रोहिणी नक्षत्र परिचय || Introduction of Rohini Nakshatra in Hindi
Rohini Nakshatra in Hindi|| वर्तमान भारतीय ज्योतिष में ‘रोहिणी नक्षत्र’ क्रम से चौथा नक्षत्र हैं। चन्द्र भवन में 40° अंश से लेकर 53°अंश 20′कला तक का विस्तार क्षेत्र ‘रोहिणी नक्षत्र’ कहलाता हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘अलडेबरान’ (Aldebaran), The Follower अथवा Bull’s Eye कहा जाता हैं। अरेबिक नक्षत्र प्रणाली (Manzil Al-Qamar) में इसे ‘अल-दबरान’ चीनी सियु में इसे ‘Bì – बी’ या ‘Pi – पी अथवा पई’ कहा जाता हैं, जो श्वेत बाघ (White Tiger of the West) का 5वां भवन हैं। ‘रोहिणी’ शब्द संस्कृत भाषा के ‘रुह्’ धातु से निष्पन्न हुआ हैं; जिसका अर्थ हैं— ऊपर चढना, बढ़ना, विकसित होना या उदय होना; अतः रोहिणी का अर्थ हैं— “आरोहण करने वाली” या “वह जो ऊपर की ओर बढ़ती है।” ‘रोहिणी नक्षत्र’ मुख्यतया 5 तारों का समुह हैं, जिससे रथ / शकट वा गाड़ी जैसी आकृति बनती हैं। यह प्रतीक उर्वरकता (fertility), वृद्धि और विकास, समृद्धि, वाणिज्य (commerce) और स्थिर गति से आगे बढ़ने का प्रतीक है।
अतः वृषभ राशि अंतर्गत 10°अंश से लेकर 23°अंश 20′कला तक का विस्तार क्षेत्र रोहिणी नक्षत्र का हैं। इसका नक्षत्र स्वामी – चन्द्रमा, नक्षत्र देवता – सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, जाति – शुद्र, योनि – सर्प (साँप), योनिवैर – नकुल (नेवला), मनुष्य गण, अंत नाड़ी, सत्तोगुणी, सिद्धिदायक, शुभ, राजसिक, स्त्री नक्षत्र हैं। यह दक्षिण दिशा का स्वामी, ध्रुव संज्ञक, उर्ध्वमुखी, अंधलोचन वा अंधाक्ष नक्षत्र हैं।
रोहिणी नक्षत्र– सृष्टि अर्थात सृजनात्मक शक्ति, कृषि, उत्पादकता, उर्वरता, स्थाई प्रगति, सभ्यता, वाणिज्य, भौतिक समृद्धि, रथ, राजसी वैभव, विकास की गति, वट वृक्ष व जामुन वृक्ष अर्थात स्थिरता व आश्रय, मंदिर, दिव्य निर्माण, सांस्कृतिक सौन्दर्य, जुनून, प्रजनन क्षमता, आकर्षण शक्ति, नव विचार, कलात्मक अभिरुचि, आत्म अभिव्यक्ति, सौम्य व्यवहार, श्रृंगार, संयुक्त परिवार, पारंपरिक लोकाचार पर आधुनिक संशोधन, प्रेम करने की कला, सुन्दर ओजस्वी संभाषण, कुटनीतिक दक्षता, काव्य अभिरुचि, नृत्य-संगीत, वाद्ययंत्रों के विभाग, शाश्वत कर्म, ईश्वर उपासना, कामक्रीड़ा, विलासितापूर्ण जीवनशैली, अद्वितीय सौन्दर्य, सुखद कल्पनाशीलता, सकारात्मक चिंतन का द्योतक हैं।
कृषि कार्य (बीज बोना, फसल लगाना, पेड़-पौधे लगाना), नया व्यापार शुरू करना, दुकान/कारोबार का उद्घाटन, वित्तीय कार्य, धन संबंधी लेन-देन, निवेश, विवाह, सगाई, रोमांस, यौन संबंध, संतानोत्पत्ति हेतु कर्म,
निर्माण कार्य शुरू करना (घर, मंदिर, इमारत आदि), आभूषण, वाहन, वस्त्र, सौंदर्य संबंधी वस्तुओं की खरीदारी, स्व-उन्नति, चिकित्सा/हीलिंग, यात्रा (विशेषकर छोटी यात्राएँ), कला, संगीत, सौंदर्य, विलासिता से जुड़े कार्य, पूजा-पाठ, मंदिर निर्माण या धार्मिक अनुष्ठान का आरंभ, नया उद्यम, manifestation (इच्छा पूर्ति) संबंधी कार्यों में रोहिणी नक्षत्र सिद्धिदायक हैं।
यह सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की शक्ति से ओतप्रोत नवसृजन, शुभ कल्याणकारी कार्यों के आरंभ, सौन्दर्य, कलात्मक, सौम्य, भावनात्मक कार्यों के लिए अनुकूल फल देने वाला हैं।

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ज्योतिषीय संकेतात्मक विवरण || Rohini Nakshatra in Hindi Symbolic Description
रोहिणी के नक्षत्र देवता स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं। पौराणिक आख्यानों के अनुसार ये त्रिदेवों में से एक, सृजनात्मक शक्ति के स्वरूप हैं। श्रीहरि विष्णु के नाभि कमल से इनकी उत्पत्ति मानी जाती हैं। देवी सरस्वती इनकी सृजनात्मक शक्ति हैं। वेदों में ब्रह्मा को मुख्य रूप से प्रजापति के रूप में वर्णित किया गया है। वे सृष्टि के जनक और रचयिता हैं।
ऋग्वेद के हिरण्यगर्भ सूक्त का प्रथम श्लोक इस प्रकार हैं कि—
“हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् ।
स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥”
अर्थात सृष्टि के आरंभ से पहले हिरण्यगर्भ प्रकट हुआ। वह सभी प्राणियों (भूत) का एकमात्र स्वामी और पति था। उसी ने पृथ्वी और स्वर्ग (द्यौ) को धारण किया। हम किस देवता को हवि (आहुति) अर्पित करें?
इस सूक्त में ये बतलाया गया हैं कि, सृष्टि से पहले केवल हिरण्यगर्भ (परम सत्य या ब्रह्म का सृजनात्मक रूप) था। उसी से पृथ्वी, आकाश, जल, प्राणी आदि की रचना हुई। अंत में प्रजापति (ब्रह्मा) को सृष्टि का रचयिता माना गया है। यह वैदिक काल की दार्शनिक व्याख्या है, जिसमें सृष्टि को एक “सुनहरे अंडे” से निकलने वाली प्रक्रिया बताया गया है।
ब्रह्मा के चार मुख चारों वेदों (ऋग्, यजुर्, साम, अथर्व) के प्रतीक हैं। श्रीहरि विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा के प्राकट्य के बाद, श्री नारायण ने (विष्णु पुराण के अनुसार) वा महादेव की इच्छा से (शिव पुराण के अनुसार), ब्रह्मा को सृष्टि करने का कार्य सौंपा गया। पद्म पुराण के अनुसार— ब्रह्मा को रोहिणी नक्षत्र की रोहण शक्ति (वृद्धि और सृजन की शक्ति) से सृष्टि रचना की प्रेरणा मिली। इसलिए रोहिणी नक्षत्र का अधिदेवता ब्रह्मा हैं। इसलिए कहा गया हैं कि—
“प्रजापतीश्वतुर्बाहुः कमंडल्वक्षसूत्रधृत् ।
वराभयकरः शुद्धौ रोहिणी देवतास्तुभे ॥”
पुनः ब्रह्मा ने सृष्टि करने के क्रम में,
श्री हरि विष्णु के नाभि-कमल को तीन भागों में विभाजित किया–
- भूः (पृथ्वी लोक — भूलोक)
- भुवः (अंतरिक्ष लोक)
- स्वः (स्वर्ग लोक)
ये तीन लोक जीवों के भोग के स्थान बने।
तत्पश्चात सृष्टि की भौतिक आधारशिला के रूप में पंच महाभूतों (पाँच मूल तत्वों) आकाश (Ether), वायु (Air), अग्नि/तेज (Fire), जल (Water), पृथ्वी (Earth) की रचना की
इनसे ही समस्त जड़ पदार्थ (स्थूल सृष्टि) बने।
पुराणों में ब्रह्मा द्वारा (प्राकृत + वैकृत भेद से) कुल दस प्रकार के सर्ग (सृष्टि) बताए गए है—
महा सर्ग (प्रकृति से संबंधित सूक्ष्म सृष्टि)
भूत सर्ग (पंच महाभूतों की सृष्टि)
इंद्रिय सर्ग (इंद्रियों की सृष्टि)
मुख्य सर्ग (अव्यक्त से व्यक्त सृष्टि)
वैकृत सर्ग आदि (कुल 9-10 प्रकार)।
पुनः मानस पुत्रों की रचना की जिनमें सर्वप्रथम चार कुमार: सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार हुए। ये ब्रह्मचारी रहे और सृष्टि विस्तार में रुचि नहीं ली, बल्कि ज्ञान और तपस्या में लगे रहे। फिर दस प्रमुख मानस पुत्र— मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ, भृगु, दक्ष, नारद की रचना की। इन्हें प्रजापति भी कहा जाता है।
इनमें से सात (मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ) को सप्तर्षि कहा जाता है। पुनः ब्रह्मा ने अपने शरीर के विभिन्न अंगों से देवता, असुर, गंधर्व, यक्ष, राक्षस आदि की रचना की। दक्ष प्रजापति (मानस पुत्र) ने अपनी पुत्रियों से विवाह कर आगे प्रजाओं का विस्तार किया। जिनमें रोहिणी आदि भी शामिल हैं।
अंततः मनु व शत्तरुपा से मैथुनी सृष्टि भी आरंभ हुई, यही मनु की संतान आगे चलकर ‘मानव’ कहलाए। पशु-पक्षी, वनस्पति, कीट आदि की रचना भी इसी क्रम में हुई।
पुनः समय की व्यवस्था की गई। ब्रह्मा ने युग, मन्वंतर, कल्प आदि का निर्धारण किया। एक कल्प ब्रह्मा का एक दिन माना जाता है। यह 4.32 मानव वर्षों के बराबर माना जाता हैं।
अंत में ब्रह्मा ने वेदों का ज्ञान दिया, वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि) और आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ आदि) की व्यवस्था की।
ये संपूर्ण कथानक इस ओर संकेत करते हैं कि, रोहिणी नक्षत्र, न केवल सृष्टि, उत्पादकता, उर्वरता व सृजनात्मक क्षमता का द्योतक क हैं, बल्कि यह कलात्मक तरीके से, क्रमवार सतत् विकास का व ऊपर उठते हुए प्रगति का द्योतक भी हैं।
रोहिणी नक्षत्र की मूल विशेषताएँ || Basic Characteristics of Rohini Nakshatra in Hindi
पौराणिकआख्यानों के अनुसार रोहिणी– दक्ष प्रजापति और प्रसूति की पुत्री थी। अपनी 27 कन्याओं (27 नक्षत्रों को दक्ष प्रजापति की कन्याएं माना गया हैं।) कन्याओं का विवाह चन्द्रमा से हुआ। रोहिणी की अद्वितीय सौन्दर्य व कोमलता, बड़ी आँखें व रसदार अधरों के कारण ये चन्द्रमा को विशेष प्रिय थी। अतः चन्द्रमा अन्य 26 कन्याओं की तुलना में रोहिणी को अधिक समय देने लगे। जिससे अन्य कन्याओं ने इसकी शिकायत अपने पिता ‘दक्ष प्रजापति’ से की। दक्ष प्रजापति ने चन्द्रमा को शाप दिया, जिससे चन्द्रमा क्षीण होने लगे। बाद में महादेव की कृपावश उनकी वृद्धि हुई, और वो बच गए। इसी कारण चन्द्रमा के दो पक्ष हुए — 1• कृष्ण पक्ष, 2• शुक्ल पक्ष।।
वराह मिहिर का कथन हैं कि— सत्यवादी, मीठा बोलने वाला, पवित्र, स्थिर बुद्धि, रुपवान्, सुव्रत, पुण्य वृत्ति, राजा, योगी, गाड़ी से आजीविका अर्जित करने वाला, गाय, बैल व जलीय जीवों, किसान, पर्वत, ऐश्वर्ययुक्त आदि ये सब पदार्थ रोहिणी नक्षत्रगत हैं।
श्रीरामदीन दैवज्ञ का कथन हैं कि— पाँच ताराओं से शकटनुमा / गाड़ी की आकृति वाला, स्थिर, प्रजापति देवता, गौतमी गोत्र वाला नक्षत्र रोहिणी हैं। इसमें बन्धन, बगीचा, विवाह, द्वार, अटारी, ध्रुव (स्थिर), मांगलिक, काँटा आदि या गर्त आदि घेरा, देवतायतन, राजकीय नौकर का घर, शहर, गाँव की स्थापना, खेती का आरम्भ या घर का प्रारम्भ, वाटिका और अभिषेक सम्बन्धित कार्य करने चाहिये। कर्ज व हजामत ग्रहण नहीं करना चाहिये । इस रोहिणी नक्षत्र में शुभ काम करने की अनुमति है व अशुभ कार्य करना वर्जित हैं।
अतः अनवरत प्रगति, सृष्टि, उत्पादकता, क्रियाशीलता, महात्वाकांक्षा, भौतिक समृद्धि, विलासिता, विकास, सुखद यात्रा वा जीवन यात्रा, स्थिरता, व्यवहारिकता, सामाजिकता, संगीत-नृत्य, फैशन, कला, अभिनय, अत्यंत रुपवान, हँसमुख, गुणों से युक्त, उन्नत ललाट, आकर्षक अधर, गोल मुखाकृति, उन्नत वक्ष स्थल व नितम्ब, बड़ी-बड़ी मदमस्त आंँखें, कोमल अंगों वाला, सौन्दर्य से सड़कों मोहित करने वाला, श्रृंगार प्रिय, सौन्दर्य प्रसाधन व अलंकरणों से युक्त, भाग्यशाली, उन्नतिशील, सृजनात्मक व कलात्मक क्षमता से पूर्ण, सबका प्रिय, उत्तम विचार, भावनात्मक प्रबलता, उदारता, दयालुता, परिजनों के प्रति जिम्मेदारी, परोपकार, प्रेम करने को उद्यत, इन्द्रिय सुखों में लिप्त, संवेदनशील, जल्दी किसी के प्रभाव में आने, ईर्ष्यालु आलोचना करना, खेती-बाड़ी, फसल उत्पादन, बागवानी, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी प्रोडक्ट्स, खाद्य पदार्थों का उत्पादन, पैकेजिंग और वितरण, होटल, रेस्टोरेंट, कुकिंग, फूड इंडस्ट्री, हॉस्पिटैलिटी, वनस्पति विज्ञान, हर्बल प्रोडक्ट्स, फैशन डिजाइनिंग, कपड़ा उद्योग, ज्वेलरी व रत्नादि व्यापार, सौंदर्य प्रसाधन, मेकअप, इंटीरियर डेकोरेशन, लेखन, पेंटिंग, ग्राफिक डिजाइन, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, विज्ञापन उद्योग, बैंकिंग, फाइनेंस, निवेश प्रबंधन, धन प्रबंधन, रियल एस्टेट, भूमि-भवन निर्माण, उद्यमिता, लग्जरी गुड्स का कारोबार, तेल, साबुन, इत्र, सुगन्धित द्रव्य, दवाइयांँ, गुड़, खाड़, चीनी, ईख, परिवहन, ऑटोमोबाइल, तेल व पेट्रोलियम शिपिंग, पर्यटन, ट्रैवल इंडस्ट्री, रिसोर्ट मैनेजमेंट, तरल पदार्थ और जलीय उत्पादों से संबंधित व्यवसाय, औषधि, चमड़ा उद्योग, ब्यूटि थेरेपी, सरकारी नौकरी में बड़े पद, वकील, न्यायाधीश, राजस्व अधिकारी, पुरोहित कर्म, ज्योतिष, ड्राइविंग, ट्रांसपोर्टर, पशुपालन से जुड़े कार्य, गले व गर्दन से संबंधित संक्रमण यथा टॉन्सिलाइटिस, खराश, सर्दी-खांसी, रक्त विकार, मधुमेह, पीलिया, अनियमित मासिक धर्म, स्तन संबंधी समस्याएं, चित् की अधीरता, टखनों व पिंडलियों में दर्द वा सूजन आदि रोहिणी नक्षत्र से संबंधित घटक हैं।
लग्न में रोहिणी नक्षत्र के फल || Result of Rohini Nakshatra in Ascendant/Lagna
यदि लग्न में रोहिणी नक्षत्र हो तो जातक अतीव आकर्षक, मनमोहक, अनेक कलाओं को जानने वाला, शुन्य से शिखर पर पहुंचने वाला, विलक्षण प्रतिभा का धनी, प्रसिद्ध, राजनीतिक विमर्श का ज्ञाता, प्रेम करने में निपुण, कलात्मक, प्रबल भावनाओं का सागर वाला, नृत्य-संगीत, विभिन्न वाद्ययंत्रों के विद्या को जानने वाला, बहुमित्रवान्, सबका प्रिय, सदैव प्रसन्नचित्त, मधुर मुस्कान लिए, मांसल शरीर वाला, पशुप्रेमी, दयालु, शुद्ध आत्मा, शक्तिशाली, तर्क-वितर्क में निपुण, दानशील, धैर्यवान, शब्दों का जादूगर, मदमस्त हाथी की तरह चलने वाला, कृषि बागवानी, पुष्प आदि रोपने-बोने में रुचिवान्, विकासशील, अल्प ईर्ष्यालु, भोग से युक्त, कम किन्तु गंभीर बोलने वाला, गंभीर विचारक, धर्मशास्त्रों का ज्ञाता, अति कामुक, प्रचुर यौनसुखी, भिन्न-भिन्न आसनों में सम्भोग करने की रुचि रखने वाला, पृथ्वी को भोगते हुए भी परम सत्य को जानने वाला, भोग में लिप्त होते हुए भी योगी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्रोत्पन्न पुरुष जातक के गुण-दोष || Qualities of Male Chart/ Horoscope born in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र वाला जातक आकर्षक, सुन्दर, सुडौल कद-काठी वाला, प्रभावशाली व्यक्तित्व, विशाल और आकर्षक आँखें, मनमोहक मुस्कान, आकर्षक शारीरिक बनावट वाला, मीठा बोलने वाला, विनम्र, संवेदनशील, भावुक, प्रेमपूर्ण व्यवहार करने वाला, प्रकृति प्रेमी, सौंदर्यबोध से युक्त, स्वच्छता पसंद, दृढ़ इच्छाशक्ति वाला, प्रगतिशील, बुद्धिमान, चिड़चिड़ा, शत्रुओं पर दया नहीं करने वाला, वर्तमान में जीने वाला, दीर्घायु, उच्चस्तरीय पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला, व्यवसाय व रचनात्मक क्षेत्रों में सफल, भौतिक सुखों, विलासिता और आराम की ओर झुकाव वाला, परिवार के प्रति जिम्मेदार, सहायक और सामाजिक प्रकृति वाला, सत्यभाषी, नैतिक मूल्यों का धनी, आध्यात्मिक मुक्ति की ओर झुकाव रखने वाला, तेजस्वी, कला-संगीत का प्रेमी, मेहनती, लोकप्रिय, कला, संगीत, फैशन, व्यवसाय, कृषि, मनोरंजन व रचनात्मक क्षेत्रों में अच्छी सफलता हासिल करने वाला, दुर्घटनाओं से पीड़ित, अति विश्वसनीय से धोखा खाने वाला, अति कामातुर, संभोग में विशेष रुचिवान, अनेक प्रेम संबंधों वाला, 36 वर्ष के आयु से पहले विभिन्न छोटे-मोटे स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित, पश्चात तीव्र गति से प्रगतिशील होता है।
रोहिणी नक्षत्रोत्पन्न स्त्री जातिका के गुण-दोष || Qualities of Female Chart/ Horoscope born in Rohini Nakshatra
चूंकि यह नक्षत्र अत्यंत कोमल, स्त्री तत्व नक्षत्र हैं, अतः यह स्त्रियों के लिए अत्यंत उत्तम गुणों को देने वाला हैं। स्त्री जातक अत्यंत रुपवती, यौवन व आकर्षण से युक्त, गोल मुखाकृति, चन्द्रमा के समान सौम्य, कोमलांगी, बड़े-बड़े मादक नयन, मध्यम कद-काठी, मांसल शरीर, गौरवर्णी, उच्च ललाट, गुलाबी अधर, उन्नत नितम्ब, समस्त कलाओं में निपुण, सबकी प्रिय, ईश्वर में आस्था रखने वाली, धर्मपरायण, आनंदित, ललित कला, नृत्य-संगीत का प्रेमी, बुद्धिमान, प्रेम करने वाली, प्रकृति प्रेमी, जीवों पर दया करने वाली, परोपकारी, भावुक, व्यवहारिक, छेड़ने पर चिड़चिड़ी, मध्यम शिक्षित किन्तु विविध विषयों में ज्ञानी, दीर्घायुष्य से पुष्ट, शंकालु स्वभाव वाली, परिजनों का ख्याल रखने वाली, कामातुर होती हैं। प्रेमी व पति पर संदेह करने से निकट संबंधों में वैमनस्य पैदा कर लेतीं हैं। सामान्यतया सौभाग्यवती होती हैं।
प्रत्येक चरणों / पदों के फलों में सूक्ष्म विविधता || Rohini Nakshatra Subtel Result Variations in all 4 Charan (Padas)
रोहिणी नक्षत्र प्रथम चरण (Rohini Nakshatra First Charan/ Padas): वृषभ राशि अंतर्गत 10° अंश से 13° अंश 20′ कला तक का क्षेत्र रोहिणी का प्रथम चरण हैं। नवमांश मेष होने से इस चरण का स्वामी मंगल हैं। अतः रोहिणी के प्रथम चरण पर शुक्र-चन्द्र-मंगल का संयुक्त प्रभाव हैं। कलात्मक अभिरुचि, महात्वाकांक्षा, श्रेष्ठता, भोग-विलास, सुन्दरता, धन के लिए उद्यमशीलता इस चरण के मुख्य गुण हैं।
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक मध्यम कद-काठी का, साधारण स्वास्थ्य, तीखे नयन-नक्श, पिंगल वर्ण वा गौ घी के रंग जैसा गौरवर्णी, फुर्तीला, मिलनसार, अनेक मित्रों वाला, दूसरों के धन का हरण करने वाला, अल्प क्रोधी, भोग-विलास को उन्मुख, मद्य वा अन्य मादक द्रव्यों का सेवन करने वाला, भोगी, लोभ से युक्त, विषय-वासना में लिप्त, आय के अनेक स्रोतों वाला, अनेक सुन्दरियों को अपने वशीभूत करने वाला व उनकी यौवन व संपत्तियों का भोग करने वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र द्वितीय चरण(Rohini NakshatraSecondCharan/ Padas) : वृषभ राशि अंतर्गत 13° अंश 20′ कला से लेकर 16° अंश 40′ कला तक के क्षेत्र विस्तार, रोहिणी नक्षत्र का द्वितीय चरण हैं। नवमांश वृषभ होने से यह वर्गोत्तम पद हैं; इसके साथ हीं यह एक पुष्कर नवमांश भी हैं। व इस चरण का स्वामित्व शुक्र को जाता हैं। अतः रोहिणी के द्वितीय चरण पर शुक्र-चन्द्र-शुक्र का संयुक्त प्रभाव हैं। अद्वितीय सौन्दर्य, आकर्षण, संवेदनशीलता, भौतिक समृद्धि, इच्छा पूर्ति, जिद्द, क्रांतिकारी स्वभाव व परिवर्तन इसके मूल गुण हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में उत्पन्न जातक अत्यंत सौम्य, रुपवान, चुम्बकीय आकर्षण से युक्त, गौरवर्णी, सुन्दर घने केश, बड़ी-बड़ी आंँखें, लम्बी नाक, उन्नत ललाट, झूले हुए लम्बे नरम कान, लम्बी बाहें, चौड़े कंधे, मांसल कमर, शुभ्र, स्वेच्छाचारी, कलात्मक, प्रियवक्ता, न्यायप्रिय, दयालु, दानशील, स्त्रियोचित धर्म वाला, विकसित अंगों वाला, काम, क्रोध, मोह, मद से सामान्यतया मुक्त, धनवान्, इन्द्रियों को वश में करने वाला, सुखी, भौतिकता से युक्त होते हुए परमज्ञानी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र तृतीय चरण (Rohini Nakshatra Third Charan/ Padas) : वृषभ राशि अंतर्गत 16° अंश 40′ कला से लेकर 20° अंश तक का क्षेत्र रोहिणी नक्षत्र का तृतीय चरण हैं। नवमांश मिथुन होने से इस चरण का स्वामी बुध हैं। अतः रोहिणी के तृतीय चरण पर शुक्र-चन्द्र-बुध का संयुक्त प्रभाव हैं। व्यापार-व्यवसाय, उच्च बुद्धिमत्ता, संचार कौशल, कुटनीतिज्ञता, आकर्षण, तर्कशीलता, नीति मर्मज्ञता, धनाढ्यता, जिद्द, चंचलता, हास्य-विनोद, भोग व समृद्धि रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण के मुख्य गुण हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में उत्पन्न जातक मध्यम कद-काठी का, गठन युक्त शरीर वाला, सुन्दर, तीव्र आकर्षण से युक्त, बड़ी-बड़ी चंचल आँखों वाला, अच्छी तर्क क्षमता वाला, व्यवहारिक, व्यापार-व्यवसाय में कुशल, हँसी-मजाक करने में निपुण, प्रभावशाली वक्ता, ईश्वर भक्त, दान-धर्म करने वाला, प्रसन्नचित्त, गणित, विज्ञान, अकाउंट्स, मैनेजमेंट, बीमा, डिप्लोमेट्स आदि क्षेत्रों में सफल व प्रसिद्धि पाता हैं।
रोहिणी नक्षत्र चतुर्थ चरण (Rohini Nakshatra Fourth Charan/ Padas): वृषभ राशि अंतर्गत 20° अंश से लेकर 23° अंश 20′ कला तक का विस्तार क्षेत्र, रोहिणी नक्षत्र का चतुर्थ चरण होता हैं। नवमांश कर्क होने से इस चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। अतः रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण पर शुक्र-चन्द्र-चन्द्र का संयुक्त प्रभाव हैं। आकर्षक व्यक्तित्व के साथ-साथ, सरलता, सौम्यता, करुणा, ममता, दया, क्षमा, भावुकता, वात्सल्यपूर्ण प्रेम, उदारता, मजबूत स्मृति क्षमता, भौतिक समृद्धि, सृजनात्मक शक्ति, पोषण, धार्मिकता, सत्यनिष्ठा, चपलता, संकीर्णता, अल्प ईर्ष्या इसके मुख्य गुण हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में उत्पन्न जातक सुन्दर, हृष्ट-पुष्ट शरीर, लम्बे-लम्बे हाथ-पैर, उभरीं हुई बड़ी-बड़ी आँखें, गोल लम्बी नाक, भावनात्मक निर्णय लेने वाला, स्त्रियों में अति आसक्त, सहज प्रसन्न तो कभी अकारण रुष्ट, सत्यवादी, दूसरों के मन के भेद को जानने-समझने वाला, समझदार, खर्चीला, सुखी, विश्व भ्रमण करने में रुचिवान्, अनगिनत प्रेम संबंधों वाला, प्रचुर यौनसुखी, भांति-भांति के स्वादिष्ट व्यंजनों वा पेय पदार्थों का स्वाद चखने वाला, विलासी, उत्तम भूमि-भवन, वाहन सुख से परिपूर्ण, जीवनसाथी के साथ रसिक, अपने कुल का मान बढ़ाने वाला कुलभूषण होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के विभिन्न चरणों / पदों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फल || Result of various Planets situated in different Charan/ Padas of Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित सूर्य फल || Result of Sun in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य हो तो जातक रक्तिम वर्णी, ओजस्वी, धन-धान्य से युक्त, व्यवसायिकों का नेता, उत्तम वाहन व रत्नादि आभूषणों का शौकीन, रेसिंग, कंपटीशन, खेलकूद का आयोजक, प्रबंधक, भोगी, अनेक स्त्रियों के साथ समागम करने वाला होता हैं। जातक को तंत्रिका व यौनांग संबंधी रोग होने की संभावना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में सूर्य हो तो जातक आत्मबली, प्रसन्नचित्त, भोग से संतुष्ट, समाज में आदरणीय, सेना, प्रशासन वा न्यायिक विभागों में अधिकारी, प्रभावशाली, धन व संतत्तियों से परिपूर्ण, श्रेष्ठ पुरुष होता हैं। व्यवसाय करे तो तरल पदार्थों का व्यापारी, जलीय मार्ग से व्यवसाय, मादक द्रव्यों का व्यवसाय करता हैं। सिरदर्द, मतली, मेनिनजाइटिस, एन्सेफलाइटिस, सेप्टीसीमिया, बेहोशी आदि स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में सूर्य हो तो जातक जातक चंचल, मासूम मुखड़ा, आकर्षक व्यक्तित्व, चातुर्य से भरपूर संभाषण करने वाला, व्यवसायिक व्यवहार में निपुण, शिक्षा ग्रहण करने में होशियार, विद्यालय, कोचिंग, इन्स्टीट्यूट आदि चलाने वाला, परोपकारी, औषधि आदि का विक्रेता, सफल चिकित्सक होता हैं। ये ठंड से घबराने वाले, स्त्री हो तो मासिक धर्म में गड़बड़ी वाली, आंशिक डरपोक होते हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य फल (Result of Sun Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में सूर्य हो तो जातक सुन्दर, कला व संस्कृति में रुचिवान्, विशेष सम्मान से सम्मानित, सौम्य, स्त्रियों का आदर करने वाला, मशहूर, सरकारी वा सहकारी क्षेत्रों से लाभान्वित, यात्रा व पर्यटन का प्रेमी, अपनी पत्नी से अतीव प्रेम करने वाला, पुरुषार्थी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित सूर्य पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Sun located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित सूर्य पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक महात्वाकांक्षी, कार्यक्षेत्र से असंतुष्ट, स्त्रियों के अंतर्वस्त्र व सौन्दर्य प्रसाधन का विक्रेता, महिलाओं के आधीन कार्यशील, अस्थिर संपत्तिवान् अर्थात आर्थिक स्थितियों में भयंकर उतार-चढ़ाव देखने वाला होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक राजकीय कार्यों, जमींदारी, वसुली, ठेकेदारी, भूमि-भवन संबंधी कार्य-व्यवसाय, सरकारी क्षेत्र से धनी, मानी, समाज में आदरणीय होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक कृषि मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, कैबिनेट मंत्रीमंडल, पुरोहित कर्म, यज्ञादि कर्म, धर्मगुरु, ज्योतिष कार्य आदि से आजीविका अर्जित करने वाला, समाजसेवी, अध्यापन कार्य आदि से प्रतिष्ठित, संपत्तियों से युक्त, चतुर्दिक विकासशील होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक निर्धनतावश उद्विग्न, रिश्तों से विमुख, चिड़चिड़ा, मजदूरी करने वाला, अनियमित आय वाला, गृहक्लेश करने वाला होता हैं। हड्डियों व स्नायु तंत्र से संबंधित पीड़ा होने की संभावना होती हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक बाल्यकाल में परिजनों के सहयोग से वंचित, अल्पायु में धन कमाने को उत्सुक, बालारिष्ट अर्थात बचपन में अत्यंत दुर्घटना ग्रस्त, प्रौढ़ावस्था में धनवान होता हैं। तथापि आजीवन भिन्न-भिन्न परेशानियों से पीड़ित होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक सूई, तेल, धागा, रुई आदि वस्तुओं का व्यवसाय करने वाला, सूक्ष्म कल-पूर्जों का मिस्त्री, इंजीनियरिंग, निर्माण कार्य में रुचि रखने वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा का फल || Result of Moon in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्रमा हो तो जातक भाई-बहनों से घिरा हुआ, प्रसन्नचित्त, भावुक, क्रोधी, मधुरभाषी, तरल पदार्थों का व्यवसायी, साहसी, नीतिज्ञ, सेना, पुलिस, सशस्त्र बलों में अधिकारी, मोटिवेशनल स्पीकर होता हैं। नाक व कान से संबंधित व्याधियों से पीड़ित होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक अत्यंत मोहक, सौन्दर्य से युक्त, श्रृंगार प्रेमी, कलात्मक, नृत्य-संगीत, चित्रकारी, मुर्तिकारी आदि क्षेत्रों में निपुण, घुमन्तू, प्रसिद्ध कलाकार होता हैं। स्त्री जातक आचरण से हीन, दुश्चरित्रा, अनैतिक होने से बदनाम होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्रमा हो तो जातक किशोरों की तरह चंचल, विशेष अल्हड़, ख़ुशमिजाज, अच्छी स्मृति क्षमता वाला, सबका प्रिय, विश्वासी, गणित, खगोल आदि विषयों का ज्ञाता, बातुनी, अव्वल दर्जे का कुटनीतिज्ञ, कविता, साहित्य आदि लिखने वाला, मीडिया, गुप्तचर, संचार, महिला सौन्दर्य प्रसाधन आदि का कारोबार करने वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा का फल (Result of Moon Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): रोहिणीनक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्रमा हो तो जातक की आँखें विशेष सुन्दर होती हैं। जातक सुन्दर, कलात्मक, प्रबल भावना वाला, प्रिय, रत्न-आभूषण, सौन्दर्य प्रसाधन, डेयरी प्रोडक्ट्स, ज्योतिष, हीलिंग, योग, औषधि आदि का व्यापारी होता हैं। महिला जातक अत्यंत नाज़ुक, मासिक धर्म में अनियमितता वखली, सदैव युवती दिखने वाली, प्रेम संबंधों में लीन रहने वाली होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Moon located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित चन्द्रमा पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक तंत्र-मंत्र, रहस्यमय विद्याओं का जानकार, ध्यानी, आत्मबली, मनोबली, कोमल हृदयी, विनयशील, विद्वान, धनी, समाज में प्रभावशाली होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक निवेश से धनवान, विपुल पैतृक संपत्तिवान्, बाल्यकाल से प्रचुर महिला मित्रों वाला, परिवार में सम्मानित, स्थाई संपत्ति, सोना, भूमि-भवन से सुखी होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो सात्विक, परोपकारी, अतीव सुन्दर, सौम्य, सभ्य, महिलाओं का सम्मान करने वाला, विनोदी, शर्मिला होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो शास्त्रों का रचयिता, नव पथ निर्माता, कर्त्तव्यपरायण, जीवदया करने वाला, स्वाभिमानी, विद्वान, शास्त्रों का संरक्षक होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत मोहक, रुपवान, अल्प अहंकारी, विलासितापूर्ण जीवनशैली वाला, श्रृंगार प्रिय, सफल वक्ता, व्यवसायी, भ्रमणशील, कलाकार होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो मातृसुख से वंचित, जन्मस्थान से दूर, संघर्षशील, अपने कार्य-व्यापार के प्रति जिम्मेदार, वन्य, उत्खनन, तेल, तरल पदार्थों से संबंधित कार्य क्षेत्रों वाला होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक मलीन वेषभूषा धारी, भयभीत, अस्थिर, मित्र-शत्रु के बोध से वंचित, संस्कार विहीन, दुर्बुद्धि से युक्त होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक प्रारंभिक जीवन में उद्विग्न, भ्रमणशील, कम बोलने वाला, एकांतप्रिय, बुजुर्गों के सानिध्य में रहने वाला, उत्तरार्द्ध में चिंतनशील, आध्यात्मिक, किन्तु भौतिक सुख के प्रति आसक्त होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित मंगल ग्रह का फल ||Result of Mars in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में मंगल हो तो जातक जमींदार, विपुल पैतृक संपत्ति वाला, कृषि, भूमि-भवन, बीज भंडार, उर्वरक आदि का व्यवसायी, संगीत, पेंटिंग, रेसिंग, खाद्य पदार्थों के व्यवसाय में रुचि रखने वाला, ढोल, मृदंग आदि वाद्ययंत्रों को बजाने में रुचिवान्, कामातुर, अनेक रमणियों का प्रिय होता हैं। नस व मांसल अंगों में गांठ, घाव, चोट, साइनस, यौनांगों में रोग की संभावना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में मंगल हो तो जातक हिंसक, क्रूर, अपशब्दों का प्रयोग करने वाला, युद्ध करने को उद्यत, सैनिक वा असमाजिक तत्व (गुंडा-मवाली), यौन हिंसा करने वाला, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ, धन कमाने को उत्सुक, प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करके समृद्धशाली होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में मंगल हो तो जातक चंचल, व्यंग्यात्मक शैली में बातें करने वाला, सभ्य दिखने वाला, मित्रों से युक्त, उच्च शिक्षित, तार्किक बुद्धिमत्ता रखने वाला, धनिकों व विद्वानों द्वारा आदरणीय, भाषात्मक हिंसक, कभी-कभी प्रचण्ड उदण्ड होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल फल (Result of Mars Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मंगल हो तो जातक सात्विक कर्म करने में शिथिल, कम ऊर्जावान, भारी शरीर, शर्मिला, अपने कार्य के प्रति बेईमान, झूठा, सरकारी वा निजी क्षेत्र में अधिकारी होता हैं। धन कमाने के लिए पाप कर्म करने से भी नहीं चुकता; व स्व अर्जित धन का बड़ा हिस्सा सुरा-सुन्दरी में उड़ा देता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित मंगल पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mars located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित मंगल पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक तुनकमिजाज, घुमन्तू, चिड़चिड़ा, परदेस में निवास करने वाला, प्रकृति प्रेमी, अस्थिर चित का होता हैं। पारिवारिक जीवन को विशेष महत्व ना देने से कलह होता हैं। वृद्धावस्था आते-आते आंशिक रूप से गृहत्यागी होने की संभावना होती हैं; अर्थात वानप्रस्थाश्रम को स्वीकार कर लेता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक उदण्ड, स्त्रियों का तिरस्कार करने वाला, माता का भी अनादर करने वाला, उनपर हाथ उठाने वाला, अपशब्दों का प्रयोग करने वाला, अवैध संबंधों में रहने वाला, पथभ्रष्ट होता हैं। फिर भी धन व संतान से सुखी होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक शास्त्रों का जानकार, कथा-साहित्य में रुचिवान्, धर्मानुरागी, व्यवहार कुशल, समाजिक, अल्प मित्रों वाला, अन्य शुभ ग्रहों की दृष्टि ना हों तो पेनसेक्सुअल होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक परिश्रमी, शिक्षित, जिम्मेदार, परिजनों का हितैषी, सरकारी क्षेत्र से लाभान्वित, गुरु वा उपदेशक, दान-पुण्य करने वाला, दो पत्नियों वाला, या विवाहेत्तर संबंधों वाला होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक उत्तम भूमि-भवन से सुखी, अनेक वाहनों से युक्त, निवेशक, राजनेता, उद्योगपति, अनेक स्त्रियों को भोगने वाला, प्रचुर यौनसुखी होता हैं।
शनि से दृष्ट हो तो जातक भूमि से जुड़ा, परिपक्व विद्वान, अनुभवी, समाजसेवी, सरकार द्वारा सम्मानित, दण्डनायक वा न्यायधीश होता हैं। घुटने, पैर, पसलियों में चोट की संभावना बनती हैं।
राहु से दृष्ट हो तो जातक आनाज का व्यवसायी, भेड़-बकरियांँ पालने वाला, कालाबाजारी करने वाला, नृत्यकार या जादूगर होता हैं।
केतु से दृष्ट हो तो असमाजिक तत्वों का मित्र, अनेक दुर्दांत जनों से मैत्री संबंध वाला, धार्मिकता का ढोंग करने वाला, अहंकारी, रहस्यात्मक प्रकृति का होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित बुध फल || Result of Mercury in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो जातक शीघ्र निर्णय लेने में सक्षम, विलक्षण प्रतिभा का धनी, तीक्ष्ण वा व्यंग्यात्मक लहजे में बोलने वाला, अति होशियार, साहित्य लेखन, पत्रकारिता, समाज सुधारक होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में बुध हो तो जातक सौम्य, सदाचारी, उच्च कल्पनाशील, साहित्यों का भाष्यकार, श्रृंगार प्रिय, सम्मानित, राजा वा सरकार द्वारा पुरस्कृत वा सम्मानित किया जाता हैं। प्रायः जातक थोड़ा स्त्रियों जैसे गुण वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): : रोहिणी के तृतीय चरण में बुध हो तो जातक चंचल, चतुर, मनभावन, सबका प्रिय, अति मित्रों वाला, महात्वाकांक्षी, समृद्ध परिवार वाला, धन-धान्य से परिपूर्ण, अति कामुक, मृदुभाषी, पराक्रमी, व्यापार-व्यवसाय में सफल, प्रेम व वैवाहिक संबंधों से आर्थिक रुप से लाभान्वित, कार्यक्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर पहुंचता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध फल (Result of Mercury Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में बुध हो तो जातक मानसिक रुप से विचलित, परिजनों में कलह करने वाला, अनावश्यक यात्राओं में भटकने वाला, महिला शत्रुओं वाला, नाना प्रकार को रोगों यथा हृदय रोग, नेत्र व दाँतों में दोष वाला, बेडौल मोटापे से पीड़ित होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित बुध पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Mercury located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित बुध पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अत्यंत रुपवान, गुणी, गृहस्थ जीवन में निपुण, व्यवहारिक, श्रृंगार प्रिय, कलात्मक अभिरुचि वाला, तरल पदार्थों, समुद्री व्यापार, ज्योतिष आदि कार्यों से धनवान् होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक तीक्ष्णभाषी, रौबदार मुखाकृति, व्यंग्य कवि, कार्टूनिस्ट, सुरक्षाकर्मी, सेवाकर्मी, खजांची होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक उच्च कोटि के ग्रंथों का रचयिता, आकर्षक आत्मकथा लिखने वाला, गणितज्ञ, नक्षत्रवेता, खगोलशास्त्री, राष्ट्र के व्यवसाय के नीति निर्माता, वाणिज्य मंत्री वा विभागीय अधिकारी होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक चतुर, परिपक्व, अनुभवी शल्यचिकित्सक, राजकर्मचारी वा निजी क्षेत्र में उच्च पदासीन, क्रूर, कठोर नियमावली को मानने वाला, मनोविज्ञानी, मस्तिष्क से संबंधित अनुसंधान में रुचि रखने वाला, लौह आदि भारी खनिजों व धातुओं से संबंधित कार्य क्षेत्रों में सफल होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक कृषि, पशुपालन , दुग्ध अनुसंधान, चमड़ा उद्योग, शराब व नशीले पदार्थों का व्यवसायी, सोने-चांदी आदि बहुमूल्य धातुओं का संग्रह करता, धनी, अय्याश होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक भाषा और साहित्य पर गहन शोध करने वाला, प्राचीन रचनाओं का व्याख्याता, घड़ी आदि सूक्ष्म तकनीकी से जुड़े कारीगर, औषधि विज्ञान का जानकार, शारीरिक गठन वाला, नस रोग से पीड़ित होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित गुरु फल || Result of Jupiter in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में गुरु हो तो जातक शक्तिशाली, पांडित्य से युक्त, दर्शन शास्त्र में रुचिवान्, कटु सत्य बोलने वाला, धनवान्, कुशल नेतृत्व क्षमता वाला, परिजनों का मुखिया, कुलीन स्त्रियों का स्वामी, शास्त्रानुरागी, गुरु-ब्राह्मणों का पूजक, दिव्य आत्मा होता हैं। कफ जन्य रोग होने की संभावना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में गुरु हो तो जातक अनेक धर्मों में रुचिवान्, सभी मतों व पंथावल्म्बियों के शास्त्रों के अध्ययन में रुचिवान्, शील गुणों से युक्त, माता-पिता का स्नेही, ईमानदार, सम्मानित, धन-जन से युक्त, अनेक नौकर-चाकर वाला, उत्तम वाहन, भूमि-भवन से सुखी, एक से अधिक विवाह वा विवाहेत्तर संबंधों की संभावना बनती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में गुरु हो तो जातक चंचल वृत्ति वाला, हँसमुख, समझदार, धन कमाने की युक्ति वाला, साहित्य कला का पोषक, विपरीत लिंगीयों में अत्यधिक खर्चीला, अनैतिक आचरण वाला, प्रबल यौनाचारी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु फल (Result of Jupiter Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में गुरु हो तो जातक उच्च शिक्षित, सौम्य, उदार, भावनाप्रधान, सभ्य भाषा का अनुप्रयोग करने वाला, तीर्थाटन वा पर्यटन करने वाला, विदेशी मुद्राओं का संग्रहकर्ता, आनंदित, नया कीर्तिमान स्थापित करने वाला, औषधि व अनुसंधान का जानकार, सबका हितैषी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित गुरु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Jupiter located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित गुरु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक सेनानायक, पुलिस आदि रक्षा विभाग में अधिकारी, वेदपाठी, यज्ञादि कर्म करने / कराने वाला, शास्त्रीय संगीत का जानकार, धर्मात्मा होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो समृद्ध, उत्तम स्मृतियों वाला, भाग्यवान, परोपकारी, भावनाप्रधान, अचल संपत्तियों वाला, धन-धान्य से परिपूर्ण, मातृस्नेही, गंभीर विचारक होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक उतावला, सफल कारोबारी वा सेना, पुलिस आदि क्षेत्रों में उच्च अधिकारी, उत्तम संतत्तियों व आज्ञाकारिणी पत्नी से युक्त, भाग्यशाली होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक आकर्षक, कुशल राजनीतिज्ञ, हँसमुख, कला – संस्कृति का संरक्षक, सुन्दर भूमि- भवन से सुखी, चारित्रिक दुर्गुणों वाला, बहुभाषाविद् होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सुन्दर, सौम्य, कलात्मक अभिरुचि वाला, शास्त्रज्ञ, सौन्दर्यदर्शी, दानशील, धनी, विनम्र, परोपकारी, अनेक प्रेम संबंधों वाला होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक कर्मठ, बुद्धिमान, अधिक जीवटता वाला, दार्शनिक विचारों वाला, किसी संगठन का अध्यक्ष, राजनेता, अनेक अनुचरों वाला, प्रधान होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक किसी मंदिर का पंडा या पूजारी, पुरोहित कर्म करने वाला, मंत्रादि जपने वाला, दान की संपत्ति से आजीविका चलाने वाला, दूसरों पर निर्भर, लोभी, डरा-धमकाकर अपना हित साधने वाला होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक आध्यात्मिक वृत्तियों वाला, खेती-बाड़ी करने वाला, कारीगरों का प्रमुख, वन्य उत्पादों वा खनिजों से संबंधित कार्यों को करने वाला, ज्योतिष, हीलिंग, योग, प्राणायाम सीखाने वाला, अंतर्मुखी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित शुक्र फल || Result of Venus in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत मोहक, कलात्मक व सृजनात्मक रुचि रखने वाला, संपत्तिवान, आक्रामक गतिविधियों वाला, खेलकूद व जिमनास्टिक में ख्याति प्राप्त, कोमल हृदयी, दान-पुण्य कर्म करने वाला, बहुमित्रों वाला, वैवाहिक जीवन में क्लेश करने वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत मोहक सौन्दर्य वाला, बड़े नेत्रों व केशों वाला, हर्बल प्रोडक्ट्स, फैशन व सौन्दर्य प्रसाधन का व्यवसाय करने वाला, पशुधन से युक्त, ललित कला, नृत्य-संगीत में निपुण, सुखी वैवाहिक जीवन वाला, रसिक, प्रेमी होता हैं। नौकरी व्यवसाय स्थल पर भी अनेक प्रेम संबंध बनाने की संभावनाएं होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शुक्र हो तो जातक अत्यंत सुंदर, चंचल, भौतिक सुख सुविधा से युक्त, साहित्य कविता, कहानी, उपन्यास आदि लिखने में अभिरुचि वाला, प्रकाशक, मीडिया आदि क्षेत्रों में सफल, समाजसेवी, राजनेता, विश्व विख्यात व्यवसायी होता हैं। अत्यंत कामातुर, मैथुन-प्रिय होने से व अनेक स्त्रियों से संसर्ग करने से, संसर्ग जनित व्याधियांँ होने की संभावना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र फल (Result of Venus Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शुक्र हो तो जातक चिड़चिड़ा, ईर्ष्यालु, छोटे कद-काठी का, गोलाकार मुखाकृति लिये, सिलाई-कढ़ाई करने में निपुण, पाक कला का जानकार, अनुशासनप्रिय, समय का सदुपयोग करने वाला, सुन्दर, निपुण जीवनसाथी वाला, प्रचुर यौनसुखी, वस्त्राभूषणों का शौकीन, उत्तम वाहनों से युक्त होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित शुक्र पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Venus located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित शुक्र पर यदि—
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक मनमोहक सुंदरता वाला, घने केश, बड़ी आँखों वाला, वस्त्राभूषणों का शौकीन, करुणा से भरा, विलासितापूर्ण जीवन जीने वाला, ललित कलाओं का प्रेमी, प्रेमपूर्ण कामुकता वाला, भावना प्रधान होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक लाह की चूड़ियांँ बनाने वाला, वस्त्रों पर छपाई का कार्य करने वाला, रंगाई-पुताई, शिल्पकारी, धातुओं की मूर्तियों आदि से संबंधित कार्यों को करने वाला होता हैं। संतानोत्पत्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। बार-बार गर्भपात होते हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक थुलथुले शरीर वाला, गौरवर्णी, सजने-संवरने वाला, धन-संपत्ति से परिपूर्ण, धार्मिक जीवन साथी वाला, उत्तम संतत्तियों से सम्मानित होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक रुखे स्वभाव वाला, शारीरिक सौन्दर्य व श्रृंगार करने में उदासीन, पेट, नस व रक्त विकारी, नपुंसकता का शिकार, धन के लिए संघर्षशील, अपने से बहुत बड़े उम्र के लोगों से संसर्ग करने को विवश होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक दिखावा पसंद, कर्ज लेकर श्रृंगार, उत्तम वाहन आदि का उपभोगी, मादक द्रव्यों का सेवन करने वाला, इंजीनियरिंग, डिज़ाइनर, ग्राफिक्स डिजाइन, इन्टीरियर डिजाइनर आदि क्षेत्रों में रुचिवान् होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक रक्तिम गौरवर्णी, तंत्र-मंत्र में रुचिवान्, मिट्टी के बर्तन व मूर्तियों का व्यवसायी, पारंपरिक वस्तुओं का संग्रहकर्ता, अंधविश्वासी, रिश्तों में गैरजिम्मेदार, सामान्यतया उदासीन किन्तु रति करते समय हिंसक होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित शनि फल || Result of Saturn in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में शनि हो तो जातक चिंतित, रोगी, क्लेश करने वाला, जुआ-सट्टा में धन नाश करने वाला, पाखंडी, परिजनों का अपमान करने वा कराने वाला, सत्कर्म करने में आलस्य युक्त, अनावश्यक कार्यों को करने को उद्यत, कोर्ट-कचहरी, मुकदमेबाजी व कर्ज से परेशान होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में शनि हो तो जातक कृशकाय, चमकदार आँखों वाला, दूरदर्शी, परिपक्व, शिक्षित, सुन्दर तार्किक बातें करने वाला, तत्वज्ञानी, धनवान्, सूक्ष्म अन्वेषक, पशुधन वा स्थिर संपत्ति का मालिक होता हैं। पेट, पैर, घुटने से संबंधित चोट/ऑपरेशन की संभावना, मन से खिन्न होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में शनि हो तो जातक सुन्दर, सुभग, कांतिमान, विनोदी, दुःख में भी ख़ुश, धैर्यवान, गणित, विज्ञान, वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा में पारंगत, गहरा मर्मस्पर्शी साहित्यिक कौशल वाला, संचार, राजनीति, कुटनीति विशेषज्ञ, कुशल कलाकार, कारीगर, शिल्पी, अनुसंधानकर्ता, धनिकों में पूज्य होता हैं। कोई-कोई जातक मुख वा दाँत, कान, गला आदि के रोग से पीड़ित होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि फल (Result of Saturn Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शनि हो तो जातक परदेसवासी, जलीय मार्ग से धातु, तेल, भारी खनिजों का व्यवसाय करने वाला, पशुपालन, कृषि, मत्स्य पालन, जड़ी-बूटी का उत्पादन व संवर्धन करने वाला, समाजसेवी, नेता, मंत्री आदि उच्चस्तरीय अधिकारी होता हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती हैं, जातक की आध्यात्मिक शक्तियों में वृद्धि होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित शनि पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Saturn located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित शनि पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक दुःखी, क्लेश करने वाला, परिजनों से द्वेष करने वाला वा परिजनों द्वारा त्यक्त, ज़हरीले रिश्तों के कारण विचलित, परिपक्व, विचारशील, परिश्रमी होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक गंभीर, प्रसन्नचित्त, बुजुर्गों के सानिध्य में रहने वाला, आंशिक रुढ़िवादी, परंपरावादी, ठेकेदारी आदि के कार्य व्यवसाय से धनी होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक आलोचक, ढीठ, आत्ममुग्ध, अनावश्यक हँसने की आदत वाला, रक्त व अस्थियों से संबंधित व्याधियों से पीड़ित होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, मशीनों व उससे संबंधित कल-पूर्जों का व्यवसाय करने वाला, पारिवारिक जीवन में आंशिक दिलचस्पी लेने वाला, नास्तिक विचारधारा का होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक मार्गदर्शक, कोचिंग इंस्टीट्यूट्स आदि चलाने वाला, अनुसंधान में रुचि रखने वाला, पर्यटन व तीर्थाटन करने वाला, प्रसन्नचित्त, दीर्घायुष्य से पुष्ट, धनवान् होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक सभ्य, शर्मिला, मूल्यवान धातुओं वा रत्नों का व्यवसायी, शनै शनै प्रगतिशील, अल्प कामुक, मादक द्रव्यों का सेवन करने वाला, कुलीन वर्गों से मैत्री संबंध वाला होता हैं।
राहु की दृष्टि हो तो जातक वस्तुओं का मरम्मत करने वाला, भूमि-भवन का जीर्णोद्धार करने वाला, कूड़ा-करकट का व्यवसाय करने वाला, रहस्यमय विद्याओं में रुचिवान्, भूत-प्रेत आदि इत्तर योनि के प्राणियों से संपर्क साधने वाला होता हैं।
केतु की दृष्टि हो तो जातक सरल व्यक्तित्व वाला, साधारण आस्थावान, कर्मचारी, छोटे स्तर का नेता किन्तु अपने जनों में पूजित, आदरणीय होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित राहु फल || Result of Rahu in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में राहु हो तो जातक कृशकाय किन्तु बलिष्ठ, शठ, शत्रुओं पर विजयी, दीर्घायु, साहसिक कार्य करने वाला, नशा, विडियो गेम, कसीनो आदि का व्यापार करने वाला जीर्ण रोगी, कर्कश, उदर व नेत्र रोग से पीड़ित होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राहु हो तो जातक सुन्दर, नये फैशन में ढलने वाला, भूरे लम्बे बालों वाला, धन संग्रह के लिए दृढ़ संकल्पित, अपने क्षेत्र में मशहूर, बड़े व्यापारियों व नेतृत्वों से सहायता प्राप्त, समझदार, देहव्यापार करने वाला, धन कमाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु फल (Result of Rahu Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra): रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में राहु हो तो जातक धूर्त, ठग, मृदुभाषी, अस्थाई मैत्री संबंध वाला, घमण्डी, षड्यंत्रकारी, मुख, रक्त व मोटापा जनित रोगों का शिकार, अस्थाई वा घुमंतू व्यवसाय करने वाला, शब्दों का जादूगर होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु फल(Result of Rahu Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में राहु हो तो जातक भावुक, दुःखी, शेर-ओ-शायरी करने का शौक़ीन, कवि, कलात्मक अभिभाषण करने वाला, दूसरों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला, सबका दिल जितने वाला, अपनी ग़लतियों सै सीखते हुए, धीरे-धीरे धनवान् होता हैं
रोहिणी नक्षत्र स्थित राहु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Rahu located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित राहु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक जन्म समय से ही माता-पिता के लिए दुर्घटना करने के लक्षणों से युक्त, परिजनों के लिए कष्टकारी, पैतृक संपत्तियों को नष्ट करने वाला, सबकुछ हड़पने की नीति वाला, भूत-प्रेत जनित व्याधियों से पीड़ित होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो जातक अति क्रोधी, उन्मादी, प्रबल हिंसक, विष विज्ञान का जानकार, उत्पीड़क, आत्महत्या की ओर बार-बार प्रेरित होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक बीज संवर्धन, उर्वरक आदि का जानकार, कृषि कार्य से उद्योग स्थापित करने वाला, पशुधन का क्रय-विक्रय करने वाला, भूत-प्रेत, क्षूद्र शक्तियों का पूजक होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो जातक रहस्यात्मक कथा / पटकथा लेखक, नवाचारी, उद्यमिता के क्षेत्र में नये अविष्कार करने वाला, चंचल, परिश्रमी, राजकाज में निपुण, जीवन में विभिन्न कार्यक्षेत्रों में स्वयं को आजमाने वाला होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो जातक कृषि, पशुपालन, पारम्परिक व्यवसाय में रोगों व महामारियों को फैला कर उसका लाभ लेने वाला, राजा वा सरकार से जालसाजी करके मुआवजा लेने वाला, समाज में उत्पात करके अपना हित साधने वाला होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो जातक पर्यटन, खाद्य सामग्री, यात्रा व्यवसायी होता हैं। कार्य क्षेत्र के कारण भ्रमणशील होता हैं। अति कामुक होने व घुमन्तू जीवनशैली होने से अनेक यौनाचार के प्रसंगों में लिप्त होता हैं। 40 के उम्र के यौनरोगी होने की भी संभावना होती हैं।
शनि की दृष्टि हो तो जातक दर-दर भटकने वाला, अकर्मण्य, दूसरो पर आश्रित, नौकर होता हैं। स्त्री जातक के गर्भपात होते हैं। संतानोत्पत्ति के अनेक प्रयास निष्फल होते हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित केतु फल || Result of Ketu in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in First Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में केतु हो तो जातक उग्र, हिंसक प्रकृति, धार्मिक, परिश्रमी, दरवान, सारथी, सैनिक, अग्नि युक्त कार्य, सफ़ाई कर्मचारी, सेवक, कार्यकर्ता होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Second Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में केतु हो तो जातक बलवान, रुखे शरीर वाला, परिश्रम से घबराने वाला, गालीबाज, मिठाई वगैरह पकवानों का व्यवसायी, जड़ी-बूटी, रसायन, गुड़, खाड़ बनाने वाला, कम्बल , दरी आदि बनाने वाला, बर्तन व्यवसायी होता हैं। नेत्र, चर्म, तंत्रिका तंत्र व दाँत से संबंधित रोग होने की संभावना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Third Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में केतु हो तो जातक आलोचक, शास्त्रों का व्याख्याता, लेखक, शिक्षक वा कथावाचक, ज्योतिषी, दिव्यद्रष्टा वा संन्यासी होता हैं। जातक शरीर से विरक्त, कम खाने वाला, व्यवहार में कटु, गले, मुख, मस्तक से संबंधित व्याधियांँ वा दुर्घटना होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु का फल (Result of Ketu Situated in Fourth Charan/ Padas in Rohini Nakshatra) : रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में केतु हो तो जातक धीर-गंभीर, अपनी विचारों से परंपराओं पर कुठाराघात करने वाला, दान-पुण्य करने वाला, कठोर भावना का, निर्मोही, मंत्रज्ञ, साधक, जल चिकित्सा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा आदि का जानकार, रहस्यात्मक प्रकृति का, जीव मात्र के लिए कल्याणकारी होता हैं।
रोहिणी नक्षत्र स्थित केतु पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि फल || Aspect Result of Various Planets on the Ketu located in Rohini Nakshatra
रोहिणी नक्षत्र स्थित केतु पर यदि—
सूर्य की दृष्टि हो तो जातक राजवैद्य, राजज्योतिषी, (वर्तमान परिप्रेक्ष्य में VVIP Doctors अथवा सेलेब्रिटी Astrologer), सत्ताधारी पक्ष का सहायक, योजना बनाने वाला, सलाहकार, रक्षक होता हैं।
चन्द्रमा की दृष्टि हो तो आवेगी, मंदबुद्धि, निर्णय लेने में असमर्थ, बेचैन, भ्रमित, परिजनों से दूर, निर्जन स्थानों में भटकने वाला, मनोरोगी, डिप्रेशन, anxiety का शिकार होता हैं।
मंगल की दृष्टि हो तो जातक जिद्दी, चिखने-चिल्लाने वाला, कलहप्रिय, आक्रोशित, कठिन परिश्रम से धनी, समाज में प्रभावशाली होता हैं।
बुध की दृष्टि हो तो रहस्यमय विद्याओं का जानकार, तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाला, अड़ियल, झगड़ालू, मित्रों का अपकार करने वाला, दूषित भावनाओं वाला, स्त्रियों पर अत्याचार करने वाला होता हैं।
गुरु की दृष्टि हो तो लिखित शास्त्रोक्त धर्म-कर्म व्यवहारी, छुआछूत मानने वाला, अपने विचारों का कट्टर, धर्मशास्त्रों का व्याख्याता, अपने विचारों का कट्टर, परोपकारी, विरक्त होता हैं।
शुक्र की दृष्टि हो तो अल्प वय में शील / कौमार्य भंग होता हैं। जातक कामातुर, मैथुन प्रिय, जननांगों में रोग वाला, वस्त्र वा रंग उद्योग में कार्य करने वाला होता हैं।
शनि की दृष्टि हो तो मशीनों के पूर्जे आदि बनाने या बेचने वाला, अग्नि युक्त कार्य, खनन, लकड़ी उद्योग, बर्तन उद्योग, पारंपरिक वस्तुओं का संरक्षक, न्यायिक वा प्रशासनिक विभाग में रुचि रखने वाला होता हैं।
उपसंहार || Important Considerations
किसी भी नक्षत्र में एक से अधिक ग्रह यदि युति /दृष्टि आदि संबंधों में होते हैं तो उनमें से सभी ग्रहों के बलाबल अनुसार जातक में गुण-दोषों का मिश्रण होता हैं। अर्थात यदि किसी नक्षत्र में दो या दो से अधिक ग्रह युति करे, तो जातक में उक्त ग्रहों के बलाबल के अनुपात में गुण-दोष की वृद्धि करेंगे। दृष्टि के संबंध में भी ऐसा हीं समझना चाहिए।
यदि कोई नक्षत्र भिन्न-भिन्न जातकों की कुंडलियों में भिन्न-भिन्न भावों में स्थित हो, तो उस भाव से संबंधित फलों के साथ अपने कारकत्वों को मिश्रित करके, जातक को संस्कारित फल प्रदान प्रदान करता हैं।
सूर्य के अत्यधिक सन्निकट होने से— बुध, सूर्य से 28° अंश और शुक्र, सूर्य से 48° अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता, अतः सूर्य, बुध एवं शुक्र का आपस में दृष्टि संबंध नहीं होता।
राहु-केतु परस्पर सदैव 180° अंशों की दूरी पर होते हैं, अतः ये एक-दूसरे को सदैव पूर्ण दृष्टि से देख रहे होते हैं। इनमें से प्रत्येक के फलित में दूसरे का प्रभाव बिना कहे, सम्मिलित समझना चाहिए।
जन्मपत्रिका में विभिन्न ग्रहों का विभिन्न भावों, नक्षत्रों व परस्पर युति-दृष्टि आदि संबंधों से भिन्न-भिन्न प्रकार के गुण निष्पन्न होते हैं। यही कारण हैं कि, कोई भी जातक भिन्न-भिन्न गुणों का सम्मिश्रण होता हैं। अतः कुंडली जनित जातक फलकथन के लिए सम्पूर्ण ग्रहों व नक्षत्रों के फलों का समावेशी फल विचारणीय हैं।
रोहिणी नक्षत्रोत्पन्न महान व्यक्तित्व || Famous Personalities Born In Kritika Nakshatra
भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण – का जन्म नक्षत्र रोहिणी में था।
रानी विक्टोरिया (ब्रिटेन की महारानी) – का लग्न रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में एवं सूर्य और चन्द्र दोनों रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में थे।
मैरिलिन मुनरो (अमेरिकी अभिनेत्री व आइकॉन) – का सूर्य रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में था।
जॉन एफ. कैनेडी (अमेरिकी राष्ट्रपति) – का सूर्य रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में था।
एंजेलिना जोली (प्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेत्री) – का सूर्य रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में था।
[ उपरोक्त महान व्यक्तित्वों के जन्म नक्षत्र वा लग्न नक्षत्र का रोहिणी में होने की पुष्टि उनकी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जन्मकुंडली विवरण से की गई हैं। ]
~ Krishna Pandit Ojha..
WhatsApp: 9135754051
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नक्षत्र (Nakshatra) क्या हैं.? विस्तृत व्याख्या
1• अश्विनी
2• भरणी
4• रोहिणी
5• मृगशिरा
6• आर्द्रा
7• पुनर्वसु
8• पुष्य
9• आश्लेषा
10• मघा
11• पूर्वा फाल्गुनी
12• उत्तरा फाल्गुनी
13• हस्त
14• चित्रा
15• स्वाति
16• विशाखा
17• अनुराधा
18• ज्येष्ठा
19• मूल
20• पूर्वाषाढ़ा
21• उत्तराषाढ़ा
22• श्रवण
23• धनिष्ठा
24• शतभिषा
25• पूर्वा भाद्रपद
26• उत्तरा भाद्रपद
27• रेवती