में राजकर्मचारी, विदेशी आय वाला, यात्रा व पर्यटन से लाभान्वित, अनेक शत्रुओं वाला, विपरीत लिंगीयों के प्रति तीव्र आसक्ति वाला, व्यसनी होता हैं। हृदय, नेत्र, चर्म वा धातु संबंधी रोगों से पीड़ित होने की संभावना होती हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक चंचल, कामातुर, अल्प बुद्धिमान, सिलाई-कढ़ाई, सौन्दर्य प्रसाधन, स्त्रियों के वस्त्रों का डिज़ाइनर वा व्यवसायी, इंटिरियर डिजाइनर, नक्शा का विशेषज्ञ, अप्राकृतिक मैथुन प्रिय होता है।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत रुपवान्, स्त्रियों जैसा नाज़ुक, लचीला, अल्पशिक्षित, कलाकार अथवा कारीगर, अन्न-अनाज, चीनी, खांड, तेल आदि का व्यवसायी, ब्याज पर धन का लेन-देन करने वाला, महंगें वाहनों, धातुओं, रत्न आदि के क्षेत्र में कार्य करने वाला, पशुधन से लाभी, अवैध संबंधों में संलिप्त रहता हैं। 

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक धातु शोधन करने वाला, भारी मशीनों का संचालक, अधीर किन्तु विचारशील, दार्शनिक बुद्धिमत्ता वाला, बेशर्म, गाली-गलौच करने वाला, दूसरों का सामान मांग कर अथवा छीन कर उपभोग करने वाला, कामातुर, रक्त रोगी, अति कामातुर, यौनरोगी होता हैं। विवाह में क्लेश व जीवनसाथी से धोखे की संभावना होती हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Venus located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक गौरवर्णी, अत्यंत रुपवान, शीतल स्वभाव वाला, मधुरभाषी, अल्प अहंकारी, चिड़चिड़ा, अनेक प्रेम संबंधों वाला, गृह कार्य में दक्ष, सजने-संवरने का शौकीन, ममत्व से परिपूर्ण, धनवान्, सुखी होता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक प्रचुर इन्द्रिय सुखों वाला, आक्रामक, तुनकमिजाज, कलात्मक अभिरुचि वाला, रिश्तों में क्षणभंगुर, विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला, व्यसनी, हिंसक रति करने वाला, परस्त्रीगामी वा वैश्यागामी होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक सच्चा प्रेमी, मनोहर, धर्मयुक्त आचरण वाला, शिक्षित, कलाविद्, दूसरों को सहज सम्मोहित करने वाला, निकट संबंधियों का पोषक, समस्त भौतिक सुखों से परिपूर्ण, प्रथम प्रेम संबंध में धोखा खाने वाला होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक कार्यकुशल, सामान्य किन्तु अद्वितीय वेशभूषा वाला, दुकानदारी से आजीविका चलाने वाला, विभिन्न रोगों व शारीरिक अपंगता वाले दुर्घटनाओं से पीड़ित होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक जातक मनमोहक सुंदर, तीव्र आकर्षण वाला, विलासितापूर्ण जीवन का इच्छुक, परिजनों व जन्मस्थान से दूर, छल-कपट करने में माहिर, अपनी योग्यता व सुन्दरता से अन्य को रिझाने का कार्य करता हैं। धोखा, अनैतिक संबंध अथवा देह व्यापार में संलिप्त रहता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल से मातृसुख से वंचित, आराम की उपेक्षा करने वाला, संबंध विच्छेद वाला, मतलबी, घुमन्तू, खर्चीला, स्वास्थ्य में त्वचा, नेत्र व प्रजनन अंगों में समस्या वाला होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक बाल्यकाल से हीन भावना वाला, माता-पिता से द्रोह करने वाला, अत्यंत क्रोधी, सदैव स्वयं को सही ठहराने वाला, महा विनाशकारी, कलहप्रिय, असमाजिक तत्वों का दास होता हैं। जीवन में एकाध बार जेल यात्रा के योग बनते हैं। आजीवन शत्रुओं से घिरा रहता है।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक दुबला-पतला, छरहरे बदन का, छोटी आंँखों वाला, विनोदी, परिश्रमी, धन-धान्य से युक्त, मौकापरस्त, बड़ी-बड़ी डींगे हांँकने वाला, चापलूस, कुशल व्यवसायी अथवा राजनीतिज्ञ होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक उच्च शिक्षित, सफल कुटनीतिज्ञ, सरकारी क्षेत्र से लाभान्वित, भूमि-भवन, निर्माण सामग्री, कल-पुर्जे, छोटे मशीन, गाड़ी, खनिज संपदा, वन्य-उत्पाद, औषधि आदि का व्यवसायी, अत्यंत चतुर, वैज्ञानिक सोच वाला, अन्वेषक होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक उग्र, आक्रामक, दोषारोपण करने वाला, धोखेबाज, अतिक्रमणकारी, माता-पिता से वैमनस्य पालने वाला, बाल्यकाल से जन्मस्थान से दूर, दूसरों के संपत्ति का उपभोगी, समान्य धनी, जीवनसाथी के साथ शारीरिक हिंसा करने वाला, रक्तचाप रोगी, दुर्घटनाओं से ग्रस्त होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Saturn located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल में दुर्घटना ग्रस्त, अपरंपरागत व्यापार-व्यवसाय में रुचि रखने वाला, बागी स्वभाव का, परदेस से लाभान्वित, अपने परिवार से अलग सफल होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक संयुक्त परिवार अथवा कुटुम्बियों में सबसे अधिक सफल व सम्मानित, बड़े घर वाला, अस्थिर मति, पर्यटन प्रेमी, तरल पदार्थों का व्यवसाय करने वाला, इंजीनियरिंग, न्यायपालिका, शोध व विदेशी आय से समृद्धशाली होता है। चिंता, अनिद्रा, मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक दुबला-पतला किन्तु अच्छी शारीरिक सौष्ठव वाला, फिटनेस पसंद, अनेक कार्यों में कुशल, रक्षा विशेषज्ञ, युद्ध कला में निपुण, शासन-प्रशासन वा सैन्य सेवा में होता हैं। धन-धान्य से परिपूर्ण, कुशल गृहस्थ होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक चंचल, व्यवहारिक, मित्रों द्वारा सहायता प्राप्त, गणित, खगोल, विज्ञान, तकनीकी शिक्षा में रुचिवान्, मैनेजमेंट, डाटा एनालिसिस, गणक वा ज्योतिषी के क्षेत्र में रुचिवान्, क्षणिक क्रोध व तुनकमिज़ाजी में अपने कार्य का भयंकर नुकसान कर लेता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत भाग्यशाली, भूमि-भवन का सुखी, धन-धान्य से युक्त, धर्म-कर्म में अनुरागी, देश-समाज का नायक, ईमानदार, कर्त्तव्यपरायण, तत्वज्ञानी, प्रचुर भौतिक सुख व संसाधनों से युक्त होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सामान्य कद-काठी का, श्यामवर्णी वा गेहूंआ रंग का, चिमर शरीरी, वाक्-चातुर्य से युक्त, परिवार में क्लेश करने वाला, अल्प ईर्ष्यालु, समस्त सुख के संसाधनों का उपभोगी, अपने से बड़ी उम्र की स्त्री के साथ संसर्ग करने वाला, यदि स्त्री हो तो, बाल्यकाल में निकट रक्त संबंधी द्वारा शीलभंग होता हैं।

राहु की दृष्टि हो तो जातक दीर्घकालिक संघर्ष के बाद अप्रत्याशित सफलता प्राप्त करने वाला, विदेश अर्थात प्रवास में उन्नतिशील, तकनीकी, वैज्ञानिक, सामाजिक सुधार कार्य में योग्य, नवीन नियम-कानून या व्यवस्था बनाने की क्षमता वाला होता है।

केतु की दृष्टि हो तो जातक अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह, जन-कल्याण करने वाला, अल्प भोजन करने वाला, गृहस्थी से दूर, वन-वन भटकने वाला होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक महात्वाकांक्षी, कुशल  नेतृत्व क्षमता वाला, शासन-प्रशासन, व राजनैतिक क्षेत्रों में रुचिवान्, अल्पशिक्षित किन्तु धुर्त बुद्धिमान, पारिवारिक जीवन में तनाव वाला, अपने स्वार्थ के पूर्ति के लिए अनेक प्रेम संबंधों में लिप्त, जीवनसाथी के प्रति निष्ठावान होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक वाक्पटु, सामाजिक, कुशल व्यवसायी, पराक्रमी, शत्रुहंता, विजयी, राजनीतिक पहचान वाला, चल-अचल संपत्तियों का स्वामी, उच्चस्तरीय अधिकारी, संचार कुशल, ख्यातिप्राप्त कलमकार (लेखक, प्रकाशक आदि), होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक आकर्षक, संतुलित, सौंदर्य-प्रिय, लेखन, निर्माण, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, फैशन, मीडिया, डेकोरेशन संबंधित व्यवसाय वाला, निर्णय में द्वंद्व का सामना करने वाला, कफ व पित्त जनित रोग, श्वेत कुष्ठ से पीड़ित होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक रहस्यमयी, आक्रामक, माता से मतभेद, उदण्ड, मानसिक तनाव, परिवारिक समस्याओं से पीड़ित, प्राचीन ग्रंथों पर टीक लिखना, पुरातत्व, परिवर्तन से संबंधित क्षेत्र वा चिकित्सा संबंधी क्षेत्र में सफल होता हैं।

पुष्य नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Rahu located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक कुशल नेतृत्व क्षमता वाला, उच्च सरकारी वा प्रशासनिक पदों पर आसीन, राजनीति या सामाजिक सुधार में सफलता प्राप्त, ऐतिहासिक विरासत वाले कुल मे जन्मा, नया कीर्तिमान स्थापित करने वाला, अधिकारियों व राजनयिकों से सहायता प्राप्त होता है। नेत्र, फेफड़े व भूत-प्रेत जनित व्याधियों से पीड़ित होता हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक घुमन्तू, उद्विग्न, आलस्य से युक्त, जलीय व तरल पदार्थों का व्यवसायी, चुगलखोर, काम पीड़ित, कौटुंबिक व्याभिचार की ओर उन्मुख होता हैं। धन कमाने के नये-नये अवैध हथकंडे अपनाते रहता हैं। जिसके चलते आर्थिक स्थिति उतार-चढ़ाव भरी होती हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, कार्य कुशल, तकनीकी, रक्षा, भूमि संबंधी क्षेत्र में सफलता प्राप्त, संपत्ति से लाभी, आक्रामक, समाज सुधारक, चिकित्सा, कृषि, निवेश आदि क्षेत्रों से लाभ अर्जित करता है। दो विवाह होंने की संभावना होती हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक लेखन, संचार, सलाहकार या तकनीकी क्षेत्र, मैनेजमेंट, अकाउंट्स, व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र से धनागम करने वाला, गुणवत्ता के संबंध में नीति-निर्माता होता है।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक उच्च शिक्षित, विस्तृत कौशल वाला, अल्प अहंकारी, महात्वाकांक्षी, अपने पद का दुरूपयोग करने वाला, किसी संस्था वा धार्मिक संगठन का प्रमुख होता है।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कलाकार, चित्रकार, मंत्रज्ञ, कुशल संचालक, अतरंगी वेशभूषा वाला, धातु रोग से पीड़ित, अपनी बात को कलात्मक ढंग से कहने वाला, अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार, पारिवारिक जीवन में असंतोष होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक परदेसवासी, कठिन परिश्रम से अत्यंत सफल, देश-विदेश में पर्यटन प्रेमी, नवयुग का प्रवर्तक, ईर्ष्यालु, बलवान लोगों पर तंज़ कसने वाला होता हैं। 

पुष्य नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in First Charan/ Padas in Pushya Nakshatra) : पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक आत्मसम्मान में कमी वाला, समय से पहले वृद्ध दिखने वाला, दूसरों का दास, जीवन से विरक्त, सोच-विचार नहीं करने वाला, निवेश व कोर्ट-कचहरी मुकदमेबाजी में परेशान, परिवार से दूर, अकेला रहना पसंद करता हैं।

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Second Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक अर्थहीन प्रलाप करने वाला, समय व्यर्थ गंवाने वाला, गुरु व मित्र का द्रोही, कठोर आलोचक, जीवनसाथी से शाब्दिक कलह करने वाला, कामक्रीड़ा में लिप्त, अनेक किशोरियों का शील भंग करने वाला होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Third Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक सामान्य कद-काठी का, त्वचा रोग, साफ-सफाई या वेशभूषा में मलिन, निर्णय द्वंद्व से ग्रस्त, भौतिक सुखों से दूरी, आलसी, अस्थिर कार्य क्षेत्र वाला, अर्जित संपत्ति का विनाशक, असाध्य रोगों से पीड़ित, कुआचरणी होता हैं।

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Fourth Charan/ Padas in Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक साहसिक कार्यों में संलग्न, अग्नि, मशीन, धातुकर्म, निर्माण, इंजीनियरिंग, सेना, गुप्तचर एजेंसियों में रुचिवान्, परिवार व पत्नी को अधिक महत्व न देने से वैवाहिक जीवन असंतोषपूर्ण होता है।

पुष्य नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Ketu located in Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—

सूर्य की दृष्टि हो तो जातक स्वाभिमानी, आत्मविश्वास की कमी वाला, आध्यात्मिक नेता, सरकारी वा निजी क्षेत्र में उच्च पदासीन, न्यायप्रिय, अहंकारी, तेजस्वी होता हैं। आँख, हड्डी, छाती में चोट या जलने-कटने के निशान होते हैं।

चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मातृभक्त, अपने क्षेत्र व भाषा का पोषक, जन कल्याणकारी, सेवा क्षेत्र पर निर्भर, आत्ममूल्यांकन करके दुःखी होता हैं।

मंगल की दृष्टि हो तो जातक आक्रामक, रहस्यवाद, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, अनुसंधानात्मक कार्य, शल्यचिकित्सा आदि क्षेत्र में रुचिवान्, पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद, मानसिक अशांति का शिकार होता हैं।

बुध की दृष्टि हो तो जातक कुशल व्यंग्यकार, शोध-पत्र लिखने-पढ़ने का शौकीन, कुशल रणनीतिकार, सहोदरों से मतभेद वाला, उच्च कोटि का सलाहकार होता हैं।

गुरु की दृष्टि हो तो जातक प्रबल आध्यात्मिक गुरु, त्यागी, ज्ञान-धर्म आदि का प्रचार-प्रसार करने वाला, शिक्षा व शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा अधिकारी, अपने ज्ञान का दुरूपयोगी होता हैं। स्त्री जातक के विवाह व वैवाहिक संबंधों में तनाव, व संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती हैं।

शुक्र की दृष्टि हो तो जातक कृषि, बागवानी, औषधि आदि क्षेत्रों में सफल, भोग-विलास के प्रति आसक्त किन्तु जीवनसाथी के साथ छल-कपट करने वाला, घोटालेबाज होता हैं।

शनि की दृष्टि हो तो जातक अनुशासित, आध्यात्मिक साधनाओं में रुचिवान्, दीर्घकालिक सेवा-कार्य में लिप्त, सरकारी वा संस्थागत क्षेत्र में स्थिरता से कार्यशील, न्यायप्रिय, समय का पाबंद, अंतर्मुखी होता हैं।

उपसंहार || Important Considerations

किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।

यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।

सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता। 

राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।

जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।

पुष्य नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personalities born in Pushya Nakshatra

प्रभु श्रीराम के अनुज धर्मसम्राट भरत – का जन्म नक्षत्र पुष्य था।

Dr. A.P.J Abdul Kalam (भारतीय मिसाइल मैन) – का लग्न पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

विजय दलपति (मशहूर तमिल अभिनेता व राजनेता) – का चन्द्र पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में था।

बेनिटो मुसोलिनी (इतालवी तानाशाह व फासीवाद के जनक) – का सूर्य पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

टॉम क्रूज (प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेता व फिल्म निर्माता) – का चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण में था।

क्वीन लतीफ़ा (मशहूर अमरीकी गायिका व अभिनेत्री) – का चन्द्र पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण में था।

[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का पुष्य में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]

~ Krishna Pandit Ojha..

   WhatsApp:9135754051

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नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या 

1• अश्विनी

2• भरणी

3• कृतिका 

4• रोहिणी 

5• मृगशिरा 

6• आर्द्रा 

7• पुनर्वसु 

8• पुष्य 

9• आश्लेषा 

10• मघा 

11• पूर्वा फाल्गुनी 

12• उत्तरा फाल्गुनी 

13• हस्त 

14• चित्रा 

15• स्वाति 

16• विशाखा 

17• अनुराधा 

18• ज्येष्ठा 

19• मूल 

20• पूर्वाषाढ़ा 

21• उत्तराषाढ़ा 

22• श्रवण 

23• धनिष्ठा 

24• शतभिषा 

25• पूर्वा भाद्रपद 

26• उत्तरा भाद्रपद 

27• रेवती

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